चलो आज बात करे गुज़रे जमाने की मैंने जरूरत समझी आप सबको बताने की ….. संग उसके मुस्कुराकर समझते थे क्या बेनज़ीर रौनक है मेरे काशाने की …. इक मरतबा भुला ही दिया […]
चलो आज बात करे गुज़रे जमाने की मैंने जरूरत समझी आप सबको बताने की ….. संग उसके मुस्कुराकर समझते थे क्या बेनज़ीर रौनक है मेरे काशाने की …. इक मरतबा भुला ही दिया […]
वो पूछते है हमसे कि आजकल हम क्या करते है क्या बताएं कि उनके इंतजार में किस कदर मरते है अपने अहसास, अपनी आरजू दिल में दबाए रखे है वो कहते है कि आजकल हम […]
kya bataye kese din maan chalte h mere.. bahut hi kharab haalat par har pal machalte h mere. mein jhuti hasi hasu toh bhi mera hi kasoor… ke dusman to dusman dost bhi jalte h […]
थोड़ा रंज में , थोड़ी ख़ुशी में , साल ये बीता …. ख़ुद की मोहब्त को हारा , लेकिन फिर भी जीता …… मुसलसल हैं आज भी यादों का कारवाँ …. थोड़ा तन्हा , […]
मोहब्बत से नफरत तक आने में, वक़्त तो लगता है; जागती आँखों को सुलाने में वक़्त तो लगता है!! . इतनी जल्दी कहाँ से सीखा, तुमने रक़ीबों-सा हुनर; अपने महबूब को रुलाने में, वक़्त तो […]
सम्भाल ले ऐ – ख़ुदा , एक लम्हे के लिए मुझे…. अब मैं हार रहा हूँ ….. तू ही बता मेरे साहिब , मैं क्यों ये जिंदगी तन्हा गुजार रहा हूँ … तूने साज़ […]
जब महफ़िल – ए – इश्क़ में , निग़ाह से निग़ाह टकराई … दिल की बात चेहरे पर उभर आई …. अँधेरे में डूबे मेरे एक एक लम्हे को रोशन करने …. उसने क्या […]
उसके चेहरे से नजर हे कि हटती नहीं वो जो मिल जाये अगर चहकती कहीं जिन्दगी मायूस थी आज वो महका गयी जेसे गुलशन में कोई कली खिलती कहीं वो जो हंसी जब […]
घुल गया उनका अक्स कुछ इस तरह अक्स में मेरे आईने पर भी अब मुझे न एतबार रहा हमारी मोहब्बत का असर हुआ उन पर इस कदर निखर गयी ताबिश1-ए-हिना, न वो रंग […]
घने अंधेरे भी बेहद जरुरी होते हैं….. घने अंधेरे भी बेहद जरुरी होते हैं बहुत से काम उजाले में नहीं होते हैं। उडऩा चाहेंगे जो पत्ते, वे झड़ ही जायेंगे वे आंधियों के तो मोहताज […]
बिछडने के ख्याल से हम आपसे मिलने से डरते है मगर कैसे बताएं हम किस कदर तनहा मरते है देख न ले वो हमें, कहीं पुकार न ले उनकी गलियों से यूं गुज़रने से […]
फूलों से कह दो चमन में अब न यूँ महका करें । खौफ से कांटों के अब सब काँटों का सिजदा करें । चाँद किस से जाके अपनी दास्ताँ ए दिल कहे , जब उजालों […]
बरस ना जाये फिर नैना , तू दिल मे कैद कही वो अब्र कर ले.. तो क्या हुआ , अगर कुछ ख्वाईसे पूरी ना हुई तेरी …. तू अधूरी ख्वाईसों संग पूरा ये सफ़र कर […]
कल खो दिया मैंने वो नायाब रत्न … जिसे पाने को हर इंसान करता है , ना जाने कितने प्रयत्न ….. This Gajal Dedicate to my grandfather ….. रंज की बार – बार दरवाज़े – […]
तुम अपने गिर्द हिसारों का सिलसिला रखना मगर हमारे लिये कोई रास्ता रखना ज्यादा देर तक जुल्म नहीं सह सकता मैं अब अगर आयें कडे दिन तो दिल कडा रखना तुम्हारे साथ सदा रह सकें […]
हादसा ऐसा भी उस कूचे में कर जाऊं मैं कोई खिडकी न खुले और गुजर जाऊं मैं सुबह होते ही नया एक जजीरा लिख दूं आज की रात अगर तह में उतर जाऊं मैं मुन्तजिर […]
उसकी यादों की बारिश से , एक एक पल है यूँ भीगा…… किया है जब से दीदार – ए – रुख़ – ए – रोशन हो गए संजीदा….. क़दम रखा जैसे ही उसने दिल के […]
ये दुनियाँ बदल रही है, या बस हम बदल रहे हैं ; दौड़ बची है पैसों की, सब, सबसे आगे निकल रहे हैं ! यारियाँ है मतलब की, फर्ज अब हक़ में बदल रहे हैं […]
घर अँधेरे में अब ना किसी का रहे । चार सू रंग यूँ रौशनी का रहे । जगमगायें यहाँ सब महल झोपड़ी पर्व सबका ये दीपावली का रहे । घर ,मुहल्ले ,शहर खिल उठें […]
टूटता हूं फिर से जुड जाता हूं मैं पानी का आईना हूं घर से लिये हूं रात का सूरज कहने को मिट्टी का दीया हूं गले गले है पानी लेकिन धान की सूरत लहराता हूं […]
चले जाओगे तुम ये सोच नहीं था हो जाएगें तनहा हम ये सोचा नहीं था हंसते हंसते बितायी थी जिंदगी हमने गम में ढ़ल जाएगी जिंदगी ये सोचा नहीं था तेरी आंखो के नशे मे […]
2122 1212 22 कुछ दिनों से खफा-खफा सा है । चाँद मेरा छुपा-छुपा सा है ।। कुछ तो जिन्दा है जिस्म के अंदर ; और कुछ तो जुदा-जुदा सा है । जब से’ […]
गायब हर मंजर मेरा ढूढ़े परिंदा घर मेरा जंगल में गुम फ़स्ल मेरी नदी में गुम पत्थर मेरा दुआ मेरी गुम सर सर में भंवर में गुम महवर मेरा नाफ़ में गुम सब ख्वाब मेरे […]
तेरी सदा का है सदयों से इन्तेजार मुझे तेरे लहू के समंदर जरा पुकार मुझे मैं अपने घर को बुलंदी पे चढ के क्या देखूं उरूजे फन! मेरी देहलीज पर उतार मुझे उबलते देखी है […]
चाँद के शौक मे तुम छत पे चले मत जाना शहर में ईद की तारीख बदल जाएगी
गमछे रखकर के अपने कन्धों पर…. गमछे रखकर के अपने कन्धों पर बच्चे निकले हैं अपने धन्धों पर। हर जगह पैसे की खातिर है गिरें क्या तरस खाएं ऐसे अन्धों पर। सारा दिन नेतागिरी खूब […]
तुम्हारे अक्स से दुनिया है रोशन , सुना है चाँद की तू चांदनी है . सलीका प्रेम में अब क्या करेगा , नज़र को अब के माफ़ी मिल चुकी है . ज़रा अब दर्द से […]
तुम्हारी चाह ही मंज़िल हमारी ए मेरे साकी,ज़रा अब तो पिला दे न , तमन्ना अब भी है बाक़ी.मेरे साकी तेरे आँखों की मदिरा क्या बताऊँ मैं,फ़क़त आँखों से चढ़ती है ,मगर दिल तक उतरती […]
आज की शाम शमा से बाते कर लूंउससे चेहरे को अपनी आखों में भर लूं फासले है क्यों उसके मेरे दरम्याचलकर कुछ कदम कम ये फासले कर लूं प्यार करना उनसे मेरी भूल थी अगरतो […]
छुपा है चाँद बदली में ,अमावस आ गयी है क्या?नहीं देखा कभी जिसको वही शर्मा गयी है क्या?मिलन की रात में ये घुप्प अँधेरा क्यों सताता है ?वो मेरा और उसका छुप छुपाना याद आता […]
तेरी आवाज में हम डूब जाते हैतुझसे हम कुछ कह नहीं पाते है हाल ए दिल कैसे करें बयां अपनादिल की हर धडकन में तुझे सजाते है गालिब बना दिया हमें तेरी मोहब्बत नेतनहाइयों में […]
सिमट गया जो चंद अल्फ़ाजों में, उस अफ़साने की बात करते हो खुद को हमारी जिंदगी बनाकर, छोड जाने की बात करते हो | नहीं है कोई अंजाम इस अफ़साने का, मालूम था हमें […]
क़भी जब गिर के सम्भ्लोंगे तो मेरी याद आएगी , कभी जब फिर से बहकोगे तो मेरी याद आएगी। वो गलियां , वो बगीचे ,वो शहर ,वो घर , कभी गुजरोगे जब उनसे तो मेरी […]
आती नहीं है नींद क्यों रातों में आजकल। तस्वीर बन रही है एक आँखों में आजकल। फूलों से दोस्तीदोस्ती है या उल्फत का असर है। शोखी घुली है उसकी बातों में आजकल। कुछ दिल से हो रही है क्यों महकी हुई फ़िज़ा। मेहंदी रचा रही है वो हाथो पे आजकल। #कुलदीप अनजाना
हम अपना हाल -ए- दिल आपसे कहते रहेकभी बच्चा तो कभी मासूम आप हमें कहते रहे आज तक कोई सबक पढा न जिंदगी में हमनेताउम्र हम आपकी आखों जाने क्या पढते रहे इक अरसा बीत […]
काटी है रात तुमने भी ले-ले के करवटें देखो बता रही हैं, चादर की सलवटें। उधड़ेगी किसी रोज सिलाई ये देखना यूं इस तरहं जो लेकर अंगडाईयां उट्ठे। पहले ही हो रही है, बड़ी जोर […]
झगड़ों में घर के, घर को शर्मसार मत करो आंगन तो खुला रहने दो, दीवार मत करो। मारे शर्म के आंख उठा भी सकूं न मैं अहसानों का इतना भी कर्जदार मत करो। हर ओर […]
कभी दीवार गिरती है, कभी छप्पर टपकता है कि आंधी और तूफां को भी मेरा घर खटकता है। चमकते शहर ऐसे ही नहीं मन को लुभाते हैं पसीना भी हर इक मजदूर का इसमें चमकता […]
यहां कोई न भला लगता है अब बियाबान मेंं जी लगता है। आ के शमशान में है ढ़ेर हुआ वो उम्र भर का चला लगता है। तुम भी ले आये क्या नकाब नई आज चेहरा […]
कोई तो दे दो वजह जीने की वरना मत पूछो वजह पीने की। दर्द अब आ गया है सहना तो क्या जरुरत है जख्म सीने की। मेरी खता नहीं तो कैसी सजा बात कुछ तो […]
दोस्त, दुश्मन तमाम रखता हूं मैं हथेली पे जान रखता हूं। शाम तक जाम क्यूं उदास रहे मैं तो अपनी ही शाम रखता हूं। कफन खरीद के है रखा हुआ आखिरी इन्तजाम रखता हूं। जब […]
थकी सोई हुई लहरों को चलकर थपथपाते हैं समंदर में चलो मिलकर नया तूफान लाते हैं। न आये पांव में छाले तो मंजिल का मजा कैसा सफर को और थोड़ा सा जरा मुश्किल बनाते हैं। […]
कुछ न था हाथ की लकीरों में वरना होते न क्या अमीरों में। भरे जहान में भी कुछ न मिला हैं खाली हाथ हम फकीरों से। आपके प्यार से तो लगता है बंधे हो जैसे […]
खुशी तलाश की, तो मिल ही गई दर्द के नीचे दब गई थी कहीं। छेड़ बैठे वो अपना ही किस्सा बीच में बात मेरी, रह ही गई। एक दीवार सी थी दोनों में गिराने बैठे, […]
वो नदी सी थी, मैं किनारा सा कुछ ऐसा ही मिलन, हमारा था। खुद में बस डूबते, उतरते रहे न समन्दर था, न किनारा था। उसने शायद, सुना नहीं होगा मैने शायद, उसे पुकारा था। […]
हरे-भरे से थे रस्ते पहाड़ होने लगेनदी क्या सूखी, इलाके उजाड़ होने लगे।कौन से देवता को खुश करें कि बारिश होरोज चौपाल में ये ही सवाल होने लगे। लकीरे खिंचने लगी रिश्तों में तलवारों से […]
सोचता हूं अभी पाजेब बजी है उसकी……….. दूर अपने से उसे होने नहीं देता हूं मैं ख्यालों में उसके साथ-साथ रहता हूं। मैने दीवार पे टांगें हुए हैं फ्रेम कई उसको मैं सोच के तस्वीर […]
घुल गया उनका अक्स कुछ इस तरह अक्स में मेरेआईने पर भी अब मुझे न एतबार रहा हमारी मोहब्बत का असर हुआ उन पर इस कदरनिखर गयी ताबिश1-ए-हिना, न वो रंग ए रुख़्सार रहा हमारी […]
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