आओ साथी मास्क लगाए। अपनो से दो गज की दूरी बनाये।। स्वस्थ खुशहाल तो देश खुशहाल। यही मंत्र सभी को काम आए।। हर मर्ज के दवा है हमारे पास। बस थोड़ा सावधानी बरती जाए।। कोरोना […]
आओ साथी मास्क लगाए। अपनो से दो गज की दूरी बनाये।। स्वस्थ खुशहाल तो देश खुशहाल। यही मंत्र सभी को काम आए।। हर मर्ज के दवा है हमारे पास। बस थोड़ा सावधानी बरती जाए।। कोरोना […]
ए नागन ज़रा देखें तो तुझ में कितना है जहर। तूने अनगिनत आशिकों के दिल ढाया है कहर।।
फलक के सितारे भी तारीफ़ करते हैं तेरी अदा को। जरा मैं भी तो देखूं खुदा ने किस कदर बनाया है आपको।।
मैं आज जो निकली राहों पर यह राह मुझे बात सुनाती है कहे शर्म तो आती ना होगी मेरा घ्रणा से नाम बुलाती है कहे घूम रही चौराहों पे कोई वजह है या आवारा है […]
किरदार निभा रहा हूँ अपना नया भारत हूँ मैं और दिल का तिरंगा लहरा रहा हूँ
तूने दूर किया है मुझको अपने साये से मेरी दीवानगी देखो तुझमे ही डूबा रहता हूँ
मैंने जिस दिन से आलिंगन किया तुझे रात दिन खुमार में ही रहता हूँ
फूल की राहों में काँटे बिखरेता है कौन? चांदनी रात में अकेला यहाँ आता है कौन?
इस घर की कैद ने भी क्या खूब काम किया बिखरी तस्वीरों को करीने से सजा दिया फिर से याद आए वह पुराने साथी कुछ बिछड़े पलों को फिर से मिला दिया ।
जब तुझसे मेरी पहली मुलाकात होगी बिना बोले ही आंखों से सब बात होगी बिताकर कुछ पल जिंदगी के साथ तेरे फिर से हमारे प्यार की शुरुआत होगी तेरे चेहरे की मुस्कुराहट से दिल को […]
चलो दर्द को भूल जाते हैं हंसी की ट्रेन पकड़ कर खुशी के संसार में जाते हैं पुरानी यादों में से ‘कुछ’ को चुनकर फिर से नई दुनिया बसाते हैं
जब हम साथ होते हैं हाथों में हमारे हाथ होते हैं दुनिया की उलझनों से दूर सिर्फ हम और हमारे जज्बात होते हैं❣️❣️
छोटा सा एहसान कर के लोग ताउम्र जताते हैं कितने मासूम है वह मां-बाप जो सब कुछ करने के बाद भूल जाते हैं….
खुदा के फरिश्ते के रूप में तुम आती हो होठों पर मीठी सी मुस्कान लाती हो अपनी जिजीविषा और कर्मनिष्ठा से टूटी आशा को जगा जाती हो रोगियों में रोगों से लड़ने की क्षमता बता […]
बदले तो वो थे ….. इल्जाम हम पर लगा बैठे हमने तो ख्वाब सजाए थे वो तो उनको ही जला बैठे।
सब कुछ कहां कह पाते हैं कुछ शब्द अधूरे रह जाते हैं कुछ बातें मन में आती हैं कुछ मन में ही रह जाती हैं कहने को हम सब पूरे हैं बिन लफ्जों के भाव […]
तुम कृपाण रखते हो तो मैं भी कटार रखती हूँ। तुम एतवार रखते हो तो मैं भी प्यार रखती हूँ।।
बेशक़ कड़ा है लोहे का फिर भी है चूड़ियों का भाई। भाई वीर कहलाता है तो बहना क्यों कहाती अबला दाई।।
जब भी देखता हूँ मैं इस रोटी के खुरचन को तो माँ आ जाती है यादों में। तवे पे रोटियाँ बनाती जब जला -जला के रोटियाँ की सौंधी सुगन्ध फैल जाती वातों में।। तोड़ -तोड़ […]
सफलता सफलता नहीं है कोई वस्तु सफलता है दृढ संकल्प की अग्नि सफलता को अगर पाना है तो सफलता के पीछे दौड़ लगाओ कमर कसकर समय के संग बढ़ना होगा आगे ही आगे बस आगे […]
मत माड़ ए माँ मुझे, तू अपनी कोख में। बेटा बन कर दिखाउंगी, आ जाने दे जग में।।
ना दर्द है ना धूप है यह कैसी दुनिया लगे बेदर्द है हा खुश हूं मैं हा बेसुध हु मै अपने दुनिया मे बेशक सफल हु मै पर खलती तेरी कमी बेजान सी यह ज़िन्दगी […]
माँ से बोली एक बेबस बेटी:- अविस्मरणीय है कोख तेरी माँ जिसमें स्फुटित हुई हूँ मैं । तुझे किसने बता दिया है माँ बेटा नहीं बेटी हूँ मैं । तभी से तू बेसुध है तेरे […]
अक्सर कहा करता था मैं माँ जाऊँगा परदेश को। “”ना ना वश कर”कहती माँ को मत कलेश दो।। दृढ़ संकल्प होकर ऐसा एक दिन निश्चय कर डाला। आजिज होकर मान गई और कहने तू सुन […]
मां की लोरी बड़ी सुहाती, मां की ममता याद दिलाती। मां अपनी सर्वस्व अर्पण करती, मां अपने हिस्से की निवाला खिलाती।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
मां की ममता बड़ी सुहानी लगती है सबसे न्यारी । बचपन को मेरे सिंच रहीं है बनाकर फूलों की क्यारी, दुध पिलाकर गले लगाकर पलकों पर है रखती, गुणगान करें हम कितना धरा पर मां […]
कांप उठे दुश्मन सुनकर नाम महाराणा का, थर थर कांप उठे देख वीरता महाराणा का। देश के लिए समर्पित प्राणों का दिया आहुति, जयकारा लगाओ वीर धरती पुत्र महाराणा का।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
मां की गोदी में खेलकर बड़ा हुआ, मां के क़दमों को चूमकर खड़ा हुआ। दुध पीकर मां का आंचल का मुझे प्यार मिला, मां के छत्रछाया में ज्ञान पाकर मैं बड़ा हुआ।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
फूल खिले हैं डाली डाली भक्तों के हाथ में माला है। तुम तक कैसे पहुँचें भगवन मन्दिर में लटक रहा वस ताला है।।
जेठ का महिना भी अबकी कमजोर लगता है। शायद कोरोना ने इसे भी लाॅकडाउन कर दिया।
कोरोना भगाने को हम सब घर में बन्द रहे दिन पचास। कोरोना तो भागा नहीं अब घर भी बन गया एक वनवास ।।
उनका एक थप्पड़ इश्क़ में घी का काम कर गया। बुझे चिंगारी को बेशर्म शोला और शबनम बना दिया।।
मै अपनी जवानी गुजार दी मय के मयख़ाने में। अब तो बस खाली पैमाना बच गया मेरे जिंदगानी में।।
कोई वरिष्ठ था कोई गरिष्ठ था कोई पहनके इच्छामृत्यु का चोला। पुत्र मोह के चादर में कोई और प्रतिशोध आदर में कोई ले तन मन में प्रतिकार का गोला।। मित्र सम्बन्धी बनकर कोई लवण की […]
कर्ण ने कवच कुण्डल दान किया दानवीर कहलाने के लिए। दधिचि ऋषि अश्थि तक त्यागे आखिर क्या पाने के लिए।
गुजारिश कर ——————- और माँग ले कर्ण के कवच-कुण्डल जीवन का यही सत्य है अपनी मृत्यु को टाल दे औरों की मृत्यु का कारण बन जगमगा जीवन के प्रकाश में किसी के जीवन में तिमिर […]
सुनो ना मां! मत घबरा मेरे आने से मुकम्मल हो जाएंगे दोनों एक नए बहाने से तेरे पंख मेरी उड़ान होगी जमाने में अपनी नई पहचान होगी तेरी परछाई बन तेरे ख्वाबों को चुन लूंगी […]
रंगमंच पर हर किरदार अपना एक महत्व रखता है। गूंगा बनकर चार्ली चेप्लिन दुनिया को खूब हँसता है।।
चटपटी स्वाद की इमली व कड़वा होता नीम यहाँ। मूँह में पानी आ जाते हैं देख इमली जहाँ -तहाँ।। बिन खाए सांसों से केवल स्वास्थ्यलाभ दे नीम हमेशा। ‘विनयचंद ‘ ऐसे हीं संतन हरे सकल […]
तू मेरा मनमीत है तुझसे मेरे जीवन का हर गीत है तेरा साथ जो हो तो हार भी एक जीत है।
गूंगी लड़की ————— रात्रि के अंधकार में, नहा जाती वह दूधिया प्रकाश से। जब उसकी कहानी के पसंदीदा किरदार उसको घेरे खड़े होते। बेबाकी से वो दिखा देती अपने दिल में उठे ज्वारभाटो के निशान […]
किन्नर ——– व्यंगात्मक हंसी में भी प्रेम तलाशते, अभिशप्त जीवन जीने को मजबूर यह संवेदनाओ से भरे हृदय अपनी दो जून की रोटी के लिए आपके घर खुशियों के मौकों पर भर भर झोली दुआएं […]
किन्नर ——– व्यंगात्मक हंसी में भी प्रेम तलाशते, अभिशप्त जीवन जीने को मजबूर यह संवेदनाओ से भरे हृदय अपनी दो जून की रोटी के लिए आपके घर खुशियों के मौकों पर भर भर झोली दुआएं […]
तलवार जरूरी —————— मराठे, राजपूत, सिख सदा उसूलों पर ही चले थे। सीने पर तीर खाएं…. फिर भी… पीठ पीछे ना वार किए थे। अंग्रेज या मुगल हो इनसे …. धोखे पर धोखे खाए। हाथ […]
किताबें खोल कर देखा नहीं तुमने शायद पुराना बहुत हूँ पर अंदाज़ वही है
बरसों बाद आया हूँ उसी अंदाज़ में वही स्फूर्ति का तूफान लेकर मैं
गज़ल बन जाओ तुम गीत हम बने कुछ तुम कहो तो कुछ हम कहें
जो रोने भी ना दे बन के आँख का आँसू बरसे वो प्यारी माँ होती है
माँ तेरी ममता का कोई हिसाब नहीं। तेरी आँचल की छाया और जिसको तेरी गोद मिले। खुशनसीब है वो संतान जिसको ममता की मोद मिले।। तेरे मन की शीतलता के सम कोई माहताब नहीं । […]
मातृदिवस पर माँ को बच्चे याद बखूबी करते हैं। सोशल मीडिया पर आकर अह्लाद बखूबी करते हैं। माँ ने अपने दूध की ममता फेसबुक पर डाला क्या? दिल के एस डी कार्ड से भैया तेरा […]
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