कहीं खो से गए हैं सपने और जाग पड़ी हैं नींदे लॉक डाउन में जैसे सहम गये हैं जीवन के माइने कहीं रिश्तों की डोरी ने मजबूत हो रही है तो कहीं टूटने लगी है […]

कहते हैं किसको हँसना गमगीन ज़िन्दगी है। मिट्टी करे समर्पित अश्कों से बन्दगी है। हरदम रहे वो गीला उसका सदा हीं जून है। क्या नाम दूँ मैं उसको वो एक गोरकुन है।।

सीता का हाँथ देते समय जनक ने कभी नहीं सोचा होगा की जनक दुलारी सीता यूंँ वन में कष्ट भोगेगी कन्द मूल खायेगी और घास की सेज पर सोयेगी पर होतब्यता देखो यह सब हुआ […]

लाॅकडाउन बढ़ाते रहो अध्यादेश लगाते रहो आखिर जो आप मंत्री ठहरे। मजदूरों को भगाते रहो शराबियों को अजमाते रहो आखिर जो आप मंत्री ठहरे।।

धृतराष्ट्र की महत्वाकांक्षाओं ने ही बीज बोया महाभारत का धृतराष्ट्र आंखों से अंधे थे उन्होंने दुर्योधन के व्यक्तित्व को अंधा बना दिया इतिहास धृतराष्ट्र को ही महाभारत का जिम्मेदार ठहराता है गलत नहीं है क्योंकि […]

आओ साथी मास्क लगाए। अपनो से दो गज की दूरी बनाये।। स्वस्थ खुशहाल तो देश खुशहाल। यही मंत्र सभी को काम आए।। हर मर्ज के दवा है हमारे पास। बस थोड़ा सावधानी बरती जाए।। कोरोना […]

मैं आज जो निकली राहों पर यह राह मुझे बात सुनाती है कहे शर्म तो आती ना होगी मेरा घ्रणा से नाम बुलाती है कहे घूम रही चौराहों पे कोई वजह है या आवारा है […]

इस घर की कैद ने भी क्या खूब काम किया बिखरी तस्वीरों को करीने से सजा दिया फिर से याद आए वह पुराने साथी कुछ बिछड़े पलों को फिर से मिला दिया ।

जब तुझसे मेरी पहली मुलाकात होगी बिना बोले ही आंखों से सब बात होगी बिताकर कुछ पल जिंदगी के साथ तेरे फिर से हमारे प्यार की शुरुआत होगी तेरे चेहरे की मुस्कुराहट से दिल को […]

जब हम साथ होते हैं हाथों में हमारे हाथ होते हैं दुनिया की उलझनों से दूर सिर्फ हम और हमारे जज्बात होते हैं❣️❣️

खुदा के फरिश्ते के रूप में तुम आती हो होठों पर मीठी सी मुस्कान लाती हो अपनी जिजीविषा और कर्मनिष्ठा से टूटी आशा को जगा जाती हो रोगियों में रोगों से लड़ने की क्षमता बता […]

सब कुछ कहां कह पाते हैं कुछ शब्द अधूरे रह जाते हैं कुछ बातें मन में आती हैं कुछ मन में ही रह जाती हैं कहने को हम सब पूरे हैं बिन लफ्जों के भाव […]

जब भी देखता हूँ मैं इस रोटी के खुरचन को तो माँ आ जाती है यादों में। तवे पे रोटियाँ बनाती जब जला -जला के रोटियाँ की सौंधी सुगन्ध फैल जाती वातों में।। तोड़ -तोड़ […]

सफलता सफलता नहीं है कोई वस्तु सफलता है दृढ संकल्प की अग्नि सफलता को अगर पाना है तो सफलता के पीछे दौड़ लगाओ कमर कसकर समय के संग बढ़ना होगा आगे ही आगे बस आगे […]

माँ से बोली एक बेबस बेटी:- अविस्मरणीय है कोख तेरी माँ जिसमें स्फुटित हुई हूँ मैं । तुझे किसने बता दिया है माँ बेटा नहीं बेटी हूँ मैं । तभी से तू बेसुध है तेरे […]

अक्सर कहा करता था मैं माँ जाऊँगा परदेश को। “”ना ना वश कर”कहती माँ को मत कलेश दो।। दृढ़ संकल्प होकर ऐसा एक दिन निश्चय कर डाला। आजिज होकर मान गई और कहने तू सुन […]

मां की ममता बड़ी सुहानी लगती है सबसे न्यारी । बचपन को मेरे सिंच रहीं है बनाकर फूलों की क्यारी, दुध पिलाकर गले लगाकर पलकों पर है रखती, गुणगान करें हम कितना धरा पर मां […]