पेड़ रहे नित धूप में बाँटे सबको छांव। ऐसे हीं परोपकार में लगे हाथ और पांव।।
पेड़ रहे नित धूप में बाँटे सबको छांव। ऐसे हीं परोपकार में लगे हाथ और पांव।।
कौन कहता है कि दिल में सुराग नहीं होते। गर ना होते तो बेवफा कभी फरार नहीं होते।।
वो टहनियाँ जो हरे भरे पेड़ों से लगे हो कर भी सूखी रह जाती है जिनपे न बौर आती है न पात आती है आज उन मृत टहनियों को उस पेड़ से अलग कर दिया […]
मां भारती वीणावादनी ये घाव कैसा है, शब्दों की झुंझलाहट में फटकार कैसा है। कण्ड से निकलते झूठ का ये भाव कैसा है, ज्ञान की देवी मनुष्य का दुर्भाव ये कैसा है।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
नारी तुम हो बड़ी बलशाली, हारना नहीं तुम कभी हालातों से। लड़ते रहना खुद को साबित करना, मात ना खाना तुम कभी अपने बातों से।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
कौन किया हालात तुम्हारा हे मां वीणावादनी, शिक्षा के धरोहर ही लगा दिए है दाग मां वीणावादनी। दृष्ट के कण्ठ,ज्ञान के भण्डार को छीन लो मां भारती, कमल आसान छोड़कर पापी को सजा दो मां […]
शिक्षा के आंगन में सौदेबाजी हो रहा, शिक्षक ही शिक्षा का बोली बखुबी लगा रहा। मां सरस्वती को तांक पर रखकर, शिक्षक दिन रात ज्ञान को नीचा दिखा रहा।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
धरा पर जब जब बढ़ता अत्याचार, नारी धारण करती रूप विकराल। खुद से करके नारी सोच विचार, पाप के अन्त के लिए उठाती भाल।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
ज्ञान की दो चार बातें सीखकर इंसान, मां वीणावादनी का करता दुत्कार । सीख पढ़कर शब्दों का वर्ण संसार, अपने ज्ञान को समझता इंसा महान ।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
कितना भी बना लो शिक्षा को व्यापार, मां वीणावादनी करेंगी अपने बच्चों पर उपकार। शीश आशीष ज्ञान का भण्डार मन मस्तिष्क में भरकर, करती रहेंगी सदैव दृष्ट पापीयों का संहार।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
शिक्षा को शिक्षा ही रहने दो, मां सरस्वती मुझे वर दो । सौदेबाज शिक्षकों को दण्डित कर, हे हंसवाहनी मेरे उर का तम हर दो।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
झूठ फरेब की कलंक से कलंकित होती मां, कण्ड ज्ञान का भण्डार देकर खाती अब मात। हिंद के सिपाही थाम लिए अंग्रेजी का हाथ, दाग लगाकर सरस्वती पर मिट्ठू बनके गाते गान।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
दिल की बात दिल में ही रह जाती है रात खामोश हो कर भी बहुत कुछ कह जाती है
ज्ञान कि देवी सुर कण्ठ वरदायनी, शत् शत् नमन तुम्हें करें हम सब । जीह्वा पर हम सबके करती हो वास, हे वीणावादनी नमन करें हम सब।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
शत् शत् नमन करेंगे गुरूवर, शिक्षा का वरदान दे दो । मां सरस्वती को प्रणाम करके, विद्या दान का संकल्प हमें दे दो।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
प्रस्तुत है हाइकु विधा में रचना :- जिसका जो हो कर्म करे मानव ना करे चोरी जीत ले बाजी हर दांव की वह ना थके कभी संघर्ष करे नित जीवन में वो ना रुके कभी […]
प्रस्तुत है हाइकु विधा में कविता:- मजदूर हूँ पैदल चल पड़ा घर की ओर विपदा आयी सबने छोड़ दिया मौत की ओर आशावादी हूँ खुद ही जीत लूँगा यह युद्ध भी तुम कौन हो? समाज […]
गजल- भूख के मारे हुये है | भूख ले आई शहर हम भूख के मारे हुये है | छोड़ चले शहर को हम भूख के सताये हुये है | कोरोना के कहर ने बदल दी […]
इम्तिहान -ए-इश्क़ में सारे शरीक होते हैं। जो पास हो गए वही तो खुशनसीब होते हैं।।
तुम्हारे नजर- ए-रहम से तेरे,सब मीत बन जाते हैं। मेरे अल्फाज तेरे लबों से छूकर गीत बन जाते हैं।।
यूँ कहना तो बड़ा आसान है भूल जाना सारे बन्धनों को जाति -पाति को छोड़ देना परंतु सच्चाई यह है की जाति- पाति के ताने-बाने हमने ही बनाये हैं और उनको हम ही पोषित करते […]
एक बाद कहूँ गर सुनते हो तुम मुझे अच्छे अच्छे लगते हो जब होते हो नाराज़ कभी तो प्यारे प्यारे लगते हो एक बात कहूँ गर सुनते हो तुम मुझे भोले -भाले लगते हो
किसी को अपनी खता दिखाई नहीं देती जिस तरह तिमिर में दिखाई परछाई नहीं देती
ए सनम कहाँ खो गये हो । बोलो न ए सनम कहाँ खो गये हो।। किस खता की सजा हमने पायी। एक मर्तबा बता तो दे ए हरजाई।।
जमाने में सबसे निराला है । इसलिए नहीं कि मेरा यार है वो , मन का बड़ा हीं सच्चा और भोला भाला है।।
मुहब्बत के कई रंग देखे हैं। जो भी मिला उसे तंग देखे हैं। यूँ तो बड़ी सुहानी है ये दुनिया पर कहीं खुशी तो कहीं गम देखे हैं।।
तुम अपने मुहब्बत में कर लो परीक्षा सनम। पास निश्चित करुँगा पर आगे की तेरी इच्छा सनम।।
कुछ छंद अनोखे लाए हैं कुछ गीत सुहाने लाए हैं। हम तो तुम्हारे आशिक़ हैं कुछ भाव तराने लाए हैं।।
दुनिया दरकिनार होना चाहती थी हमसे पर दरकिनार हो न पाई । मुहब्बत ने ईंटे तो काफी लगाए पर इश्के मीनार हो न पाई।।
गीत बन्द पड़े हैं कल्पनाओं के अंतस में मीत सुनने को बेताब है
एक वक्त ऐसा भी लाऊँगी मैं जो हमें देख के अनदेखा कर देते हैं वो हमें देखने को तरसेंगे
कहीं खो से गए हैं सपने और जाग पड़ी हैं नींदे लॉक डाउन में जैसे सहम गये हैं जीवन के माइने कहीं रिश्तों की डोरी ने मजबूत हो रही है तो कहीं टूटने लगी है […]
कहते हैं किसको हँसना गमगीन ज़िन्दगी है। मिट्टी करे समर्पित अश्कों से बन्दगी है। हरदम रहे वो गीला उसका सदा हीं जून है। क्या नाम दूँ मैं उसको वो एक गोरकुन है।।
ये कोरोना की छुट्टी भी अब बेकार हो गई । मोबाइलों में होम वर्क और पव जी बेकार हो गई।।
गर्मी की छुट्टी हो गई गर्मी के आने से पहले। शायद स्कूल लग जाऐंगे नानी 🏡 जाने से पहले।।
ऐ वक्त जरा रुक जा कुछ देर के लिए। दुनिया में लाॅकडाउन है नये सबेर के लिए।।
सीता का हाँथ देते समय जनक ने कभी नहीं सोचा होगा की जनक दुलारी सीता यूंँ वन में कष्ट भोगेगी कन्द मूल खायेगी और घास की सेज पर सोयेगी पर होतब्यता देखो यह सब हुआ […]
मन्दिर बन्द है फैक्टरी बन्द है बन्द है कारोबार। घर में सोना बाहर कोरोना जीना है दुश्वार।।
जनताओं को कैद कर दो’कोरोना के नाम पे। बिजली पानी भी मुफ्त करो कोरोना के नाम पे।।
लाॅकडाउन बढ़ाते रहो अध्यादेश लगाते रहो आखिर जो आप मंत्री ठहरे। मजदूरों को भगाते रहो शराबियों को अजमाते रहो आखिर जो आप मंत्री ठहरे।।
चौथापन है लाॅकडाउन का फिर भी कोरोना अभी जवान है। करते रहो अध्यादेश जारी तुम्हें क्या जनता कितनी परेशान है।।
आलिंगन भी दिल से दिल को ना मिलाता। फिर बेबफाई से दिल आखिर क्यों टूट जाता।।
हर कसम टूट जाते हैं मुहब्बत के एक कसम खाने के बाद। इश्क़ रंग लाता है जुदाई के बाद।।
रंग बदलती दुनिया में बेरंग पड़ा है सबका जीवन फूलों से थोड़ा रंग चुरा कर तितली से थोड़ा रंग चुरा कर भर लो अपने जीवन में।
धृतराष्ट्र की महत्वाकांक्षाओं ने ही बीज बोया महाभारत का धृतराष्ट्र आंखों से अंधे थे उन्होंने दुर्योधन के व्यक्तित्व को अंधा बना दिया इतिहास धृतराष्ट्र को ही महाभारत का जिम्मेदार ठहराता है गलत नहीं है क्योंकि […]
जीवन चलता है चलता रहेगा कल घुटनों के बल चलते थे आज पैरों पर खड़े हैं
कसम दे देकर बर्बाद किया तुमने जहर की बात तुम ना करो तो अच्छा है
गीत मुस्कुरा के गाता हूं जाने क्यों ग़ज़ल लिखने में आंख भर आती है
दूरियां बनाने से कुछ नहीं मिलता रिश्ते नज़दीकियों से ही चलते हैं
कब से जाम लिये बैठा हूँ नजरों से पिलाने वाले कहाँ गए
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