कांप उठे दुश्मन सुनकर नाम महाराणा का, थर थर कांप उठे देख वीरता महाराणा का। देश के लिए समर्पित प्राणों का दिया आहुति, जयकारा लगाओ वीर धरती पुत्र महाराणा का।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

मां की गोदी में खेलकर बड़ा हुआ, मां के क़दमों को चूमकर खड़ा हुआ। दुध पीकर मां का आंचल का मुझे प्यार मिला, मां के छत्रछाया में ज्ञान पाकर मैं बड़ा हुआ।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

मै अपनी जवानी गुजार दी मय के मयख़ाने में। अब तो बस खाली पैमाना बच गया मेरे जिंदगानी में।।

कोई वरिष्ठ था कोई गरिष्ठ था कोई पहनके इच्छामृत्यु का चोला। पुत्र मोह के चादर में कोई और प्रतिशोध आदर में कोई ले तन मन में प्रतिकार का गोला।। मित्र सम्बन्धी बनकर कोई लवण की […]

गुजारिश कर ——————- और माँग ले कर्ण के कवच-कुण्डल जीवन का यही सत्य है अपनी मृत्यु को टाल दे औरों की मृत्यु का कारण बन जगमगा जीवन के प्रकाश में किसी के जीवन में तिमिर […]

सुनो ना मां! मत घबरा मेरे आने से मुकम्मल हो जाएंगे दोनों एक नए बहाने से तेरे पंख मेरी उड़ान होगी जमाने में अपनी नई पहचान होगी तेरी परछाई बन तेरे ख्वाबों को चुन लूंगी […]

चटपटी स्वाद की इमली व कड़वा होता नीम यहाँ। मूँह में पानी आ जाते हैं देख इमली जहाँ -तहाँ।। बिन खाए सांसों से केवल स्वास्थ्यलाभ दे नीम हमेशा। ‘विनयचंद ‘ ऐसे हीं संतन हरे सकल […]

गूंगी लड़की ————— रात्रि के अंधकार में, नहा जाती वह दूधिया प्रकाश से। जब उसकी कहानी के पसंदीदा किरदार उसको घेरे खड़े होते। बेबाकी से वो दिखा देती अपने दिल में उठे ज्वारभाटो के निशान […]

किन्नर ——– व्यंगात्मक हंसी में भी प्रेम तलाशते, अभिशप्त जीवन जीने को मजबूर यह संवेदनाओ से भरे हृदय अपनी दो जून की रोटी के लिए आपके घर खुशियों के मौकों पर भर भर झोली दुआएं […]

किन्नर ——– व्यंगात्मक हंसी में भी प्रेम तलाशते, अभिशप्त जीवन जीने को मजबूर यह संवेदनाओ से भरे हृदय अपनी दो जून की रोटी के लिए आपके घर खुशियों के मौकों पर भर भर झोली दुआएं […]

तलवार जरूरी —————— मराठे, राजपूत, सिख सदा उसूलों पर ही चले थे। सीने पर तीर खाएं…. फिर भी… पीठ पीछे ना वार किए थे। अंग्रेज या मुगल हो इनसे …. धोखे पर धोखे खाए। हाथ […]

माँ तेरी ममता का कोई हिसाब नहीं। तेरी आँचल की छाया और जिसको तेरी गोद मिले। खुशनसीब है वो संतान जिसको ममता की मोद मिले।। तेरे मन की शीतलता के सम कोई माहताब नहीं । […]

मातृदिवस पर माँ को बच्चे याद बखूबी करते हैं। सोशल मीडिया पर आकर अह्लाद बखूबी करते हैं। माँ ने अपने दूध की ममता फेसबुक पर डाला क्या? दिल के एस डी कार्ड से भैया तेरा […]

क्या लिखूं तुझ पर ? तू खुद शब्दों की माया है, खुद ना आ सका विधाता इसलिए तुझे भिजवाया है। Happy mother’s day

जब से सावन मेरी जिंदगी में बहार बनके आया तब से हम कविताओं को अपनी डायरी में जगह नहीं देते। शब्द लपेट लेते हैं अपने दामन में उसको दिल में जगह नहीं देते घाव कितने […]

आसमान के तारे भी सूक्ष्म मलिन से लगते हैं जब भारत के सैनिक वर्दी पहन ओढ़ कर चलते हैं जान ठोकर खाती है कदमों में और होंठों पर मुस्कान लिए चलते ऐसा जिगरा तो केवल […]

कुछ खट्टी कुछ मीठी बातों को सुनने और सुनाने को जी करता है मेरा जब भी तेरी आँचल में आ जाता हूँ। तू जननी है जन्मभूमि है तेरी गोद में आकर मैया सुख जन्नत का […]

देखते देखते हम बदनाम हो गए देखते देखते हम सिरफिरे और नाकाम हो गए, कल कहते थे हम जिंदगी है उनकी आज उनके लिए हम दास्तां-ए शाम हो गए।

आईना नहीं है आंखें मेरी फिर भी हकीकत तो जानती हैं ना तुम राही हो ,ना हमराही हो फिर भी तुम्हें अपना मानती हैं ।

खोल यादों की पोटली सोच विचार कर रहें, मानव अपने कर्मों पर गहन विचार कर रहें। कैसी ये मुफलिसी है छायी मेरे चेहरे पर, अपने आप को ढुंढ कर अपने आप में ही खोए रहें।। […]

आ बटोही बैठकर कुछ स्मरण कुछ चिंतन करें, यादों की पोटली खोलकर आ बटोही मंथन करें। कुछ तेरे कुछ मेरे सपनों का आ बटोही हवन करें, जिंदगी के क्रुध्द पल का आ बटोही हनन करें।। […]