चेहरे के हर भाव पढ़ने लगती है, जब कोई लड़की बढ़ने लगती है, कहती कुछ नहीं मुख से फिरभी, चुप्पी आँखों में गढ़ने लगती है, खेल खिलौनों संग खेलने वाली, रिश्तों के अंदर ही कुढ़ने […]

आँखों ही आँखों में जाने कब बड़ी हो जाती है बिन कुछ कहे सब कुछ समझ जाती है जो करती थी कल तक चीज़ों के लिए ज़िद आज वो अपनी इच्छाओं को दबा जाती है […]

दिल में जो हैं ” रहस्य ” देवरिया गर है मोहब्बत तो जताते क्यों नही। दिल मे जो है बात बताते क्यों नही।। %%%% %%%% जरुरी नहीं हर बार तू रुठे मै मनाऊ। हमे कभी […]

पहने सर पर नीली टोपी उछलता -कूदता आता है कभी इधर तो कभी उधर नाचता और नचाता है। भर अपने थैले में टॉफी बिस्कुट सबको लाता है हाथ मिलाकर बच्चों से एक जादू की झप्पी […]

चेहरे के हर भाव की जल्द ही कीमत लगने लगेगी, खामोशी, हंसी की दुकानों पर प्रदर्षनी लगने लगेगी, जेब खाली हो जायेगी सिर्फ भावों को सुनकर इनके, गहरी मगर ये मेरी बात सोंचो तो सच […]

तुम अक्सर आकर अपने मन की खुल के मुझसे कह लेती हो, धूप लगे जब तुमको मेरी छाया में तुम सो लेती हो, बहुत अकेला मैं भी सुनके चुप-चाप खड़ा रहा जाता हूँ, जब मुझको […]

ज़माने से बेपरवाह रहती है दुनिया के दिखावे से अंजान है माँ तू ऐसी क्यों है जो मेरी खुशियों में अपनी खुशियाँ संजोए रहती है।। – मनीष

कितने मजबूर होकर यूँ हाथ फैलाते होंगे, भला किस तरह ये बच्चे सर झुकाते होंगे, उम्मीदों के जुगनू ही बस मंडराते होंगे, बड़ी मशक्कत से कहीं ये पेट भर पाते होंगे, तन पर चन्द कपड़े […]

कितने मजबूर होकर यूँ हाथ फैलाते होंगे, भला किस तरह ये बच्चे सर झुकाते होंगे, उम्मीदों के जुगनू ही बस मंडराते होंगे, बड़ी मशक्कत से कहीं ये पेट भर पाते होंगे, तन पर चन्द कपड़े […]

कब तक मै यूँ ख़ामोश रहूँगा, अब मुझे तू शब्दों में बयां हो जाने दे, कब तक मै राहों में यूँ भटकता रहूँगा, अब मुझे तू अपनी मन्ज़िल हो जाने दे, कब तक मैं यूँ […]

मित्रो , ईश्वर के आशीर्वाद से , आज मेरी रचना , एक बार फिर राष्ट्रीय अखबार “दैनिक वर्तमान ” मे प्रकशित हुई है जिससे मेरे साहित्यिक क्षेत्र को बल , संबल प्राप्त हुआ है। आपके […]

ज़िन्दगी जैसे शतरंज की बिसात हो गई, जिसने समझ ली उसकी जीत ना समझा जो उसकी मात हो गई, ज़िन्दगी जैसे…… बंट गए हैं चौंसठ खानों में हम कुछ इस तरह, जैसे खाने से हटते […]

हाथ में लेकर सीटी आता साइकिल पर होकर सवार एक डंडे पर ढेर से खिलौने जिसमे रहते उसके पास गली गली और सड़क सड़क बच्चों की खुशियाँ लाता है देख के बच्चे शोर मचाते खिलौने […]

हाथ में लेकर सीटी आता साइकिल पर होकर सवार एक डंडे पर ढेर से खिलौने जिसमे रहते उसके पास गली- गली और सड़क- सड़क बच्चों की खुशियाँ लाता है देख के बच्चे खुश शोर मचाते […]

भक्ति तुम बिन वैभव कहीं एक पल को रह न पाये, जबसे देखा तुमको मुझको कुछ और नज़र न आये, कितने दिन से बैठा था मैं कितने राज़ छुपाये, अब डरता हूँ कहीं आँखों से […]

तेरे कलाम में हर पहर पढ़ती रहती हूं तेरी हर नज्म में खुद को ढ़ूढती रहती हूं इक चाहत थी कि तुझसे किसी दिन मिलूं इसी ख्वाहिश में हर लम्हा गुजरती रहती हूं|

क्यों कैद करते हो पंछियों को आज़ाद कर दो इनको सब आज इनको भी हक़ मिला हुआ है खुले आसमाँ में विचरण का जनाब गुलामी में जीना किसको पसंद है दे दो आज़ादी इनको भी […]

दुश्मनी ले, रहे हो बिना काम के!! ना तुम कुछ ले जा पाओगे, ना हम कुछ ले जा पायेगे।। केवल दो गज के कपड़े मेरे भी साथ जाएंगे, आपके साथ भी जाएंगे। दुनियादारी मुझे मालुम […]

कितनी भी धूप हो, कितनी भी ठण्ड हो काम पर अपने लगे ही रहते दिन हो या रात हो,सुबह हो शाम हो खेत पर हल को, चलाते ही रहते हर एक बीज को प्यार से […]

गर्मियों की छुट्टियाँ शुरू हुई हैं बच्चों में नई लहर दौड़ उठी है खेलेंगे -कूदेंगे अब दिन भर जमकर मस्ती और मस्ती खुलकर करेंगे दीदी भैया साथ गृह कार्य करेंगे विद्यालय से मिला कार्यकलाप करेंगे […]

कभी ठीक से अपने ही बिछाने पर सो भी तो नही सकते, ए ज़िन्दगी महसूस तो कर सकते है पर छू भी तो नही सकते काश अब ये भी समज ले कि कोशिश नही की थी हमने, कुछ भी […]

परिन्दा कैद से छूटा नही है छुडाने कोई भी आता नही है बहुत खामोश है दरिया के जैसे बहुत बेचैन है कहता नही है दिवाना बन गया है प्यार में वो वो लड़ता है मगर […]

उल्झे हुए रास्तो से, मुझे अंजाम तक जाना हे, मंज़िल ना जाने कहा गुम हे, ना जाने किस राह गुज़र जाना हे.. मे थका हारा दर ब दर, पाओं मे भी चुभन सी हे, हाल […]

देख गुब्बारे वाले को जब बच्चे ने आवाज़ लगाई दिला दो एक गुब्बारा मुझको माँ से अपनी इच्छा जताई। देखो न माँ कितने प्यारे धूप में लगते चमकते सितारे लाल, गुलाबी, नीले ,पीले मन को […]