केवल बेटी ही नही, बेटे भी घर जाते। दो जुम के रोटी के लिए अपना घर– परिवार छोड़ जाते। जो आज तक पला बाप के हाथ के छाये मे, आज वो दुसरे शहर मे भुखे […]
केवल बेटी ही नही, बेटे भी घर जाते। दो जुम के रोटी के लिए अपना घर– परिवार छोड़ जाते। जो आज तक पला बाप के हाथ के छाये मे, आज वो दुसरे शहर मे भुखे […]
वो दर्द वो खामोशी का मंजर नहीं बदला! तेरी अदा-ए-हुस्न का खंजर नहीं बदला! शामों-सहर चुभते रहते हैं तीर यादों के, मेरी तन्हाई का वो समन्दर नहीं बदला! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
वो दर्द वो खामोशी का मंजर नहीं बदला! तेरी अदा-ए-हुस्न का खंजर नहीं बदला! शामों-सहर चुभते रहते हैं तीर यादों के, मेरी तन्हाई का वो समन्दर नहीं बदला! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
उत्कर्ष मेल में पहली बार मेरी ग़ज़ल बहुत बहुत शुक्रिया संपादक महोदय जी का । आपका सहयोग यूँ ही बना रहे ।
भारतीय हो-भारतीय रहो ———————————- भारतीय हो–भारतीय रहो सर ऊँचा कर भारतीय कहो मिट्टी यहाँ की,संस्कृति यहाँ की संस्कारों में पली-बढ़ी है शक़्ल-ओ-सूरत मनुष्य एक सा फिर,क्यों—? सबको भेदभाव की पड़ी है व्यथित विचारों की तोड़ो […]
सारी यादें बन्द दरवाज़े के पीछे कैद कर रहा हूँ, हर एक निशानी को मैं कैसे सुफैद कर रहा हूँ, कोई आंकलन ही नहीं मुझे इस सनक का मेरी, क्यों सांकल लगा कर मैं खुद […]
हमारे दिल की धड़कन है तू हमारे जिगर का टुकड़ा है तू छुए तू इतनी ऊंचाइयों के कि दुनियां जहाँ में मशहूर हो तू।।
दुनिया की भीड़ में जब कभी अकेली होती हूँ तो बहुत याद आती है मुझे मेरी माँ खुशियाँ हो या गम हो हर सुख दुःख में बहुत याद आती है मुझे मेरी माँ जब भी […]
तेरे रवैये पे तू इतराया ना कर, ऐ दोस्त तू चेहरे को अपने यूँ बनाया ना कर, तू झूठ पर पर्दा उढ़ाया ना कर, यूँ सच को आईना दिखाया ना कर, तेरे रवैये पे तू […]
अब डूबने के डर से बेखौफ हो गया हूँ मैं, लहरों से सीख़ आया हूँ वापस लौट के आने का हुनर।। – राही (अंजाना)
पेट भरने को कितनी जद्दोजहद दिखाता है, जब कोई बच्चा सड़कों पर खेल दिखाता है, चोट दिल पे लगे और जिस्म को झुकाता है, क्यों पैसों की खातिर यूँ मासूम जज़्बा दिखाता है।। राही (अंजाना)
जब देख ही लिया उनके चेहरे को जी भर के, तो अब किसी तस्वीर को आढ़ा देख कर क्या होगा, बदल ही गया जब वक्त के साथ रुख उनका, तो अब किसी रिश्ते का रंग […]
एहसासों की एक चादर को रोज़ बिछाया करता हूँ, अपने दिल के टुकड़ों को उसपे रोज़ सजाया करता हूँ, बहुत अन्धेरा लगता है जब कभी मुझे अंतर्मन में, मैं उसकी एक तस्वीर मात्र को देख […]
बात करते हैं मगर चेहरा छिपा लेते हैं लोग, अक्सर खुद पर ही पेहरा लगा लेते हैं लोग, आते क्यों नहीं भला खुल के सामने सबके, जो दर्द भी दूजे के अपना बना लेते हैं […]
भला मौन रहकर भी कैसे कोई गहरे तीर चला लेता है, छोटी-छोटी बातों से ही मन की तस्वीर बना लेता है, लगे चोट अपनों से तो खुद को ही समझा लेता है, चेहरे पर झूठा […]
अब कोई तो बादल ही ढूंढ ले मुझको, बारिश ए बून्द ही सही चूम ले मुझको, एक अरसे से सूखी हैं ये आँखे मेरी, कोई हवा का झोंका ही सूंघ ले मुझको।। राही (अंजाना)
जानते हैं के सभी को बीमारी हो गई है, रिश्तों के मध्य खड़ी चार दीवारी हो गई है, कभी बैठ कर साथ में जो बना लेते थे बातें, आज उन्हीं दोस्तों के मन में गद्दारी […]
बड़ा अकड़ रहे थे वो चन्द बर्फ के टुकड़े बैठकर, जो मेरे सनम के हाथ लगते ही पानी पानी हो गये।। – राही (अंजाना)
सारे प्रयास प्रत्यक्ष है के विफल हो रहे हैं, सभी अक्षर मुख से निकल अस्त वयस्त हो रहे हैं, पहुँच ही नहीं रही है आवाज़ उस बालक तक, जिसके मस्तिष्क में ठहरे प्रश्न चिह्न चल […]
चेहरे के हर भाव पढ़ने लगती है, जब कोई लड़की बढ़ने लगती है, कहती कुछ नहीं मुख से फिरभी, चुप्पी आँखों में गढ़ने लगती है, खेल खिलौनों संग खेलने वाली, रिश्तों के अंदर ही कुढ़ने […]
कल तक जिस आँगन में पली और बड़ी हुई आज उसी के लिए पराया हो गया है कल तक जिस चीज़ को मन करता उठाया आज अपने वो हाथों को बाँधे बैठी है कल तक […]
आँखों ही आँखों में जाने कब बड़ी हो जाती है बिन कुछ कहे सब कुछ समझ जाती है जो करती थी कल तक चीज़ों के लिए ज़िद आज वो अपनी इच्छाओं को दबा जाती है […]
दिल में जो हैं ” रहस्य ” देवरिया गर है मोहब्बत तो जताते क्यों नही। दिल मे जो है बात बताते क्यों नही।। %%%% %%%% जरुरी नहीं हर बार तू रुठे मै मनाऊ। हमे कभी […]
पहने सर पर नीली टोपी उछलता -कूदता आता है कभी इधर तो कभी उधर नाचता और नचाता है। भर अपने थैले में टॉफी बिस्कुट सबको लाता है हाथ मिलाकर बच्चों से एक जादू की झप्पी […]
ताल्लुक संस्कृति से अपना वो खुल के दिखाती है, बेटी इस घर की जब गुड़िया को भी दुप्पट्टा उढ़ाती है।। राही (अंजाना)
इक लौ जलाकर आया हूं अंधेरों में कहीं ख्वाहिश है के वो कल तक सूरज बन जाये
मुकद्दर तेरा ज़रूर रंग लायेगा, जब कोई जीत कर भी हार, और तू हार कर भी चर्चा का मुद्दा बन जायेगा॥
चेहरे के हर भाव की जल्द ही कीमत लगने लगेगी, खामोशी, हंसी की दुकानों पर प्रदर्षनी लगने लगेगी, जेब खाली हो जायेगी सिर्फ भावों को सुनकर इनके, गहरी मगर ये मेरी बात सोंचो तो सच […]
तुम अक्सर आकर अपने मन की खुल के मुझसे कह लेती हो, धूप लगे जब तुमको मेरी छाया में तुम सो लेती हो, बहुत अकेला मैं भी सुनके चुप-चाप खड़ा रहा जाता हूँ, जब मुझको […]
मत कैद करो इन मासूम परिंदों को यूँ पिंजरे में इनको भी हक़ है खुले आसमां में विचरण का।।
मत कैद करो इन मासूम परिंदों को यूँ पिंजरे में इनको भी हक़ है खुले आसमां में विचरण का।।
सिकंदर सा चला था मै, सारी दुनिया जीतने… पर माँ के दिल से हार गया ।। ~ सचिन सनसनवाल
बड़ी चाह है ख़ुद को फ़िर बर्बाद करें, तुम आओ कि हम फिर मुलाक़ात करें !!
पकड़ी जब नफ़्ज़ मेरी., हकीम लुकमान यू बोला…! वो ज़िंदा है तुझ में..’ तू मर चूका है जिस में..!?✍?
उदासी जब तुम ?? ♀️पर बीतेगी ? तो तुम भी ?जान जाओगे, कोई ? नजर-अंदाज ? करता है तो ? कितना दर्द ? होता है..
एक टेबल, चाय का कप, और तुम, एक शाम, वो बेन्च, और तुम एक डोली, मेरा हाथ, और तुम एक घर, चारो धाम, और तुम एक दिल, मेरे नाम, और तुम ये सब सिर्फ रातो […]
ज़माने से बेपरवाह रहती है दुनिया के दिखावे से अंजान है माँ तू ऐसी क्यों है जो मेरी खुशियों में अपनी खुशियाँ संजोए रहती है।। – मनीष
अब तो कदम -कदम पर लोग शतरंज की बिसात बिछाये बैठे रहते हैं एक मामूली सी चूक पर तत्काल मात दे डालते हैं।।
कितने मजबूर होकर यूँ हाथ फैलाते होंगे, भला किस तरह ये बच्चे सर झुकाते होंगे, उम्मीदों के जुगनू ही बस मंडराते होंगे, बड़ी मशक्कत से कहीं ये पेट भर पाते होंगे, तन पर चन्द कपड़े […]
कितने मजबूर होकर यूँ हाथ फैलाते होंगे, भला किस तरह ये बच्चे सर झुकाते होंगे, उम्मीदों के जुगनू ही बस मंडराते होंगे, बड़ी मशक्कत से कहीं ये पेट भर पाते होंगे, तन पर चन्द कपड़े […]
कब तक मै यूँ ख़ामोश रहूँगा, अब मुझे तू शब्दों में बयां हो जाने दे, कब तक मै राहों में यूँ भटकता रहूँगा, अब मुझे तू अपनी मन्ज़िल हो जाने दे, कब तक मैं यूँ […]
मित्रो , ईश्वर के आशीर्वाद से , आज मेरी रचना , एक बार फिर राष्ट्रीय अखबार “दैनिक वर्तमान ” मे प्रकशित हुई है जिससे मेरे साहित्यिक क्षेत्र को बल , संबल प्राप्त हुआ है। आपके […]
ज़िन्दगी जैसे शतरंज की बिसात हो गई, जिसने समझ ली उसकी जीत ना समझा जो उसकी मात हो गई, ज़िन्दगी जैसे…… बंट गए हैं चौंसठ खानों में हम कुछ इस तरह, जैसे खाने से हटते […]
हाथ में लेकर सीटी आता साइकिल पर होकर सवार एक डंडे पर ढेर से खिलौने जिसमे रहते उसके पास गली गली और सड़क सड़क बच्चों की खुशियाँ लाता है देख के बच्चे शोर मचाते खिलौने […]
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