तेरी सारी सोच मन्सूबे तदबीरें इनमें कुछ भी कम ना आएगा वक्त जब अपना फ़ैसला सुनाएगा तब तेरा कुछ भी बच ना पाएगा …… यूई
तेरी सारी सोच मन्सूबे तदबीरें इनमें कुछ भी कम ना आएगा वक्त जब अपना फ़ैसला सुनाएगा तब तेरा कुछ भी बच ना पाएगा …… यूई
गिर गया है गर समाज तो इसे खोना ही चाहिए वक्त की गहरी क़ब्रों में अब इसे सोना ही चाहिए …… यूई
अच्छा बुरा सब एक वक्त के है दो पहलू जिन शमशीरों ने सामाजो को बचाया है उन्ही ने लाखों का खून भी बहाया है …… यूई
कौन अच्छा है कौन बुरा कौन किसका यहां फ़ैसला करे पल पल बदलते रंगों में कौन सफेद स्याह का रंग चुने …… यूई
यही प्रथा है इस ग्रह की जीवन यहां पे सबको है ज़िन्दगी की कवायत यहां की जिंदा है रिवायत वहां की …… यूई
उस बाज़ी में कभी ना थी तूने मानी इस बाज़ी में अब किसी ने ना तेरी मानी …… यूई
जब था वक्त तब किसी की ना मानी जब ना अब वक्त तब ना किसी की मानी …… यूई
गम सारे जमाने के मिटाने की क्या तुमने अकेले कसम खाई है ……यूई
बस करो रुक जाओ ख़ुद के लिए प्यास अपनी को बड़ा लो मेरे लिए ……यूई
तेरे दिल के रंग सुनसान से पाए तेरी आँखों में ख्वाब वीरान से पाए तेरे मन की उमंगें निर्जन सी पाई तेरी राहे ख़ुद से अनजान सी पाई तेरे मन की बातें बेजान सी पाई […]
समुंदर में रह कर भी तूं प्यासा क्यों है अरमानो भरा प्यार पाकर उदासा क्यों है उदासी अपनी की वज़ह तो बता इक बार तमाम खुशियाँ जीवन की दूँ तुझ पे वार ……यूई
क्या हुआ आज एक हाथ ही तो छूटा है वक्त-बेवक्त कईयों को तूने भी लूटा है लूटते हुए जो खुशियाँ खिलीं थी सीने में वोही तो लौटी हैं आज बन खंजर सीने में ……यूई
उम्मीद टूटी तो रोता क्यों है ख़ुद पे भरोसा खोता क्यों है ……यूई
दिल से गर तूं साँचा है यार के दिल का कांचा है ……यूई
वफ़ा कहने को बस एक लफ्ज निभाना इसको है सबसे सहज़ अडिग है गर तेरा खरा ईमान ता-उमर पयेगा साथ निष्ठावान ……यूई
इल्ज़ाम-ए-बेवफाई सच तो नही झूठे तेवर आपको जच्ते नही आईने आपके घर में टूट गए या आपने सँँवरना छोड दिया ……यूई
क्या फिज़ा यहाँ की बदरंग हुई यहाँ सोच ही सब की तंग हुई ……यूई
बिकती नही वफाएँ बाज़ारों में दिखती भी नही यह हजारों में ……यूई
बदला ख़ुद को तो कुछ पा जाएगा ना बदला ख़ुद को सब खो जाएगा ……यूई
. ღღ__रात के सन्नाटे की, कुछ ऐसी आदत लगी है “साहब”; . कि सुबह के शोर में हमसे, अब और जिया नहीं जाता!!….#अक्स .
[बुरा न मानो होली है ….. शुभकामनाओं सहित ] आया जोबना पे कैसा उभार दैया । गोरी कैसे सम्हालेगी भा…र दैया ।। पूनम के चांद–सा रूप खिला रे ! क़दरदान कोई न यार मिला रे […]
में हु थोड़ा उनमे थोड़े मुझमें छूटे न छूटे ऐसा रिश्ता बन जाये उनसे , दुनिया छोड़ जाये पर वो न दूर जाये मुझसे , कहे दू उनसे वो क्या है मेरा लिए , या बन […]
तेरा ज़िक्र तो हर जगह होता है दर्द ए अश्क आंखों में जो भरा होता है
. ღღ__तेरी पहली नज़र का रंग ही, अब तक उतरा नहीं “साहब”; . हम किससे खेलें होली, हमपे कोई रंग डालता नहीं !!…..#अक्स .
आज अवध में होली है और, मैं अशोका बन में। रंग दो मोहे राजा राम , मैं बसी हूँ कन कन में।। आँखे रोकर पत्थर हो गयी, आँसू से भरे सागर। तुम भी देख लेना […]
कविता … “मैं बच्चा बन जाता हूँ” न बली किसी की चढ़ाता हूँ। न कुर्बानी से हाथ रंगाता हूँ। रोने की जब दौड़ लगती है, मैं गिद्धों पर आंसू बहाता हूँ। न मैं मंदिर में […]
जब हम बच्चे थे , चाहत थी की बड़े हो जायें | अब लगता है , कि बच्चे ही अच्छे थे || अब न तो हममें कोई सच्चाई है , न ही सराफ़त , पर […]
वफाएँ चाहते हो सच मैं ही पाना दिल को बना लो वफादार तुम जाना …… यूई
बेवफाईया जो तूने उमर भर लुटाई हैं वोही लौट कर वापस पास तेरे आयीं हैं …… यूई
तुझे पाने वाला ख़ुद का नसीब कहता है लुटने वाला ख़ुद को बदनसीब कहता है हैं दोनों ही तेरी राह् के भटके मुसाफिर तूँ तो दोनों को ख़ुद की औलाद कहता है …… यूई
वफा वोह अनमोल कमाई है जो सबके नसीब ना आयी है …… यूई
ता-उमर लगायी दौलत कमाने मैं तूने जो कमाया अब वोही तो तेरा है बंदिया बेवफ़ाई पे मेरी क्यों तूँ इतना बिखर गया वफ़ा तूने क्मायी ही कहा, जो ढूँढे बंदिया हाँ दौलत से मिलती नही […]
उम्मीदों की तामीर की ख्वाबों की बुनियाद पे अब क्या शिकवा करे अपनी ही बुनियाद से …… यूई
इंतज़ार में रखना है तो फितरत उम्मीद की इंतज़ार में मरना है किस्मत विश्वास की …… यूई
हमनें पूछा उम्मीद से फिर दे गई धोखा उम्मीद ने कहां मैं और धोखा यह तो तेरा तुझको ही धोखा …… यूई
उम्मीद की तो फितरत है धोखा किस उम्मीद ने तुझे है रोका …… यूई
ज़िन्दा रहना उम्मीद के सहारे है बस रहना जैसे डूबते किनारे …… यूई
तेरे हौंसलों में मैं ज़िन्दा थी तेरे जाते ही मैं बस खो गयी शरीर तेरा था तूँ ले जाता मन का साथ तो दे जाता तेरे मन का साथ मरते ही उम्मीदे मेरी सारी खो […]
डूबना मेरी कश्ती का हो गया था तय तभी जब छोड़ साथ अपनों का अर्पण किया था तुझे सभी …… यूई
मालूम हैं मुझे के में ना खरा उतरा तेरी आस्मानी उम्मीदो के पैमानों पर हाँ मैँ ही तुझे यह समझा ना पाया इंसानो को नही तौलते खुदा के पैमानों पर …… यूई
मैंने उम्मीद की इसका गम नही इससे समझा के तूँ मेरा हमदम नही …… यूई
ऐसा नही के उम्मीद पूरी नही होती होती है पर हजारों में एक होती है …… यूई
गुनाह् नही, कोई उम्मीद करना गुनाह् है , उम्मीद को ना-उम्मीद करना …… यूई
उम्मीद तेरी यह कैसे होती पूरी इमारत की तामीर थी हवाओं में …… यूई
वफाएँ हासिल करने का दम भरते हो सर उठा कर चेहरा तो देख आईने में …… यूई
अता ना की होती यह गर रोशनी ख़ुद की तूने सोच तो मैं क्या ही पता लिखना तो कभी ना भाता …… यूई
लिखवाता जा रहा है तूँ मुझसे नाम मेरा हो रहा है रोशन मैंने भी ना रखा कुछ मुझमें रोज़ किया तेरा नाम रोशन …… यूई
कहने को बस नाम हो रहा मेरा तू तो जानता है यह है काम तेरा …… यूई
जिस चोले को पहन भगत सिंह खेले, अपनी जान पे जिसे पहन कर राज गुरु मिट गए, अपनी आन पे आज उसी को पहन के देश का बच्चा, बच्चा का बोला मेरा रंग दे बसंती […]
सभी मित्रोजनो को होली की अग्रिम शुभकामनाये। आप सबों को होली पर एक भेट! ****** प्रेम-रस का रंग बरसाने निकली भर के झोली में ! क्युँ मैं सखियों से बिछङी क्या आया रास अकेली में […]
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