Category: हिन्दी-उर्दू कविता

  • “मैं आदमी-सा था”

    सूरत तो उसकी देखी, पर सीरत नहीं देखी;
    ღღ_है मेरी खता ये, कि मैं आदमी-सा था !
    .
    ღღ_वक़्त के साथ उनके, बदला किये ख्याल;
    इन हालात में बिछडना, तो लाज़मी-सा था!!……‪#‎अक्स

  • ” दो घूंट में ” # 2 Liner

    अपनी पूरी कमाई तूने मय पर लूटा दी…..

     

    ए  – ग़ालिब….

    जरा मुझे ये बता…

    उस दो घूंट में , जिंदगी जीने का स्वाद कितना है….

     

    • पंकजोम ” प्रेम “

  • काश कभी ऐसा भी हो

    बहुत याद करते है हम आपको
    क्या कभी आपके ख्यालों मे हम भी आते हैं
    होती है गुफ़्तगू कई दफ़ा दिन में
    क्या कभी आपके सपनों में हम भी आते हैं
    काश कभी ऐसा भी हो
    हम आपको याद करे
    और आपका हाथ हमारे हाथों मे हो|

  • बात

    जो बात हम में हैं,

    वो बात ना तुझ में हैं और ना ही मुझमे!!!

  • “लालच” #2Liner-19

    ღღ__वो तो लालच है उनके ख्वाबों का, जो हमें सुला देता है “साहब”;
    .
    वरना नींदें तो उनकी यादों ने, एक अरसे से उड़ा रक्खी हैं !!…….‪#‎अक्स‬

  • m kb tanha hui

    m kb tanha hui

    “jnab”

    meri  to masrufiyat hi tumse h???

  • roj mera katal

     


    rojj mera katal hota h

    roj m smbhal jati hu..

    jiddi tum bhut ho..

    jiddi km hum b nhi

  • ” कुछ ऐसा लिखूँ “

    कुछ ऐसा लिखूँ , की पढ़ने वाले को लगे …

    मेरा एक – एक  अल्फ़ाज , गहरा हैँ …

    खों जाये वो मेरे अल्फाज़ो की महफ़िल में ..

    लगे उसे , मानो आज वक़्त , ठहरा हैं..

    यादगार हों जाये उसके लिए , मेरी हर इक सुखनवरी ….

    एहसास हो , जैसे…..

    रौनक के पहरे से रोशन उसका , चेहरा हैं ..

     

    पंकजोम ” प्रेम “

  • ” सुराही – ए – मोहब्त “

    दिल बेचैन हुआ , तो उसके दीदार का दिया दिलासा हैं …..

    जाने वाले कल चले गए ,

    लेकिन आज भी उनके लौट आने की ….

    छोटी सी आशा हैं …..

    अब कोई तो बने सुराही – ए – मोहब्त ….

    क्योंकि ये सुख़नवर बहुत , प्यासा हैं ….

     

    पंकजोम ” प्रेम “

  • ” वक़्त लगता हैँ यहाँ “

    वक़्त लगता हैं यहाँ , इंसान को इंसान समझने में …….

    वक़्त लगता हैं यहाँ , पत्थर को भगवान समझने में ……

    आधी उम्र बीत जाती हैँ सोचने सोचने में ..

    क्योंकि वक़्त लगता हैं यहाँ , जीने के अरमान समझने में …..

     

    पंकजोम ” प्रेम “

  • muktak

          मैं एेसे दरिया के किनारे बैढा हुं,
    हर घडी जहा से समुन्दर दिखने लगता है।
    ये मेरा दिल भी एक जिद्दी बुजुर्ग् जैसा है,
    जो रात होते ही किस्से सुनाने लगता है।
    आपका अपना कवि नवीन गौड

     

  • “अजनबी” #2Liner-18

    ღღ__हमको सताने के मौके, वो छोड़ते नहीं हैं “साहब”;
    .
    कल ख़्वाब में भी आए, तो अजनबी बनकर !!…….‪#‎अक्स
    .
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  • ” मैं तेरे ही पास हूँ…”

    इश्क का दरिया हूँ मैं, मैं सागर की प्यास हूँ…
    बरसों से लापता है जो, वो तेरी तलाश हूँ…

    अंधेरों को रोशन कर दे, वो जीने कि आस हूँ…
    मोत को ज़िन्दगी कर दे, मैं तेरी वो सांस हूँ…

    दिल कि तेरे धड़कन हूँ मैं, सुकून का एहसास हूँ…
    दफन है दिल मे जो तेरे, वो तूफानी राज़ हूँ…

    तड़पता है मेरे लिये, सिर्फ इसीलिये उदास हूँ…
    बंद आँखों से देख ज़रा, मैं तेरे ही पास हूँ…

  • na hum barbaad hue

    Na hum barbaad hue,

    Na hum aabad hue

    Jane kaise “janbaaj” hue???

  • मर रहा हूं मैं बार बार

    कोई ख्याल है जो बस गया है दिल में
    इक सवाल है जो उठता रहता है बार बार
    जिंदगी हो रही है बसर, मगर
    मर रहा हूं मैं बार बार

  • दिल की बात

    मैं अल्फ़ाज़ हूँ तेरी हर बात समझता हूँ,
    मैं एहसास हूँ तेरे जज़्बात समझता हूँ,
    कब पूछा मैने की क्यूं दूर हो मुझसे,
    मैं दिल रखता हूँ तेरे हलात समझता हूँ…!

  • समझों तो यहीँ मोहब्त हैं

    ये अल्फाज़ , अल्फ़ाज़ ही नहीं , दिल की ज़ुबानी हैं …..

    इन्होंने ज़न्नत को , जो जमीं पर लाने की ठानी हैं …

    साथ देने को कई मरतबा भीग जाती हैं पलकें …..

    समझों तो यही मोहब्त हैँ , ना समझों तो पानी हैं…..

     

    पंकजोम ” प्रेम “

  • मुबारक

    मुबारक हो तुमको एक नई रोशनाई,,
    चाहतों के समुंदर की प्यारी गहराई,,
    क्या तोहफा दूँ तुमको, समझ नहीं आता,,
    तुमने ने तो सारी दुनिया हैं महकाई,,

    हर तरफ अपनी मुस्कान बिखेरते रहना,,
    गमो को तो बस भैस चराने भेज देना,,
    शोपिंग करना, चहकते रहना, संवरते रहना
    अगर कोई सड़ता हैं तो उसे सड़ने देना!!

    सूरज से तेज किरणों में भी गुलाब सी महकती रहना,,
    खाली बैठकर कभी कभार हमको भी याद करती रहना,,
    इस ज़माने में बचाना चाहती हो अगर अपना वजूद तो,,
    आठवां फेरा कन्या भ्रूण हत्या को रोकने खातिर ले लेना,,

  • न तुम जी पाये, न मैं जी पायी

    बहुत सारी बातें है जो कहनी थी
    बहुत कुछ सुनना था तुमसे
    मगर कुछ न तुमने कहा
    न मैं ही कुछ बोल पायी
    जिंदगी गुजरती गयी चंद लम्हों में बटकर
    न तुम जी पाये, न मैं जी पायी|

  • बहुत खारे है जज़्बात हमारे..

     

    बहुत खारे है जज़्बात हमारे

    इस मीठी मोहब्बत के

    तुम्हारी नज़रों में क्या मोल है

    हमारे अश्कों के समंदर का

     

  • “ღ महबूब ღ”

    मेरे महबूब के जलवों की तो, पूरी दुनिया ही दीवानी है,

    ये जहाँ जो इक गुलिस्ताँ है, इसकी वो रात-रानी है;

    .

    चाल है गज़ालों सी, रुख में मौजों सी रवानी है,

    होंठों पे शबनम का बसेरा है, आँखें मैखानों की निशानी हैं;

    .

    रंगत में धूप सी चमक है, जुल्फें हैं स्याह रातों सी,

    जहाँ भर के हसीनों में, उसके चर्चे ज़ुबानी हैं;

    .

    माना ये ख्वाब दिलकश है ‘अक्स’, ज़द में रह के देखो तो अच्छा है,

    अमूमन तो ये ख्वाब पूरे नहीं होते, हो जाएँ तो ख़ुदा की मेहरबानी है!…….#अक्स

  • चलो इक कविता लिख देते हैं

    क्या कहूं, क्या लिखूं कुछ समझ नहींं आता
    कुछ बाते हैं जो लफ़्ज का साथ ही नहीं देती
    कुछ बाते हैं जो दफ़न है जहन में
    कुछ बातें अनकही ही रह जाती है
    कुछ न कह कर, कुछ न लिख कर
    चलो इक कविता लिख देते हैं

  • “इन्तजार”

    “इन्तजार” ! बहुत ‘मतलबी’ लफ्ज़ है ना ‘साहब’ ??
    ღღ__रख लो तो अमानत, दे-दो तो इक ज़मानत;
    .
    ღღ__चाहो तो मोहब्बत, सोचो तो सिर्फ नफ़रत,
    काट तो दो तो इक उम्र, और जी लो तो ज़िन्दगी !!……‪#‎अक्स
  • ” चाँद का मायूस चेहरा”

    कल मैंने अपनी प्रेमिका के उतर दिल में ,

    चाहत का ज़खीरा देखा …..

    अपने जिल्ले – सुभानी के इंतजार में ,

    उस चाँद का मायूस चेहरा देखा ..

    स्वागत में उसने आब संग बिछा दी पलकें ,

    मैंने हर इक आब पर नाम , मेरा देखा …

     

    पंकजोम ” प्रेम ”

     

  • “सोचती हूँ, क्या लिखूं…?”

    सोचती हूँ, क्या लिखूं…?
    कोई ग़ज़ल, या शायरी लिखूं…?
    या कोई क़िस्सा लिखूं प्रेम कहानी का..,
    जिसमें मैं ख़ुद को “तुम्हारी” लिखूं ।।

  • “इन्तजार” #2Liner-17

    ღღ___ज़िन्दगी तो कटती जा रही है “साहब”, इन्तजार की कैंची से;
    .
    और सिलसिला-ए-इन्तजार है, कि कटता ही नहीं कभी !!…….‪#‎अक्स
  • “आसमाँ” #2Liner-16

    ღღ__इक परिन्दा हो के भी, अब उड़ नहीं सकता;
    .
    कि मेरे साये ने ही मेरा, मेरा आसमाँ चुरा लिया !!……..‪#‎अक्स‬

  • ” सम्भाल ले ऐ – ख़ुदा “

    सम्भाल ले ऐ – ख़ुदा , एक लम्हे के लिए मुझे….

    अब  मैं हार रहा हूँ …..

    तू ही बता मेरे साहिब , मैं क्यों ये जिंदगी तन्हा गुजार रहा हूँ …

     

    तूने साज़ किया चेहरे पर , मुस्कराहट का ….

    लेकिन मैं क्यों , मायूसी स्वीकार रहा हूँ …..

     

    जिल्ले – सुभानी कहता हैँ ये जग मुझे , अल्फाज़ो का ….।

    फिर मैं क्यों ख़ुद को ख़ामोशी में उतार रहा हूँ ….

     

     

    इक रोज़ मालूम हुआ , मयख़ाने में मय बाँट लेती है रंज….

    मैं , ये कड़वा सच भी नकार रहा हूँ …..

     

    जब देखता हूँ माँ – बाप की नजरों में , तू दिखाई दे ….

    लेकिन कुछ रोज़ से , बनता जा काफ़िर रहा हूँ …

     

    अब तो कुछ और आब बढ़ा दे चेहरे की रौनक …

    क्योंकि हर दफ़ा महफ़िल – ए – रंज में , मैं उजागर रहा हूँ …

     

    अधूरी साँसे हैं , ख्वाईश एक रुख़ – ए – रोशन से बेइंतहा इश्क़ पाने की….

    लेकिन मैं क्यों , मन ही मन , मन को मार रहा हूँ ….

     

    उठ चूका हैं ,  नहीं उठना था , जो  सैलाब दिल में  ” पंकजोम प्रेम “….

    क्योंकि लहर – ए – उल्फ़त पर एक मरतबा फिर मैँ लहर रहा हूँ…

  • saavan ne poetry ko wo mukaam diya

    soch liya tha humne ab haar Gaye hai hum,
    kyunki Kisi ne na kbhi humari khwaaishon ko pyaar bharaa ik andaaz Diya…
    lekin yahan ki duniya ko jaana, Tb pta chla…
    Saavan ne poetry ko wo mukaam Diya…
    meri wishes ko sakaar krne k liye…
    mujhe ikk asmaan Diya..

  • समझ नहीं आया..

    अनकही बातों तो समझते आये थे अबतक
    उन्होने आज जो कहा समझ नहीं आया

  • माँ

    कुछ खास नहीं था कहना ,
    कुछ बात नहीं था कहना ,
    जो बोल न पाया ख्यालों की अंजुमन मैं ,
    बिन बोले तुम तक वह बात पहुंच गयी ,
    आस्चर्य मैं पढ़ जाता हूँ मैं ,
    मेरे दिन की रहमत होगी जरूर तुम ,
    नहीं तोह तुम तक मेरी हर अनकही बात कैसे पहुंच जाती हैं

  • khulii aankhon se sapne dekhte hai

    Hum aaj bhi khulii aankhon se sapne dekhte hai…
    Band aankh rakh kr aksar insaan peeche reh jaaya krte hai…
    Or aankh kholte hi dikhne wale sapne toot jaaya krte hai…

  • “क़ैद” #2Liner-15

    कुछ इस तरह ख्याल उसका, मेरी डायरी में क़ैद रहता है;
    .
    ღღ___जैसे मेरा वजूद, मेरी शायरी में क़ैद रहता है !!…….‪#‎अक्स

  • pyaar na kr sake

    Sath rhna humare or b raasta sikhayeinge…

    Dosti ki apni daastan sbko sunayeinge…

    Pyaar na kr sake to kya hua,

    dostii k hr उसूल teh-e-dil se nibhayeinge…

  • “मोहब्बत” #2Liner-14

    क़यामत के रोज़ फ़रिश्तों ने, जब माँगा हमसे ज़िन्दगी का हिसाब;
    .
    ღღ__ख़ुदा, खुद मुस्कुरा के बोला, जाने दो, ‘मोहब्बत’ की है इसने!!……#अक्स
  • prem kahaani

    Ek ladki uski aankhon Ki deewani hai…

    Pr kya itnii si uske Prem kahaani hai…

  • sbbdo ki mehfil thi sjji……..

    Shhbdo ki mehfil thi SJJI…
    yaaro hum bi chl diye apni MOHHBAT k kisse ” sunaane ” ….
    Jo dard tha dil m bya krte gye hum bi bhigi aankhiyo se…
    Kyuki hum the kisi hasina k hasin Dewaane….
    Khaa hum se nikklne wale unn sbbdo ne….
    Jindagi k kuch raz , raaz hi rehne do…
    Kyuki wo ache hote h..
    Agr ho gye ho puraane….
    Hum bi ye sochte rhe…
    Wo smaa jiski hume chahat krte the…
    Wo to kisi or ki ho gyi…
    Abb hum kon si smaa k bnne parwaane……

     

    Pankajom ” Prem “

  • दुनिया की आवाज़ों में मैरी एक आवाज़ भी है…

    दुनिया की आवाज़ों में मैरी एक आवाज़ भी है…

    इसमें मायने हैं कुछ, इसमें कुछ अल्फाज़ भी हैं…
    ज़ाहिर से इन क़िस्सों में, छिपी हुई सी ‘आह’ भी है..
    फ़िज़ूल वाक़िये हैं कुछ, सुनाने की चाह भी है…
    इस दिल मे हुए क़ैद कई भोली आशाऔं के पँछी मगर..,
    अरमानो की उडानें भरता ज़िद्दी सा इक बाज़ भी है…

    दुनिया की आवाज़ों में मैरी एक आवाज़ भी है…

    गेहराई में पलते सपने हैं, ख्वाहिशों की लाश भी है…
    मेहेरबानी ख़ुदा की है बहुत, कुछ अनसुने से ‘काश’ भी हैं…
    इस शोर में जो सुन सके, हमें ऐसे दिल की तलाश भी है…
    रस्ते में दम तोड़ गए अन्जाम थे धोखेबाज़ मगर..,
    फिर कहीं ज़िन्दा हुआ एक तूफानी आग़ाज़ भी है…

    दुनिया की आवाज़ों में मैरी एक आवाज़ भी है…

  • bachpan ki yaadein

    Yaad aate h wo guzre zamane…
    Jo haste ldte #pathfinder me bitaaye the humne…
    Ek wo din tha jab zabrdasti bandhwaaya tha wo sadhaaran sa dhagaa…
    Aaj uski kimat anmol hai ye baat samjh aane lgi hai…
    Koi deta tha toffee, to koi chocolates, koi gift tha lata, to koi emotionally tha behlata…
    Mano jaise Bachpan wali shararte khilkhila rhi hai…
    Hichkiyan aaj mujhe kasam se bhot aa rhi hai…
    Lgta hai kisi ko humari aaj kmi staa rhi hai…

  • kho gayi hu main

    Uske deedar k baad ab kho gayi Hu main…

    Raaton uski yaadon Mein jagne k baad, ab so gyi Hu main….

    Ab awaaz mat Dena, aage badh rahi Hu main…

    Takleefon se ubhar kar, khushiyo Ki talaash Mein chal padii Hu main…

  • sawaal mat pucho

    sawaal mat pucho,

    jawaab nahi aata….

    dil ki rawaani na pucho,

    ab khwaab nahi aata….

  • ” मेरे माधव ही नहीं आप सब “

    मेरे माधव ही नहीं आप सब …

    राह – ए – क़ामयाबी में , मेरी तरह एक मुसाफ़िर भी  हो ….

    भरने फ़लक – ए – क़ामयाबी पर ऊंची उड़ान ……

    मेरे संग उड़ने वाले तायर हो …

    जिल्ले – सुभानी – ए – अल्फ़ाज़ हो …..

    और सुखनवरी की दुनिया के क्या बेहतरीन सुख़नवर हो …. ….

     

    पंकजोम ” प्रेम “….

     

    तायर – पंछी

    जिल्ले – सुभानी – सम्राट

    सुख़नवर – शायर , कवि

    सुखनवरी – शायरी , कविता

  • हाँ,, मैंने लोगो को बदलते देखा हैं!!

    हाँ,, मैंने लोगो को खुद में ही बदलते देखा हैं!!
    उनके जज्बाती हम को अहम बनते देखा हैं,
    कल तक जो सबको साथ लेकर चलने की बात करते थे,,,
    आज उनके खिलाफी ख्वाबो को भी अनाथ होते देखा हैं!!

    गलत सोचता था कि नाराजगी,,
    होती हैं चाँद लफ्जो की दगावाजी,,
    उनके प्यारे सावन से मिलकर जाना,,
    ये तो सुनामी की हैं कलाबाजी!!
    मगर सुनामी से ही सागर को उझड़गते देखा हैं,,
    हाँ,, मैंने लोगो को खुद में ही बदलते देखा हैं!!

    तुझे भी दगा देना हैं तो शौक से दे दिल,,
    हम तो साँसों से भी काम चला लेंगे,,
    घुट घुट कर जी जाऊंगा मैं इतना कि,
    सावित्री की याद यमराज को दिला देंगे!!
    अधूरेपन से खुद को आबाद होते देखा हैं,,
    हाँ,, मैंने लोगो को खुद में ही बदलते देखा हैं!!

  • “तारीख़” #2Liner-13

    ღღ__हमको भी अपनी बारी का, इंतज़ार रहेगा “अक्स”;
    .
    लोग कहते हैं तारीख़, खुद को दोहराती ज़रूर है !!………‪#‎अक्स‬

  • रशमें – ए – इश्क़

    जब महफ़िल – ए – इश्क़ में , निग़ाह से निग़ाह टकराई …

    दिल की बात चेहरे पर उभर आई ….

     

    अँधेरे में डूबे मेरे एक एक लम्हे को रोशन करने ….

    उसने क्या ख़ूब कंदीले – ए – मुस्कराहट जलाई ….

     

    ख़ामोश थी उसकी जुबां , ख़ामोश एक एक अल्फ़ाज़ ….

    मुझे अपने दिल की और ले जाने ,  स्वागत में उसने पलके बिछाई…

     

    मैं तो वाकिफ़ था नशा – ए – उल्फ़त से …..

    वो एक मरतबा फिर ज़ाम – ए – चाहत बना लाई …

     

    बिखरें इस सुख़नवर को , क्या खूब मोहब्त से समेटा उसने …

    एक अलग अंदाज़ में रशमें – ए – इश्क़ निभाई ….

     

    इश्क़ के वसन में कुछ यूं लपेटा उसने  ख़ुद को ….

    मेरे साथ रहने , बन गयी मेरी परछाई …

     

    ख़ुशी हुई मिलकर उस से इस क़दर  , पंकजोम ” प्रेम ”

    की दूर हो गयी बरसों पुरानी तन्हाई …..

  • ” हाल – ए – दिल “

    देखकर उसकी मुस्कान , ख़ुशी से भर जाता हूँ , मैं …..

    उसकी एक झलक पाने ….

    कुछ भी कर जाता हूँ , मैं…..

    वो क्या जानें , मेरा हाल – ए – दिल ..

    उसे मायूस देख …..

    ग़ुलाब की पत्तियों की तरह बिखर जाता हूँ , मैं…..

     

    पंकजोम ” प्रेम “

  • “अक्स” #Liner-12

    वो मुझमें बस गया है ‘साहब’, आईने में “अक्स” की मानिन्द;
    .
    ღღ___नज़र के सामने होकर भी, अक्सर सामने नहीं होता !!…….‪#‎अक्स‬

  • ” कश्ती – ए – मोहब्त “

    दिल जब कश्ती – ए – मोहब्त पर सवार होता हैँ…..

    तब उनसे मुलाकात करने को दिल बेक़रार होता है….

    दीदार कर उस अप्सरा का , मैंने भी मान लिया …

    ” एक नज़र में भी प्यार होता हैं ”

     

    पंकजोम ” प्रेम “

  • उसके चेहरे से नजर हे कि हटती नहीं..

    उसके चेहरे से नजर हे कि हटती नहीं

    वो जो मिल जाये अगर चहकती कहीं

     

    जिन्दगी मायूस थी आज वो महका गयी

    जेसे गुलशन में कोई कली खिलती कहीं

     

    वो जो हंसी जब नजरे मेरी बहकने लगी

    मन की मोम आज क्यों पिगलती गयी

     

    महकने लगा समां चांदनी खिलने लगी

    छुपने लगा चाँद क्यों आज अम्बर में कहीं

     

    भूल निगाओं की जो आज उनसे टकरा गयी

    वो बारिस बनकर मुझ पे बरसती गयी

     

    कुछ बोलना ना चाहते थे मगर ये दिल बोल उठा

    धीरे- धीरे मधुमयी महफिल जमती गयी

     

    आँखों का नूर करता मजबूर मेरी निगाहों को

    दिल के दर्पण पर उसकी तस्वीर बनती गयी

     

    सदियों से बंद किये बेठे थे इस दिल को

    मगर चुपके से वो इस दिल में उतरती गयी

     

    तिल तिल जलता हे दिल मगर दुंहा हे कि उठती नहीं

    परवाना बनकर बेठे हे शमां हे की जलती नहीं

     

    हो गयी क़यामत वो जो सामने आ गयी

    दर्द ऐ दिल से गजल आज क्यों निकलती गयी

     

    थोडा सा शरमाकर, हल्के से मुस्कुराकर झुकी जो नजर

    नज़रे-नूर-ओ-रोशनी में मेरी रंगे-रूह हल्के से घुलती गयी

  • लफ़्जों में ढ़लने लगी है जिंदगी मेरी

    कोई अपना था जो खो गया
    जिंदगी में जो पास था
    जो दूर हो गया
    यादों के सहारे रह गयी है जिंदगी मेरी
    लफ़्जों में ढ़लने लगी है जिंदगी मेरी

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