Category: हिन्दी-उर्दू कविता

  • नदी को अकेले चलने का गम सताता है

    नदी को भी अकेले चलने का गम सताता है….
    इसलिए सागर से मिलकर वह खुशी में बदल जाता है ….

  • ek panchii ki daastan

    Panchii hu Main ek ,
    magar apne par ki mujhe khabar nahii…
    Khwaaishein puri krne ki tamanna jagii h bilkul nayi nayi,
    ki itnezaar krne ka mujhme baaki ab sabar nahii…
    मौत Ki neend Sulaane ko betaab hai duniya,
    magar mere liye khaali ek kabrr nahi…

  • dil se nikle do alfaaz

    Pyaar kya hota hai hum nhi jaante…
    Par zindgi ko apna hum bilkul hai maante…
    Zindgi me mile h itne gum ki eshaas nhi hota…
    Isliye ab koi pyaar kare humse ye vishwaas nhi hota…

  • “ऐतबार” #2Liner-11

    ღღ__मेरे मनाने से आखिर, क्यूँ लौट आएँगे वो भला;
    .
    वो छोड़ कर ही न जाते, अगर ऐतबार होता !!……..‪#‎अक्स‬

  • हमारे दिल की न सुनी उन्होने एक भी बार

    उनकी सुनते सुनते हमारी उम्र निकल गयी
    हमारे दिल की न सुनी उन्होने एक भी बार

  • ख्वाहिश है बहुत दिल की

    ख्वाहिश है बहुत दिल की
    आंखो में गम है बहुत
    ज़हन में है इक अजीब सी खामोशी
    होती है घुटन हरदम
    अब नहीं ख्वाहिशों का कत्ल करने को जी करता है
    खामोशी को चीरने को जी करता है
    इक बार मुस्कुराने की ख्वाहिश है

  • “ख़ामोशी” #2Liner-10

    ღღ___कल मेरी ख़ामोशी का उसकी यादों से, झगड़ा हो गया “साहब”;
    .
    और शोर इतना हुआ दिल में, कि नींद जागती ही रात भर !!…..#अक्स

  • kah bhi na pau

    kah bhe na pau,
    seh bhi na pau,
    yeh judayiaan

    teri nigahoon pe rakha hun,
    mera pharaar hua dil,
    kabhi dekha nahin tujhe,
    padh yeh aihsaas,
    rakha hain tere hi liye

    dhere se tu jo meri
    jindagi main ayi,
    pal bhar main gam khusiyon
    main chayi

    phir kyun chali gayi tu,
    kah pe na pau,
    seh bhi na pau,
    yeh judayiaan

  • “ख़ुशी” #2Liner-9

    ღღ___अच्छे-बुरे का हिसाब, हम नहीं रखते “साहब”
    .
    हम तो बस वो करते हैं, जिसमें तुमको ख़ुशी मिले !!…….‪#‎अक्स‬

  • बाकी सब ले गया मेरा ‘सब कुछ’

    कुछ हर्फ़, चंद अहसास और कुछ खारे से मोती
    यही सब बचा है मेरे पास,
    बाकी सब ले गया मेरा ‘सब कुछ’

  • तेरी कहानी का तू सिकंदर है।।

    जब चारों ओर कीचड़ दिखा, असमंजस तेरे अंदर है।
    नादान बला, आईना वो नहीं, तेरी रूह तो कमल सी सुंदर है।।

    दिखा हर तरफ एक धुआँ तुझे, कहीं आग लगी भयंकर है।
    जग छान लिया, कुछ मिला नहीं, मुई आग वो तेरे अंदर है।।

    मत बुझा उसे, वो भड़कने दे, जैसे आग का समुन्दर है।
    अपनी ज़िन्दगी बेफिक्र तू लिख, तेरी कहानी का तू सिकंदर है।।

    गर हुआ सामना क़ातिल से, और पड़ते दिल पे खंजर हैं।
    कोई रोक सके तो रोके ज़रा, तू भी क्या कम बवंडर है !!

  • अभी तो बचा है बदलाव का बीज बनना है

    कोई जमीन अभी भी है जहां मैं अभी तक गया नहीं हूं
    कोई आकाश बचा है अभी भी जहां मुझे पहुंचना है
    दो परतों के दरम्या मैं ठहरा हआ
    अभी तो बचा है बदलाव का बीज बनना…

  • “रातें” #2Liner-8

    ღღ___सवाल तो बे-आवाज़ रातों का है “साहब”;
    .
    दिन तो गुज़र ही जाता है, ज़रूरतों के शोर में !!…….‪#‎अक्स‬

  • हर कोई रूह से अनजान है

    किसी ने कहा था कभी कि मैं उड नहीं सकती
    अब जमाना मेरी उडान देख के हैरान है
    कभी लोग मेरी खामोशी की शिकायत करते थे
    अब मेरे बोलने से परेशान है
    आज तक समझ न सकी दुनिया मुझको
    हर कोई रूह से अनजान है…..

  • घुल गया उनका अक्स कुछ इस तरह अक्स में मेरे..

     

    घुल गया उनका अक्स कुछ इस तरह अक्स में मेरे

    आईने पर भी अब मुझे न एतबार रहा

     

    हमारी मोहब्बत का असर हुआ उन पर इस कदर

    निखर गयी ताबिश1-ए-हिना, न वो रंग ए रुख़्सार रहा

     

    हमारी मोहब्बत पर दिखाए मौसम ने ऐसे तेवर

    न वो बहार-ए-बारिश रही, न वो गुल-ए-गुलजार रहा

     

    भरी बज्म2 में हमने अपना दिल नीलाम कर दिया

    किस्मत थी हमारी कि वहां न कोई खरीददार रहा

     

    तनहाईयों में अब जीने को जी नहीं करता

    दिल को खामोश धडकनों के रूकने का इंतजार रहा

    1. ताबिश : चमक
    2. बज़्म= सभा
  • दर्द

    जब दर्द हुआ मेरे सीने में ….

    तो चुपके से दिल ने कहा …..

    ए – सुख़नवर …

    ” आज थोड़ी तकलीफ़ हो रही हैँ , जीने में “….

    पंकजोम ” प्रेम “

  • दो लाइनें दिल से

    _________

    लफ़्जों का सहारा बहुत लिया जिंदगीभर मैनें
    कभी कोई कंधा भी मिल जाता तो क्या बात होती

    – अंजली

    _________

  • “ऑंखें ” #2Liner-7

    ღღ___मेरी आँखों में जो क़ैद है “साहब”, वो समुन्दर ही है शायद;
    .
    कि सूखता भी नहीं, बहता भी नहीं, बस भरा ही रहता है !!…….‪#‎अक्स‬

  • घने अंधेरे भी बेहद जरुरी होते हैं….

    घने अंधेरे भी बेहद जरुरी होते हैं…..

    घने अंधेरे भी बेहद जरुरी होते हैं
    बहुत से काम उजाले में नहीं होते हैं।

    उडऩा चाहेंगे जो पत्ते, वे झड़ ही जायेंगे
    वे आंधियों के तो मोहताज नहीं होते हैं।

    कूदती-फांदती लड़की को सीढिय़ां तरसें
    छत पे जब कपड़े नहीं सूख रहे होते हैं।

    डूबती कश्तियों को देख कर भी हंस देंगे
    बच्चे कागज से यूं ही खेल रहे होते हैं।

    हादसा, जैसे सड़क पर कोई तमाशा हो
    लोग बस रुक के जरा देख रहे होते हैं।

    उसके जलने की सी उम्मीद लिये आंखों में
    बच्चे चूल्हे के आसपास पड़े रहते हैं।

    ऐसे आकर के नहीं घौंसला बना लेते
    परिन्दे उड़ते में घर देख रहे होते हैं।

    वो अपने जिस्म से हर रात निकल जाती है
    जानवर लाश को बस नौच रहे होते हैं।
     …सतीश कसेरा

  • “हासिल” #2Liner-7

    ღღ___हासिल-ए-इश्क़ के बारे में, सोंचता हूँ जब भी ;
    .
    तेरा मिलना याद आता है, तेरी बेरुखी नहीं !!………..‪#‎अक्स‬

  • humse kya puchte ho

    Humse kya puchte ho dard

    “Jnab”

    Humne to bs ishq kiya..

    Fir bdle me jo tha..

    Use sb “dard dard” keh rhe h.

  • “तजुर्बा” #2Liner-6

    ღღ__लोग कहते हैं, इश्क़ मत कर, आखिर इश्क़ से क्या होगा;
    .
    अरे कुछ हुआ तो ठीक है “साहब”, ना हुआ, तो तजुर्बा होगा !!……..‪#‎अक्स

  • सिसकता बचपन..

    तन्हा चल रहा था सड़क पर मैं,

    तब देख रहा था मुझकों, “बाशिंदा उसका” ,

    बड़ा मासूम सा वो,तबस्सुम कहीं खोई हुई,

    निगाहे तलबगार, और चेहरा उदास था उसका,

    जिस हाथ में “होनी थी कलम”, उसमे था?

    एक छोटा, टूटा सा कटोरा उसका,

    कहते है जिसे, नबाबों की उम्र,

    गरीबी की आग मै झुलसता, “ये बचपन था उसका”,

    हमउम्र यारों को मौज उड़ाते देख, “जी ललचा”,

    पर हर शौक का क़त्ल करता, “बेरहम मुक़द्दर था उसका”,

    उम्मीद भरी निगाहों से आया वो मेरे करीब,

    और मेरी चंद दौलत को पाकर,

     “लाखो दुआए देता सच्चा दिल था उसका”,

    ©अंकित आर नेमा.

  • meri zindgi se ek jang

    meri zindgi se ek jang c chiddi h..

    m muskura leti hu..

    or

    wo rulane pe adi h..

    meri zindgi se ek jang c chiddi h.

  • dard to bhut h seene me

    drd to bhut h is seene me…

    sbd km h jeewan me..

    fir b khin na khin se jood leti hu sbdo ko…

    smet leti hu drd ko..

    aaram mil jata h chand lmho ka..

    drd zinda ho jata h fir kuch sayron ka..

  • मौत हुयी हमारी हजार बार

     

    कौन कहता है

    आदमी मरता है बस एक बार

    वस्लो हिज़्र के खेल में

    मौत हुयी हमारी हजार बार

  • बेहद ही खूबसूरत है जिंदगी

    बेहद ही खूबसूरत है जिंदगी
    हर पल नयी, नूतन
    झिलमिलाती, चमकती हुई
    आंखों में ख्वाबों के पुल बनाती हुई
    कभी मुस्कुराती कभी रोती
    आसूओं में भी खुद का आईना दिखाती
    कभी चलती, कभी ठहरती
    बेहद ही खूबसूरत है जिंदगी

  • ღ दर्द ღ #2Liner-5

    ღღ__दर्द की चाशनी में, डुबोना भी पड़ता है “साहब”;
    .
    महज़ इल्म की शायरी में, मिठास नहीं आती !!……..‪#‎अक्स‬

    “इल्म = ज्ञान”

  • MOhabbat k khanjar se

    MOhabbat k khanjar se is kadar
    kta h wo shaks
    jisne judna b chaha to judd na paya…

     

  • Bhulae nhi bhulte ho tum

    Bhulae nhi bhulte ho tum
    ab
    tumhari trh tumhari yaade b ziddi h

     

  • ek dost ne muje ek dost gift ki

    ek dost ne muje ek dost gift ki
    boli
    jo tum muje na keh ski
    tu ise bta skegi…

     

  • ruko or thehro

    Ruko or thoda wakt bitao
    kuch apne sath
    kuch apno k sath..
  • log muje dfna rhe the

    log muje dfna rhe the
    or wo ankho me anshu la rhe the
    jo zindgi bhr brse mere hi ankho se aab wo uski
    ankho se behne me katra rhe the

     

  • Dard to sbka ek hi h

    Dard to sbka ek hi hota h
    byan krne ka trika anek hota h
    pehle mohabbat ki baris h
    fir judai ki ret h
    drd to sbka ek h
  • Sach kehte h ghr wale

    Sach kehte h ghr wale
    ki muje tanha rehne ki bimari ho gyi h
    ise dur krne k liye
    ek shaks ko dhundne ki taiyaari ho rhi h
  • Tu Daag na lga

    tu daag na lga
    mere jazbatto ko
    yhan aanch c rehne de
    is grm aanch me neend sukun bhri aane de
    bhuj jaegi ye aanch b dheere dheere
    jaise tdp k mar gye jazbaat mere
    tuje asar kya hoga..
    pathr b mohabbat se pighli h
    mgr tuj sa “Nagina” to bs toote hi ga.
    jb kbhi tuje khabar e “Kabar” hoga..
  • “किताब” #2Liner-3

    ღღ__हम वो किताब थे “साहब”, जो कभी पढ़े ही नहीं गए;
    .
    काश, हमपे भी नक़ाब-ए-जिल्द, अच्छी चढ़ी होती !!…….‪#‎अक्स‬

  • अब तो भूलने की कोशिशों की भी यादें बन गयी है

    कई दफ़ा की कोशिश भूल जाने की उन्हे
    अब तो भूलने की कोशिशों की भी
    यादें बन गयी है|

  • दिल की आवाज किसी कोने में दफ़न हो गयी

    मेरी कहानी अनकही ही रह गयी
    सितारों के उजालों में अंधेरे सी दब गयी
    दुनिया ने मेरी सिर्फ़ सूरत ही देखी
    दिल की आवाज किसी कोने में दफ़न हो गयी

  • करामात – ए – मय देखिये..

    जैसे ही शरीक हुए , महफ़िल – ए – मय में …..

    जाम पर जाम होंठो  से टकराते गए…..

    हर एक घूंट के साथ …..

    हम उनके साथ बिताये हुए , संगीन लम्हें भुलाते गए …..

    करामात – ए – मय देखिये , जितना भुलाया  था उन्हें…

    नशा उतरने के बाद वो उतना ही याद आते रहे…..

     

    पंकजोम ” प्रेम “

  • “क़त्ल” #2Liner-3

    ღღ__नींद आँखों तक आने में, अब डरती है साहब;
    .
    इक रात इनमें कुछ ख्वाबों का, क़त्ल हो गया था !!……..‪#‎अक्स‬

  • बारिश

    एक दफा बारिश का आनंद लेने की ठानी,
    यही कर दी हमने सबसे बड़ी नादानी |
    घर के बाहर ही कीचड का ढेर था ,
    और उस ढेर में फंसा मेरा पैर था |
    फिर भी मैंने हार ना मानी ,
    आगे बढ़ने की दिल में थी ठानी |
    शूकर पानी का आनंद ले रहे थे ,
    जाने कैसे विचार मेरे मन में बह रहे थे |
    आगे बढ़ा तो कार वाले ने नहला दिया ,
    मेरे कपड़ो पर कीचड ही कीचड फैला दिया |
    यह सब तो मेरे लिए आम था ,
    क्योंकि मैं एक आम इंसान था |
    सड़क पर ही तालाब की अनुभूति थी ,
    पर मेरी ख़ुशी भी उतनी ही झूठी थी |
    तभी पब्लिक चिल्लाई अबे ये कहाँ गया ,
    मैं एक पल में खुले मैनहोल में समा गया |
    व्यवस्था परखने की ललक मौत बन के आई थी ,
    पर हमारे व्यवस्थापकों की रूह भी न लजाई थी |
    खुद के बंगले के आगे की सड़क तो पक्की करा ली ,
    और यह कह दिखा के उन्होंने शहर की तरक्की करा ली |

  • बिछडने के ख्याल से हम आपसे मिलने से डरते है

    बिछडने के ख्याल से हम आपसे मिलने से डरते है

    मगर कैसे बताएं हम किस कदर तनहा मरते है

     

    देख न ले वो हमें, कहीं पुकार न ले

    उनकी गलियों से यूं गुज़रने से डरते है

     

    ताउम्र उन्हे चाहने के सिवा क्या किया है हमने

    अब मगर यूं बेहिसाब चाहने से डरते है

     

    कभी बारिश का इंतजार रहता था हमें सालभर

    मगर अब भीग जाने के ख्याल से ही डरते है

     

    दर्द को लिखना चाहते है मगर लफ़्ज साथ ही नही देते

    दिल ए दरिया से बाहर आने से आजकल वो मुखरते है

  • फूलों से कह दो चमन में

    फूलों से कह दो चमन में अब न यूँ महका करें ।
    खौफ से कांटों के अब सब काँटों का सिजदा करें ।

    चाँद किस से जाके अपनी दास्ताँ ए दिल कहे ,
    जब उजालों के ही आशिक चांदनी रुसवा करें ।

    प्यार देने वाले भी तो खा रहे धोखे यहाँ ,
    आदमी की जात का अब हम “भरोसा” क्या करें ।

    अपने दिल की रहगुज़र पर जो अकेले ही चले ,
    क्यूँ जमाने वाले उनके प्यार पर पहरा करें ।

    इतना ही काफी है “नीरज” दिल के रिश्तों के लिए,
    तुम हमें समझा करो और हम तुम्हे समझा करें ।

    नीरज मिश्रा

  • वाह! क्या बात है

    ****************************
    उतार दी है जिंदगी सारी कि सारी
    चंद लफ़्जों में
    काश कोई समझ ले कभी
    इसी इंतजार में है इक मुद्दत से
    कि कभी कोई मेरे लफ़्जों को गढ़ ले कभी|
    सीधे सपाट शब्दों में कह देता हूं
    अपनी आपबीती, दास्ता अपनी
    थोडी सी भीगी भीगी,थोडी सी सूखी
    लोग कहते है “वाह! क्या बात है”

    – Anirudh

    ******************************

  • ख़्वाब !! #2Liner-2

    ღღ__मेरे ख्वाबों की इक झलक, देखने की कोशिश तो करो कभी;
    .
    खुद-ब-खुद समझ जाओगे, तुमने क्या खोया है, इक मुझे खोकर !!…..‪#‎अक्स‬

  • एक जंजीर ढूंढता हूँ ..

    मुझे हमेशा तुम से बाँधें रखेँ ….

    इस क़ायनात में , ऐसी एक जंजीर ढूंढता हूँ …..

     

    दौलत से सब बन जाते है अमीर …

    लेकिन तुझमे मैं , वो दिल वाला अमीर ढूंढता हूँ …..

     

    बांवरा , मगर थोड़ा सयाना बन ….

    पार हो जाये तेरे दिल के….

    मैं तरकश में ,  वो मोहब्त का तीर ढूंढता हूँ ….

     

    पंकजोम ” प्रेम “

  • धीरे धीरे चलने से राहे बन जाती है

    धीरे धीरे चलने से राहे बन जाती है
    छोटी छोटी बातों से यादें बन जाती है
    जरा कोशिश तो कर के देख
    चंद लफ़्जो ओ अहसासों से नज्म बन जाती है|

  • अश्क बेपरवाह बहे जाते है

    अश्क बेपरवाह बहे जाते है

    एक कहानी है

    ये जो कहे जाते है

    कोई सुनता ही नहीं

    कोई ठहरता ही नहीं

    आते है लोग, चले जाते है

    अश्क बेपरवाह बहे जाते है

     

    आंखो से बहकर आसूं

    आ जाते है रूखसारो पर

    छोड कर खारी लकीरे,

    अपने अनकहे अहसासों की

    न जाने कहां गुम जो जाते है

    अश्क बेपरवाह बहे जाते है

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