दुनिया की सबसे पुरानी तेरी मेरी प्रीत मैं हूँ तेरा Pagal भैया तू है मेरी दीदी आप दुनिया के सबसे अच्छे दीदी ho I love you Pratibha didi
दुनिया की सबसे पुरानी तेरी मेरी प्रीत मैं हूँ तेरा Pagal भैया तू है मेरी दीदी आप दुनिया के सबसे अच्छे दीदी ho I love you Pratibha didi
मुझे है मुहब्बत बहन से अपने मेरे बहन जैसा कोई बहन दुनिया मे नही वो मुझे बहुत प्यार करती है दीदी मेरी दुनिया तेरे आंचल मे I love my Pratibha didi बहुत प्यार करते है […]
न कोई चेहरा न, कोई गगन चाहिए, मुझे तो बस अपनी बहन चाहिए। I love my Pratibha didi I love you very very very much infinite. I can’t express in words
न रिश्ता कोई हमसा, फिर भी वही लगाव है। वो है मेरी पागल बहना , येसा मेरा भाव हैl Rajneesh
भाई नहीं कोई उसका, मगर मुझे भाई कहकर बुलाती है। जब जब याद आती है मुझे उस बहन की, आँसू खुद बा खुद निकल आती है।। Rajjnneesh
रह जाता हूँ याद करके तस्वीर किसी की, है मेरी जैसी न है तक़दीर किसी की,, उलझन में भी आता है हमे इक समझ, उड़ा देती है होश मेरे तीर किसी की। Rajjnneesh
मेरे कानो को गीत सुनाता रहा कोई, था दूर मैं पास बुलाता रहा कोई,, नींद आती नहीं थी बग़ैर देखे उसे, हाथो मे लिए तस्वीर सुलाता रहा कोई। Rajjnneesh
हसी के बाद इक ग़म आया शहीद ये दोस्त का नमन आया
नदिया का पानी था मीठा, उसे खारा समझा, मेरे अन्दर के दर्द को उसने पारा समझा। नज़र न लगे इसलिए देखते नहीं थे, उसने तो मुझे गालियों वाला आवारा समझा।
हमे कोई अपना, तो कोई पराया समझा, हूँ मैं काली रात, मुझे खौफ का साया समझा।
पहले तुम्हें पाने को दिन-रात जागा करता था, आज तुम्हें पाकर भी कब से सोया नहीं हूँ मैं।। राही अंजाना
ये कहानी कुछ यूँ तय्यार हों गयीं की एक शख़्सियत बस उनपर फ़िदा हों गयीं ..! बस देखने से ही शूरवात हों गयीं फिर तो फिर आँखोवाली मुलाक़ात हों गयीं ..! दिन में भी मेरी […]
नहीं है कोई खबर मुझे खुद की क्यों तुम मेरा पता पूछते हो
उम्मीदों का ठेला लेकर रोज निकल जाता है कोई, कागज़ कोरे जेब में लेकर रोज निकल जाता है कोई।। कलम कीमती है कितनी ये भटक राह में जाना है, तभी बैग में स्याही लेकर रोज […]
ये दिल बहुत ज़िद्दी है मेरा! ग़मों की दौलत जमा करता है; चोट दिल पर हो या जिस्म पर हर ज़ख्म पे ग़ुमांं करता है।
बन्द कर लो बेशक ऑंखें मर्ज़ी तुम्हारी सही, तुम्हारी आँखों से मुतासिर आँखें हमारी सही।। राही अंजाना मुतासिर – प्रभावित
Kaabil-e-taareef h wo log… Jo meri buraayi mere aage krne ki himmat rkhte h…… Peeth piche buraayi krne walon… Tumhari soch or nazariye ki mujhe parwaah takk nahi……. #Sheetal
अब घर भी नहीं घर की तमन्ना भी नहीं है मुद्दत हुई सोचा था कि घर जाएँगे इक दिन
दिलों को सिलने वाला कारीगर ढूंढ निकाला, हार कर जितने वाला बाज़ीगर ढूंढ निकाला,
कब इश्क़ की इलायची जिंदगी में घुलती है जिंदग़ी में महक तभी ताउम्र ठहरती है
जब होगा दीदार रब का तो पूछुंगी मैं की तेरी इबादत मोहब्बत में इतनी अड़चने क्यों हैं
कोई क्या कहता है परवाह किसे है आंखे जब मुहब्बत से रोशन है तो रातो दिन की फिक्र किसे है
खूब निभाया था जिसने वो मुश्किल की बात थी मिला मुकद्दर मे जो मेरे meri औकात थी Rajjneesh
हमारे हर लम्हे की कोशिश तुम्हारी रूह तक जाने की थी मगर अफ़सोस आप ही इससे अनजाने थे
वो जो कमी थी मैं काबिल न हुआ, मेरे नसीब मे मुहब्बत कभी काबिल न हुआ। Rajjneesh
तेरे मुहब्बत मे न जाने कितने तराने थे, मै आशिक था जब तेरे फ़साने थे।
सो जाते हैं जो सोचकर, उन्हे ख्वाब नहीं मिलता। जिनकी परछाइ होती है मुहब्बत, उन्हे जवाब नहीं मिलता।
हुई थी खता हमसे, हमारा ही वो नजर था रखा था कदम जिस गली मे, वो गली ही उनका शहर था। By Rajjneesh
देखते हो उस शख्स को तुम, By जिसे तुम शाद करते हो। नाम मुहब्बत रहता है बस , Rajjneesh बाकी तुम बर्बाद करते हो।
बहती है हवा रातों को, तो कभी चमकता सितारा होता है। होती है मोहब्बत जिसे बार बार, उसे बेवफ़ाई का सहारा होता है। By Rajjneesh
फ़ुर्सत मिले तो पढ़ लिया करो 2 लाइने मेरे शायरी की, ये वो शायरी है जो कभी गलत नहीं होती।
चलाता रहता हूँ बैठ के साख पे अपनी mobile, गर्मी है साहब पसीने से भीगना नहीं चाहता। Shayar Rajjneesh kann
मुहब्बत है मुहब्बत का अंजाम बता दो, जिसे शायरी पसंद है वो अपना नाम बता दो। Shayar Rajjneesh kann
खाक हुआ मेरा, तेरे फसाने मे। मै पागल हुआ, तेरी तस्वीर बनाने मे। Shayar Rajjneesh kann
ज़मीन मुझको समझ कर खुद आसमान लिखा था उसने, मैं था परिंदा वगैर परवाला खुद को उड़ान लिखा था उसने, मौत को देखा है मैं करीब से अपने मुझको पुतला खुद में Jaan लिखा था […]
रोशनी दिन मे थी अंधेरी शाम लिखा था उसने, वाकिब मैं था जैसे खुद को अंजान लिखा था उसने, नज़रे पलट ली निगाहों से अपने मुझको मिट्टी खुद को शान लिखा था उसने, अरे बेवफा […]
कभी ना हो सके जिसका खात्मा, ऐसा इम्तिहान लिखा था उसने। वर्षों की दुश्मनी थी जैसे ऐसा, इंतेकाम लिखा था उसने।। अधूरी कहानी अधूरी मोहब्बत अधूरी जिंदगी में, मैं खुश हूँ खुद परेशान लिखा था […]
मंजिल मेरी वो मुझको श्मशान लिखा था उसने, है गरीब खुद ऐसा खानदान लिखा था उसने। रहता मै पक्के घरों में अब(पहले खपरैल मे रहते थे), झोपड़ी में है वो ऐसा मकान लिखा था उसने।। […]
हम साये थे तेरे मंजिल ए इश्क के, फितूर कोई लाया होगा। मुकाबिल न थे हम तेरे, तुम्हें तो आशिको ने बुलाया होगा। Shayar Rajjneesh kann. Please contact me for any show 6393465662
आशिक थे उसके, तो जिक्र और पहचान थी हमारी, उसकी खुशी में ही, तो jaan थी हमारी।
कोई साथी नहीं अपना, बेगाने लाख होते हैं , जो होते हैं दिलो के आग, वही तो राख होते हैं।
बहुत दिनों बाद सावन के द्वार आया पहले की तरह इसको अपना ही पाया सभी कवि लोगों को नमस्कार है सावन की आयी जो बहार है
और एक दिन दे दिये शब्द सारी व्यथाओं को लिख डाली एक कविता अपनी पहली कविता …
समंदर के किनारे बैठे कभी लहरों को गौर से देखा है एक दूसरे से होड़ लगाते हुए .. हर लहर तेज़ी से बढ़कर … कोई छोर छूने की पुरजोर कोशिश करती फेनिल सपनों के निशाँ […]
लफ्ज़ो को बढ़े करीने से सजाया है इस नज़्म में नूर ए इश्क़ को बहाया है कुछ समन लाकर रख दिये है इसके करीब अपने होठों से हमने इसे गाया है
कोई साथी नहीं अपना, बेगाने लाख होते हैं , जो होते हैं दिलो के आग, वही तो राख होते हैं।
मैं वो तस्वीर नहीं जो आइने से गुजर जाता हूँ खुश्बू भी नहीं जो लोगो मे बिखर जाता हूँ बिखरती हैं शामे दिन निकलने से पहले मै शायरी हूँ जो हर पन्ने पे उतर जाता […]
उनके होने से ही मौसम में बहार आ जाती है अहसास ए इश्क से रूह भी सिहर जाती है
नारी की दशा बहोत ही विचित्र सी है है देवी पर क्यों अपवित्र सी है ? है हर जीवन का स्रोत… पर जीते जी स्वयं मृत सी है
कसम से हर जुबाँ से दर्द मिला कभी नज़रों से वो दर्द मिला न जाने कब बदलेगा ये हालात नारी होने का हर दर्द मिला
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