ईर्ष्या करके मत जलो, तज दीजय अभिमान क्रोध लोभ से दूर मैं, हो जाऊं भगवान् 2 भाईचारा खेत में, चलिए मन हे आज सुख पाओगे बहुत तुम, और करोगे नाज
ईर्ष्या करके मत जलो, तज दीजय अभिमान क्रोध लोभ से दूर मैं, हो जाऊं भगवान् 2 भाईचारा खेत में, चलिए मन हे आज सुख पाओगे बहुत तुम, और करोगे नाज
वर्षा ऋतु में हो रही, गर्मी की वर्षात हरी डाल मत काटिए, ऋतु कहती है बात 2 हरी डाल पादप कहे, सब कुछ करता दान मुझसे कर ले दोस्ती, सुखी रहे इंसान
प्रकृति संतुलन बिगड़ता, आते बाढ़ अकाल संरक्षण पर्यावरण, कर लीजै तत्काल 2 दूषित पर्यावरण है, कहत पुकार पुकार जीवन की रक्षा करो, आदत मनुज सुधार
आया है संकट बड़ा, धैर्य धरे इंसान सच्चाई का सामना, करना है बलवान 2 धैर्य परीक्षा होत है, सदा ही आपत काल विचलित होना है नहीं, बाल न बांका हाल
सब धर्मो का सार है, दया, त्याग, उपकार मानव जो रक्षा करे, ये तीनो उपहार 2 सत्य, अहिंसा, ग्यान, है, आवश्यक अति जान अपना कर इनको सदा, बनते हैं इंसान
सत्य अहिंसा प्रेम है, भारत माता शान देते दोनों शक्ति है, फौजी और किसान 2 भारत ने दुनिया किया, सदा बड़ा उपकार शांति पक्ष लेता रहा, चले नहीं तलवार
विश्व शांति हो हो जाय अब, बुद्ध होय चहुँ ओर सुख की वर्षा होय तब,मन ज्यूँ वन का मोर 2 युद्ध नहीं समाधान है, समस्याओ का जान चाहे गीता भगवात, चाहे पढ़े कुरान
सूनी सूनी सड़क है, सूना है संसार पतझड़ जैसे पतन है, विलख रहे परिवार 2 घर में कैदी की तरह, जीवन रहे विताय कहर भयानक है बहुत, कुछ भी समझ न आय
अबला नहिं सबला हुई, घर से पंख पसार बैठी है सर्वोच्च पद, देख रही संसार 2 नारी से दुनिया चले, नारी है बलवान पूजा होती है जहां, रहते हैं भगवान्
आप लोगो से अनुरोध है की सावन मंच एक बार सभी कवियों का परिचय समारोह का आयोजन करे ताकि सभी सदस्य एक दुसरे के बारे में जान सके तथा साहित्य में कौन कितना योगदान दिया […]
बुरे दिनों में ही सदा, आए ईश्वर याद बांकी दिन करता नहीं, मन ईश्वर फरियाद 2 सदा बुरे दिन नहिं रहे, सुख की कीमत जान बुरे दिनों से जुड़ गया, है रिश्ता भगवान्
मत करियो अभिमान, रावण का जब नहिं रहा मन सुमिरो भगवान्, जीवन की मंजिल वही 2 दशरथ नंदन राम, मन मंदिर में आय कर आप दया के धाम, दूर करो चिन्ताए सब
जाओ ईश्वर द्वार पर, मांगो मत वरदान तन मन धन सब कुछ करो, प्रभु चरणों में दान, सभी कुछ देकर गाओ कर्ता है भगवान्, आप अभिमान मिटाओ कह पाठक कविराय, पारिस्थित जैसी पाओ भाव रखो […]
कब से है बेकार, कोरोना पंगु बनाया कुछ करिए सरकार, बहुत है मन घबराया भगवन के भी द्वार, किसीने बंद कराया व्याकुल है संसार, घरो मे आज समाया
अब जैसे असहाय, कभी नहीं पहले हुए कोई लेव बचाय, कोरोना यमराज से 2 उजड़ रहे परिवार, कहाँ गए भगवान् तुम रोता है संसार, वैग्यानिक विचलित दिखे
शरीर है कैद मन भटक रहा है कोरोना मानवता को गटक रहा है अस्पतालों में मानव शिर पटक रहा है गलियों मे पुलिस वाले कहां भटक रहा है काल ज्यूँ दरवाजे में लटक रहा है […]
मेघ सुधा जल बरसते, धरती शीतल होय मेढक गाते गीत औ, व्याकुलता दे खोय 2 काले काले मेघ तब, जल ले वसुधा पास गरज चमक मानो कहे, बुझाओ अपनी प्यास 3 जल स्रोतों को कर […]
माता भारत कथन है, मिलजुल रहना सीख दुश्मन हमले कर रहा, सुन ले शरहद चीख सुन ले शरहद चीख, देश के वीरो आओ गांधी भगत सुभाष, धरोहर सभी बचाओ कह पाठक कविराय, संघ का लेकर […]
अपना तो एक धर्म है, पर सबका सम्मान करने में सुख निहित है, ईश्वर एक समान ईश्वर एक समान, छोटा बड़ा न कहिए संविधान निरपेक्ष, सदा मर्यादा रहिए कह पाठक कविराय, रहा बापू का सपना […]
मानव ही दानव बने, औ बनता भगवान् मानव तन अनमोल है, मानवता है प्राण मानवता है प्राण, धार्मिक झगड़े छोडो ईश्वर सागर मान, नदी अवतार है जोडो कह पाठक कविराय, एक उन्माद है दानव ईर्ष्या […]
बेकारी उत्पन्न हो, जब जनसंख्या बुद्धि सीमित संसाधन नहीं, सबको सुख समृद्धि सबको सुख समृद्धि, स्ववलंबी बन जाओ कर दो लज्जा त्याग, नहीं बेकार कहाओ कह पाठक कविराय, जीत हो जाय तुम्हारी छोटा बड़ा न […]
बच्चे बूढ़े एक से, दोनों को दे प्यार दीपक हैं परिवार के, करते हैं उपकार करते हैं उपकार, जरूरत इन्हे तुम्हारी रखना सदा प्रसन्न, उठाओ जिम्मेदारी कह पाठक कविराय, ये दोनों दिल के सच्चे भूतकाल […]
छोटा हो परिवार अब, रखना इसका ध्यान जनसंख्या तलवार सी, निकल रही है म्यान निकल रही है म्यान, समस्या होगी भारी धरती का विस्तार, न होगी मारामारी कह पाठक कविराय, शपथ लो जल ले लोटा […]
दुनिया के सब देश मे, एटम बंब की होड़ शांति संधि सब शर्त को, पल में देती तोड़ पल में देती तोड़, बड़ा खतरा है भाई होगा दुनिया अंत, होड़ है ये दुख दाई कह […]
गर्मी ऋतु के बाद मे, आती है बरसात धरती उगती घास औ, तरु में आते पात तरु में आते पात, दामिनी चहुँ दिश चमके गिरती जल की बूँद, गगन में बादल दमके कह पाठक कविराय, […]
नारी के सब रूप को, वंदन बारंबार जो करती सत्कर्म से, दोनों कुल उजियार दोनों कुल उजियार, सती श्री वीणापाणी ममता करुणा मूर्ति, जगत की है कल्याणी कह पाठक कविराय, आरती करे तुम्हारी हरण करो […]
करो काम भगवान् का, रखकर हरपल ध्यान सब जीवों के ह्रदय में, बसते हैं भगवान् बसते हैं भगवान्, दिखावा नहीं जरूरी रक्षक बन ईमान, आवश्यकता कर पूरी कह पाठक कविराय, प्रेम से खाई भरो सब […]
बच्चे बूढ़े युवक सब, ले साधन संचार अपनो से हुए दूर औ, तस्वीरों से प्यार तस्वीरों से प्यार, बढ़ी संवाद हीनता मोबाइल मन लीन, ऊर्जा रहा छीनता कह पाठक कविराय, सभी उपकरण हैं अच्छे सीमित […]
घर की फुलवारी उजड़ गयी,सब गलियां सूनी हुई जांय, हंसी ठिठोली अपना सुनावे,सुनने को कान तरस है जाय, इस महामारी से बचने को एकै उपाय यही सुझाय, दो गज दूरी मास्क जरूरी, सब जन लेव […]
कोरोना महामारी आयी हाहाकार है दियो मचाय, अंतर्मन चित्कार करें अब,कैसी दहशत दियो फैलाय, ज़रा सी खांसी और जुकाम से,पल में अपने दूर हुइ जांय, बुखार चढ़े ज्यों सौ से ऊपर,घर में क्वारंटाइन हुई जांय, […]
नेताओं के बेटे क्यूं नहीं बनते सिपाही ? माना की राजनीति उन्होंने विरासत में पाई युवा नेता खुद को बताकर करते रहते तानाशाही यदि शहीद कहीं पर हो जाए कोई सैनिक ढाँढस बंधाने के नाम […]
कोरोना ने कर दिया, तन मन धन बर्बाद हे भगवान् करवाइए, अब इससे आजाद कोरोना से रुक गया, दुनिया सकल विकास दवा बनी जिसकी कमी, करती गयी हताश मास्क लगाकर कीजिए, कोरोना को दूर छह […]
एक तूफान सा छाया है चारों ओर तुम्हारी गलियों में । ऐ भ्रमर मत उलझ काँटों से खुशबू अभी कैद है कलियों में।।
क्या छिपा रही हो हाथ से, क्या देख रही हो आख से, लग रहा जुखाम हुई आपको जो नाक पोछ रही हो हाथ से, ——— ✍ऋषि कुमार ‘प्रभाकर’-
क्या छिपा रही हो हाथ से, क्या देख रही हो आख से, लग रहा जुखाम हुई आपको जो नाक पोछ रही हो हाथ से, ——— ✍ऋषि कुमार ‘प्रभाकर’-
व्यंग्य —————— लड़कीया खुबसूरत होती है, लड़के गरीब अमीर होते है, लड़कीयो की संपत्ति सुंदरता है लड़कों की खूबसूरती पैसा है, इसलिए विचार करो लड़कों तुम धन कमाओ इतना कमाओ रोज तुम, सपना चौधरी को […]
काव्य की शोभा बढ़ाने को सावन ने लिया नया अवतार, हमेशा नई ऊंचाइयां छूता रहे हमारा सावन परिवार, ह्र्दय से करती अभिनंदन,सबका व्यक्त करती आभार, धन्यवाद है बड़ा छोटा सा शब्द,एकता का अभिवादन करो स्वीकार, […]
मत कर होड़ा होड़ी बीच सड़क तू चलने में। तेरा जीवन बेशकीमती फिर ना आना पलने में।।
होड़ा होड़ी आज सड़क पर , कुत्तों को दूध पिलाने की। कचड़े खाती गाय बेचारी हाय, कैसी सोच जमाने की ।। राहु केतू के चक्कर में क्यों लक्ष्मी को ठुकराते हो । दूध दही घी […]
मैं मजदूरी करता हूँ समझो पेट के ख़ातिर। पर खून पसीने का मेरे मोल कहाँ सेठ के खातिर।।
आय न सके बढ़ाय पर, मंहगाई की मार जीवन जीना कठिन है सुन लीजै सरकार सुन लीजै सरकार, कैसे परिवार चलाए गर्दन कटे गरीब, नहीं तलवार चलाए कह पाठक कविराय, बढ़ेगी यूँ महगाई पिछड़ जाएंगे […]
खाने सोने में रहे, जीवन लोग गंवाय उन्नति देखी और की, सिर धुन धुन पछिताय सिर धुन धुन पछिताय, काम कुछ करिए ऎसा जगत करे सम्मान और पाए भी पैसा कह पाठक कविराय, कर्म बिन […]
देश एकता अखंडता, जोड़े सूत्र समाज जो तोडे़गा वह नहीं, हो सकता युवराज हो सकता युवराज , पांच वर्षों तक छाए लेना है मतदान, देश दंगा करवाए कहते हैं कविराय, चलेगा अब ना ऎसा जोड़े […]
*आर्यन सिंह ” शनि भैया ” के जीवन की एक खास घटना * जब वह अपने प्रिय वेदांताचार्य स्वामी आधार चैतन्य से मिले .* आर्यन के बचपन की वो घटना जब वे 12 साल की […]
उम्मीद का दिया जलता रहे मेरे देश तू फूलता फलता रहे सबके दिल मे प्रेम की गंगा बहे रुके ना तेरे पैर यूं ही चलता रहे हर क्षेत्र में विजयी हो हो जाए तू अमर […]
हर गली में खड़ा है कोरोना कहर। मौत की आग में जल रहा है शहर।। राम तेरा सहारा जो मुझको मिले। हर घर में खुशी के फूल खिलते रहे।।
हर गली में खड़ा है कोरोना कसर। मौत की आग में जल रहा है शहर।। राम तेरा सहारा जो मुझको मिले। हर घर में खुशी के फूल खिलते रहे।।
धरती के चारो ओर सन्नाटा छाया हुआ है सावधान सम्हालकार कोरोना आया हुआ है घर में भी लगाते रहे मास्क साइनएटाजर मुह दिखाने लायक नहीं अब मुह छिपाया हुआ है
रब की बनाई हवा है कितनी अनमोल। बिन आक्सीजन प्राण गया और पता चला है मोल।।
एक आँधी सी छाई चहुदिश बन दुश्मन द्वार कोरोना है। लाशें रो रही आज सड़क पर पीड़ित धरती का हर कोना है ।। विनयचंद एकांत में ले चल बीच भीड़ में क्योंकर रोना है। राम […]
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