Category: Other

  • हर किसी के बस का नहीं

    हर किसी के बस का नहीं

    हर एक इंसान के चेहरे को पढ़ लेना, हर किसी के बस की बात नहीं।
    निज स्वार्थ से ही फुर्सत नहीं मिलती, ठहर जाता मन स्वयं पर ही।
    स्वरचित एवं मौलिक
    –✍️ एकता गुप्ता*काव्या*

  • मां शैलपुत्री (मनहरण घनाक्षरी)

    चैत्र नवराते आए, खुशियां अपार लाए,
    नवरुप अंबे मां के, जयकार कीजिए।

    प्रथम दिवस आए, शैलपुत्री मन भाए,
    कैलाशवासिनी अंबे, दर्शन दे दीजिए।

    कमल त्रिशूल धारी,करे वृषभ सवारी,
    श्रद्धा सुमन अर्पित, मां स्वीकार कीजिए।

    मोक्षदानी वरदानी,भवप्रीता महारानी,
    देविआदि शक्तिरुपा, कृपादृष्टि कीजिए।

    ✍️… अमिता

  • Kya aaj bhi woh bachpan baaki hai?

    Kya aaj bhi wahi bachpan baaki hai?

    Bachpan ki yaadon ko samet paana thoda mushkil hoga, itni yaadon ko sahej ke rakhna thoda mushkil hoga, hain zehen mein aaj bhi yaadein taaza unhein bhoolpaana thoda mushkil hoga .Hai zindagi kya bas yaadon ka safar usmein bachpan ko phir doodh paana thoda mushkil hoga.

    Gujarte hain aaj apne mohalle se toh poochta hai woh shehtoot ka ped ki kahan ho tum tarasti hain nighaaein tumhein dekhne ko ki aao chado aur todo humein ki aaj hum milte hain bazaron mein mart mein lagaate hain mol log humaara par jab todke khaate the tun toh lagte the tum apne se humein kya aaj bhi woh rishta baccho ka us shehtoot ke ped se baaki hai ?

    Kya aaj bhi woh beparwaahi apnapan baaki hai?

    Maarte the beparwah challang baarish ke pani mein banaate the mitte ke ghar kya aaj bhi woh bachpan ki shararat baaki hai?

    Woh door door tak jaana ramleela ke maidan mein ramleela dekhne,woh kuch paiso ki barf wala gola khaa ke bhi khushi se ji bhar aana kya woh khushi ab bhi baaki hai?

    woh dusshera woh diwali ka milna woh meethi Eid par doston ke ghar jaakar sheer kurma khaana kya woh apnapan aaj bhi baaki hai?

    Bachaate the chawaaniyan apno ko tohfe dene ke liye mahino mahino tab jebe choti dil bade the poocho zamaane se kya aaj bhi wahi apnapan baaki hai?

    Sab dhul sa gaya hai zamaane ki daud mein aaj baccho se poocho kya bachpan baaki hai?

  • मेरी 8 शब्दों की कहानी

    मेरी 8 शब्दों की कहानी

    मैं वफा, कल्पना, बुद्धि
    और प्रेम की पराकाष्ठा..

  • ईश्वर का साथ हो तो

    ईश्वर का साथ हो तो
    खुद पर विश्वास हो तो
    हर काम आसान हो जाता है
    मंजिल भी मिलती है और
    सफर भी कट जाता है

  • लक्ष्य

    लक्ष्य को पाने के लिए
    अर्जुन सी निगाह होनी चाहिये
    मछली चाहे जितनी बड़ी ही क्यों ना हो
    सिर्फ आँख पर निगाह होनी चाहिए

  • दिल का सौदा

    दिल का सौदा कभी करो ना
    इसी बहाने से कुछ वक्त दो ना

  • पल

    हम जीते हैं जिन पलों में वो लम्हे कैद नहीं हो पाते

  • रामराज्य का शंखनाद -( एक अद्भुत जीवन्त कविता )

    जिस दिन हिंदुत्व का परचम उस अम्बर पर लहराएगा
    उस दिन भारत की धरती पर श्री राम राज्य आ जाएगा ।।

    जिस दिन बदला लिया जाएगा चन्दन की कुर्बानी का
    हर नारी में रूप दिखेगा झांसी वाली रानी का.
    रंग भंग हो जाएगा जब जयचंदो की मेहमानी का
    इस पल डंका बज जाएगा हिंदुत्व की अगवानी का.

    भारत का बच्चा बच्चा जिस दिन पुरुषार्थ दिखाएगा

    उस दिन भारत की धरती पर श्री राम राज्य आ जाएगा ।।

    सत्ता के गलियारों में जब नहीं होंगे भ्रष्टाचारी
    संविधान से सजे प्रशासन लेकर सब जिम्मेदारी.
    रहें सजग सब नौकरपेशा जितने अफसर सरकारी
    रिश्वत का जब नाम मिटेगा फैलेगी ईमानदारी.

    बिना खौफ के न्यायालय जब अपना न्याय सुनाएगा

    उस दिन भारत की धरती पर श्री राम राज्य आ जाएगा ।।

    जातिपात का भेद मिटे मानवता को अपना लो तुम
    लड़ना है तो लड़ो सत्य पर अपना धर्म बचा लो तुम.
    राम कृष्ण राणा प्रताप का वह स्वाभिमान दिखा दो तुम
    बिखर रहा है देश तुम्हारा अब अधिकार जमा लो तुम.

    धरती का रज रज कण कण जब भगवा युक्त दिखाएगा
    उस दिन भारत की धरती पर श्री राम राज्य आ जाएगा ।।

    धर्म के ठेकेदार जहां पर नहीं पाखण्ड मचाएंगे
    अन्धविश्वास आडम्बर हिंसा अवगुण दूर भगाएंगे.
    रूढ़िवादी मानसिकता से जिस दिन आजादी पाएंगे
    हरजन जब हरिजन बनकर ईश्वर की कथा को गाएंगे.

    तो विष्णु का बुद्ध रूप फिर धरती पर प्रकटाएगा

    उस दिन भारत की धरती पर श्री राम राज्य आ जाएगा ।।

    अभी देख लो जातिवाद का असर भयंकर बोल रहा
    इसीलिए ध्वज हिंदुत्व का कमजोरी में डोल रहा.
    हर मानव मानवता को ही तलवारों पर तौल रहा
    उन्हें खदेड़ो जो इस समाज में जहर जाती का घोल रहा.

    जब धरती का हर सनातनी मिलकर एकजुट हो पाएगा

    उस दिन भारत की धरती पर श्री राम राज्य आ जाएगा ।।

    अंदर से कमजोर हुआ जो हिन्दू धर्म हमारा जो
    रक्तपात हो रहा बहुत अब कहां गया भाईचारा वो ?
    हम बैठे उन्हें मित्र समझ पर है हर दल हत्यारा वो
    जहां भी मिले अकेला हिन्दू मारा गया बेचारा वो .

    आने वाली पीढ़ी को सच्चा इतिहास सुनाएगा
    उस दिन भारत की धरती पर श्री राम राज्य आ जाएगा ।।

    कहां खो गया जमीर तुम्हारा तुम्हे शर्म नहीं आती है
    आओ बचाओ पुत्र हमें भारत माता चिल्लाती है.
    संकट में है सत्य सनातन व्यथा साफ दिखलाती है
    फिर शूरों की संतानों क्यों नहीं हथियार उठाती हैं ?

    जब हिन्दू आगे बढ़कर दुश्मन का गर्व मिटाएगा
    उस दिन भारत की धरती पर श्री राम राज्य आ जाएगा ।।

    रचनाकार –
    नए भारत का उद्घोष करने वाले क्रांतिकारी , भागवताचार्य , हिन्दी रत्न , युवा नेतृत्व –
    आर्यपुत्र आर्यन जी महाराज
    फोन – 9720299285

  • पति

    बहुत गुस्सा भर जाता है अन्दर
    जब मेरी माँ बोलती हैं
    पति मारे भी तो क्या:
    पत्नी को उस पर हाथ उठाना नहीं चाहिए।
    मेरे पति तो मुझे कितना मारते थे
    क्या कभी साथ छोड़ा !
    पति की मार खा कर भी उसके साथ रहना चाहिए।

    😡😡😡😡😡😡😡

  • गिरना

    आज कुछ अजीब होते देखा।
    उसको उसकी ही नजरों में गिरते देखा।

  • वो जो गैर निकले

    दर्द में मेरी जीभ मेरी नहीं होती,‌।फिर तुम तो कहीं बाहर से आये मेरी जिन्दगी में,।न सोचना तुम्हें सोचती हूँ ,मैं,तुम्हें माथे पर रखा ,खुद को बहुत कोशती हूँ ,मैं,,।।कविता पेटशाली 💔💔💔💔💔💔💔

  • *आओ फिर से वृक्ष लगाएं हम*

    विधा– नारा लेखन*
    🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱
    वसुधा को बनाएं फिर से रत्नगर्भा हम
    आओ फिर से वृक्ष लगाएं हम।
    🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱
    सिर्फ एक दिन ही वृक्ष लगाने से न पूरा होगा कर्तव्य
    पर्यावरण और हरित धरा बचाने को लुटाना है निज सर्वस्व
    🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱
    एक अकेले से कुछ न होगा
    हमें चाहिए सबका साथ
    धरती मां की रक्षा को
    मिलकर बढ़ाओ सब अपने हाथ
    🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱
    स्वरचित एवं मौलिक
    –✍️ एकता गुप्ता ‘काव्या’

  • कला की परख साहित्य कार ही करते हैं -डाॅ हरिसिंह पाल

    बस्सी पठाना पंजाब के पंडित विनय शास्त्री ‘ विनयचंद ‘ को काव्य रत्न और गोल्डेन बुक आॅफ वल्ड रेकार्ड से सम्मानित करते हुए डाॅ हरिसिंह पाल ने कहा कि एक साहित्यकार ब्रह्माजी होते हैं जो साहित्य सृजन करते हैं और सही मायने में कला एवं कलाकार की सच्ची परख एक साहित्यकार ही करते हैं। ये ग्रंथ तो अदभुत है ही पं विनय शास्त्री विनयचंद द्वारा रचित काव्य भारत रत्न विश्व विख्यात सितारवादक और संगीतकार पंडित रविशंकर के जीवन चरित्र पर आधारित हृदयस्पर्शी और सराहनीय है। जिनमें उनके जीवन के हर पहलुओं का संक्षिप्त वर्णन करते हुए बताया कि एक कलाकार की आत्मा सदैव उनकी कृति(स्वर लहरी) के रूप में जगत में व्याप्त रहते हैं। इसका अध्ययन करना हमारे लिए सौभाग्यपूर्ण और ज्ञानवर्द्धक साबित होगा ।

  • काव्य रत्न सम्मान से सम्मानित हुए विनय शास्त्री

    अन्तर्राष्ट्रीय शब्द सृजन संस्थान गाजियावाद के तत्वावधान में आयोजित भारत रत्न विजेताओं के जीवन पर आधारित कालजयी ग्रंथ भारत के भारत -रत्न के भव्य लोकार्पण समारोह नई दिल्ली के हिन्दी भवन में विगत 15 मई रविवार को सम्पन्न हुआ। संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय डाॅ राजीव पाण्डेयजी और महासचिव श्री ओंकारनाथ त्रिपाठी जी के अथक परिश्रम के परिणामस्वरुप देश- विदेश के 301 कवियों के माध्यम से भारत रत्न विषय पर स्वरचित काव्य का आनलाईन पाठ सिर्फ बारह घंटे करा कर उनमें से चुनिन्दा 215 रचनाओं को ग्रंथ रुप में प्रकाशित करना गौरव की बात है। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्व विख्यात साहित्यकार पद्मश्री डाॅ श्याम सिंह शशि, विशिष्ट अतिथि सुदर्शन चैनल के मालिक श्री सुरेश चौहान ,मुख्य अतिथि नागरी लिपि के अध्यक्ष डाॅ हरिसिंह पाल, हिन्दी अकादमी के संरक्षक इंदिरा मोहन जी एवं संस्कृत के प्रकांड विद्वान डाॅ जीतराम भट्ट ने ग्रंथ को अद्भुत साहित्य और ऐतिहासिक धरोहर कहकर सम्मानित किया।
    इस संदर्भ में बस्सी पठाना के पंडित विनय शास्त्री को काव्य रत्न सम्मान से सम्मानित करते हुए डाॅ हरिसिंह पाल ने साहित्यकार को ब्रह्माजी कहकर अलंकृत किया। इसके साथ ही गोल्डेन बुक आॅफ वल्ड रिकार्ड से भी सम्मानित किए गए।

  • विचार – ३

    (3)
    दूसरों के घाव देखने वाले
    कभी अपने घाव नहीं भर पाते।।1।।

    वर्तमान हि सब – कुछ हैं
    भूत वासना का घर
    और भविष्य चिन्ता का जंगम हैं ।।2।।

    जो आंतरिक दुश्मन से लड़ते हैं
    उसके बाहरी दोस्त नहीं होते ।।3।।

    समझदारी अनुभव से आती हैं
    और अनुभव ज़िन्दग़ी सिखलाती हैं ।।4।।

    भूत, वर्तमान के गाल पर एक शानदार तमाचा हैं
    अत: भूत कि याद, भविष्य के लिए खतरा हैं ।।5।।

    📜✍️ विकास कुमार

  • विचार – ३

    (3)
    दूसरों के घाव देखने वाले
    कभी अपने घाव नहीं भर पाते।।1।।

    वर्तमान हि सब – कुछ हैं
    भूत वासना का घर
    और भविष्य चिन्ता का जंगम हैं ।।2।।

    जो आंतरिक दुश्मन से लड़ते हैं
    उसके बाहरी दोस्त नहीं होते ।।3।।

    समझदारी अनुभव से आती हैं
    और अनुभव ज़िन्दग़ी सिखलाती हैं ।।4।।

    भूत, वर्तमान के गाल पर एक शानदार तमाचा हैं
    अत: भूत कि याद, भविष्य के लिए खतरा हैं ।।5।।

    📜✍️ विकास कुमार

  • विचार – २

    (2)
    लिखने मात्र से कुछ न होगा
    उसपे चलना तुम्हारी कवित्व को निखारेगा।।1।।

    सारी कृतियां समय व प्रस्तिथि कि देन हैं
    लोग अहम् – भाव के कारण अपना समझ बैठे हैं ।।2।।

    एक से अनेक को संसार कहते हैं
    और एक में लय होना प्रलय ।।3।।

    अच्छाई की शुरुआत
    बुराई का अंत हैं
    ये इतना आसान नहीं
    पर इतना कठिन भी नहीं हैं ।।4।।

    तुम जैसे रहोगे
    तुम्हें वैसे हि लोग मिलेंगे ।।5।।

    📜✍️ विकास कुमार

  • विचार

    कीचड में ही कमल खिलता हैं,
    लेकिन ऊपर नीचे नहीं ..1..

    बिषयाशक्त पुरुष खुश रह नहीं सकता
    और निराशक्त को दु:ख छू नहीं सकता ..2..

    इंद्रियों का रुख , यदि सात्विक हैं।
    तो पूरी कि पूरी जिंदगी सुधरेगी
    नहीं तो कुछ भी नहीं ।।३।।

    इंद्रियों का दुरुपयोग इंसान को हैवान बना डालता हैं।
    अत: मनो-निग्रह बहुत – बहुत जरुरी हैं ।।4।।

    खुद को जानने में
    यदि पूरी कि पूरी ज़िंदगी भी लग रही हैं तो कम हैं।
    क्यूँकि खुद के अलावा
    यहाँ कुछ और जानने नहीं आये हो ।।5।।
    📜✍️ विकास कुमार

  • पृथ्वी दिवस

    पृथ्वी दिवस

    आप सभी को पृथ्वी दिवस की हार्दिक बधाई एवं अनन्त मंगल शुभकामनाएं 🙏🙏🌹🌹

  • *मां चंद्रघंटा*(मनहरण घनाक्षरी)

    स्वर्ण कांति आभा धारी, करे सिंह की सवारी,
    घंटाकार अर्धचंद्र,मां का ध्यान कीजिए।

    सुख शांति दिव्य शक्ति, चंद्रघंटा मां की भक्ति,
    मणिचूर चक्र मन, मां आन विराजिए।

    तीन नेत्र दस हाथ, गदा बाण चक्र साथ,
    विराट स्वरूप मैया, दर्शन दे दीजिए।

    कष्ट निवारण करो, भय शोक दूर करो,
    बुद्धि विद्या दान दो मां, पाप नष्ट कीजिए।

    स्वरचित मौलिक रचना
    ✍️… अमिता गुप्ता
    कानपुर, उत्तर प्रदेश

  • ना समझ संतान

    कहानी-ना समझ संतान
    पैतृक संपत्ति से कुशल किसान रहता था, अनेक पशुओं तथा कृषि यंत्रों के साथ एक सुनहरे भवन का मालिक था, किसान के दो पुत्र प्रवेश तथा आवेश, दोनों पुत्रों की शादी हो गई थी, प्रवेश के पास चार संतान राजेश, राकेश, सुधा, पूनम, तथा पत्नी का नाम सीमा था, छोटे पुत्र की पत्नी का नाम गरिमा था और बच्चों का नाम आकाश और प्रकाश था,
    किसान के दोनों पुत्र अशिक्षित ,दुष्ट ,अहंकारी व नशेड़ी थें,
    किसान के दोनों बच्चों के बच्चों की परवरिश व शिक्षा से संबंधित देखरेख किसान के हाथ में था, किसान का सपना था धन इकट्ठा करके अपने इन छोटे बच्चों को अच्छी शिक्षा देना है , किसान का यह सपना धरा का धरा रह गया ,वृद्धा अवस्था में जाने के कारण किसान खेती तथा अन्य काम करने में असमर्थ होने लगा ,किसान के पुत्र घर का पैसा शराब जुआ गलत संगति में खर्च करना शुरू किए, कुछ दिन बाद पैसा खत्म होना शुरू हुआ ,प्रवेश की हालत शराब के कारण बिगड़ गयी, इसी बीच किसान की मृत्यु हो जाती है, दोनों पुत्र पूर्ण रूप से मनमानी हो गयें खेती गिरवी तथा सारे पशु बिक गए ,इसी बीच प्रवेश की हालत शराब के कारण बहुत बिगड़ गई, हॉस्पिटल में भर्ती हुआ, महंगे इलाज के कारण कृषि यंत्र तथा बचीं खेती भी गिरवी हो गयी, प्रवेश का परिवार पूर्ण रूप से गरीब बेबस लाचार मजदूर परिवार बन गया, घर के लोग दाने दाने के लिए मोहताज हो गए, छोटे भाई की पत्नी गरिमा ने परिवार में अलगाव की शुरुआत किया ,वह अपना परिवार लेकर मायके चली गई ,अब राजेश पढ़ने की उम्र में मजदूरी करने लगा, मां और बेटी भी मजदूरी करने लगीं ,समय अपने गति पर बढ़ता रहा, पिता तथा परिवार की हालत में थोड़ा सुधार हुआ ,कुछ समय बाद डॉक्टर ने प्रवेश को पूर्ण रूप से स्वस्थ बताकर अस्पताल से छुट्टी दे दिया, राजेश के सहयोग मां सीमा ने मनिहारन का काम शुरू किया, गांव-गांव ,घर-घर जाकर सामान बेचना शुरू की, बहन सुधा ने ब्यूटी पार्लर तथा सिलाई कढ़ाई बुनाई का कोर्स करना शुरू की ,राजेश बहुत पहले ही मजदूरी का काम छोड़ करके मोटर मैकेनिक का काम सीख लिया था ,इसी बीच ईश्वर ने खुशियों से खिलते हुए परिवार में एक हादसे को प्रकट किया ,राजेश की सबसे छोटी बहन पूनम एक्सीडेंट में खत्म हो जाती है, एक बार पुनः इस परिवार में शोक की लहर दौड़ आती है, परिवार इस सदमे से निकल कर पुनः अपने उसी मार्ग पर बढ़ता रहा ,अब पिता प्रवेश भी घर के सामने चाय पान की छोटी दुकान चलाना शुरु किया, देखते देखते पुनः पूरा परिवार विकास की ओर बढ़ने लगा ,छोटे पुत्र राकेश का दाखिला अंग्रेजी स्कूल में हुआ ,(जो किसान सपना था) सुधा कोर्स खत्म करने के बाद घर पर ही दुकान डाल कर अच्छा पैसा कमाना शुरू की, अब सभी के सहयोग से बड़ा भाई राजेश भी अपनी खुद की दुकान डाल कर अपना व्यवसाय छोटे स्तर पर शुरू किया, देखते देखते पूरा परिवार फिर से सुख शांति तथा विकास की ओर बढ़ चला, पैतृक संपत्ति जो गिरवी थी खेती तथा अन्य उसे छुड़ाया गया,प्रवेश की पत्नी को सरकारी आवास मिलता है और पैसा घर से लगा करके एक सुंदर सा घर बनवाते हैं, और सरकारी बैंक से लोन लेकर ट्रेक्टर तथा इत्यादि खेती के लिए मशीन खरीद लिये,प्रवेश अपनी पुरानी गलती को याद करके अपने भाई को समझाने, उसके ससुराल गया तथा वापस लाकर दोनों मिलकर पुनः खेती तथा खुद का व्यवसाय करना शुरू किए,
    सारांश-आज प्रवेश का परिवार पूर्ण रूप से स्वस्थ ,स्वच्छ ,सुंदर ,सामाजिक-आर्थिक शैक्षिक रूप से विकास की ओर अग्रसर व खुशहाल है.
    ———–
    नाम- ऋषि कुमार प्रभाकर
    पता- खजुरी खुर्द कोरांव
    प्रयागराज उत्तर प्रदेश

  • बाढ़

    बाढ़

    कहानी-बाढ़
    ————–
    सूरज निकलने वाला ही था कि बारिश रिमझिम शुरू हो गई| दोपहर होते-होते बारिश विकराल रूप धारण कर ली चारों तरफ बादल में गड़गड़ाहट बिजलीओं की लपटें, ऐसा प्रतीत होने लगा आज बादल ही फट जाएंगा, कोई भी व्यक्ति घर से बाहर न निकल सका, इतने में रेडियो पर फरमान सुनाया गया की आज अधिक बारिश होने के कारण पुराने बांध का पानी खोला जा रहा है ,सभी क्षेत्रवासी उचित सुरक्षित जगह पहुंचने का कष्ट करें, मुगरी चाची यह सुनकर रोने लगी उसकी पूरी छत टपक रही थी, इतने में दीवाल का पिछला हिस्सा ढह गया मुगरी चाची और रोने लगी ,एक बेसहारा विधवा संतान विहीन आखिर अब क्या करें कौन सहारा बने यही सोच कर बहुत रो रही है, देखते देखते नदी नाले नहर सड़क के ऊपर गली मोहल्ले में पानी घुसने लगा ,अब चाची जाए तो कहां जाए, चाची की आवाज सुन रास्ते में जा रही भीड़ से एक नवयुवक (राशिद) डंडे के सहारे मदद करने के लिए मुगरी चाची के पास आया ,चाची रो मत चलो चलते हैं ,हां लल्ला… भगवान तुझे बहुत बड़ा बनाएं ,चाची अपने पास एक झोला भी लिया उसमें अपना चश्मा अपने पति की तस्वीर तथा कुछ गहने, पानी का बहाव अधिक होने के कारण चाची फिसल कर सभल जाती है लेकिन झोला हाथ से छूट जाता है ,झोला पकड़ने के लिए राशिद बिना कुछ सोचे आगे बढ़ गया रास्ते का सही अनुमान ना होने से बगल के नाले में गिर जाता है ,और झोला पकड़ कर बहने लगता है, काफी दूर चला गया यह देखकर चाची उसे चोर चोर कहने लगती है ,इतने में बाढ़ राहत दल चाची को सरकारी टेंट मे ले जाते हैं, राशिद बह करके दूसरे गाँव पहुंचा मल्लाहओ की मदद से राशिद को बचाया गया, उसके हाथ में झोला देखकर पुलिस प्रशासन को खबर दिया गया, प्रशासन आकर के राशिद के प्राथमिक स्वास्थ्य उपचार के लिए सरकारी प्राथमिक स्वास्थ्य टेंट में उपचार के लिए ले जाते हैं ,चाची के दिए बयान रिपोर्ट के आधार पर पुलिस राशिद को पकड़ने में सफल हुई ,चाची को बुलाया जाता है पहचान के लिए राशिद का बयान सुनकर के चाची शर्मिंदगी महसूस करती है, राशिद की बहादुरी सुन करके चाची के आंखों में आंसू आ जाता है ,चाची के चेहरे पर मुस्कुराहट आ जाती है ,चाची के पति की तस्वीर जो चाची को मिल जाती है, चाची सबके सामने राशिद को अपना दत्तक पुत्र मानती है सब कुछ ठीक हो जाने पर चाची सारी संपत्ति अपने राशिद पुत्र के नाम करके उसी के संग रहने का फैसला सुनाती है ,राशिद भी बिना मां बाप का था ,वह भी किसी के यहां नौकरी किया करता था, अब राशिद के खुशी का ठिकाना ना रहा ,उसे मां के रूप में जो चाची मिल गयी , चाची भी अत्यंत खुश है की बाढ़ के आड़ में उसे साहसी बहादुर इमानदार एक पुत्र मिल गया चाची पुलिस प्रशासन को धन्यवाद देती है,
    — ऋषि कुमार ‘प्रभाकर’
    कोरांव प्रयागराज

  • शिक्षा ग्रहण करो, संत ज्ञानेश्वर भीमराव बनो

    शिक्षा ग्रहण करो, संत ज्ञानेश्वर भीमराव बनो

    शिक्षा ग्रहण करो,संत ज्ञानेश्वर भीमराव बनों
    —————————————————-
    यदि मन में अभिलाषा है किसी विशेष कार्य, वस्तु ,लक्ष्य, पद प्रतिष्ठा के लिए और धरातल पर कोई ठोस कदम नहीं, तब स्वाभाविक है कि आने वाले समय में आपको असफलता का स्वाद चखना पढ़ेगा। अभिलाषा पूर्ण करने के लिए उचित प्रबंधन, समय ,श्रम, विश्वास, जैसे अनेक हथियारों का निवेश व संग्रह करना होगा अन्यथा अंत में निराशा ही हाथ लगेगी । जैसे यदि आपकी इच्छा विद्यार्थी जीवन में उच्च पद की नौकरी सरकारी या प्राइवेट प्राप्त करना है, तो आप का प्रथम कर्तव्य होगा धैर्य ,समझ, गहराई से लगन पूर्वक अध्ययन करना।अच्छे अंकों के साथ परीक्षा उत्तीर्ण करें, आपके अंक आपको विश्वास और सफलता के लिए ऊर्जा प्रदान करेंगे । इस उम्र में आप को सभी पहलुओं से पहले अपने माता-पिता व गुरु का आज्ञाकारी पुत्र व शिष्य बनकर कार्य करना चाहिए| संस्कार ,शिक्षा , कहीं से भी मिले ग्रहण करो, बड़ों का उपदेश सुनो,अपनी वाणी पर नियंत्रण रखो और सकारात्मक चिंतन में प्रगतिशील रहो ।दया, धर्म परोपकार आदि बातों को सीखना समझना चाहिए| इसके साथ विद्यार्थी जीवन में अंधा प्रेम, अमर्यादित शब्द, द्वेषपूर्ण कार्य-भाव, अर्धमरुपी बीज तन मन में ना बोये।नफरत ,जातिवाद,धर्मवाद,क्षेत्रवाद ,रंग,लिंग, आदि अवगुण जो मानवता के खिलाफ है या इसी के आड़ में नया मंच ,राजनैतिक समाजिक संगठन अपना स्वार्थ सिद्ध कर रहीं हैं | उनसे दूरी बनाना परम आवश्यक है।
    आज समाज में नयी बुराइयां मानव को दानव बनाने में अग्रसर है| इससे भी सावधान सचेत रहना है, प्रेम युद्ध नहीं सिखाता, संगत बुरा मार्ग नहीं दिखाता, ज्ञान मन को कुंठित नहीं करता, शब्द सर को झुकने नहीं देते ।यदि आपने तन-मन,कर्म-वचन, पर नियंत्रण और सकारात्मकता का भाव पाल रहे हो तो अपका भविष्य उत्तम है । यह आपको महान क्रांतिकारी दार्शनिक बनने की ओर अग्रसर करेगा | कम समय में ही आप एक अच्छी ऊंचाई को छू सकते हो । ऐसी बातों का संग्रह करना व किताबों को पढ़ना है, जो दुख-सुख,जीवन-मरण, सत्य-असत्य ,धर्म-अधर्म, स्वर्ग-नर्क, पाप-पून्य, शुभ-अशुभ,आदि बातों का खंडन कर सकें,मानवीय गुणों में वृद्धि व पाखंड अंधविश्वास पर कुठाराघात करते हुए विज्ञान को बढ़ावा दे सकें।
    ज्ञान उम्र का मोहताज नहीं है ।प्रतिभा किसी विशेष जाति में निश्चित नहीं है ।जो भी चाहे कम उम्र में शिक्षा के द्वारा उत्तम आदर्श ,पद, प्रतिष्ठा प्राप्त कर सकता है व समाज में उपयोगी बन सकता है । विज्ञान सत्य है -धर्म गलत है ,भगवान असत्य है-प्रकृति सत्य है।संसार को नया दर्शन,इतिहास,भूगोल के लिए मार्ग बना सकते हो, संपूर्ण जगत के लिए एक नया जीवन दर्शन खड़ा कर सकते हो। नए पथ, पंथ ,धर्म-समाज का निर्माण व परिभाषा बदल सकते हो और गढ़ सकते हो, धर्म ग्रंथों को कटघरे में खड़ा करके सवाल कर सकते हो, सभी धर्म ग्रंथ का गहन अध्ययन करके एक नए पंथ का निर्माण कर सकते हो। इन सब बातों के लिए प्रथम आवश्यक शर्त है, एकाग्र चित्त, हसमुंख, जिज्ञासु बनकर,अंबेडकर, विवेकानंद, स्वामी दयानंद सरस्वती, संत ज्ञानेश्वर ,एकलव्य के भातीं शिक्षा ग्रहण करना, ब्रहमचर्य जीवन व्यतीत करना ,एक मन, एक लक्ष्य, और एक जीवन शैली के साथ,मानवता भरे विचारों का पालन,अध्ययन तथा खोज के लिए प्रयत्नशील रहना आवश्यक है ।शिक्षा मनुष्य की प्रकृति ,प्रवृत्ति तथा संपूर्ण ब्रह्मांड से ,ज्ञान-विज्ञान से, ध्यान-धर्म से, योग-संयोग से ,आदि का शिक्षा दीदार कराने के लिए तत्पर हो जाएगी।शिक्षा आपको अल्प समय में मानव से महामानव बनाने में सहयोग देती है । शिक्षा, शब्द -भेदी बाण के समान विजय दिलाने में कार्य करेगी,
    बाबा साहेब भीम राव अम्बेडकर जी ने कहा- शिक्षा वह शेरनी का दुध है जो पियेगा वह दहाड़ेगा, अब फैसला आप सबके हाथ में है ।
    —————
    ऋषि कुमार ‘प्रभाकर’
    पता-खजुरी खुर्द कोरांव प्रयागराज उत्तर प्रदेश
    संपर्क-6391617530

  • दे ज्ञान हमें मा भारती

    दे ज्ञान हमें मा भारती
    भर दे झोली इतनी सी हैं आरजू .
    काया का ना हमें ध्यान
    इतना हो माँ हमपे मेहरबान .
    पूर्व संस्कार सब मिटा दें मातेश्वरी
    दे ज्ञान हमें माँ भारती ।।१।।
    ✍️ विकास कुमार

  • कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन पर कविता

    कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन पर कविता

    आगाज हिन्दुत्व का
    6 दिसम्बर 2021 : आने वाला महान शौर्य दिवस
    कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन

    कृष्ण लला हम आएंगे अपना वचन निभाएंगे
    जहां पर जन्म हुआ माधव का मन्दिर वहीं बनाएंगे।।

    पहला पन्ना पूर्ण हो गया नगर अयोध्या धाम का
    चारों तरफ बजाया डंका रामचन्द्र के नाम का
    फुरसत में मत बैठो हिंदुओं वक्त नही आराम का
    अबकी बार बजेगा डंका यदुनन्दन घनश्याम का

    क्षीण पड़ी जो धर्म धरोहर फिर से उसे सजाएंगे
    जहां पर जन्म हुआ माधव का मन्दिर वहीं बनाएंगे।।

    जाग उठो हे वीर हिंदुओ अब भीषण हुंकार भरो
    सीने मे उत्साह रखो और हाथों मे हथियार धरो
    शंख बजाओ महाविजय का वीरों का आवाहन करो
    यही वक्त है सही वक्त है महासमर मे निकल चलो

    ताकत सत्य सनातन की हम दुनिया को दिखलाएंगे
    जहां पर जन्म हुआ माधव का मन्दिर वहीं बनाएंगे।।

    बहुत हुआ अपमान धर्म का नही सहन अब करना है
    कफन बांध लेंगे सिर पर अब गद्दारों से लड़ना है
    मोह त्यागकर सत्ता का अब धर्म की राह पकड़ना है
    फिर भरकर हुंकार साथियों कर्तव्य मार्ग पर अड़ना है

    दुश्मन के सीने पर चढ़कर हम भगवा ध्वज लहराएंगे
    जहां पर जन्म हुआ माधव का मन्दिर वहीं बनाएंगे।।

    प्रस्तुति –
    आर्यपुत्र आर्यन सिंह “कथावाचक व लेखक
    ( युवा प्रदेश प्रमुख कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति दल )
    Official- 9720299285

  • प्यार की नाव

    अभी तो प्यार की नाव में बैठे ही थे पर क्या करें,
    मेरे माझी ने ही नाव में छंद कर दिया ।

  • भरोसा

    एक भरोसा ही मागा था,
    भरोसे ने भरोसे से भरोसा तोड़ दिया।।

  • सुविचार-7

    कभी-कभी लगता है हम दुनिया के सबसे बदकिस्मत इन्सान हैं
    पर°°
    जब अपने हाथ पैरों को सही सलामत देखते हैं तो अमीरी का एहसास होता है।।

    By pragya shukla

  • सुविचार-6

    कवि ब्रह्मा का दूसरा रूप होता है क्योंकि दोनों में सृजन करने की अपार क्षमता होती है…

  • सुविचार-5

    संसार में ईश्वर के बाद एक कवि ही है जो हथेली पर सूरज उगा सकता है और
    पथ्थर पिघला सकता है
    ये काम साधारण मानव की सामर्थ्य से बाहर है…

  • सुविचार-4

    विपक्ष हो या आलोचक
    दोनों हमारी कमियों को उजागर करते हैं
    ————————-
    अतः सरकार हो या कवि उसे स्वयं को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।

  • #सुविचार-2

    सुविचार:-2
    आज यकीन आ ही गया हमें-
    टूटे दिल और अधूरे सपनों से,
    वो बचपन के खिलौने काफी अच्छे थे।।

  • #सुविचार

    सुविचार:-

    दूसरों पर विश्वास जरा सोंच कर करना चाहिए,
    क्योंकि कभी कभी हमारी जिह्वा को
    हमारे ही दन्त काट बैठते हैं।

  • कुमाऊनी कविता: धन्न्न पैसा त्यर कमाल

    धन्न्न पैसा त्यर कमाल
    कस्स्ये बतूं त्यर हाल
    जों ले जांछे वों बबाल
    धन्न्न पैसा त्यर कमाल

    जब ऊंछे तू देश बटी
    तू भले क्वे जिन भैटे
    त्वै के हाल्छया सब अंग्वाल
    धन्न्न पैसा त्यर कमाल

    त्वै है ठुला झुकी रूछ्या
    बाट-घाटा में रुकी रूछ्या
    त्यर सामान कान में ल्याल
    धन्न्न पैसा त्यर कमाल

    घमंड में तू चूर रुंछे
    आफ जैसो क्वे ना देखछै
    त्यर बौल्याट कुछै साल
    धन्न्न पैसा त्यर कमाल

    जै लै त्वैके धर्मे ल कमा
    तू लै हुंछै वांई जमा
    उ घरा का बडिया हाल
    धन्न्न पैसा त्यर कमाल

  • गरमी

    ये गरमी कैसी जेठ की ,
    चिल चिल करती धूप।
    ठंढी मीठी छांव में,
    क्या परजा क्या भूप।।

  • मै माँ हूँ, मैं बेहतर से जानती हूँ

    1. मै माँ हूँ
    मैं बेहतर से जानती हूँ
    मेरा नाम अनु मेहता हूं, मैं भी के माँ हूँ मेरी बेटी भी 15 महीने की है….
    कोविड -19 (कोरोना वायरस) महामारी ने पूरी दुनिया में हाहाकार मचा रखा है। भारत कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर से ज़बरदस्त तरीक़े से जूझ रहा है फिर, अचानक कोरोना की दूसरी लहर ने पांव पसारना शुरू कर दिया।
    मन में भी इतना डर बैठ गया है, मेरे मन में भी नकारात्मक (negative) विचारों ने घेर रखा है। मैं रोज की तरह अपने ऑफिस से रूम जाती हूँ । अपने मुँह-हाथों को धो कर दरवाजे से अपनी बेटी Itika को आवाज देती हूँ। Itika भी नंगे पांव दौड़ते हुए कमरे से बाहर निकलती है, माँ-माँ करते हुए, उसको अपनी गोद में लिए अपने कमरे में ले जाती हूँ। थोड़ी देर मां – बेटी आराम करते है। 18.00 बजे उठकर हम रात का खाना बनाते थे। फिर थोड़ा सा पड़ोसियों के पास बात-चीत कर लेते और थोड़ा बच्चों के साथ भी खेल लेते थे। क्या करे बच्चों के साथ बच्चे बन जाते है।
    20.00 बजे खाना खाया और 21.00 बजे सो गए। मां और बेटी दोनों गहरी नींद में सो रही थीं। अचानक किसी ने बहुत तेजी से दरवाज़ा खटखटाया। हड़बड़ी जल्दबाजी में मैंने भी दरवाजा खोला के लिए भागी और मेरे पैर से पानी का जग भी गिर गया। जैसे दरवाजा खोला तो देखा निकिता की माँ निकिता को अपनी गोद में लिए बहुत जोर -2 से रोने लगी और बोली देखो मेरी बेटी को क्या हो गया है। जैसे ही उसने मुझे अपनी बेटी को गोद में दिया, मैं खुद बहुत डर गई थी। मैंने देखा 19 महीने की बेटी उसके मुंह में सफेद झाग जैसा निकल रहा था…….
    मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा था मै क्या करू, कहा जाऊँ, किस से मदद मांगू, Over All कुछ समझ नहीं आ रहा था। दिमाग कुछ काम नहीं कर रहा था। फिर मुझे जो सही लगा वही किया सब से पहले बेटी को पानी पिलाया। फिर दूध और थोड़े से ब्रेड खिलाये और बच्ची की माँ के पास उसकी बेटी वापस दे दी। खाना खिलाने के बाद उसने उल्टी कर दी। मैं उसकी माँ को बोला आप अपना दुध पिलाओ। गाड़ी का प्रबंधन करती हूँ। उतनी ही देर में बेटी के पापा भी आ गए। घर के पास एक नजदीक कंपनी में काम करते है। उन्होंने कंपनी की गाड़ी से बेटी को हॉस्पिटल लेकर गए। 10 -15 मिनट में हम लोग हॉस्पिटल भी आ गए। डॉक्टर ने बेटी का चेकअप किया। बेटी को बहुत तेज़ बुखार (103 डिग्री) था। डॉक्टर ने ठंडे पानी की पट्टी रखने को कहा………… आधे घंटे तक नर्स के साथ ठंडे पानी की पट्टी रखने में भी मै भी मदद करवा रही थी। बेटी का तापमान कम होते ही डॉक्टर ने दवा दे दी।
    20-25 मिनट के बाद छुट्टी दे दी। गई हम लोग रात के 2.00 बजे कमरे में पहुंचे। अगली सुबह डॉक्टर ने चेकउप के लिए बुलाया था। फिर से डॉक्टर के पास लेकर गए और उसका ब्लड टेस्ट, कोरोना टेस्ट करवाया। जब तक रिपोर्ट नहीं आयी तब तक चिंता बहुत सता रही थी। 2-3 घंटे बाद रिपोर्ट आई। ब्लड टेस्ट की रिपोर्ट में ब्लड इंफेक्शन और कोरोना की रिपोर्ट में कोरोना निगेटिव। रिपोर्ट को देख कर थोडी दिल को एक राहत मिली। डॉक्टर ने बेटी का पूरा ख्याल रखने कि सलाह दी…………
    बेटी की माँ ने बेटी की अच्छे से ध्यानपूर्वक अच्छी देखभाल की। अब बेटी बिल्कुल ठीक है।
    आप सभी से अनुरोध है कि अपना और अपने परिवार का पूरा ख्याल रखें।
    घर पर रहें और स्वच्छ रहें….
    Stay home and stay clean

  • मेरा प्यार, बुजुर्ग का ज्ञान

    मेरा प्यार, बुजुर्ग का ज्ञान
    —————-
    किसी बुजुर्ग ने,
    एक सवाल पूछा,
    जिसका जबाब-
    उम्र भर ना दे पाऊगा,

    बेटा! ऐसा कौन सा
    ज्ञान हासिल किया है,
    जो आज उसकी
    बेटी ले के भागा है,

    कैसे जबाब दू प्यार हैं
    बुजुर्ग ने सवाल पूछा, ज्ञान का हैं,
    ———
    कवि-ऋषि कुमार ‘प्रभाकर’-

  • यथार्थ =दोहे

    बिन मतलब कोई नहीं, करता देखो बात
    अहंकार का संग है, बड़ी भयानक रात
    2
    बूढो से कोई नहीं, करता देखो बात
    बात बात में हो रहे, कैसे कैसे घात
    3
    दुख सुख अब बांटे कहाँ, व्यस्त हुए सब लोग
    अपनी राग अलापने, का लगा भारी रोग

  • जीवन से जुड़े “दोहे”

    (१)
    कारज ऐसे कीजिए,सबके मन को भाए।
    संतुष्टि मन को मिले,जन्म सफल हो जाए।।
    ‌ (२)
    कार्य सफल हो जाएगा, रट ले हरि का नाम।
    हरि की कृपा जो मिल जाए, बन जाए सब काम।।
    (३)
    कल पर कार्य न टालिये, समय बीतता जाए।
    तज दो आलस तन मन से, सुयश मान बढ़ जाए।।

  • देश का सम्मान

    जीवन से भी कीमती, मात्रभूमि का मान
    आपस मे लडिए नहीं, मारो मिल शैतान
    2
    जाति पंथ औ लिंग की, मत करिए परवाह
    करते प्रेम प्रचार चल, एक जुटता की राह

  • राजनीति

    राजनीति एक खेल है, जिसमे शकुनी चाल
    सर्वाधिक प्रचलित हुई, करती मालामाल
    2
    राजनीति एक पर्दा है, जो ले पाप छिपाए
    आंधी आती सांच की, चेहरा देय दिखाय

  • समरसता

    जाति धर्म के भेद को, आओ जाए भूल
    डिठौना एक मां भारती, ललाट भारत धूल
    2
    दुनिया भारत देश से, समरसता का सार
    सीख सीख पहुंचा रही, इंसानो के द्वार

  • बदलता समय

    बदलता है समय किसी को सताए नहीं
    ईर्ष्या द्वेष के बीज उगाए नहीं
    मिट्टी में मिल जाते हैं महल
    उजाड़ कर किसी का खुद को बसाए नहीं

  • मिट्टी प्रदूषण

    धरती में अपशिष्ट का, मिलना घातक जान
    कूड़ा कचड़ा प्लास्टिक, फेको कूड़ा दान
    2
    मिट्टी प्रदूषण से सुनो, बीमारी कई होय
    जैविक खेती से करे रक्षा अब सब कोय

  • ध्वनि प्रदूषण

    कहते दुश्मन कान के, जग आवांछित शोर
    जोर जोर से होत है, सुनिए चारो ओर
    2
    सोना औ सुनना हुआ बड़ा कठिन अब काम
    वाहन और मशीन की ध्वनि को नहीं आराम

  • वायु प्रदूषण

    वायु प्रदूषण बढ रहा, सुरसा मुख विकराल
    हम नहिं है हनुमान सा, दुख ज्यूँ मुख हो व्याल
    2
    वायु देव को भी किया, मानव ने बीमार
    हॉस्पिटल में ले रहे, ऑक्सिजन लगातार

  • कब जाओगे

    मंदिर मस्जिद बंद है, पिंजडे में इंसान
    गलिया लथपथ खून से, घूम रहा शैतान
    2
    आए हैं तो जाएगे, राजा रंक फकीर
    कोरोना कब जाएगा, मिटा रहा तकदीर

  • लाचारी

    जीवन है अनमोल पर, बीत रहा बेकार
    धंधा सब चौपट हुए, मानव है लाचार
    2
    रोजी रोटी बंद है, बहुत दिनो से जान
    अब हर वर्ग तबाह है, औ मजदूर किसान

  • माया

    सुंदर सपना की तरह, देखा है संसार
    आँख खुली कुछ भी नहीं, लीला अपरम्पार
    2
    दुख आकर कहते रहे, ईश्वर है सरकार
    मत बनना तुम नास्तिक, लेते हैं अवतार

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