Category: Other

  • गुम

    गुम

    थांडी हवा और बैंड आंखें खोई हुई थी मैं या फिर मदहोश हीं कह लो
    खुली खिड़की से मैं बहार की दुनिया को निहार रही थी,
    ये सोच रही थी कि कैसे बहार की दुनिया इतनी तेज चल रही है, हमसे बहुत आगे निकल चुके है, पर मैं नहीं निकल पाई,
    शायद मैं बाकियों जितनी जीतनी तेज नहीं हूं या फिर शायद मुझे तेज जाना है था मुझे यहीं रहना था।
    मैं कहीं जाना है न ही चाहती थीं,
    आखिरकार क्या फायदा तेज चलने से जब तुम खुद को दर्द दो, क्या फायदा बाकियों जैसा बनने का जब तुम खुद को खुद की नज़र से देख ना पाओ क्या फायदा उस कमियाबी का जब तुम खुश ना रह पाओ,
    कमियाब होने का मतलब ये तो नहीं कि तुम इस भीड़ में अपना अस्तित्व भूल जाओ।।
    इस चकाचौड़ दुनिया की यह रीत सी है अब तो यहां सब खो जाते है , पता नही खोकर वो कैसे जी पाते हैं उनकी अपनी इक्षाए उनका क्या??
    क्यों हम वो करे जो सब कर रहे है हम वो भी कर सकते हैं जो हम चाहते हैं और खुश रह सकते हैं।।
    शायद मैं ज्यादा हीं सोच रही शायद लोग इस उलझन में हीं खुश है ।
    तभी मेरा सर खिड़की से टकराया और पास के बर्थ पे बैठी मेरी दादी मां ने कहां
    “कहां खोई हो बेटा तब से देख रही हूं तुम्हे”
    मैंने कहा,”कुछ नही दादी बस यूं हीं को गई थी ”

    अदिति

  • बारिश: मन की रिमझिम और ख़्वाबों का गांव

    बारिश की बूंदों की खुशबू, बहती हर बूंद में छुपी कहानी। जब मौसम बन जाता है रिमझिम, मन की धड़कनें बदल जाती हैं जवानी।

    बारिश की ताल पे झूमती है ज़िंदगी, जीने की ख्वाहिशें जगमगाती हैं आसमानी। पानी की बूंदें लहराती हैं नदियों में, प्रकृति के गीत बजाती हैं जल तरंगी।

    छाती में बसी है बारिश की चाह, चुपके से आती है खिलखिलाहट। प्यार की मिठास बरसाती है फुहारों में, दिल को भर देती है ये मुस्कानी।

    मिट्टी की खुशबू घुलती है हवाओं में, प्रकृति के रंग ढलते हैं आसमानों में। प्यार और अपनापन की बहार छाती है इस बारिश में, मन को भीगोने की चाहत होती है मन की मानी।

    बारिश की रिमझिम सुनकर दिल खो जाता है, हर बूंद में खो जाती है ज़िंदगी की कहानी। इस बारिश की फुहारों में बसता है ख़्वाबों का गांव, ज़िंदगी की खुशियों से भर जाती हैं मनमानी।

  • इंतजार के पल – उम्मीद की किरण संजोए इंतजार के पल हर लम्हा याद में गुजारे इंतजार के पल कभी हसाए तो कभी रुला ही डाले मुस्किल से बीतते है, ये इंतजार के पल। बेचैन कर के ही माने, इंतजार के पल सुकून को दूर भगाए ,इंतजार के पल पहेली सा मन में जगह बनाए उलझन में डाल देते , ये इंतजार के पल। विश्वास से रिश्ता बनाते,इंतजार के पल हर वक्त बस है आजमाते ,इंतजार के पल एक उम्र संग बहा ले जाए ख्वाबों का जहां बसाए ,ये इंतजार के पल।

    इंतजार के पल –
    उम्मीद की किरण संजोए इंतजार के पल
    हर लम्हा याद में गुजारे इंतजार के पल
    कभी हसाए तो कभी रुला ही डाले
    मुस्किल से बीतते है, ये इंतजार के पल।
    बेचैन कर के ही माने, इंतजार के पल
    सुकून को दूर भगाए ,इंतजार के पल
    पहेली सा मन में जगह बनाए
    उलझन में डाल देते , ये इंतजार के पल।
    विश्वास से रिश्ता बनाते,इंतजार के पल
    हर वक्त बस है आजमाते ,इंतजार के पल
    एक उम्र संग बहा ले जाए
    ख्वाबों का जहां बसाए ,ये इंतजार के पल।

  • Pyaar ki shadi

    Meri best friend,
    Meri ex girlfriend,
    Meri zindagi,
    Sab thi wo,
    Uski ajj shadi hai,
    Kya wo khush hai mere bina?
    Par mere saath bhi kaha thi?
    Merko abb tak job nahi lagi thi,
    usko gharwala life partner chahiye tha,
    Me kabhi na kabhi ghar le hi leta,
    Lekin tab tak uske pass time nahi tha,
    Uska honewala pati Doctor tha,
    Bs Ghar hi nahi, uske pass badi car bhi thi,
    Me bhagwan se sirf uske liye dua mangta tha roz
    ” Woh khush rahe” aur
    ” Wo jo chahe use wo mile”
    Aur dono ajj saach horaha,
    Mere saath ye toh bhagwan se mene kabhi shart nahi rakhi,
    Mere bina hi sahi,
    Khush rahe wo.

  • Ek Pharmacy ki dukan

    एक फार्मेसी की दुकान में कई दवाएं होती हैं। कुछ दवाएं हमें ठीक करती हैं, कुछ हमें जिंदा रखती हैं और कुछ हमें मार देती हैं। हम अक्सर कहते हैं कि एक अस्पताल ने बहुत से लोगों और रोगियों को अलग-अलग भावनाओं के साथ देखा है। कोई जीवन के लिए भीख मांगता है, कोई दर्द रहित मृत्यु के लिए, और कोई अपने प्रियजनों के लिए प्रार्थना करता है। लेकिन सच कहूं तो फार्मेसी की दुकान में और भी ऐसे लोग देखे गए हैं जिनकी आंखें आशा और भय से भरी हुई हैं, यह प्रार्थना करते हुए कि जो दवाएं वे खरीदते हैं वे उनके प्रियजनों को ठीक कर दें या उन्हें जीवित रखें। ऋषि को फार्मासिस्ट के रूप में अपनी नौकरी से नफरत थी क्योंकि उन्हें यह कभी दिलचस्प नहीं लगा। वह कभी भी अन्य चीजों में अच्छा नहीं था इसलिए अपने पिता की तरह वह भी फार्मासिस्ट बन गया। वह अपने जीवन से नफरत करता था क्योंकि वह अपने आस-पास जो कुछ भी हो रहा था उससे खुश नहीं था।

    तेज धूप के साथ यह बहुत गर्म दिन था। उसने अपनी दुकान खोली और ग्राहकों के आने का इंतजार करने लगा। उनकी दुकान के सामने एक ऑडी आई। उसने सोचा कि जिसके पास यह है वह कितना भाग्यशाली है और धनवान होना हमेशा भाग्यशाली होता है। एक लंबा लड़का जो बिसवां दशा में था, कार से बाहर आया। वह बहुत बड़ा था और भूरे बालों के साथ अच्छी तरह से तैयार था और उसमें अमीरी का आभास था।

    लेकिन उसकी आंखें नम थीं। लड़का अपनी दुकान पर आया और उसे एक पर्ची दी जिसमें कुछ दवाएं थीं। दवाओं ने स्पष्ट रूप से स्थिति का वर्णन किया कि कोई जल्द ही दर्दनाक बीमारी से मरने वाला था, दवाएं सिर्फ समर्थन के लिए दी गई थीं। फार्मासिस्ट ने उस लड़के से पूछा कि यह किसके लिए है और बहुत उदास और धीमी आवाज में उसने जवाब दिया कि यह उसकी माँ के लिए है। फार्मासिस्ट के देते ही लड़का दवा लेकर अपनी कार के अंदर भाग गया। फार्मासिस्ट को लड़के के लिए बुरा लगा और उसे खुशी हुई कि उसकी माँ घर पर जीवित और स्वस्थ थी। चूंकि अपनी मां को मरते हुए देखना बहुत दुखद और दुखद था।

    सबकी अपनी-अपनी लड़ाइयाँ हैं। अभी जो आपके पास है उसी में खुश रहो। हर कोई जो बाहर से खुश दिखता है, अपने जीवन में वास्तव में खुश नहीं होता है। हर अमीर आदमी खुश नहीं होता और न ही सभी गरीब दुखी होते हैं। जो आपके पास है उसे खुशी से स्वीकार करें।

  • Kismat ka chand

    Raat aayi,
    Uski baat aayi,
    Kismat se ladte ladte,
    Khudse har gaye,
    Chand me uska chehra dikhraha tha,
    Merko dekhe Chand muskurara tha,
    Kal shaadi thi uski,
    Chand ko maine uski waadon ke baare me bataya,
    Batate batate toh me khud has padi,
    Kitni bewakoof thi me,
    Pyaar me har kar chand se bad bad kar rahi thi,
    Jab mere ankho se nayi baarish ki paani girne lagi, tab chand ne mere se kaha

    ” Ro mat tune taaron se pyaar kiya, shayad tere kismat me chand ho”

  • Situationship

    Situationships,
    Merko pyaar hai ,
    Ky usse bhi hai?
    Thande thande hawaon me,
    Highway ke chotisi dukan me
    Garam garam chai pite pite,
    Humare jism bhi garam honeke liye taras rahe the,
    Uski muskurahat dekh kar usse hasate rehneka mera man kar raha tha,
    Chai pite pite joh baatien ho rahi thi ,
    Shyd woh humne kabhi kisise na ki ho,
    Usko hooton ki chamak,
    Uski bhoore ankhe,
    Uske kaale baal,
    Sab masum se zyda pyaare lag rahe the,
    Saath 2 saal hogaye the,
    Casual tha,
    Kyuki usse master’s ke liye abroad Jana tha,
    Usne chai baju me rakhte hue kaha
    ‘ Mujhe kuch kehna hai’
    ‘ Kya’
    ‘ I finally got admission in Canada and I’m leaving within two days’
    Dil Tut Gaya,
    Merko pata tha yeh din ayega,
    Mera pyaar batadu?
    Par kya woh rukega?
    Nahi me rok nahi sakti,
    Par batake bhi agar rukha nahi toh ,
    Dil Tut jayega,
    Woh apne sapne batraha tha,
    Aur merko mere sapne tute hue dikh Gaye,
    Nahi bataya Maine bs,
    Nahi batyungi,
    Usse meri pasandita adhuri khwaish rehnedungi,
    Puri zindagi!

    Chai dukhan ke radio me gana bajne laga
    ” Dil ko tumse pyaar hua , pahili bar hua, tumse pyaar hua”

  • Wo Sunday ka din

    Sunday tha,
    Bistar se uthneka kisko man rehta hai?
    Garam chai pineka aur purane gane suneka din rehta hai,
    Papa ne haaton me thaili pakda di,
    Barish ka masum tha,
    Chatri lekar mai bhi nikal padi market ke aur,
    Chatri ka ek faida hai,
    Hum apni shakal chupa kar chal skte hai,
    Jab tak mai chalte chalte market pahuchi,
    Baarish ruk gayi,
    Toh maine chatri rakh di,
    Rakhte hi, mere samne wale raste me meri nazar gayi,
    Meri dhadkan tez hogayi,
    Uski chehre ki woh muskurahat,
    Uski ankho ki woh chamak,
    mai yeh nahi chahti thi ki woh mujhe dekhe,
    Lekin meri nazare usse kaha hatrahi thi,
    Mai nahi chahti thi ki uski woh chamak gayab ho jaye,
    Uske saath joh ladki thi woh mere se zyda sundhar thi,
    Lekin woh baat mujhe nahi satarahi thi,
    Merko pata hai ki usne uska dil pahile dekha hoga,
    Kya uska dil mere se accha tha?
    Kya woh mere jaisa usse pyaar karti thi?
    Usne mujhe dekha ,
    Maine usse dekha,
    Lekin uske ankhon me dukh ya udasi ki jhalak nahi dikhi,
    Balki ek pyaari si muskurahat uske hothon se nikal gayi,
    Lekin me muskura nahi payi,
    Koshish ki,
    Mai usse ghurte khadi ho gayi,
    Woh chala gaya,
    Mai udhar hi usse jate dekh khadi hogayi,
    Merko yeh nahi samaj raha tha,
    Ki mai uske liye khush hou,
    Ya mere liye dukhi,
    Pyaar bhi toh aise gajab ka kiya tha,
    Baarish wapis shuru hogayi,
    Papa ne pucha ‘sabzi nahi layi?’
    ‘ Nahi , baarish shuru hogayi’
    Aur sawalon ka jawab dene se bachne ke liye mai apni room me bhag gayi,
    Unhe kaise batau ki sabzi kharidne gayi thi lekin apna dil bech ke aa gayi,
    Apne headphones Kano mai lagaye ,
    Aur bistar odhkar apne ankh band karliye,

    ” Raste me joh Milo toh haath milane Rukh Jana,
    Sathme koi ho tumhare durse hi tum muskanaa”

  • वो शिक्षक है साहब

    रिश्ता खून का नहीं है उनसे

    फिर भी मां बाप की तरह वो फटकारते हैं।

    यूं तो पैरों पे चलना मां बाप सिखाते हैं।

    पर वो शिक्षक हैं साहब पैरों पर खड़े होना तो बस वही सिखाते हैं

    जो जाऊं गलत रास्ते पे तो कान पकड़कर सही रास्ता दिखाते हैं। वो शिक्षक हैं साहब जो खुद से ज्यादा हमें कामयाब देखना चाहते हैं जो हार जाऊं तो हिम्मत भी वही देते हैं हो जाऊ अगर निराश तो बस वही समझाते हैं और हमें भी उनका कुछ हिस्सा सुनाया करते हैं. आजतक का सबसे वर्स्ट बैच देखा है कहकर वो अक्सर अपना गुस्सा हम पे ज़ाहिर करते हैं।

    क्लासेस में अपने कहानी किस्सों से वो बोरिंग लेक्चर को भी मजेदार बनाते हैं

    वो शिक्षक हैं साहब मंज़िल का रास्ता तो बस वही दिखाते हैं हमें पढ़ाते पढ़ाते अक्सर वो भी अपने स्कूल कॉलेज के दिनों को याद कर लिया करते हैं

    पर सबसे ज्यादा खुश भी वो उसी बैच में हुआ करते हैं सुधारलो खुदको मत करो मां बाप का पैसा बरबाद

    ऐसा कहकर वो हमें अक्सर चेतावनी दिया करते हैं कुछ इस तरह वो हमें सही रास्ता दिखाया करते हैं

    जब होता है आखिरी साल कॉलेज का

    तो हम भी इन पलों को याद करके आखें नम कर लिया करते हैं बस हम भी आपका दिल से शुक्रिया करना चाहते हैं

    और रहें आप सब खुश बस यही दुआ मांगना चाहते हैं

  • सुनो ना

    सुनो ना

    एक बात कहनी थी
    तुमसे प्यार था या पता नहीं क्या था पर कुछ तो हुआ था हमें भी,
    इतने करीब आए थे हम जिस्मो का पता नहीं पर रूह छू गए थे हम भी,
    बिन बात के मुस्कुराना सीख गए थे हम भी,
    बिना सोए सपने सजाना सीख गए थे हम भी,
    एक रोज बनूंगी उसकी उसके झूठे वादों पर एतबार करना सीख गए थे हम भी,
    जब थोड़ा था उसने तो खुद को संभालना सीख गए थे हम भी,
    बस कुछ ना सीख पाए तो यह उसकी यादों से छुटकारा कैसे पाएं,
    उसके किए हुए वादों से कैसे मुकर जाए मिले,
    ना मिले वह जी लेंगे हम भी,
    बस जीते जी मरना सीख गए हम भी|

  • Poem

    Kar hausla buland itna ki koi na soch sake…

    Chal aisi rah par jha koi na pahoch sake ..

    Jeetna hai tujhe ye thaan le…

    Kar le koi kitni bhi koshish tujhe na gira sake….

    Ye zindagi ki daud hai tujhe chalna padega…

    Gir gir kaar sambhalna padega…

    Rokne se bhi na ruke tu aisi chaal chal…

    Pahochna hai apni manzil par ye dimag mai thaan kar …..

    Kar dikha kuch aisa jo ho sabki soch ke pare ……

    Kar hausla buland itna ki koi na soch ……

  • वो निरीह आंखे

    वो बूढ़ी निरीह आंखों में,
    कुछ सपने दिखाई पड़ते हैं।
    कुछ अपनो से मिलने को,
    दिल की धड़कन सुनाई पड़ते हैं।।
    आशा है, उमंग है, प्यार हैं,
    लेकिन उन सुनी आंखों में दिखता इंतजार है।
    इस फीकी सी मुस्कान में,
    ना जाने कितने दास्तां दबाए बैठे हैं।
    और दिल में ना जाने कितना ही,
    शिकायतों से लिपटा प्यार छुपाए हुए हैं।
    फिर भी एक इंतजार के साथ,
    अपनो के लिए सिर्फ दुआ और दुआ ही है।।

  • मोबाइल और इंटरनेट की दुनिया

    मोबाइल और इंटरनेट की दुनिया

    मोबाइल की दुनिया, ये है अजब अनोखी,
    जिसमें सबकुछ होता है जलवाहीं और रोचक।
    हर आदमी का हाथ में, यहाँ तक कि बच्चों के पास,
    एक-एक करके सब खो रहे हैं अपनी मस्तियाँ यहाँ।

    हर रोज़ नया एप आता है बाज़ार में,
    सब कुछ एक ही छोटे से डिवाइस में।
    चैटिंग से लेकर फोटो और गेम्स का शौक,
    हर व्यक्ति है जुड़ा इस मोबाइल के साथ।

    पहले था लैंडलाइन, थोड़ा हटके था टेलीफोन,
    आज की दुनिया में हैं स्मार्टफोन।
    कॉल करने के लिए नहीं रखते अब फोन,
    मोबाइल अब तो रहा है हर काम का साथी।

    जहां चाहो जाओगे, इंटरनेट का रास्ता है,
    जब चाहो जाओगे, डाउनलोड का मास्टर है।
    चिढ़ाने के लिए नहीं रखते अब गुड़िया-गुब्बारे,
    मोबाइल अब तो रहा है हमारा मनोरंजन का साथी।

    पर ध्यान रखें, ये मोबाइल की दुनिया जटिल है,
    सोशल मीडिया की जंगली जगह है यहाँ।
    सबसे पहले है अच्छा यह समझ लें,
    वास्तविकता बिन
    इंटरनेट की दुनिया, असीमित और अद्वितीय,
    यहाँ हर दिल बातें करता है सबसे मुक्ति से।
    सोशल मीडिया का जगत, एक आद्यात्मिक संगम,
    यहाँ बिखरती हैं भावनाएँ, हर एक व्यक्ति के रंगमंच।

    वीडियो कॉल के जरिए आपस में बैठे,
    कर सकते हैं बातें, संगीत और हंसी सेंटर।
    ईमेल, चैट और फोरम के माध्यम से,
    बांट सकते हैं विचार, अनुभव, और विद्या का तेज़।

    विश्व का संपर्क बना रहे हैं इंटरनेट के रास्ते,
    दूरीयों को मिटा रहे हैं इसके संचार सौंदर्य।
    विद्यार्थी, व्यापारी, कला कर्मी और संगीती,
    हर क्षेत्र में आराम से उभरते हैं लोगों के ज्ञान की माला।

    पर सच यही कि इंटरनेट की दुनिया है जटिल,
    यहाँ सत्यता और झूठ का खेल चलता है संगतियों में।
    सोशल मीडिया की आवाजशाही और खुदगर्जी,
    सोच-विचार को भटका रही है असामाजिकता के समीर।

    इंटरनेट के सदैव ध्यान रखें हमेशा,
    जागरूक और सतर्क रहें, अपना योग्यता संरक

  • साहस

    यातनाओं से भरी जिंदगी के रास्तों पर,
    अकेलापन की छाया ढ़लती चाँदनी संग साथ हो।
    जब तन्हाई की गहराई में हो गमों की बारिश,
    तो यादों के साथ हमेशा मेरी मुस्कान हो।

    प्रेम की धूप में जब जीवन खिल उठे,
    होंठों पर अपने मुस्कान का साथ हो।
    हंसते रहो खुशी की लहरों में स्वाभिमान के साथ,
    मुसीबतों के बादलों को तुम दूर करो आसानी से हाथों से।

    खुदा का हुक्म मानो और प्यार से रवाना हो जाओ,
    सबको अपनी खुशियों का हिस्सा बनाना हो।
    प्रकृति के साथ मेल करो, एकता की नयी धरा खोलो,
    खुशहाली से भरो पूरा जीवन, हर एक का दिल जीतो।

    अच्छाई और सच्चाई के मार्ग पर चलने का आसरा बनाओ,
    भ्रम और अंधविश्वास को दूर भगाओ।
    सृष्टि के रंगों से जीवन को सजाओ,
    प्रेम की गाथा सबके दिल में बजाओ।

    हर रोज़ नयी उम्मीद के साथ जीना सीखो,
    आगे बढ़ने का साहस रखो।
    अपनी ख्वाहिशों की पंखों पर उड़ान भरो,
    आशाओं के सागर में खो जाओ।

    हिम्मत से जीने का आद

  • Uska zikar

    Arz Kiya hai…
    Ke zikar uski nigaahon ka , uske noor ka ..
    Ab m kisi haal se nahi kartaa…
    Beshak se yeh har saans meri, deti hai gawahi uske bewafa hone ki…
    Par yakeen maano Mera ab m usko yaad nhi karta ..
    Aur maaloom h yeh bhi mujhe ki voh baate toh meri karta hai..par afsos ab voh mujhse baat nhi karta ..

  • Uska laut kar ana

    Arz kiya hai..
    ek mohabbat meri nahi smjhe tum,
    toh yeh bichadna tumhara laazmi tha…
    par yeh toota dil bhi naa thaam sake toh…
    fir yeh ashqo m bikharna tumhara laazmi tha..
    aur yu laut kar ana tumhara .. haath m marham liye…
    fir tumhe aata dekh.. mera zakhm chupana bhi laazmi tha

  • तुम

    तुम कुछ यूँ ज़रूरी बन गए कि तुम्हे भुला ना सकी,
    इस बात को किसी और को बता ना सकी,
    इस दिल का भोज कभी हटा ना सकी,
    तुम्हारी यादों से दूर जा ना सकी,
    बोलने की हिम्मत कभी जता ना सकी,
    साँसों में तुम्हारी अपने को बसा ना सकी,
    ख्वाबों को हकीकत में सजा ना सकी,
    तुम्हे अपना बना ना सकी ।

    तुम कुछ यूँ ज़रूरी बन गए कि तुम्हारी वो कविता भुला ना सकी,
    तुम्हारे लिखे खत जला ना सकी,
    आँसुओं को अपने अंदर समा ना सकी,
    तुम्हारे दिल को अपने लिए मना ना सकी,
    अपनी मोहब्बत तुम्पर फना करना सकी,
    झूठी हँसी होठों पर ला ना सकी,
    तुम्हे अपना बना ना सकी ।

    तुम कुछ यूँ ज़रूरी बन गए कि तुम्हारी तस्वीर आँखों से हटाने की हिमाकत सी ना हुई,
    उन यादों को चाहकर भी भुलाने की नजाकत सी ना हुई,
    वक़्त को उस पल में दुबारा ले जा ने की कोशिश सी ना हुई,
    इन लम्हों को यहीं थमा ने की इच्छा मुकम्मल सी ना हुई,
    बरसती बूंदों को वहीं रोक ने की हिम्मत सी ना हुई,
    तुम्हारी नज़र को अपने पर टिका ने की बात सी ना हुई,
    लफ़्ज़ों को ज़ुबाँ पर फ़िर ला ना पाई,
    तुम्हे अपना बनाने की ख्वाहिश पूरी सी ना हुई।

    काश उस वक़्त हिम्मत कर तुम्हे सब कुछ बता दिया होता,
    तो फ़िर ये लिखने का मौका ना दिया होता,
    जीवन का रंग रूप अबसे कुछ अलग होता,
    तुम मेरे होते, मैं तुम्हारी होती और ये रिश्ता एक होता ।

  • KHUDKUSHI

    KHUDKHUSHI
    Unn kuch iss tarah se har shaam vo pankha mujhe apni taraf bulata hai
    Par ye dil bs ek chehre ki wajh se ruk jaata hai
    Smjh ni ata kya khayi jara hai
    Kyuu ye mn meraaa drd ke dariyaa me bahi jaa raha hai
    Samjhta bhi hu aur khud ko smjhata bhi hu
    Par naa jane kyuu ankheein ka samundar ruk nhi paa Raha hai
    Kuch sochna chahta hu aur soch nahi paata hu
    Bina soche smjhe khud ko gumraha kr jata hu
    Iss adhuri kahani ko.puraa nahi kar para hu
    Bs ek yaadoon ka bhoj leke akele chala Jaa raha hu
    Vo awaaz jo har raat sunyi deti hai mujhe
    Awaaz vo jo tumari rooh se nikl ke mere
    Jism me ati hai
    Apni hatho ki dhor ke sahare mujhe sbse dur Krna chahti hai
    Dil me drd mehsus hota hai
    Par bta nhi paata hu
    Jazbaat kuch iss kadar behna chahte hai
    Par jaata nhi pata hu

    Jab dil ki dhadkan ruk si jaati hai
    Jab mnn se ek darawani ahaaat ati hai
    Jab hatho ka shareer se मेल nhi ho pata hai
    Lete lete ye shareer sun saa pdh jata hai
    Hann tab mujhe khudkhushi ka khyal aata hai han tab mujhe khudkhushi ka khyal ata hai

  • वो कष्ट से प्यार नहीं कर सकती

    वो ज्यादा तो नहीं जानती
    व्यवहारिकता भी नहीं जानती
    वो सिर्फ इतना जानती है ,
    कि वो कष्ट से प्यार नहीं कर सकती ।
    शाम ढले ,देहरी पर खड़ी आसुओं का इंतजार नहीं कर सकती ।
    फिर उन ऑखों में प्रशंसा के लिए ,श्रृंगार नहीं कर सकती।
    उसकी लम्बी आयु के लिए,
    व्रत, अनुष्ठान नहीं कर सकती।
    स्त्री जो पा जाए, उसी में संतोष करे,
    ऐसे विचारों का बखान नहीं कर सकती।
    उसका दर्द देखकर,
    न पिघले जो देवता
    उसके मंदिर की पुजारिन,
    वो नहीं हो सकती।
    उस रोती- बिसूरती को तुम जड़ दो तमाचा,
    पर नैनों से उसके, जाए न आशा
    वो इतनी महान नहीं हो सकती।
    जो उसे ही प्यार न कर पाए,
    वो उसके दिए कष्ट से प्यार नहीं कर सकती।
    वो हो सकती है प्रेयसी, पतिव्रता नारी,
    पर वो नहीं हो सकती अबला, बेचारी।
    वो सिर्फ इतना जानती है ,
    कि वो कष्ट से प्यार नहीं कर सकती।
    Saloni

  • Tere sath hoon mein

    Kuch likhkar chhod diya usne jise ab woh padta nahi ….
    Ruth Gaya koi maana hua usse jisse ab woh ladta nahi …..
    Koshishein har Roz karta hain haarne se woh darta nahi……
    Kise sunaye apni kahani woh jakar jis kahani m kabhi koi marta nahi …

  • Aasman

    Jab aasman ek hai toh hmare Chand alag kyu
    Jab zurm ek hai toh daag alag kyu
    Manzil ek hai toh raah alag kyu
    Saath ek hai toh haath alag kyu
    Aur galti tu meri ek maaf karde
    Mai Teri sau maaf kar du
    Mere bas ki Rahi toh apne dil se ye ilzaam saaf kar du
    Ki Ishq me log kamzor hote hai
    Mai toh mazboot बनना chahta tha

  • Little Girls

    Sweat dripped from Lalita’s forehead, her chest barely covered, heaved as her fingers shivered on the granite floor. She never imagined this is what giving birth would be like. Blood dripped from between her legs, her infant daughter wailed beside her but she could not find it in herself to console her. How could she? What will she ever say to the little child? The clouds thundered above her, pattered on the metal sheet which was her roof. Her village was no place for little girls like her.
    Princess Ashwini’s birth, for a span of seven days the village had bathed in colors and music as they danced their days away. The day she was born, a two year drought had ended. It was her steps, her little feet that had made their village bloom with prosperity. Everything about her was so beautiful; she was the beloved of the people.
    The king, her father had kept her in immeasurable luxury, unmatched in this land and the next seven. When Ashwini turned eighteen, her celebration was full of grandiose. As age dictated, she fell in love. Her father was elated; their marriage was an affair unforgettable.
    The dark set in, when Ashwini sat in her carriage and went to her new home, the village fell back into despair. Her fortune was gone with her. Farms dried, animals died, grains rotted away, treasury fell empty. Astrologers and saints all stated the same reason to the king “whatever you had was from her.” The king did not think he had another option. When Ashwini came back to visit, the king closed all doors. She was to never leave the kingdom again. The young girl however was too in love; she wanted to escape no matter what, so the king did something horrific.
    Lalita screamed.
    Ashwini was adorned like a bride, taken to the biggest farm in the village, she was worshipped as she cried and peasants tilled the land beside her. Tied in iron shackles she was buried alive as the soil above her prospered. She was their prosperity and now she would never leave.
    Blood requires blood, a sacrifice like hers demands more and Ashwini did ask for more. Men of religion warned, never let Ashwini go hungry, give her the bloody sacrifices she demands. Every girl born into the village belongs to her. Year after year, little girls born were buried in the same field; catastrophe would strike even if one was spared. Lalita made a mistake, a selfish one. She hid the baby girl in a tank of grains.
    She shouldn’t have, Ashwini does not like betrayal.

  • Hindi Poem

    एक स्त्री कि व्यथा को बचपन से गृहस्त जीवनी को दर्शते हुए सुंदर कविता…
    मैं अकेली परी सी बनी 
    माँ के कर्मों कि बुनी
    घर काम को करती 
    सही किताबों को पड़ती
     कभी एक दिन होगायी बड़ी 
    ब्याह को राज़ी ख़ुशी
    फिर उठी डोली कही
     ससुराल ने समझा नहीं
     बिन सहारे रोती फिरी
     प्रेम मोह से लड़ती रही
     ईश्वर ने प्रथना सुनी
     संतान से झोली भरी
     दर्द भरी कहानी मेरी
    आँसू जैसे नदी बहीं
    जीवन मेरा कही अंकही.

  • Soch

    ये सोच ही है जो जुबान से शब्दों के रूप में कही जाती है
    ये सोच ही है जो इंसान को एक दूसरे से अलग बनाती है।
    ये सोच ही तो है जो लोगों में अपनापन लाती है
    और यही सोच है जो अपनो को ही दूर ले जाती है

    ये सोच भी ना समय के साथ बदल जाती है
    कभी सही तो कभी गलत सोचने पर मजबूर कर जाती है
    ये सोच मुश्किल्लो मे भी हिम्मत देती है
    और यही सोच आसान चीज को भी पहाड़ जितना बड़ा और पेचीदा बना देती है

    ये सोच ही है जो हार में भी जीत और जीत में भी हार ढूंढ लेती है
    ये सोच ही है जो किसी की अच्छाई में भी उसकी बुराई ढूंढ लेती है
    ये सोच ही है जो लड़की को घर में कैद कर देती है और यही वो सोच है जो उसे चाँद पर भी पहुँचाना चाहती है

    सोचते तो सभी है.. कभी अपने लिए तो कभी लोगों को समझने के लिए
    कभी अच्छा तो कभी बुरा
    कभी दुसरो को समझाते है तो कभी दूसरों की गलत सोच को सही मानकर अपना ही गलत कर बैठते है
    पर क्या हम ये सब जानते हुए भी इस गलत और सही सोच मे फर्क समझ पाते है? ये सोच !!!!

  • “Digital Threads: Love Unveiled in Cyberspace”

    In a realm where screens glow bright,
    Where words traverse the endless night,
    There blooms a love, pure and unseen,
    Born from the depths of the digital screen.

    Across vast distances, hearts connect,
    In a virtual realm, love finds its effect.
    Through messages sent with care and grace,
    A love story unfolds in this cyber space.

    Pixels and letters weave a tale,
    As emotions dance, they never fail.
    In the realm of the internet’s embrace,
    Love blossoms, defying time and space.

    Through words typed on a glowing screen,
    Two souls unite in a love serene.
    They share their hopes, their dreams, their fears,
    As distance dissolves, love perseveres.

    Across the expanse of cyberspace,
    They explore each other’s inner grace.
    With every keystroke, their hearts align,
    Their virtual connection, truly divine.

    In this realm, love knows no bounds,
    As digital waves carry its resounding sounds.
    Through video calls and shared laughter,
    Their love grows stronger, ever after.

    But amidst this realm of love so grand,
    Caution echoes, a gentle command.
    For behind the screen, real hearts beat,
    And face-to-face connection is a love’s true feat.

    Yet, internet love, though unique and rare,
    Can bridge the gap when distance is there.
    It teaches us to love with open hearts,
    And embrace the power technology imparts.

    So, let us cherish the love that’s found,
    In the realm where the internet is crowned.
    For love, in its essence, transcends the screen,
    A connection forged, real and unseen.

  • रेप

    रेप

    अंधेरी रात में जब सब कुछ शांत था
    मन की एक चीक जो सुनाई दे रही थी
    जो मुंह से निकल नहीं रही थी।
    वो आंसू जो बहार नहीं आ रहे थे
    दुख बनकर अपने शरीर से नफरत करना सिखा रहे थे।
    खुदखुशी जीने से आसान लगने लगी थी।
    ये कहानी है उस लड़की की जो किसी के हवस का शिखर होते होते बची थी।

  • Ajnabi kavita

    अजनबी कविता आवाज़

    User
    Give me a Hindi poem that has never been published

    ChatGPT
    Here’s a Hindi poem for you:

    एक धूप चांदनी की कहानी,
    मैंने छोड़ी थी रस्ते की परवाही।

    सुबह की उठती रोशनी में,
    चल पड़ा मैं अनजान राही।

    पेड़ों की छाँव में बैठा,
    कुछ गीत लिखने की थी इच्छा।

    आवाज़ को खोजने का मन,
    था मेरे दिल में भरी हवा।

    कलम पकड़ चला जगमगाते,
    खुद से नई दुनिया बनाते।

    शब्दों का खेल खुद से संग,
    दिखा रहा था नये सपने।

    बारिश की बूंदों में भीगता,
    लिखता था मैं अनजान राज़ी।

    कविता के रंग में खो जाता,
    पल भर में हो जाता विलीन।

    ये कविता जो तैयार हुई,
    न जाने कौन सी कहानी लिखी।

    सब कुछ अनजान था यहां,
    पर अद्भुत रस्ते बन गईं।

    यह कविता अजनबी आवाज़ है,
    किसी की आँखों की परछाई है।

    पुब्लिश नहीं हुई इसे कहीं,
    पर यहां तक पहुंची है साथियों के जीवन में।

  • भविष्य

    भविष्य

    एक वक्त था जब लगा की जिंदगी का ये सफर सही पटरी पर है..

    ये कहां पता था जिस वक्त में ये सोच रहे थे वो वक्त भी अपना ना है..

    वक्त गुज़र गया ज़िंदगी की पटरी कब दागमगा गई एहसास ही ना हुआ..

    मां बाप की चेहरे पर शिकन का सामना हुआ..
    खुद ही मन में सोच कर ये कमबख्त जिंदगी को प्यार करने की कोशिश कर रहा है..

    कि क्या पता शायद ऊपर वाला भविष्य में कुछ अच्छा लिख ​​रहा है।

  • तू ले चल वहां

    तू ले चल वहां

    जहां सितारों की चादर पर
    बादलों का पहरा ना हो ।
    मुसाफिर-ए-दिल
    इस इश्क के सफर में हार कर ठहरा ना हो ||

    जहां कई वादियां
    लाजवाब बेमिसाल हो ।
    सुकून बहता रहे इन नसों में
    ना मन में कोई मलाल हो ।।

    जहां बहती हवाओं में
    तेरी जुल्फें लहराती रहे।
    कितना प्यार है तुझे मुझसे
    बस तेरी नजरें बतलाती रहे ।।

    जहां दिन ढलने पर भी
    तुझ पर मेरा दिल ढले नहीं ।
    तू गलत भी कह दे
    तो में मान लूं बस यही सही ।

    तू ले चल वहां,

    थाम पकड़ के हाथ तेरा
    जहां में चल दू रास्ते बेखौफ सभी
    बस एक बार उलझा लो अपनी उंगलियां मेरी उंगलियों से कयामत तक ना छूटे फिर ये साथ कभी ।।

  • Sawan

    वक्त बदला हे के नही सावान अक्सर जांचता है।
    फूलों से अपना स्वागत आन शान से करवाता है।

    तैयार होते है झूले सावान का सिंघासन बनने के लिए।
    बादल गरजते है जोरो से अपनी हाजरी सावान को देते हुए।

    हवाएं बताती है उसे सुने अनसुने दिलों के पैगाम।
    गीत गाते है पंछी इस त्यौहार को करते हुए अपने नाम।

    राधा कृष्ण के मिलन का मीठा इशारा आया है।
    मुस्कुराते चेहरा का बुलावा है सावान को,
    जो सावान दबे पांव फिर आया है।

  • विवशता

    कहीं दूर किसी नदी किनारे, दो पल को बैठना है मुझे।
    सारी उलझन को धुआं बनते देख,
    चैन से दो पल रुकना है मुझे।

    सांसे जब घुटन का पिंजरा बन जाए।
    बेईमान तकदीर जब ताला बन जाए।
    इस बंधन को तोड़,उलझनों को छोड़।
    एक नई राह की खोज करनी है मुझे।

    कहीं दूर उत्तरी अक्षांशो पर स्वयं चढ़कर,
    सुमेरू ज्योति नैनों में मूंदनी है मुझे।
    तीव्र इच्छाओं की ज्वाला में,
    दो पल निस्वर्थता धू – धू करनी है मुझे।

    अक्षांशो से आकांक्षाओं की दूरी तय करनी बाकी है,
    कितने ख्याल कितने शब्द मेरे अंजानी सहपाठी हैं ।
    अगर इस बांध को तोड़ दूं, अनजाने साथ छोड़ दूं ,
    आएगा क्या कोई कभी मुझसे मेरा हाल पूछने?

    कहीं दूर मुझे उस और जाना है, जहां सवेरा सबसे पहले होता। डोंग की मदमस्त हवा में,
    सुकून की आहे उल्लासित मन भर देता।

    हाथों की लकीरों में जो किरणें आ जाएं ।
    उन किरणों से जो मोती बन जाए।
    अंखियों के चादर पर जो आंसु गिरे थे पहले ।
    मोदी से फेर लू उन्हें ,
    चांदनी बना दूं हर कपड़े मैले।

    उन पग डंडियों पर चलकर कोई गैर जो बन जाए।
    उस गैर से पूछो कि मुझे चैन कैसे आए ।
    सुकून की किरने जो लाई मैं उधार डॉग से।
    उन पत्थरों को क्या भीगा पायेंगे वह अपने तेज से।

    कहीं दूर मुझे मावसूनराम की गलियों में खोना है ।
    भीगे भीगे पद पर उत्साहित शोर करना है ।
    भीनी खुशबू वाली शीतल हवाओं में,
    खुद को भींच लू मैं।

    अंदर तक जो मन भीग जाए।
    सप्तवर्ण की धारा से आसमान जब जगमगा जाए ।
    भीतर के अंधेर को शक्र चाप से झिलमिल कर लू।
    मन की वाणी को मेह से निर्मल कर लूं।

    कहीं दूर किसी जंगल में,
    हरियाली के मंगल में,
    चिड़ियों की चहचहाहट पर,
    वक्त की सरसराहट में,
    खो जाने को आना है।
    मोह छोड़ जाने को आना है ।
    होठों पर दबे शब्दों की निरक्था, खोल कर भूल जाना है ।
    बोलकर भूल जाना है।

    कहीं दूर जाने को तो मार्ग बहुत है,
    मन मस्तिष्क में दबी आशाएं बहुत हैं।
    नील समंदर से भी गहरी ये गिराहें,
    डूबा देती है भ्रामक कुंडल की राहें।
    छिन्न-भिन्न करने की निर्णायक शक्ति
    विवशता के चक्रव्यू से ले जाते मुक्ति ।
    अंत में रह जाती बस इच्छाएं खाली, बेरंग, खुद को पाने की आशाएं।

  • Maa

    Maa tumne hi sbkuch sikhaya hai… Sahi Galt kya hai ye tmne hi to bataya hai …..
    Khelaya hai,hasaya hai, pyar se tmne hi to apne goad me sulaya hai….. Kabhi daraya hai kabhi sataya hai magar neend se uutha kr v to tmne he khilaya hai….
    Mere ek khushi k liye tmne har mumkin takleef uuthaya hai aur jo mai kabhi ruuth jau to tmne hi to mujhe manaya hai….
    Mere har jarurat ko tmne apna banaya hai aur mere har galti ko tmne pyar se apnaya hai….
    Mere har badhte kadam k liye tmne apna sbkuch lutaya hai aur akelapan
    Me bhi jo sath na chore maa wo tera saya hai…. Maa Tm mere har agge badhte kadam ka piche chuta nisan ho….
    Maa tm mera abhimaan ho tum mere zindgi ki har mushkil k samne khara ek Chattan ho….

  • मैं…

    1.) क्या मैं सिर्फ ‘मैं’ नहीं रह सकता? दूसरों के लिए मरते-मरते जीना, मैं नहीं सह सकता।

    अपने ख्याल, अपने वसूल क्यों मुझ पर लाद देते हो तुम क्या देख नहीं सकते, जिंदगी भुनती चली जा रही है मेरी?

    2.) मुझे साँस लेना आता हैं, जीना मुझे मत सिखाओं, मैं जैसा हूँ, वैसा ही हूँ, बदलना मुझे मत सिखाओ।

    बहुत कोशिश की मैंने, खुद को काबिल बनाने की, क्या रह गया हैं आज? सब कुछ खो बैठा हूँ, तुम्हारे नज़रिए से देखने पर ।

    3.) खुश रहना सीखा नहीं पाए, तुमने सिर्फ लड़ते रहना सिखाया।

    अब किससे लहूँ मैं आज, मेरे सामने खड़ी हैं मेरी ही काया ।

    4.) क्या अब खुश हो ? हाँ, हो गया मैं कामयाब !

    मन के संवेदनशिलता को त्याग कर, जी रहा हूँ मैं तुम्हारा ख्वाब ।

    5.) जैसे झूठी हँसी हँसता हूँ मैं, वैसे ही सच्ची रूलाई छुपाता हूँ।

    काश, मैं ‘मैं’ ही बना रहता, अब अपने-आप पर ही तरसता हूँ

  • सूर्य की किरणों !

    धूप की किरणों से भरी एक सुबह,
    खिल उठती है फूलों की फुहार।
    मन में उमंगों की लहर लहराती,
    गाती है प्रकृति का मधुर संगीत प्यार।

    वन के पेड़ों में हंसते फुलों की डाल,
    मन को भाती है उनकी सुंदरता निहार।
    हरियाली का आच्छादित आँगन,
    प्रेम और शांति से भरे आधार।

    बादलों की छांव में खेलती बूंदें,
    प्रकृति के रंगों में खो जाती ख़ुशियों की बहार।
    गीतों की धुन पे नाचता जहां,
    भर जाती है दिल की सबकी तारीफ़ करार।

    सूर्य की किरणों से सजी हर साँझ,
    धरती पर छाती है नयी आशा की उम्मीद सहार।
    हिन्दी की मिठास से भरी कविता,
    जगमगाती है सबके हृदय में भार।

  • Poem

    Jo junoon subah ki roshni mein hai wo raat ki chandani mein kaha ×2,
    Aur Jo sukoon raat ki chandani mein hai wo subah ki roshni mein kaha… ) – Tanya

  • You feel like home

    You feel like home
    I didn’t know i was looking for,until you came around .
    You feel like home to me.
    A home I can run to when nothing makes sense.
    A home which doesn’t necessarily give all the answers to the aching questions,
    but a home I fall asleep into after crying cluelessly my heart out.
    You feel like a warm and homely 4pm golden hour sunset that
    I watch from the small window of my old house.
    It makes me feel as if everything is alright.
    A cup of chai,a book in my lap, light breeze, silence, warm yellowish beams of sunlight washing through my soul and mind.
    Everything feels settled.

    ~mrinali
    ©penpaperandlives

  • Home

    You feel like home
    I didn’t know i was looking for a home until you came around .
    You feel like home to me.
    A home I can run to when nothing makes sense.
    A home which doesn’t necessarily give all the answers to the aching questions,
    but a home I fall asleep into after crying cluelessly my heart out.
    You feel like a warm and homely 4pm golden hour sunset that
    I watch from the small window of my old house.
    It makes me feel as if everything is alright.
    A cup of chai,a book in my lap, light breeze, silence, warm yellowish beams of sunlight washing through my soul and mind.
    Everything feels settled.

    ~mrinali
    ©penpaperandlives

  • ‘विकर’ सा प्रेम।

    प्रेम की भाषा, ना स्वरूप ना रूप
    बस एक भाव! जो कभी हमने जाना,
    पर कभी जाना ‘ही’ नहीं।
    प्रेम की माया, प्रेम की काया,तुमने भी सीखी और हमने भी पढ़ी,
    पर पढ़ कर भी हम ‘निरक्षक ‘
    और जान कर भी मन जाना ‘ही ‘ नहीं।

    माना भाव कुछ ऐसे थे;
    दिन में रात, रात में तुम,
    और तुम में हम कुछ खोये से थे।
    सपनो में तुम, ख्यालो में तुम,
    ओर तुम्हारे लिए हम रातो को रोये भी थे।

    अभाव है अब प्रेम का जीवन मरण, साँसों में
    भावो में, रातो में।
    अभाव है अब प्रेम का कल्पनाओं मे।
    ‘विकर्’ है जीवन का, बिना प्रेम के
    बिना ‘गुरु’ के।
    जो सिखा सके प्रेम या फिर
    प्रेम के बिना जीवन।

    ‘निरकर’ सा जीवन और ‘विकर’ सा प्रेम।
    शब्दों के झरोखे और रातों का मेल
    कुछ शब्द तुम्हारे हो और कुछ शब्द हमारे,
    संग चल प्रेम के, चलो
    क्यों ना ये जीवन सवारे!

    शब्द तुम्हारें भी अधूरे हैँ और बातें मेरी भी।
    तो क्यों ना तुम्हारे शब्दों के मोतियों से,
    ‘हमारी’ बातों के अर्थ निकाले।

    तुम्हारे शब्दों के झरोके से
    कुछ शब्द हमने संभाल के रखे हैँ।
    जब वफ़ा की बातें सुनते हैँ,
    तो तुम्हे याद कर लेते हैँ।
    साथ ही ‘विकार’ से प्रेम को भी
    जो था तुम्हारे और मेरे बीच
    किसी बहती नदी के समान,
    जिसका अंत जरूर समंदर मे जाकर है,
    पर उसमे पानी हमेशा से है।

  • ‘विकर’ सा प्रेम।

    प्रेम की भाषा, ना स्वरूप ना रूप
    बस एक भाव! जो कभी हमने जाना,
    पर कभी जाना ‘ही’ नहीं।
    प्रेम की माया, प्रेम की काया,तुमने भी सीखी और हमने भी पढ़ी,
    पर पढ़ कर भी हम ‘निरक्षक ‘
    और जान कर भी मन जाना ‘ही ‘ नहीं।

    माना भाव कुछ ऐसे थे;
    दिन में रात, रात में तुम,
    और तुम में हम कुछ खोये से थे।
    सपनो में तुम, ख्यालो में तुम,
    ओर तुम्हारे लिए हम रातो को रोये भी थे।

    अभाव है अब प्रेम का जीवन मरण, साँसों में
    भावो में, रातो में।
    अभाव है अब प्रेम का कल्पनाओं मे।
    ‘विकर्’ है जीवन का, बिना प्रेम के
    बिना ‘गुरु’ के।
    जो सिखा सके प्रेम या फिर
    प्रेम के बिना जीवन।

    ‘निरकर’ सा जीवन और ‘विकर’ सा प्रेम।
    शब्दों के झरोखे और रातों का मेल
    कुछ शब्द तुम्हारे हो और कुछ शब्द हमारे,
    संग चल प्रेम के, चलो
    क्यों ना ये जीवन सवारे!

    शब्द तुम्हारें भी अधूरे हैँ और बातें मेरी भी।
    तो क्यों ना तुम्हारे शब्दों के मोतियों से,
    ‘हमारी’ बातों के अर्थ निकाले।

    तुम्हारे शब्दों के झरोके से
    कुछ शब्द हमने संभाल के रखे हैँ।
    जब वफ़ा की बातें सुनते हैँ,
    तो तुम्हे याद कर लेते हैँ।
    साथ ही ‘विकार’ से प्रेम को भी
    जो था तुम्हारे और मेरे बीच
    किसी बहती नदी के समान,
    जिसका अंत जरूर समंदर मे जाकर है,
    पर उसमे पानी हमेशा से है।

  • दोस्त और दोस्ती

    ज़िन्दगी का एक अभिन्न अंग है वो कहलाता,
    हर किसी को लगता प्यारा दोस्ती का नाता ||
    किंतु एक सच्चा दोस्त ही है दोस्ती को सार्थक बनाता,
    जिसके बिना मुश्किल लगता है जिंदगी का गुजारा ||

    हर किसी की जिंदगी में दोस्ती की अलग परिभाषा होती है,
    किसी कि पक्की तो किसी कि गहरी होती है ||
    दोस्ती ना रंग – रूप ना अमीर – गरीब देखती है,
    वो तो सभी भेदभावों से परेह होती है ||

    दोस्ती की परंपरा युगों से चली आ रही है,
    तभी तो श्री कृष्ण को भी सुदामा की दोस्ती बहुत प्यारी है ||
    तो दोस्तों यूं ही जारी रखना अपनी यारी,
    जिसे याद करे यह दुनिया सारी ||

    आप सभी को मित्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

  • है मानव!

    है मानव!

    तुम्हें अंदाजा भी है तुम क्या किए जा रहे हो
    रोज हमें अंत के करीब लिए जा रहे हो
    हे मानव! क्या तुम्हें समझ है,
    क्या तुम्हें पता नहीं प्रकृति पर किसी का जोर नहीं,
    तुम रोज उसका चीरहरण किए जा रहे हो|
    लाखों वन, जीव, जलाशय को प्रदूषित किए जा रहे हो,
    मानव तुम्हें पता है तुम घोर पाप किए जा रहे हो |
    जरूरतों से आगे कुछ मांगना,
    है मानव! क्यों तुम इतना लालच किए जा रहे हो,
    पृथ्वी है कितनी अनमोल क्यों तुम इसे नष्ट किए जा रहे हो |
    यह असंतुलित बहार रोज के चक्रवात अनियमित मौसम में बदलाव और जहरीली वायु, यही तो है अंत के निशान |
    मानव तुम अब तो चिंतन करो क्यों इतना विलंब किए जा रहे हो
    पक्षियों की गूंज या जाम में फंसे वाहन का शोर,
    मानव तुम ही बताओ जा रहे हो किस ओर,
    वक्त रहते हुए बचा सकते हो तुम अनमोल खजाने को,
    हे मानव! ठहरो तो, सोच के जरा देखो तो,
    यह किस भविष्य की ओर जा रहे हो ||

  • Zindagi

    एक दिन सपना नींद से टूटा खुशी का दरवाजा फिर से रूठा

    मुड़ कर देखा तो वक्त खड़ा था जिंदगी और मौत के बीच पड़ा था

    दो पल ठहर के मेरे पास वह आया पूछा मिली थी जो खुशी उसे क्यों ठुकराया

    ऐसे में जब मैं हल्का सा मुस्कुराया नजरें उठाई और तब सवाल ठुकराया

    जवाब सुनकर वह भी रोने लगा कहीं ना कहीं मेरे दर्द में खोने लग

    मेरे भाई हसा नहीं कभी खुद के लिए जिया हो जिंदगी पर ना कभी अपने लिए

    इस खुशी का एक ही इंसान मोहताज था मेरी जान मेरी धड़कनों का वो ताज था

    खत्म हो गया जो किस्सा वह file क्यों करूं जब वजह ही नहीं रही तो बता smile क्यों करूं

  • दिल से….

    दिल से….

    दिल से बोलूँ इक नगमा,

    जो सपनों को पंख दे दे धरा।

    बाँहों में ले लूँ उड़न की बहार,

    जहां चमके नये सवेरे की किरण नजर आये।

    हर दिल की धड़कनों का मेल मिलाप,

    प्यार की आवाज़ यहां सबको सुनाए।

    मुस्कान की तपिश में लिपटी,

    खुशियों का संगीत सबको सुनाए।

    यहां ना छुपती हैं आँखों की नमी,

    कहीं ना जा सके रिश्तों की खामोशी।

    हर राही का यहां मिले साथी,

    प्यार की गाथा यहां सबको सुनाए।

    बंधनों को तोड़ नयी उड़ान भरे,

    परिंदों की तरह सबको ऊँचाईयों पर ले जाएं।

    हर रिश्ता यहां नए रंगों में चमके,

    प्यार की राह पर यहां सबको सुनाएं।

    दिल से बोलूँ इक नगमा,

    प्यार और खुशियों का यही संगीत है।

    हर पल यहां खुश रहे सब,

    दिल से यह दुआएं हम सबको देते हैं।

  • ……..

    Regrets hurts more than mistakes.

  • भारत की व्यंजन गाथा।

    खाना एक संगीत हैं, और भारत उसका स्वर,
    उत्तर से दक्षिण, पूर्व से पश्चिम तक यहां प्यार फैला हर जगह।
    यहां के रसोईघर में छुपा हैं भारत का अनोखा सौंदर्य,
    ये भोजन बहुमुखी संस्कृति की गाथा, देखने वालो कि हटे ना निगाह।

    उत्तर भारत के रसोईघर से खुल जाती हैं हम गर्म व्यंजन की कथा।
    छोलेभटूरे ,सरसों का साग, मक्की की रोटी की मिठास महकती खुशबू और बेमिसाल स्वाद है हमारी प्रथा।
    पंजाब के मक्के के रोटी और सारसों के साग की खुशबू में गाते हैं हिमाचल के चारों धाम।
    कश्मीर की वादियों में छिपा हैं रोगन जोश की चटनी का राग।
    ये उत्तर भारतीय व्यंजन की सुंदरता, मन को छू लेती है बिना किसी त्याग।

    पश्चिमी भारत के व्यंजनों में बसती है भूगोल की महक,
    गुजरात की ढोकली, दमन की खीर, ओर धनिया चटनी की मिठास अनूठी होती है।
    राजस्थान की थाली में सजी है दाल बाटी चूरमा,
    जो मीटाती है गर्मियों की भूख, देती है आनंद की गरिमा।

    महाराष्ट्र की पाव भाजी ओर वड़ा पाव की मासूमियत,
    गोवा की सोरपोतेल, कच्चे रसों का नाटक जिंदादिली से सुनाती है।

    मध्य भारत के ब्रह्मपुत्र घाटी के स्वाद में छुपी है रिवायत,
    मिठाई की डिबियां, जोलपान की मिठास, लिट्टी चोखा का स्वादिष्ट है रंग भरे व्यंजनों का प्रमाण।
    मध्य प्रदेश की बावन बाफ़ला, मलयान के कबाब, छत्तीसगढ़ की मिथेला जलेबी,
    उनकी मिठास और सरसता से मन में गुलाब जैसे महकते हैं ख़्वाब।

    दक्षिण भारत के अंडमान टिकी, दोसा-इडली की सुंदरता
    तमिलनाडु के संभार वदा, केरल के अप्पम वदम जैसी विशेषता है पचास रागों की ताल।
    आंध्र प्रदेश की हैदराबादी बिरयानी, तेलंगाना का हलीम,
    कर्नाटक का दोसा, उनकी सुंदरता के रंग सबको दिलाते हैं रंगों की उल्लास।

    ये भारतीय व्यंजन की यात्रा, मन को छू जाती है , ओर है यह खुशीयों का प्रतीत।
    हर व्यंजन में छिपी है देश की विविधता का प्राकृतिक संगीत।

  • Hai Aaj Bhi Yaad!!

    हे आज भी याद ,
    मेरे रूठ जाने पर तेरा वो मनाना,
    मेरी ज़िद न खाने की और तेरा वो
    हाथ पकड़ कर खाना खाने ले जाना!!

    है आज भी याद ,
    तेरा वो मुस्कुराते हुए घर आना और
    मेरा नाम पुकारना आज मैं ये लाया हुं
    और हमारा वो छुपकर खाना!!

    है आज भी याद ,
    मेरे एक बार बोलने पर ,
    मेरी हर चीज तेरा वो लाना,
    हमेशा मुझे खुश रखना !!

    है आज भी याद ,
    ‌हम दोनों का बात-बात पर एक
    दूसरे की टांग खींचना और
    एक दूसरे को परेशान किए बिना
    एक दिन भी न रह पाना!!

    है आज भी याद ,
    मेरे लिए तेरा हर खेल में हार जाना
    और मुझे जिता देना !!

    है आज भी याद ,
    तेरा मेरी बनी हुई हर चीज की तारीफ करना
    चाहे वो अच्छी ना हो !!

    है आज भी याद ,
    तेरा मेरी हर बात मानना और मेरे लिए सबसे
    लड जाना !!

    है आज भी याद ,
    तेरा मुझपर आंख बंद करके भरोसा करना!!

    है आज भी याद ,
    तेरा मेरे दुखी होने पर दुखी होना और
    हमेशा मुझे प्यार से बेटा बुलाना !!

    है आज भी याद ,
    मेरा हर बात पर तुझसे फोन करके
    पूछना “पापा घर कब तक आओगे “!!

    है आज भी याद ,
    मेरा तेरे साथ मुस्कुराकर ज़िन्दगी जीना!!

  • जिंदगी

    जिंदगी बहुत नादान है ये सोचा था
    ये सोचने के बाद भी में बहुत रोता था
    जिंदगी एक लतीफा बन गई
    एक पल की खुशी आशु में बदल गई
    रास्ते तो बहुत हैं पर किसी जाल से काम नहीं
    चलते तो रहते हैं पर मंज़िल की खबर नहीं
    मंज़िल ढूँढते ढूँढते रस्ते भटक गए
    अब ना जाने क्यों जीने के तारिके बादल गए
    आपनो को पाने की वजह से खुद को घुमा दिया
    मौत के बारे सोचा थो
    जिंदगी ने रूला दिया
    जिंदगी है जब तक खुशी खुशी जी लेगे
    मौत आएगी जिस उसको भी दोस्त कह देंगे |

  • मजदूर क्यों मजबूर ?

    पूछा एक मां से कि क्योंं इन नन्हे पैरों को तकलीफ दे रहे हो, क्यू इन नन्हे हाथों को काम की बेड़ियों में बांध रहे हो ,
    वह कहती मजबूरी है साहब , नहीं रहे वह जो इस काम के हकदार थे,

    कई दिलासे दिए प्रशासन ने की सहायता करेंगे हमारी, मुश्किलें हमारी हल कर देंगे सारी,
    मगर ना था कोई चुनाव थी देश बंदी, इसलिए मुकर गए वह अपनी बातों से इतनी जल्दी,

    कई मील चले वह रोज सहायता की उम्मीद लेकर, कई फरिश्ते मिले उन्हें और कई चले गए उन्हें लूट कर,
    मंजिल कहां तक थी मालूम नहीं था बस चलते जाना था, आखिर उन्हें अपना परिवार बचाना था,
    कई पहुंच गए अपने आशियाने और कई रह गए बहुत दूर यूं ही असहाय और मजबूर।

  • कभी वक़्त मिले तो चले आना।

    शहर से काफी दूर- गाँव से थोड़ा करीब,
    शहर से काफी दूर- गाँव से थोड़ा करीब,
    एक मकान बनाया है,
    कभी वक़्त मिले तो चले आना इस मकान को घर बनाना है।

    मकान छोटा है वैस- मकान छोटा है वैसे,
    मगर आँगन में खुली हवाए बोहोत है।
    छत पुरानी है वैसे- छत पुरानी है वैसे मगर यहाँ के आसमान में सितारे बोहोत है।
    आधा-आधा बाँट लेगे आसमान- आधा-आधा बाँट लेगे आसमान फिर गिनेंगे सितारे,
    आधे तक़दीर के तुम्हारे- आधे तक़दीर के हमारे।

    उस भीड़-भाड़ वाली दुनियां से मिले तो कुछ वक़्त लेके आना-
    उस भीड़-भाड़ वाली दुनियां से मिले तो कुछ वक़्त लेके आना
    ख़्वाब चाहे हज़ार लाना मगर तुम अकेले ही आना।

    मैं हर शाम दहलीज़ पे बैठे तुम्हारा इंतजार करूंगा,
    मैं हर शाम दहलीज़ पे बैठे तुम्हारा इंतजार करूंगा,
    बस ज्यादा देर मत करना आने में,
    इस गाँव को भी शहर होने में।

    शहर से काफी दूर,
    गाँव से थोड़ा करीब,
    एक मकान बनाया है,
    कभी वक़्त मिले तो चले आना…

  • Bhaiya

    Bhaiya,
    Bahut yaad aata hai
    Woh ladna jhagadna
    Woh mere chid jaane par, Tera mujhe manana
    Koi kaam hone par Tera wo pyaar se awaj lagana
    Har choti baat par papa se keh dungi bolkar tujhe dhamkana!

    Bahut yaad aati h
    Teri meri pointless baatein
    Teri wo ankahi tareefein
    Tere saare sweatshirts dhapnse
    Toh tere secrets chupaane tak,

    Bhaiya, I need you with me infinity tak!

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