Category: Other

  • आज की कविताएँ

    ना रस है ना छंद है, अलंकार से हीन
    देखो कविता हो गयी, अब की कितना दीन
    2
    पाठक श्रोता दूर हैं, कवियों की भरमार
    हिंदी कविता दुर्दशा, जैसे हो बीमार
    3
    तुलसी सूर कबीर, के जैसे दिखे न भाव
    हिंदी कविता आज की, डूब रही है नाव
    4
    कविता का स्तर गिरा, खूब किया खिलवाड़
    पाठक श्रोता ने किया, अपने बंद किवाड़

  • जल संरक्षण

    वर्षा जल अनमोल है, सब अब करे प्रयास
    नदी कूप है मांगते, सावन भादौ मास
    2
    बनाए घर घर सोक्पीट, जल संरक्षण होय
    नैतिक जिम्मेदारियां, लेना है सब कोय
    3
    बिन पानी सब सून है, भर जाए जल श्रोत
    कम ना हो जल भूमिगत, सब हो ओत प्रोत

  • संस्कृति

    पराधीनता सुख नहीं, हो जाए आजाद
    अभी गुलामी मानसिक, अंग्रेजो की याद
    2
    अंग्रेजों की रीतियां, खूब रहे अपनाय
    अपनी संस्कृति देखिए, दिन दिन छुपती जाय

  • कर्जा

    कर्जा लेने की प्रथा, बहुत बुरी है जान
    कर्जा में डूबे और, तड़प तड़प दी जान
    2
    कर्जा ऎसा भार है, नहीं उतारा जाय
    दो पल की खुशियां मिले, जीवन भर पछताय

  • संघर्ष

    सच केवल संघर्ष ही, करता है इंसान
    जिससे बनती जगत में, है उसकी पहचान
    2
    हार जाय फिर भी नहीं, मन से माने हार
    कोशिश होनी चाहिए, जीवन मे लगातार

  • अपना हिंदुस्तान

    मानव भाए न गंदगी, चला स्वच्छ अभियान
    सबसे सुंदर बन रहा, अपना हिंदुस्तान
    2
    अपने हिंदुस्तान की चर्चा है चहुँ ओर
    सभी क्षेत्र में बढ़ रहा, आँगे आँगे शोर

  • उपकार

    धरती से आकाश तक, होती जय जय कार
    मानव तन जो पाय कर, करता है उपकार
    2
    करते जो उपकार है, उनके है भगवान्
    बदल नहीं सकते कभी, बदल जाय इंसान

  • किसान

    खेतों में दिनभर करे, खून पसीना एक
    मेहनत का पर्याय हैं, क्रषक काम अति नेक
    2
    कर्जा क्रेडिट कार्ड से, लेकर बोया धान
    ऎसा पड़ा अकाल की, डूबे सभी किसान
    3
    खेती है उत्तम मगर, पराधीन भगवान्
    खेती सुख मत मानिए, जानत सकल किसान

  • पुस्तक

    अद्भुत और विशाल है, पुस्तक का संसार
    सब कुछ मिलता है उसे, करता पुस्तक प्यार
    2
    ग्यानी की है आत्मा, भरा हुआ विग्यान
    गुरु के जैसे पुस्तकों, से ले सकते ग्यान
    3
    करते पुस्तक प्रेम जो, उनका बेड़ा पार
    अंधकार हरती सदा, शिक्षा का उपहार

  • दिमाग

    खाली छोड़ो खेत मत, उग आएगी घास
    खाली है मस्तिष्क तो, शैतानों का वास
    2
    भरते रहे दिमाग में, अच्छे सदा विचार
    मन प्रसन्न रहता तभी, सुख उपजे संसार

  • मैहर की मां शारदा

    मैहर की मां शारदा, ऊँचा पर्वत धाम
    बल बुद्धि विद्या दीजिए, जपते मां का नाम
    2
    मैहर की मां शारदा, महिमा अपरम्पार
    भक्तो पर करिए कृपा, आए तेरे द्वार

  • दोहे =संसार

    मेला है संसार ये, आते जाते लोग
    जीवन का मकसद नहीं, करना केवल भोग
    2
    राम नाम आधार है, लेकर होना पार
    क्षमा करो अपराध प्रभु, आए तेरे द्वार

  • भाई =दोहे

    भाई हो तो भरत सा, सब कुछ कर दे त्याग
    दुर्योधन की तरह जो, नहीं अलापे राग
    2
    भाई चारा सीखना, राम भरत को जान
    भाई के खातिर करे, अपने सुख का दान

  • दोहे =विग्यान

    बहुत बड़ा वरदान है, मानव का विग्यान
    नए नए होते जहाँ, सदा हि अनुसंधान
    2
    चाकू है विग्यान पर, मारो मत इंसान
    तब ही इसको कह सके, है अच्छा वरदान

  • आपदा =दोहे

    मानव निर्मित आपदा, आई आज अनेक
    बदलो अब व्यवहार को, कहता यही विवेक
    2
    आए जब जब आपदा, जान माल की हानि
    करे प्रबंधन मिल सभी, भारत के सब ज्ञानि

  • श्रद्धांजलि =दोहे

    कोरोना से वीरगति पाने वाले लोग
    आँखो के आँसू कहे, कितने थे अनमोल
    2
    उजड़ गए परिवार जो, दुख ये कहा न जाय
    अर्जुन सा श्री कृष्ण अब, हमको दो समझाय

  • गीता उपदेश =दोहे

    गीता का उपदेश है, कर्म रखो अधिकार
    अजर अमर है आत्मा, ईश्वर का उपकार
    2
    अर्जुन अपना काम कर, करो न सोच विचार
    निर्धारित सब कुछ यहां, ईश्वर का संसार

  • दोहे =पवन पुत्र

    सुरसा सा मुह खोलती कई समस्या आज
    पवन पुत्र अब आय कर, करो राम के काज
    2
    पवन पुत्र विनती करे, भक्त सभी कर जोड़
    आओ फिर से पापियों, नशे दीजिए तोड़

  • दोहे =अच्छे भाव

    आए अच्छे भाव जब, सुख उपजे सब ओर
    सुंदर सब लगने लगे, जैसे वन से मोर
    2
    मेरा मेरा मत करो, भूलो ना उपकार
    तन मन धन जो कुछ मिला, ईश्वर के अवतार

  • दोहे =दुनिया

    दुनिया है सुंदर बहुत, रचना है भगवान्
    कैसे तू सुख पाएगा, कमी देख इंसान
    2
    अच्छाई को ग्रहण कर, शिक्षक सकल जहान
    कमियों पर पर्दा पड़ा, कैसे हो कल्याण

  • दोहे =भाई चारा

    ईर्ष्या करके मत जलो, तज दीजय अभिमान
    क्रोध लोभ से दूर मैं, हो जाऊं भगवान्
    2
    भाईचारा खेत में, चलिए मन हे आज
    सुख पाओगे बहुत तुम, और करोगे नाज

  • हरी डाल

    वर्षा ऋतु में हो रही, गर्मी की वर्षात
    हरी डाल मत काटिए, ऋतु कहती है बात
    2
    हरी डाल पादप कहे, सब कुछ करता दान
    मुझसे कर ले दोस्ती, सुखी रहे इंसान

  • दोहे =पर्यावरण

    प्रकृति संतुलन बिगड़ता, आते बाढ़ अकाल
    संरक्षण पर्यावरण, कर लीजै तत्काल
    2
    दूषित पर्यावरण है, कहत पुकार पुकार
    जीवन की रक्षा करो, आदत मनुज सुधार

  • धैर्य =दोहे

    आया है संकट बड़ा, धैर्य धरे इंसान
    सच्चाई का सामना, करना है बलवान
    2
    धैर्य परीक्षा होत है, सदा ही आपत काल
    विचलित होना है नहीं, बाल न बांका हाल

  • उपहार

    सब धर्मो का सार है, दया, त्याग, उपकार
    मानव जो रक्षा करे, ये तीनो उपहार
    2
    सत्य, अहिंसा, ग्यान, है, आवश्यक अति जान
    अपना कर इनको सदा, बनते हैं इंसान

  • दोहे =भारत

    सत्य अहिंसा प्रेम है, भारत माता शान
    देते दोनों शक्ति है, फौजी और किसान
    2
    भारत ने दुनिया किया, सदा बड़ा उपकार
    शांति पक्ष लेता रहा, चले नहीं तलवार

  • युद्ध =दोहे

    विश्व शांति हो हो जाय अब, बुद्ध होय चहुँ ओर
    सुख की वर्षा होय तब,मन ज्यूँ वन का मोर
    2
    युद्ध नहीं समाधान है, समस्याओ का जान
    चाहे गीता भगवात, चाहे पढ़े कुरान

  • कहर =दोहे

    सूनी सूनी सड़क है, सूना है संसार
    पतझड़ जैसे पतन है, विलख रहे परिवार
    2
    घर में कैदी की तरह, जीवन रहे विताय
    कहर भयानक है बहुत, कुछ भी समझ न आय

  • दोहे =नारी

    अबला नहिं सबला हुई, घर से पंख पसार
    बैठी है सर्वोच्च पद, देख रही संसार
    2
    नारी से दुनिया चले, नारी है बलवान
    पूजा होती है जहां, रहते हैं भगवान्

  • सुझाव

    आप लोगो से अनुरोध है की सावन मंच एक बार सभी कवियों का परिचय समारोह का आयोजन करे
    ताकि सभी सदस्य एक दुसरे के बारे में जान सके तथा साहित्य में कौन कितना योगदान दिया है यह भी जान सके
    1- जीवन परिचय
    2- साहित्य परिचय
    3- आपकी रचनाएँ ग्रंथ
    4- पुरस्कार, उपाधि
    इत्यादि चीजें सावन मंच पर उपलब्ध कराएं

    अगर किसी को दुख हुआ है तो माफी चाहता हूं 🙏

  • दोहे =बुरे दिन

    बुरे दिनों में ही सदा, आए ईश्वर याद
    बांकी दिन करता नहीं, मन ईश्वर फरियाद
    2
    सदा बुरे दिन नहिं रहे, सुख की कीमत जान
    बुरे दिनों से जुड़ गया, है रिश्ता भगवान्

  • छंद सोरठा =ईश स्मरण

    मत करियो अभिमान, रावण का जब नहिं रहा
    मन सुमिरो भगवान्, जीवन की मंजिल वही
    2
    दशरथ नंदन राम, मन मंदिर में आय कर
    आप दया के धाम, दूर करो चिन्ताए सब

  • ईश्वर के द्वार

    जाओ ईश्वर द्वार पर, मांगो मत वरदान
    तन मन धन सब कुछ करो, प्रभु चरणों में दान, सभी कुछ देकर गाओ
    कर्ता है भगवान्, आप अभिमान मिटाओ
    कह पाठक कविराय, पारिस्थित जैसी पाओ
    भाव रखो संतोष, ईश दरवाजे जाओ

  • रोला छंद

    कब से है बेकार, कोरोना पंगु बनाया
    कुछ करिए सरकार, बहुत है मन घबराया
    भगवन के भी द्वार, किसीने बंद कराया
    व्याकुल है संसार, घरो मे आज समाया

  • सोरठा छंद

    अब जैसे असहाय, कभी नहीं पहले हुए
    कोई लेव बचाय, कोरोना यमराज से
    2
    उजड़ रहे परिवार, कहाँ गए भगवान् तुम
    रोता है संसार, वैग्यानिक विचलित दिखे

  • कोरोना

    शरीर है कैद
    मन भटक रहा है
    कोरोना मानवता को
    गटक रहा है
    अस्पतालों में मानव
    शिर पटक रहा है
    गलियों मे पुलिस वाले
    कहां भटक रहा है
    काल ज्यूँ दरवाजे में
    लटक रहा है
    हाथ पाव हाथकड़ियां
    मन चटक रहा है
    राम जाने कब जाए
    कोरोना खटक रहा है

  • बरसात के दोहे

    मेघ सुधा जल बरसते, धरती शीतल होय
    मेढक गाते गीत औ, व्याकुलता दे खोय
    2 काले काले मेघ तब, जल ले वसुधा पास
    गरज चमक मानो कहे, बुझाओ अपनी प्यास
    3
    जल स्रोतों को कर रहे, बादल जल का दान
    सुखी हुए सब मीन सा, क्रषक उगाए धान

  • भारत माता

    माता भारत कथन है, मिलजुल रहना सीख
    दुश्मन हमले कर रहा, सुन ले शरहद चीख
    सुन ले शरहद चीख, देश के वीरो आओ
    गांधी भगत सुभाष, धरोहर सभी बचाओ
    कह पाठक कविराय, संघ का लेकर छाता
    बरस रहा आतंक, बचाओ भारत माता

  • सब धर्म समान

    अपना तो एक धर्म है, पर सबका सम्मान
    करने में सुख निहित है, ईश्वर एक समान
    ईश्वर एक समान, छोटा बड़ा न कहिए
    संविधान निरपेक्ष, सदा मर्यादा रहिए
    कह पाठक कविराय, रहा बापू का सपना
    अनेकता में एक भाव दे भारत अपना

  • मानवता

    मानव ही दानव बने, औ बनता भगवान्
    मानव तन अनमोल है, मानवता है प्राण
    मानवता है प्राण, धार्मिक झगड़े छोडो
    ईश्वर सागर मान, नदी अवतार है जोडो
    कह पाठक कविराय, एक उन्माद है दानव
    ईर्ष्या नहीं सद्भाव, जोड़िए सब को मानव

  • बेकारी

    बेकारी उत्पन्न हो, जब जनसंख्या बुद्धि
    सीमित संसाधन नहीं, सबको सुख समृद्धि
    सबको सुख समृद्धि, स्ववलंबी बन जाओ
    कर दो लज्जा त्याग, नहीं बेकार कहाओ
    कह पाठक कविराय, जीत हो जाय तुम्हारी
    छोटा बड़ा न काम, करे जाए बेकारी

  • बूढ़े और बच्चे

    बच्चे बूढ़े एक से, दोनों को दे प्यार
    दीपक हैं परिवार के, करते हैं उपकार
    करते हैं उपकार, जरूरत इन्हे तुम्हारी
    रखना सदा प्रसन्न, उठाओ जिम्मेदारी
    कह पाठक कविराय, ये दोनों दिल के सच्चे
    भूतकाल में वृद्ध, व भावी होते बच्चे

  • कुण्डलिया छोटा परिवार

    छोटा हो परिवार अब, रखना इसका ध्यान
    जनसंख्या तलवार सी, निकल रही है म्यान
    निकल रही है म्यान, समस्या होगी भारी
    धरती का विस्तार, न होगी मारामारी
    कह पाठक कविराय, शपथ लो जल ले लोटा
    हम दो के दो चार, नियोजन से हो छोटा

  • एटम बम की होड़

    दुनिया के सब देश मे, एटम बंब की होड़
    शांति संधि सब शर्त को, पल में देती तोड़
    पल में देती तोड़, बड़ा खतरा है भाई
    होगा दुनिया अंत, होड़ है ये दुख दाई
    कह पाठक कविराय, कुल्हाड़ी पैर न मारो
    दुनिया के सब देश, स्रजन की होड़ सुधारो

  • बरसात

    गर्मी ऋतु के बाद मे, आती है बरसात
    धरती उगती घास औ, तरु में आते पात
    तरु में आते पात, दामिनी चहुँ दिश चमके
    गिरती जल की बूँद, गगन में बादल दमके
    कह पाठक कविराय, पवन शीतल सुखदाई
    भर जाते जल श्रोत, गर्मी बाद मे आई

  • कुण्डलिया नारी वंदना

    नारी के सब रूप को, वंदन बारंबार
    जो करती सत्कर्म से, दोनों कुल उजियार
    दोनों कुल उजियार, सती श्री वीणापाणी
    ममता करुणा मूर्ति, जगत की है कल्याणी
    कह पाठक कविराय, आरती करे तुम्हारी
    हरण करो अग्यान, बचाओ जग को नारी

  • कुण्डलिया काम करो

    करो काम भगवान् का, रखकर हरपल ध्यान
    सब जीवों के ह्रदय में, बसते हैं भगवान्
    बसते हैं भगवान्, दिखावा नहीं जरूरी
    रक्षक बन ईमान, आवश्यकता कर पूरी
    कह पाठक कविराय, प्रेम से खाई भरो
    सब में ईश्वर अंश, सभी से तुम प्रेम करो

  • कुण्डली संचार साधन

    बच्चे बूढ़े युवक सब, ले साधन संचार
    अपनो से हुए दूर औ, तस्वीरों से प्यार
    तस्वीरों से प्यार, बढ़ी संवाद हीनता
    मोबाइल मन लीन, ऊर्जा रहा छीनता
    कह पाठक कविराय, सभी उपकरण हैं अच्छे
    सीमित करे प्रयोग, युवक औ बूढ़े बच्चे

  • कोरोना महामारी पर आल्हा(२)

    घर की फुलवारी उजड़ गयी,सब गलियां सूनी हुई जांय,
    हंसी ठिठोली अपना सुनावे,सुनने को कान तरस है जाय,
    इस महामारी से बचने को एकै उपाय यही सुझाय,
    दो गज दूरी मास्क जरूरी, सब जन लेव नियम अपनाय,
    वैक्सीनेशन करवा लेव भइया,अपना भविष्य तुम लेव बचाय,
    करौ प्रार्थना अपने ईश्वर से,महामारी से हमको निजात दिलाय,
    डर दहशत से हम सब उबरे,
    अच्छे दिन फिर जल्दी आंय।।

  • कोरोना महामारी पर आल्हा

    कोरोना महामारी आयी हाहाकार है दियो मचाय,
    अंतर्मन चित्कार करें अब,कैसी दहशत दियो फैलाय,
    ज़रा सी खांसी और जुकाम से,पल में अपने दूर हुइ जांय,
    बुखार चढ़े ज्यों सौ से ऊपर,घर में क्वारंटाइन हुई जांय,
    कोरोना महामारी आई हाहाकार है दियो मचाय,
    घर की फुलवारी उजड़ गयी,सब गलियां सूनी हुई जांय,
    हंसी ठिठोली अब ना सुनावे,सुनने को कान तरस है जाए

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