आओ बच्चों तुम्हें सिखाए कविता लिखने की कला। कुछ शब्दों को ध्यान में रखो मिल जायेगी काव्य कला।। कल खल गल घल -घल घल । चल छल जल झल -झल झल।। डल ढल डल टल […]

टिम टिम करते लाखों तारे *********************** टिम टिम करते लाखों तारे। देखो लगते कितने प्यारे।। सुन्दर आकास सजा है ऐसे। हीरे-मोती से थाल भरा है जैसे।। बैठ के अंगना सदा निहारूँ। एक भी मोती कभी […]

लेख:- ‘ब्राण्डेड बुखार’ आजकल हर व्यक्ति अपने निजी काम को बहुत ही अच्छे ढंग से करने मे विश्वास रखता है। सबसे ज्यादा ध्यान तो इस बात पर रहता है कि हम अच्छा खाये,पिये और पहने। […]

बीत जाएगा यह वक़्त भी वक़्त कभी थमता नही अगर थमता तो वक़्त कहलाता नही एक दिन यह वक़्त इतिहास बन जाएगा इतिहास दोहराया जाता है इतिहास दोहराया जाएगा वक़्त कभी थमता नही यह वक़्त […]

वही रचेगा नया रचना जो पढ़ेगा किसी का रचना ————————- माना कविता लिखना होता है ईश्वरीय वरदान लेकिन कवि भी होता है एक प्रकार का हरि का खास संतान ——————————————————————- राम भक्त विकास कुमार

यदि पढ़ोगो मन से किसी का कविता तो जरूर मिलेगा कुछ नया सीखने का संदेशा ————————————————— कवि सिर्फ वहीं नहीं है, जिन्हें इस धरा की शान मिली है कवि तो वो है, जिसको उसने मान […]

vikashkrkamti4576@gmail.com मेरे लिए इतना काम करो मेरे दोस्त अपनी मौलिक रचना हमे EMAIL (vikashkrkamti4576@gmail.com) पर भेजो मेरे दोस्त — MOBILEमें चलती नही मेरे SAAWAAN REDEFINING POETRY APP LAPTOP में DATA की होती जाती है कमी, […]

पूरा जरूर पढ़े, मैं विकास कुमार, मोबाल सैमसंग जेड 2 , जिसमें सावन ऐप काम नहीं करता, हम अभी LAPTOP से लिख रहे हैं । हम समूह में एक्टिप नहीं रह पाते, क्योंकि LAPTOP तो […]

अनोखाजी चले बाजार। टौर से हो फटफटि सवार।। साथ में चली श्रीमति जी। चहक रहे थे आज पतिजी।। कितने अच्छे हैं टमाटर। आओ खरीदे साथ मटर।। क्या यार तुम भी हद करती हो। क्या फिर […]

कृष्णा जी की प्यारी ,राधा न्यारी बसो मोरे मन मन्दिर बिहारी,संग वृषभानु दुलारी तुम बिन कोई ना ठौर हमारी, जाऊँ बलिहारी पल पल याद करूँ त्रिपुरारी, आऐ शरण तिहारी कृष्णा जी की प्यारी, राधा न्यारी […]

लेख:- ‘मातृभाषा एकमात्र विकल्प’ मनुष्य ही एकमात्र ऐसा प्राणी है जो अपनी बात दूसरों तक पहुँचाने के लिये भाषा का प्रयोग करता है। वह अपनी बात लिखित,मौखिक व सांकेतिक रूप मे दूसरे तक प्रेषित करता […]

मार्गशीर्ष मास अतिपावन। उत्पना व मोक्षदा सुहावन।। सफला अरु पुत्रदा एकादशी। पौष मास मह बहु सुखरासी ।। षटतिला अरु जया बड़नामी। माघ मास के उत्तम फलकामी ।। विजया आमलकी फागुन मास। पापमोचनी कामदा मधुमास।। बरुथिनी […]

बड़ी अजीब है ये घुँघरू। बन्धे जब दुल्हन के पैरों में बड़े खुशनसीब है ये घुँघरू।। झनकती जब ये कोठों पर बड़े हीं गरीब हैं ये घुँघरू । बांध के किन्नर भी नाचे पर बदनसीब […]

आज नारी के पास क्या नहीं है। फिर भी पुरुष उसे अपनों से कमजोर ही समझ रहे है।जबकि,आज हमारी सरकार नारी के प्रति तरह तरह के शिक्षा दे कर पुरुष के मुकाबले में खड़ा करने […]

एक तो शीतलहर दूजा बेगाना शहर। फिर भी अटल रहेंगे हम किसान धरने पर।। हम क्यों माने हार बंधु हम तो हैं अन्नदाता जग में। पेट चले संग फैक्टरी चले व्यापार पले अपनी पग में।। […]

ममता मूल दुखद तरुवर के ,नैनन नीर बहावे। निर्मोही जड़ जीव जगत में ,सुख सरिता बहावे।। श्वान शुका अजशावक जे , मरत मूढ़मति आवे। निश-दिन मूषक मरत बथेरे, केहू ना दुख मनावै

ममता मूल दुखद तरुवर के ,नैनन नीर बहावे। निर्मोही जड़ जीव जगत में ,सुख सरिता बहावे।। श्वान शुका अजशावक जे , मरत मूढ़मति आवे। निश-दिन मूषक भरत बथेरे, केहू ना दुख मनावै।।

लेके छठी मैया का प्रसाद हम आए आज सावन पे। मैया का गाए गुणा नुवाद देखो आज सावन पे।। जीवन में ना होवे विषाद अपने प्यारे सावन पे। कृपा प्रसाद रहे आबाद अपने प्यारे सावन […]

सुस्वागतम् पाण्डेयजी क्या आप में आकर्षण है मंच पर आने से सिर्फ सावा घड़ी पहले खींच लिया मेरे दिल से कविता। बीत गई वो रातें काली नव प्रभात ले आया सविता।।

प्यार दूर की बात सम्मान कभी सपने में भी ना सोचूं तुम तो देखने से भी कतराए देख कर नज़र फेर ली फिर कहते हो मेरी दुआओं मे बड़ी ताकत हैं जल्दी कबूल हो जाती […]

जितने बदले नंबर तुमने —————————— जितने बदले नंबर तुमने हर नंबर तेरा मिल सकता , स्वाभिमान है बीच में आता है, क्योंकि तुने ही मुझे ठुकराया है, मत सोच हमें कोई नहीं मिल सकता, पहले […]

यादों में रहेगी —————— बेचैन सा रहता हूं, बन पागल फिरता हूं, मिल जाए मुझे पुनः, हर रोज दुआएं करता हूं, मान दी हमने कई मन्नते, कभी मस्जिद में भी चादर चढ़ाया करता हूं, खुदा […]

तकिया ————- रोती रही कईयों दिन तक, दोस्त खबर भी देते रहें, हम भी रोते घर बैठे, जब कोई पूछे हाल मेरा, झूठी हंसी दिखाते रहें, कब सोया कब जागा हूं, मैं जानू या रात […]

भूल नहीं सकते ———————– भूल नहीं सकते वो रातें, वो मनहूस घड़ी थी या मेरी किस्मत फूटी, एक नादानी से जंग छिड़ी, जब से बिछड़े ना कभी मिले, कॉपी में ढूंढ रहा हूं नंबर उसका, […]

है गम नहीं कि, खर्च हो रहा हूँ, जिंदगी के सारे, मर्ज ढ़ो रहा हूँ, ज़रा मुगालते में था अब तक। अब सिर्फ अपने, सपने जी रहा हूँ.

लतड़ पतड़ स्यां स्यां बल लतड़ पतड़ स्यां स्यां हाई रे मेरी फ्वां फ्वां नोना बेरोजगार छन अभी नि आई कालो धन लतड़ पतड़ स्यां स्यां बल लतड़ पतड़ स्यां स्यां मंत्री जी की गाडी […]

कोराना से बल सबुकी हालत पस्त हुयीं च देश की अर्थब्यवस्था की भी हालत खस्त हुईं च रोजी रोटी कु जुगाड़ ह्वो न हो पर, दरोल्यों की एसूं दों बल फ्वां फ्वां हुयीं च सरकिर […]

कौन कहता है कि अपने उज्जल भविष्य हेतु सपने देखना या कल्पना करना गलत है? सपने देखो और जरूर देखो, अपपे उज्जवल भविष्य की कल्पना करो और ऐसी कल्पना करो जो दूसरों को तो क्या […]

पुरुष नारी से हर एक क्षेत्र में पीछे है देने में भी और लेने में भी| कैसे?? ————————————— नारी ममता, प्रेम और त्याग देती है अपने रिश्तों को बनाए रखने के लिए…. पर वही नारी […]

खूबसूरती चकाचौंध में नहीं मन में होती है इसीलिए कभी कोई चीज बहुत खूबसूरत लगती है तो कभी वही चीज बुरी भी लगती है… —————————————- आपने देखा होगा जब भूख ना लगी हो तो छप्पन […]

उसके आँसू का संचय कर ईश्वर समंदर रचता है। प्रतीक्षा की पावन अग्नि में वो आहुतियों सा जलता है…!! जिसकी उदासी के रंग में ढलकर हुई ये रातें काली हैं, बीतें लम्हों की सोहबत में […]

कभी दिशा, कभी निर्भया,कभी मनीषा ,नन्ही बच्ची कोई, बस नाम अलग-अलग,कहानी सबकी एक, हर घड़ी डर का साया, ना जाने मर्द तुझे किस बात का घमंड है छाया, अबला होने का हर रोज एहसास करवाते […]

ओ कवि, जरा सम्भल कर लिखना यह कविता नही परछाई है तेरी आत्मा का प्रतिरूप यह तेरे अन्दर छिपी भावनाओं की प्रतीक है अच्छे या बुरे उजागर हो जाओगे फिर दुराव- छिपाव ना रख पाओगे […]

क़भी कोख़ में ही मार डाला उसे, कभी काट के फेंक दिया खलिहानों में!! कभी बेंच दिया उसे देह के बाज़ारों में , क़भी सरेराह नोचा सड़कों और चौराहों पे!! जब जी चाहा पूजा देवियों […]

सिक्के के दो पहलू समालोचना और आलोचना मन-पल्लवित होता सुन समालोचना वही रचना में आता निखार सुन आलोचना स्वीकारो ह्रदय से दोनों को एक समान यही बने कवि की सही पहचान।

कभी कभी मेरे मन के अंधेरे कमरे में न जाने किस झरोखे से चले आते हैं जुगनुओं से झिलमिलाते विचार…!! मैं अपना हाथ बढ़ाकर कोशिश करती हूँ उन्हें छू लेने की और वे छिटककर आगे […]

समर्पण:- जबरदस्ती या प्यार कोने में दुल्हन बनी मै खड़ी थी, हाथों में सिंदूर की डिबिया पड़ी थी, वक्त था मेरे घर से विदा होने की, छोड़ सब सखियां को जाने की बेला हो चली […]

अरे भाई,चुनाव का वक़्त आया है , क्या करना है? कुछ भी करो, धर्म-धर्म खेलो, जाति-जाति खेलो, औरत संग अनाचार करवा लो, हर दुखती रग पर नमक डालो, बस चुनाव नही हारना है।