एक स्त्री कि व्यथा को बचपन से गृहस्त जीवनी को दर्शते हुए सुंदर कविता… मैं अकेली परी सी बनी  माँ के कर्मों कि बुनी घर काम को करती  सही किताबों को पड़ती  कभी एक दिन होगायी बड़ी  ब्याह को राज़ी ख़ुशी फिर उठी डोली कही  ससुराल ने समझा नहीं  बिन सहारे रोती फिरी  प्रेम मोह से लड़ती रही  ईश्वर ने प्रथना सुनी  संतान से झोली भरी  दर्द भरी कहानी मेरी आँसू जैसे नदी बहीं जीवन मेरा कही अंकही.

ये सोच ही है जो जुबान से शब्दों के रूप में कही जाती है ये सोच ही है जो इंसान को एक दूसरे से अलग बनाती है। ये सोच ही तो है जो लोगों में […]

अंधेरी रात में जब सब कुछ शांत था मन की एक चीक जो सुनाई दे रही थी जो मुंह से निकल नहीं रही थी। वो आंसू जो बहार नहीं आ रहे थे दुख बनकर अपने […]

अजनबी कविता आवाज़ User Give me a Hindi poem that has never been published ChatGPT Here’s a Hindi poem for you: एक धूप चांदनी की कहानी, मैंने छोड़ी थी रस्ते की परवाही। सुबह की उठती […]

एक वक्त था जब लगा की जिंदगी का ये सफर सही पटरी पर है.. ये कहां पता था जिस वक्त में ये सोच रहे थे वो वक्त भी अपना ना है.. वक्त गुज़र गया ज़िंदगी […]

तू ले चल वहां जहां सितारों की चादर पर बादलों का पहरा ना हो । मुसाफिर-ए-दिल इस इश्क के सफर में हार कर ठहरा ना हो || जहां कई वादियां लाजवाब बेमिसाल हो । सुकून […]

वक्त बदला हे के नही सावान अक्सर जांचता है। फूलों से अपना स्वागत आन शान से करवाता है। तैयार होते है झूले सावान का सिंघासन बनने के लिए। बादल गरजते है जोरो से अपनी हाजरी […]

कहीं दूर किसी नदी किनारे, दो पल को बैठना है मुझे। सारी उलझन को धुआं बनते देख, चैन से दो पल रुकना है मुझे। सांसे जब घुटन का पिंजरा बन जाए। बेईमान तकदीर जब ताला […]

Maa tumne hi sbkuch sikhaya hai… Sahi Galt kya hai ye tmne hi to bataya hai ….. Khelaya hai,hasaya hai, pyar se tmne hi to apne goad me sulaya hai….. Kabhi daraya hai kabhi sataya […]

1.) क्या मैं सिर्फ ‘मैं’ नहीं रह सकता? दूसरों के लिए मरते-मरते जीना, मैं नहीं सह सकता। अपने ख्याल, अपने वसूल क्यों मुझ पर लाद देते हो तुम क्या देख नहीं सकते, जिंदगी भुनती चली […]

धूप की किरणों से भरी एक सुबह, खिल उठती है फूलों की फुहार। मन में उमंगों की लहर लहराती, गाती है प्रकृति का मधुर संगीत प्यार। वन के पेड़ों में हंसते फुलों की डाल, मन […]

प्रेम की भाषा, ना स्वरूप ना रूप बस एक भाव! जो कभी हमने जाना, पर कभी जाना ‘ही’ नहीं। प्रेम की माया, प्रेम की काया,तुमने भी सीखी और हमने भी पढ़ी, पर पढ़ कर भी […]

प्रेम की भाषा, ना स्वरूप ना रूप बस एक भाव! जो कभी हमने जाना, पर कभी जाना ‘ही’ नहीं। प्रेम की माया, प्रेम की काया,तुमने भी सीखी और हमने भी पढ़ी, पर पढ़ कर भी […]

ज़िन्दगी का एक अभिन्न अंग है वो कहलाता, हर किसी को लगता प्यारा दोस्ती का नाता || किंतु एक सच्चा दोस्त ही है दोस्ती को सार्थक बनाता, जिसके बिना मुश्किल लगता है जिंदगी का गुजारा […]

तुम्हें अंदाजा भी है तुम क्या किए जा रहे हो रोज हमें अंत के करीब लिए जा रहे हो हे मानव! क्या तुम्हें समझ है, क्या तुम्हें पता नहीं प्रकृति पर किसी का जोर नहीं, […]

एक दिन सपना नींद से टूटा खुशी का दरवाजा फिर से रूठा मुड़ कर देखा तो वक्त खड़ा था जिंदगी और मौत के बीच पड़ा था दो पल ठहर के मेरे पास वह आया पूछा […]

दिल से…. दिल से बोलूँ इक नगमा, जो सपनों को पंख दे दे धरा। बाँहों में ले लूँ उड़न की बहार, जहां चमके नये सवेरे की किरण नजर आये। हर दिल की धड़कनों का मेल […]

खाना एक संगीत हैं, और भारत उसका स्वर, उत्तर से दक्षिण, पूर्व से पश्चिम तक यहां प्यार फैला हर जगह। यहां के रसोईघर में छुपा हैं भारत का अनोखा सौंदर्य, ये भोजन बहुमुखी संस्कृति की […]

हे आज भी याद , मेरे रूठ जाने पर तेरा वो मनाना, मेरी ज़िद न खाने की और तेरा वो हाथ पकड़ कर खाना खाने ले जाना!! है आज भी याद , तेरा वो मुस्कुराते […]

जिंदगी बहुत नादान है ये सोचा था ये सोचने के बाद भी में बहुत रोता था जिंदगी एक लतीफा बन गई एक पल की खुशी आशु में बदल गई रास्ते तो बहुत हैं पर किसी […]

पूछा एक मां से कि क्योंं इन नन्हे पैरों को तकलीफ दे रहे हो, क्यू इन नन्हे हाथों को काम की बेड़ियों में बांध रहे हो , वह कहती मजबूरी है साहब , नहीं रहे […]

शहर से काफी दूर- गाँव से थोड़ा करीब, शहर से काफी दूर- गाँव से थोड़ा करीब, एक मकान बनाया है, कभी वक़्त मिले तो चले आना इस मकान को घर बनाना है। मकान छोटा है […]

हर एक इंसान के चेहरे को पढ़ लेना, हर किसी के बस की बात नहीं। निज स्वार्थ से ही फुर्सत नहीं मिलती, ठहर जाता मन स्वयं पर ही। स्वरचित एवं मौलिक –✍️ एकता गुप्ता*काव्या*

चैत्र नवराते आए, खुशियां अपार लाए, नवरुप अंबे मां के, जयकार कीजिए। प्रथम दिवस आए, शैलपुत्री मन भाए, कैलाशवासिनी अंबे, दर्शन दे दीजिए। कमल त्रिशूल धारी,करे वृषभ सवारी, श्रद्धा सुमन अर्पित, मां स्वीकार कीजिए। मोक्षदानी […]

लक्ष्य को पाने के लिए अर्जुन सी निगाह होनी चाहिये मछली चाहे जितनी बड़ी ही क्यों ना हो सिर्फ आँख पर निगाह होनी चाहिए

जिस दिन हिंदुत्व का परचम उस अम्बर पर लहराएगा उस दिन भारत की धरती पर श्री राम राज्य आ जाएगा ।। जिस दिन बदला लिया जाएगा चन्दन की कुर्बानी का हर नारी में रूप दिखेगा […]

बहुत गुस्सा भर जाता है अन्दर जब मेरी माँ बोलती हैं पति मारे भी तो क्या: पत्नी को उस पर हाथ उठाना नहीं चाहिए। मेरे पति तो मुझे कितना मारते थे क्या कभी साथ छोड़ा […]

दर्द में मेरी जीभ मेरी नहीं होती,‌।फिर तुम तो कहीं बाहर से आये मेरी जिन्दगी में,।न सोचना तुम्हें सोचती हूँ ,मैं,तुम्हें माथे पर रखा ,खुद को बहुत कोशती हूँ ,मैं,,।।कविता पेटशाली 💔💔💔💔💔💔💔

विधा– नारा लेखन* 🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱 वसुधा को बनाएं फिर से रत्नगर्भा हम आओ फिर से वृक्ष लगाएं हम। 🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱🌱 सिर्फ एक दिन ही वृक्ष लगाने से न पूरा होगा कर्तव्य पर्यावरण और हरित धरा बचाने को […]

बस्सी पठाना पंजाब के पंडित विनय शास्त्री ‘ विनयचंद ‘ को काव्य रत्न और गोल्डेन बुक आॅफ वल्ड रेकार्ड से सम्मानित करते हुए डाॅ हरिसिंह पाल ने कहा कि एक साहित्यकार ब्रह्माजी होते हैं जो […]

अन्तर्राष्ट्रीय शब्द सृजन संस्थान गाजियावाद के तत्वावधान में आयोजित भारत रत्न विजेताओं के जीवन पर आधारित कालजयी ग्रंथ भारत के भारत -रत्न के भव्य लोकार्पण समारोह नई दिल्ली के हिन्दी भवन में विगत 15 मई […]

(3) दूसरों के घाव देखने वाले कभी अपने घाव नहीं भर पाते।।1।। वर्तमान हि सब – कुछ हैं भूत वासना का घर और भविष्य चिन्ता का जंगम हैं ।।2।। जो आंतरिक दुश्मन से लड़ते हैं […]

(3) दूसरों के घाव देखने वाले कभी अपने घाव नहीं भर पाते।।1।। वर्तमान हि सब – कुछ हैं भूत वासना का घर और भविष्य चिन्ता का जंगम हैं ।।2।। जो आंतरिक दुश्मन से लड़ते हैं […]

(2) लिखने मात्र से कुछ न होगा उसपे चलना तुम्हारी कवित्व को निखारेगा।।1।। सारी कृतियां समय व प्रस्तिथि कि देन हैं लोग अहम् – भाव के कारण अपना समझ बैठे हैं ।।2।। एक से अनेक […]

कीचड में ही कमल खिलता हैं, लेकिन ऊपर नीचे नहीं ..1.. बिषयाशक्त पुरुष खुश रह नहीं सकता और निराशक्त को दु:ख छू नहीं सकता ..2.. इंद्रियों का रुख , यदि सात्विक हैं। तो पूरी कि […]