दाद

June 15, 2020 in मुक्तक

दाद देता हूं आपके परख को,
सलाम करता हूं आपके समझ को।
आप समझ लेती है इशारों इशारों की बातें,
बड़ी शातिर है परखने में लोगों को,

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

रावण का अंत

June 15, 2020 in मुक्तक

रावण का अंत करना है तो,
घर के वीभीषण को ढूंढ़ो ।
सच्चाई पर विजय पाना है तो,
अपने अंदर के अवगुणों को ढूंढ़ो।।

✍ महेश गुप्ता जौनपुरी

मुफ्त पर आश्रित

June 15, 2020 in मुक्तक

मुफ्त पर आश्रित है देश के बेईमान,
अपना जेब भरने के लिए बेंच दिये इमान।
माला पहन ईमानदारी का करते है ढ़ोंग,
ऐंसे धूर्त पुरुष को करते है दूर से नमन।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

कर्म

June 15, 2020 in मुक्तक

कर्म हमेशा करते रहना,
धर्म का देना सदैव तुम साथ।
हे पावन धरा के वीर सपूत,
वीभीषण को रखना तुम साथ।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

अन्याय

June 15, 2020 in मुक्तक

अन्याय जब हद से बढ़ने लगे,
नारी का हरण कलुषित पुरुष करने लगे।
धर्म का विभीषण जन्म तब हैं लेता,
जब पाप अमृत कुंड का विकास होने लगे।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

विनाश

June 15, 2020 in मुक्तक

विनाश का जब जब पहरा होता है,
तब तब एक दिव्य पुरूष अवतार लेता है।
कृष्ण कन्हैया प्राण हर लेते है मामा का,
विभीषण भाई का साथ छोड़ देते है।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

आशा की किरण

June 15, 2020 in मुक्तक

आशा की किरण देख मुस्कराते रहें,
अपनों को गले लगा गला दबाते रहें।
विश्वास में लेकर इमान का करते रहें सौदा,
अपना समझ अपने को मौत के घाट उतारते रहें।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

कुलक्षित विचार

June 15, 2020 in मुक्तक

सर पर जब छा जाता कुलक्षित विचार,
मानव करने लगता दुसरो पर अत्याचार।
धन दौलत के ऐंसो आराम में अंधा होकर,
तनिक नहीं करता वह अच्छे बुरे पर विचार।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

हैवानियत

June 15, 2020 in मुक्तक

टूट कर बिखर रहा आज रिस्ता हर मोड़ पर,
हैवानियत का शिकार हो रहा बेकसूर बेचारा।
धर्म मोह को त्याग कर कर रहें अपराध,
सत्य को बचाने को बचा नहीं कोई सहारा।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

रिश्ते में मतभेद

June 15, 2020 in मुक्तक

रिश्ते में मतभेद जब हद से ज्यादा हो जाये,
अहमियत अपनों का जब कर ना पाये।
जब नारी का इज्जत का चीर हरण होने लगें,
तब एक महाभारत की लड़ाई होने को आये।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

लश्कर में ऊंट

June 15, 2020 in मुक्तक

खुद पर लोग पर्दा डाल रहे हैं,
दुसरो को लोग बेनकाब करने में लगे हैं।
खामखा लश्कर में ऊंट बदनाम हो रहा,
लोग यहां कौवे को कोयल समझ रहे हैं।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

बदनामी

June 15, 2020 in मुक्तक

बदनामी के डर से भाग ना जाओ,
भागने वाले को दोषी मानती दुनिया।
उठो लड़ो और अपना पहचान बनाओ,
नहीं तो बदनाम कर देगी ये दुनिया।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

भेष बदलकर बैठा

June 15, 2020 in मुक्तक

कौआ कब तक कोयल बनकर मौज करेगा,
अपने सारे अय्यासी पर कब तक ऐस करेगा।
भेड़िया भले ही शेर का खोल पहन लें,
चोरी एक दिन उजागर होकर ही रहेगा।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

दाग

June 15, 2020 in मुक्तक

दाग अच्छे होते है माना मैंने,
बदनामी के धब्बे होते हैं माथे के कलंक,
बच कर रहना इस मतलबी दुनिया से,
हंसती खेलती जिंदगी को बना देते है नरक।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

महाभारत

June 15, 2020 in मुक्तक

महाभारत की लड़ाई घर घर छाई,
किस सकुनी ने भाई भाई में आग लगाई।
कलयुग के प्रकोप में भला कोई मिला नहीं,
एक दुसरे में झगडा लगा देखता तू मनु लड़ाई।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

दुनिया

June 15, 2020 in मुक्तक

दुनिया के चक्कर में पड़कर,
खुद को खुद से दूर ना करो।
अपने अंदर के प्रतिभा को पहचान,
देश का मेरे मित्र तुम नाम करो।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

झूठ फरेब

June 15, 2020 in मुक्तक

झूठ फरेब को करो बीच बाजार में बेनकाब,
धूर्त को बदनाम कर सच्चाई का दो साथ।
अपने पथ पर बढ़ते जाओ लेकर प्रभू का नाम,
सब अच्छा अच्छा होगा नेक का दो तुम साथ।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

नीर

June 15, 2020 in मुक्तक

नीर को अपने संभाल कर रखें,
लश्कर ऊंट को बदनाम ना करें।
मन के अर्तमन की वेदना संभाले,
अपने लफ्ज से कुलक्षित बात ना करें।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

राम कहानी

June 15, 2020 in मुक्तक

राम कहानी सुनकर मेरा तन मन गदगद हुआ,
राम का नाम जपते जपते मेरा आत्मा निर्मल हुआ।
राम का कृपा पाकर मैं विभोर हुआ
राम नाम कि औषधि पाकर मैं धन्य हुआ।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

काबुल में गधे

June 15, 2020 in मुक्तक

आत्मचिंतन करो लोगों पर ना हंसो,
दुनिया के दुःख दर्द को तुम समझो।
काबुल में गधे भी होते हैं मेरे दोस्त,
गधे घोड़े के बातों को तुम समझो।।

✍ महेश गुप्ता जौनपुरी

राम नाम जपना

June 15, 2020 in मुक्तक

राम नाम जपते रहे आत्मबोध हो जायेगा,
कट जायेगा सारा पाप भव से पार हो जायेंगे।
दिन दुखी का सेवा करके पुण्य की गठरी बांधो,
कुलक्षित विचार को त्याग कर राम को अपनायेगें।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

सयाना गधा

June 15, 2020 in मुक्तक

गधा अब गधा नहीं रहा,
खुद को घोड़ा समझ रहा।
अपना काम करो मत उलझो,
गधा को गधे को गधा कह रहा।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

गधा

June 15, 2020 in मुक्तक

गधा खुद को समझदार समझे,
दुसरे के बात को वह ना बुझे ।
अपने आप को शिक्षा मंत्री समझ,
भले ना एक शब्द उसे सुझे ।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

ज्ञानी गधा

June 15, 2020 in मुक्तक

गधा ज्ञानी बन च्वयनप्राश खाता,
खुद को ठाठ बाट में दिखाता ।
गधे के चाल से काबुल हुआ परेशान हैं,
गधे को असल में कुछ नहीं है आता।।

✍ महेश गुप्ता जौनपुरी

गुण की पहचान

June 15, 2020 in मुक्तक

गुण की पहचान अब कहां करते लोग,
गधे के हां में हां करते हैं लोग।
ना जाने कब तक करते रहेगें चापलूसी,
मती भष्ट करके ना जाने कब तक आलाप गायेंगे लोग।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

गधा

June 15, 2020 in मुक्तक

गधा ही गधे को ट्रेनिंग दे रहा है,
कहां से घोड़ा दौड़ा में आये ।
चुनो कितना भी सोच विचार कर,
चुनाव खत्म होते ही तेवर दिखाये।।

✍ महेश गुप्ता जौनपुरी

शिक्षा

June 15, 2020 in मुक्तक

सब शिक्षा ही सीख नहीं देती,
मानवता डिग्री से नहीं आती।
दया धर्म सिखना पड़ता है,
बोर्ड के इग्जाम में दया नहीं आती।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

कोरोना

June 15, 2020 in मुक्तक

कोरोना के मार से अगिया बेताल हुए,
सरकार के चक्कर में पड़कर बुरा हाल हुए।
सब अपनी सेंखी बघार रहें बनकर नेता,
मजदूर बेचारे पांव के छाले से बुराहाल हुए।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

नौ नगद ना तेरह उधार

June 15, 2020 in मुक्तक

नौ नकद ना तेरह उधार किजिए,
अपना मेरा समय ना बर्बाद किजिए।
आप अपने हिस्से में मैं अपने हिस्से में खुश हूं,
धन दौलत में पड़कर सम्बन्ध खराब ना किजिए।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

उफान

June 15, 2020 in मुक्तक

उफान ये उम्र भी संभल जायेगा,
इंसा जब संसार में ठोकरें खायेगा।
गलतीयों से ही संभलना सिखेगा महेश,
बिना सहारे के उठना जब उसे पड़ेगा।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

अंगिया वेताल

June 15, 2020 in मुक्तक

नेता जी को अगिया बेताल हो लेने दो,
कुछ अपनी कुछ उनकी बातें होने दो।
बड़े सिद्दत से आये है आपके दरवाजे पर,
झूठे वादों का पुड़िया अब उन्हीं को फिरा दो।।

✍ महेश गुप्ता जौनपुरी

उधार

June 15, 2020 in मुक्तक

उधार से कब तक काम चलाएंगे,
नकद का ही व्यवहार अपनाये।
अपना जेब थोड़ा सा ढिला करके,
आन बान से अपनों को जीना सिखलाये।।

✍ महेश गुप्ता जौनपुरी

कदम

June 15, 2020 in मुक्तक

कदम को बढ़ते देख कर मित्र लो बनाय,
बेटे बेटी के अन्तर्मन बातों का करें निदान।
अच्छे बूरे परिस्थिति में देते रहें उनका साथ,
जिम्मेदारी को संभालते हुए बने नेक इंसान।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

कोरोना काल

June 15, 2020 in मुक्तक

सरकार की अगर माने होते,
तो आंकड़े बहुत सीमित होते।
सब अपनी मर्जी में योध्दा हुए,
जमात के जरिए देश के दुश्मन होते।।

महेश गुप्ता जौनपुरी

आधुनिक नारी

June 15, 2020 in मुक्तक

कोस रहीं है नारी बेचारी,
निकम्मी सरकार और पुरुष को।
दोनों का हाल हुआ बेहाल,
मन ही मन कोसें खुद को।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

नारी

June 15, 2020 in मुक्तक

नारी की महिमा बड़ी निराली,
करती संघर्ष सरकार से हारी।
सुख सुविधाएं मिल नहीं पाती,
रक्त बहाकर पथ को सींचे नारी।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

चाटूकार

June 15, 2020 in मुक्तक

देश हमारा चाटूकारों से है परेशान,
किस किस का बात करोंगे मित्र आज।
अलाप गाकर जो जनता को हैं ठगते,
पांच साल बैठ कर मोटी मलाई है ठुसते ।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

नारी की महिमा

June 15, 2020 in मुक्तक

नारी की महिमा बड़ी निराली,
महाभारत भी देन नारी की।
जब अपने पर आ जाती नारी,
करती खड्ग शेरों पर सवारी।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

मानवता

June 15, 2020 in मुक्तक

मानवता की पगडंडी को,
कब तक लेकर चलोगे प्यारे।
नारी के स्वरूप को अलग ना करो,
कुछ निकम्मों के वजह से देश हारे।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

मोटी मलाई

June 15, 2020 in मुक्तक

हर नेता का काम यही है,
जेब भरना इमान यही है।
मोटी मलाई खाना फितरत है,
नेता का काम जालसाजी यही है।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

प्रेम की खूशबू

June 15, 2020 in मुक्तक

बगिया से मनमोहक फूल झड़ना,
आशिको के टूटे दिल मिलना।
बीच बाजार में दिल का मचलना,
प्रेम की खूशबू से जहां को सुगंधित करना।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

नेता जी

June 15, 2020 in मुक्तक

नेता जी के चाल चलन को देख,
जनता हुयी सर से पांव तक परेशान।
काली करतूतों का देख नेता जी का,
नीम हकीम खतरे में जान यहीं है पहचान।।

✍महेश‌ गुप्ता जौनपुरी

आकाश पाताल

June 15, 2020 in मुक्तक

नियती और नियती से चलता यह संसार,
आकाश पाताल भूमण्डल है एक विचार।
जीव जन्तु जगत विज्ञान आधार बनें भगवान,
दया धर्म अधिकार से बदलता ये संसार।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

कोरोना

June 15, 2020 in मुक्तक

कोरोना के प्रकोप में सब अंधेरे नगरी हो गया,
टका शेर बाजी का भाव भी तेज हो गया।
दिन के उजाले में अंधेर नगरी का हुजूम दिखा,
बादशाह योध्दा और याजा में भी डर समां गया।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

बादल

June 15, 2020 in मुक्तक

जो बादल‌ गरजे सो बरसे नहीं,
विष का प्याला पीकर तरसे नहीं।
जीवन में बहुत कुछ आता जाता रहेगा,
अनुभव को अपने ब्यर्थ समझे नहीं।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

अंधेर नगरी

June 15, 2020 in मुक्तक

अंधेर नगरी को उजाला करने आये हैं,
दीप जलाकर अंधेरा मिटाने आये हैं।
एक दीप जलाकर आओ मेरे साथ मित्र,
अंधेर नगरी को स्वर्ग की नगरी बनाने आये हैं।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

दुःख दर्द

June 15, 2020 in मुक्तक

गरज गरज कर आंखें दिखलाते,
बरसने की बस तुम बातें करते।
प्यार मोहब्बत से समस्या हल करके,
अपने सारे दुःख दर्द पीड़ा को कहते।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

डर

June 15, 2020 in मुक्तक

डर भय तो एक बहाना है,
उछल कूद करना इनका मकसद।
कोरोना का जंजाल है आया,
बचकर रहना कोरोना के जिद से।।

महेश गुप्ता जौनपुरी

हौसला

June 15, 2020 in मुक्तक

हौसला सुबह शाम बढ़ा रहे है,
कोरोना को हम सब भगा रहे हैं।
करके जागरूक लोगों को दोस्त,
अपने पराये को जागरूकता सीखा रहे हैं।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

शादी

June 15, 2020 in मुक्तक

शादी विवाह गुड्डे-गुड़ियों का खेल नहीं,
सत्य झूठ का इस संसार में कोई मेल नहीं।
जीवन साथी सोच समझ कर चुनना साथी,
यह जीवन बहुत अनमोल है दुबारा मिलेगा नहीं।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

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