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देवेश साखरे 'देव'

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देवेश साखरे 'देव'

@देवेश साखरे 'देव' • Joined Dec 2018 • Active 2 years ago

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by देवेश साखरे 'देव'

इतना आसान नहीं

December 6, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता

मोहब्बत को भूला देना, इतना आसान नहीं।
फैसला सुना दिया, मैं कोई बेजुबान नहीं।

मेरे सीने में भी दिल है, दर्द है, तड़प है,
पत्थर तो नहीं, कैसे समझ लिया इंसान नहीं।

अश्क सूख चुके, खून बहाया है तेरे वास्ते,
इससे बढ़कर मेरी मोहब्बत का निशान नहीं।

ये तो खून है, आज़मा लो दे सकते हैं जान भी,
मेरी मोहब्बत से तो तू वाकिफ है अंजान नहीं।

हंसते हुए दर्द का ज़हर पी जाऊं वो ‘देव’ नहीं,
मैं भी तेरी तरह इंसान हूं, कोई भगवान नहीं।

देवेश साखरे ‘देव’

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by देवेश साखरे 'देव'

मेरे बस की बात नहीं

December 5, 2019 in ग़ज़ल

तुम्हें भुला पाना, मेरे बस की बात नहीं,
तुम्हें जिंदगी में ला पाना, मेरे बस की बात नहीं।

तुम्हें बस देख कर ही जी लेंगे,
तुम्हें बगैर देखे रह पाना, मेरे बस की बात नहीं।

तुम ही पहली और आखरी मोहब्बत,
पहली मोहब्बत भुला पाना, मेरे बस की बात नहीं।

अगर तुम ना हुई कभी मेरी तो,
किसी और को अपना पाना, मेरे बस की बात नहीं।

दुनिया से दिल भर चुका मेरा,
अब और जिंदा रह पाना, मेरे बस की बात नहीं।

देवेश साखरे ‘देव’

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by देवेश साखरे 'देव'

तेरे प्यार का नशा

December 4, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता

इस कदर छाया है तेरे प्यार का नशा।
बस तेरी यादें ही दिलो-दिमाग पर बसा।

तुमसे दूर अब रहा भी न जाए।
ये जुदाई अब सहा भी न जाए।
कब उखड़ जाए ये चंद सांसें,
ना पुछो कुछ कहा भी न जाए।
ना मिलूं तो चैन नहीं, मिलकर बिछड़ना गवारा नहीं,
तुमसे मिलूं, न मिलूं, कशमकश में दिल फंसा।
इस कदर छाया है तेरे प्यार का नशा।
बस तेरी यादें ही दिलो-दिमाग पर बसा।

तेरी मदहोश खुशबू।
बेचैन करती मुझे हर-शू।
जाने क्या हो गया मुझे,
हर चेहरे में नजर आती तू ही तू।
भरी महफ़िल में भी खामोश, तन्हा रह जाता हूं,
इस दीवानगी की हालत पे लोग लगाते कहकशा।
इस कदर छाया है तेरे प्यार का नशा।
बस तेरी यादें ही दिलो-दिमाग पर बसा।

न नींद है, न करार है।
ये कैसा मुझ पर खुमार है।
शायद तेरी मुहब्बत का है जादू,
बगैर तेरे दिल बेकरार है।
इतने करीब आकर भी, कितने दूर हैं हम,
किसी ने ठीक ही कहा, ये इश्क नहीं आसां।
इस कदर छाया है तेरे प्यार का नशा।
बस तेरी यादें ही दिलो-दिमाग पर बसा।

देवेश साखरे ‘देव’

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by देवेश साखरे 'देव'

इस प्यार में

December 3, 2019 in ग़ज़ल

बगैर प्यार के कुछ भी नहीं संसार में।
वो कहते हैं क्या रखा है, इस प्यार में।

हंसीन लगती यह दुनिया, प्यार होते ही,
जहां की खुशियां सिमटी, इस प्यार में।

कैसे दिलाएं तुम्हें एतबार, इस प्यार का,
जां तक कुर्बान कर सकते, इस प्यार में।

ना करेंगे, ना होने देंगे, रुसवा ‘देव’ तुम्हें,
मोहब्बत को परस्तिश माना, इस प्यार में।

देवेश साखरे ‘देव’

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by देवेश साखरे 'देव'

तुम्हारे बगैर

December 2, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता

तुम्हारे बगैर जी तो नहीं सकता,
हाँ, मर जरूर सकता हूँ ।
पर मर कर भी यदि चैन न मिला तो,
मेरी रूह भटकेगी।
तुम्हें पाने को तड़पेगी।
तुम्हें परेशान करने का इरादा नहीं है ।
मेरी ख्वाहिशें भी कोई ज्यादा नहीं है ।
सिर्फ़ तुम्हारा साथ चाहता हूँ ।
हाथों में तुम्हारा हाथ चाहता हूँ ।
खुशियों की सौगात चाहता हूँ ।
बताना दिल के जज्बात चाहता हूँ ।
तुम, हाँ तुम ही मेरी,
पहली और आखिरी मोहब्बत हो।
हाँ तुम ही वो लड़की हो ।
जिसके लिए मैं तड़पा हूँ,
कई रातें आँखों में काटा हूँ ।
गम अपने सीने में दबाकर,
औरों में खुशियाँ बाँटा हूँ ।
क्या करूँ, मेरे आँसू सूख चूके हैं ।
क्या करूँ, मेरी उम्मीदें लूट चूके हैं ।
मैं अपने दिल का बोझ हल्का करना चाहता हूँ ।
अपने गम का इलाज धुएँ में ढुँढता फिरता हूँ ।
मालूम है, मुझे मालूम है,
हासील कुछ ना होगा ।
मौत के करीब हूँ,
ये झूठ ना होगा ।
पर तुम मुझे बचा सकती हो ।
मेरी जिंदगी सजा सकती हो ।
वो तुम हो, तुम ही तो हो ।
हाँ “मेरी चाहत” वो तुम हो ।।

देवेश साखरे ‘देव’

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by देवेश साखरे 'देव'

तुम्हारी तस्वीर

December 1, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता

तुम्हारी तस्वीर से बातें करता हूं।
कभी कुछ सोच कर हंसता हूं।
कभी कुछ सोच कर रो देता हूं।
कभी बस एकटक निहारता हूं।
तो कभी चूम लेता हूं।
तुम्हारी तस्वीर से बातें करता हूं।
कभी सोचता हूं, कि तुम होती सामने,
तो ये कहता, वो सुनता,
कभी सोचता हूं, तुम्हें बाहों में भर लेता।
लेकिन तुम मेरे करीब नहीं।
गम-ए-जुदाई में शरीक नहीं।
मेरा तो अब ये हाल है।
नहीं जीता हूं, ना ही मरता हूं।
बस तुम्हारी यादों में ही खोया रहता हूं।
तुम्हारी तस्वीर से बातें करता हूं।
बस, तुम्हारी तस्वीर से बातें करता हूं।

देवेश साखरे ‘देव’

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by देवेश साखरे 'देव'

मेरी रूह

November 30, 2019 in ग़ज़ल

तू मेरी रूह में, कुछ इस तरह समाई है।
के रहमत मुझपर, रब की तू ख़ुदाई है।

तू नहीं तो मैं नहीं, कुछ भी नहीं, शायद
तुझे पता नहीं, मेरा वजूद तुने बनाई है।

तू यहीं है, यहीं कहीं है, मेरे आसपास,
हवा जो तुझे छू कर, मुझ तक आई है।

तेरी खुशबू से महकता है, चमन मेरा,
तेरा पता, मुझे तेरी खुशबू ने बताई है।

मैं भी इत्र सा महक उठा तेरे आगोश में,
टूटकर जब तू, गले मुझको लगाई है।

देवेश साखरे ‘देव’

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by देवेश साखरे 'देव'

ख़ुदा पर यकीं

November 30, 2019 in ग़ज़ल

ख़ुदा पर जो भी बंदा यकीं दिखाता है।
तलातुम में फँसी वो सफीना बचाता है।

कठपुतलीयों की डोर है उसके हाथों में,
जाने कब, कहाँ, कैसे, किसे नचाता है।

जो किरदार उम्दा निभा गया रंगमंच में,
खुशियों का इनाम वो यक़ीनन पाता है।

नसीब का लिखा, ना टाल सका कोई,
किये का हिसाब वो ज़रूर चुकाता है।

दौलत ना सही, पर दुआएं कमाई मैंने,
बुरे वक़्त में ‘देव’ दुआएं काम आता है।

देवेश साखरे ‘देव’

तलातुम- समुद्री तुफान, सफीना- कश्ती

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by देवेश साखरे 'देव'

सजा ना सकूंगा

November 29, 2019 in ग़ज़ल

अपनी ज़िंदगी फिर सजा ना सकूंगा।
प्यार का साज फिर बजा ना सकूंगा।

क्या मैं इतना मजबूर हो गया हूं,
कि तुम्हें फिर बुला ना सकूंगा।

क्या तुम इतनी दूर हो गई हो मुझसे,
कि तुम्हें गले फिर लगा ना सकूंगा।

अब आ भी जाओ और ना तड़पाओ,
गमे-ज़ुदाई सीने में फिर दबा न सकूंगा।

देवेश साखरे ‘देव’

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by देवेश साखरे 'देव'

तेरे इंतज़ार में

November 29, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता

हां कहती, नहीं ना कहती हो,
छोड़ रखा बीच मझधार में।
सारी जिंदगी बीता दूंगा मैं,
सनम बस तेरे इंतज़ार में।

नादान बन कहती, तुमसे प्यार कहां है।
होंठों पर ना है, और दिल में हां है।
कुछ तो सिला दो, मेरी मोहब्बत का,
कह दो मुझे भी तुमसे प्यार हां है।
दिलाते हैं इतना यकीन तुम्हें,
दे सकते जां तुम्हारे प्यार में।
सारी जिंदगी बीता दूंगा मैं,
सनम बस तेरे इंतज़ार में।

फीके लगते हैं सभी हंसीन नज़ारे।
सच है नहीं जी सकते बगैर तुम्हारे।
अब आ भी जाओ विरान जिंदगी में,
दामन में डाल दूं, खुशियां जहां के सारे।
ख़ुशी से मर जाएंगे हम,
बस तेरे इश्के-इकरार में।
सारी जिंदगी बीता दूंगा मैं,
सनम बस तेरे इंतज़ार में।

देवेश साखरे ‘देव’

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by देवेश साखरे 'देव'

प्यार

November 28, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता

पहली ही नजर में पूरी हो आस,
ख़त्म हो जैसे बरसों की तलाश।
जिसके वास्ते था मैं बेकरार,
शायद इसे ही कहते हैं प्यार।

प्यार में नज़रों की, ज़ुबाँ होती है,
ख़ामोश हाले-दिल बयां होती है।
बस इंतज़ार हो दीदार-ए-यार,
शायद इसे ही कहते हैं प्यार।

दिल कहे, हां यही है जिंदगानी,
संग जिसके जीवन है बितानी।
जिसके बिना अधूरा हो संसार,
शायद इसे ही कहते हैं प्यार।

प्यार करो तो ताउम्र निभाओ,
प्यार की एक मिसाल बनाओ।
आंखें बंद, जिस पर हो एतबार,
शायद इसे ही कहते हैं प्यार।

देवेश साखरे ‘देव’

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by देवेश साखरे 'देव'

सर्द रातें

November 27, 2019 in ग़ज़ल

ठिठुरती रातों में वो हवाएँ जो सर्द सहता है।
किसे बताएँ मुफ़्लिसी का जो दर्द सहता है।

ज़मीं बिछा आसमां ओढ़ता, पर सर्द रातों में,
तलाशता फटी चादर, जिसपे कर्द रहता है।

पाँव सिकोड़, बचने की कोशिशें लाख की,
पर बच ना सका, हवाएँ जो बेदर्द बहता है।

किसको इनकी परवाह, कौन इनकी सुनता,
देख गुज़र जाते, कौन इन्हें हमदर्द कहता है।

रोने वाला भी कोई नहीं, इनकी मय्यत पर,
खौफनाक शबे-मंज़र, बदन ज़र्द कहता है।

देवेश साखरे ‘देव’

मुफ़्लिसी- गरीबी, कर्द- पैबंद,
शबे-मंज़र- रात का दृश्य, ज़र्द- पीला

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by देवेश साखरे 'देव'

सूखे गुलाब

November 26, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता

किताबों में दबे गुलाबों की,
अपनी अलग दास्तां होती है।
बगैर कुछ कहे ख़ामोशी से,
उनकी कहानी बयां होती है।

भले ही वह सूख जाए,
पर सदा जवान होती है।
सम्भाल कर रखने वाले की,
सबसे बढ़ कर जान होती है।

किसी का प्यार से दिया तोहफा,
क़िस्मत पर मेहरबान होती है।
इन्हीं हंसीन यादों के सहारे ही,
सारी जिंदगी आसान होती है।

देवेश साखरे ‘देव’

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by देवेश साखरे 'देव'

प्यार चाहिए

November 25, 2019 in ग़ज़ल

मुझे एहसान नहीं प्यार चाहिए।
मुझे रहम नहीं एतबार चाहिए।

तुम ही मेरे दिल की सुकून हो,
मुझे तड़प नहीं करार चाहिए।

बगैर तुम्हारे अब जीना है मुहाल,
मुझे तसव्वुर नहीं दीदार चाहिए।

बरसों से जिंदगी का चमन है सूना,
मुझे खिजां नहीं बहार चाहिए।

देवेश साखरे ‘देव’

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by देवेश साखरे 'देव'

शहर की चकाचौंध

November 25, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता

गाँव की जमीं बेच दी,
पुश्तैनी मकां बेच दिया।
शहर की चकाचौंध खरीदी,
खुशियों का जहां बेच दिया।

मिट्टी की सौंधी महक,
चिड़ियों की मधुर चहक।
नीम की ठंडी छाँव,
मिट्टी में सने पाँव।
खेतों को जाती पगडंडीयाँ,
बैलों के गले बंधी घंटीयाँ।
तालाब में गोते लगाना,
चूल्हे में पका खाना।
जमीन पर बिछा आसन,
परिवार के संग भोजन।
मटके का ठंडा पानी,
दादा-दादी की कहानी।
यह मधुर स्मृतियाँ हमने,
ना जाने कहाँ बेच दिया।
शहर की चकाचौंध खरीदी,
खुशियों का जहां बेच दिया।।

दसवें माले पर एक मकां,
न ज़मीं न खुला आसमां।
गाड़ियों का शोरगुल,
जानलेवा धुआँ और धूल।
शहर की भाग दौड़,
आगे जाने की होड़।
ए सी की हवा, फ्रिज का पानी,
कर रही सेहत में परेशानी।
टेबल पर लगा खाना,
फोन पर समय बिताना।
कम्प्यूटर या फोन में मशगूल,
परिवार से बातचीत गये भूल।
इंसानियत, अपनत्व हमने,
ना जाने कहाँ बेच दिया।
शहर की चकाचौंध खरीदी,
खुशियों का जहां बेच दिया।।

देवेश साखरे ‘देव’

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by देवेश साखरे 'देव'

दिल के करीब

November 24, 2019 in शेर-ओ-शायरी

समझते थे जिन्हें हम अपने दिल के करीब।
मेरे खिलाफ शाजिसो में वो निकले शरीक।
हमें कोई शिकवा न होता, गर वो गैर होता,
पर वो तो थे, हमारे सबसे अज़ीज़ रफ़ीक।

देवेश साखरे ‘देव’

रफ़ीक-साथी

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by देवेश साखरे 'देव'

तेरा ही ज़िक्र

November 24, 2019 in ग़ज़ल

तेरा ही ज़िक्र है, मेरी हर एक नज़्म में।
इरादा नहीं तू रूसवा हो, भरी बज़्म में।

पढ़ता हूँ कुछ, चला जाता तेरी ही रूख़,
हार जाता हूँ मैं, दिलो-ज़ेहन के रज़्म में।

पहलू में गर तू हो, ज़रूरत नहीं ज़िक्र की,
पर लगता कुछ तो कमी है, मेरी हज़्म में।

यहाँ चेहरे तो बहुत से हैं, पर हर चेहरे में,
तेरा ही चेहरा नज़र आता, मेरी चश्म में।

सात फेरे हो, या फिर हो जश्ने-ज़िन्दगी,
तू साथ हो मेरे, ज़िन्दगी की हर रस्म में।

देवेश साखरे ‘देव’

नज़्म- शायरी, बज़्म- सभा, रज़्म- युद्ध,
हज़्म- दृढ़ता, चश्म- आँख

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by देवेश साखरे 'देव'

शोलों सा जला

November 23, 2019 in शेर-ओ-शायरी

शोलों सा जला मैं, बरसा बादलों सा कभी।
हालाते-दीवानगी पर, कहकशे लगाते सभी।
मजनूँ ना सही, इश्क मेरा भी कुछ कम नहीं,
तुम कहो तो तुम्हारे वास्ते, मैं जाँ दे दूँ अभी।

देवेश साखरे ‘देव’

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by देवेश साखरे 'देव'

शजर

November 23, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता

तेरे हाथ सौगात, मेरे हाथ भी सौगात।
मेरे मन में पाप और तेरे नेक जज़्बात।

तुमने दिया हमें, जीने की नेमतें सारी,
मैं खुदगर्ज तुझपे करता रहा आघात।

मिटा कर वज़ूद तेरा, किसे छला मैंने,
तेरे बगैर मेरी, कुछ भी नहीं औकात।

शजर की कीमत ना समझी अब अगर,
बद से बदतर होते जाएंगे फिर हालात।

देवेश साखरे ‘देव’

शजर- पेड़

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by देवेश साखरे 'देव'

फ़ैशन

November 22, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता

फ़ैशन की चरम तो देखो।
लोगों की भरम तो देखो।

कांच की अलमारी में बंद,
ऊँची कीमत बढ़ा रही शान।
तार-तार सा हुआ चिथड़ा,
टंगा बनकर एक परिधान।
उस चिथड़े के करम तो देखो।
फ़ैशन की चरम तो देखो।
लोगों की भरम तो देखो।

जिसे फेंक दिया जाता,
पोंछा भी ना बन पाता।
फ़ैशन की हद तो देखो,
युवा पहन कर इतराता।
फ़ैशन का ज्ञान परम तो देखो।
फ़ैशन की चरम तो देखो।
लोगों की भरम तो देखो।

पश्चिमी हमारी पारंपरिक,
वेषभूषा अपना रहे हैं।
फ़ैशन के नाम पर हम,
किस ओर जा रहे हैं।
संस्कृति और धरम तो देखो।
फ़ैशन की चरम तो देखो।
लोगों की भरम तो देखो।

फटे अर्धनग्न वस्त्र पहन,
शर्म, हया सब त्यागें हैं।
पर याद रहे इसमें भी,
जानवर हमसे आगे हैं।
खोता आँखों से शरम तो देखो।
फ़ैशन की चरम तो देखो।
लोगों की भरम तो देखो।

देवेश साखरे ‘देव’

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by देवेश साखरे 'देव'

मेरी चाहत

November 21, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता

तुम हो मेरी चाहत,
यह तुमने भी तो है माना।
अगर तुम न हुई मेरी तो,
कुछ भी कर सकता है दीवाना।

दिल के करीब फिर भी कितनी दूर हो।
दुनिया से या फिर खुद से मजबूर हो।
आ जाओ मुझमें समा जाओ,
मुश्किल है बगैर तेरे जीवन बिताना।
अगर तुम न हुई मेरी तो,
कुछ भी कर सकता है दीवाना।

जाने कब बनोगी मेरी दुल्हन।
जाने कब सजेगा मेरा अंजुमन।
मेरे विरान इस जहान को,
अपने हाथों से तुम सजाना।
अगर तुम न हुई मेरी तो,
कुछ भी कर सकता है दीवाना।

देवेश साखरे ‘देव’

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by देवेश साखरे 'देव'

गुज़र जाता है

November 20, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता

जो चाहता नहीं, वही गुज़र जाता है।
रहा – सहा जज़्बात भी मर जाता है।

जिन से थोड़ी बहुत उम्मीद होती है,
वही हम से आंखें फेर जाता है।

जिन्हें सर आंखों पर बिठाना चाहिए,
बेअदबी, उनका ही कुसूर कराता है।

फितरत नहीं, किसी की तौहीन करना,
पर वो काम ही कुछ ऐसे कर जाता है।

या खुदा हो सके तो मुझे माफ करना,
सच्चाई की तरफ मेरा ज़मीर जाता है।

देवेश साखरे ‘देव’

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by देवेश साखरे 'देव'

कुर्बान तुझपे जान

November 20, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता

तुझसे इतनी मोहब्बत करते हैं सनम।
कुर्बान तुझपे जान कर सकते हैं हम।

नहीं कहता चांद तारे तोड़ कर ला दूंगा।
नहीं कहता कि ज़मीं-आसमां मिला दूंगा।
जिंदगी तेरे नाम करने की खाते हैं कसम,
कुर्बान तुझपे जान कर सकते हैं हम।
तुझसे इतनी मोहब्बत करते हैं सनम।

तुम ही मेरी सुबह, तुम ही शाम हो।
मेरी सारी खुशियां तुम ही तमाम हो।
तुम्हीं से शुरू, तुम पे ही करते हैं ख़तम,
कुर्बान तुझपे जान कर सकते हैं हम।
तुझसे इतनी मोहब्बत करते हैं सनम।

देवेश साखरे ‘देव’

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by देवेश साखरे 'देव'

बस कीजिए

November 19, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता

शराफत को बस यहीं बस कीजिए ।
मीठा धुआँ है और एक कश लीजिए ।

ये तो उस बेवफा से बेहतर होती है ।
दिल तो जलाती, मगर होंठों पर होती है ।
बेवफा से तो वफा का साथ न मिला,
मगर यह साथ अक्सर होती है ।।
बेवफाई का आलम जिसने देखा है,
कहता फिरेगा हर शख्स लीजिए ।
मीठा धुआँ है और एक कश लीजिए ।
शराफत को बस यहीं बस कीजिए ।।

कहते हैं ले जाता है मौत की ओर।
कम्बख्त जीना चाहता है कौन और ।
अब तो ये जहाँन लगती है विरान,
संभल जाओ वक्त है, हर-शू यही शोर।।
वो क्या जाने हाले-दिल बुरा कहते हैं,
एक बार क्या सरशस लीजिए ।
मीठा धुआँ है और एक कश लीजिए ।
शराफत को बस यहीं बस कीजिए ।।

देवेश साखरे ‘देव’

सरशस- हमेशा

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by देवेश साखरे 'देव'

नाज़ हमें

November 18, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता

धराशाई हो जब गिरा, वो धरा पर।
जां न्यौछावर कर गया वसुंधरा पर।

तेरी शहादत से महफूज़ मूल्क मेरा,
नाज़ हमें तेरे लहू के हर कतरा पर।

बात जब भी हिफाज़ते-वतन की हो,
टूट पड़ता है जवान, हर खतरा पर।

अकेला घिरा, वो दुश्मनों पर भारी है,
ना खौफ, ना शिकन उसके जरा पर।

पीछे हटना तो हमारे खून में ही नहीं,
लहू की आखरी बूंद तक वो लड़ा पर।

गाड़ ध्वज तिरंगा, शत्रुओं के वक्ष पर,
सर ऊँचा किया, वो खुद गिरा धरा पर।

देवेश साखरे ‘देव’

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by देवेश साखरे 'देव'

तेरी अंगड़ाई

November 17, 2019 in ग़ज़ल

चाँद की सूरत, तेरी सूरत रानाई।
होश उड़ा ले गई मेरी, तेरी अंगड़ाई।

तारीफ करूँ क्या तेरे अहदे-शबाब की,
जुबां बंद कर गई मेरी, तेरी अंगड़ाई।

सारी रात बीती करवटें बदलते – बदलते,
सहरे-नींदें चुरा ले गई मेरी, तेरी अंगड़ाई।

पायल की छन-छन, चूड़ियों की खन-खन,
सब्रो-सुकूं छीन ले गई मेरी, तेरी अंगड़ाई।

वस्ले-सनम से पहले ही कहीं ‘देव’,
जां न ले ले मेरी, तेरी अंगड़ाई।।

देवेश साखरे ‘देव’

1.सूरत- तरह, चेहरा, 2.रानाई- सुन्दर

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by देवेश साखरे 'देव'

आशियाँ

November 16, 2019 in ग़ज़ल

रेत का महल, पल दो पल में ढह गया।
आशियाँ अरमानों का पानी में बह गया।

तिनके जोड़कर बनाया था जो घोंसला,
बस वही, तूफानों से लड़ कर रह गया।

वह दरिया है, जो बुझा गई तिश्नगी मेरी,
सागर किनारे भी प्यासा खड़ा रह गया।

आरज़ू नहीं, आसमां से भी ऊँचे कद की,
ज़मीं का ‘देव’, ज़मीं से जुड़ कर रह गया।

देवेश साखरे ‘देव’

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by देवेश साखरे 'देव'

दूध का जला

November 15, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता

जो जैसा दिखता है,
वो वैसा होता नहीं है।
दूध का जला बगैर फुंके,
छाछ भी पीता नहीं है।।

लोग चेहरे पर चेहरा लगाए होते हैं,
सूरत से सीरत का पता चलता नहीं है।
मुंह में राम बगल में छुरा छिपाए होते हैं,
अब तो अपनों पर भी यकीं होता नहीं है।।

देवेश साखरे ‘देव’

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by देवेश साखरे 'देव'

मेरे महबूब

November 15, 2019 in ग़ज़ल

मेरे महबूब को देख, चाँद भी शरमाया है।
मेरा माहताब जो ज़मीं पर उतर आया है।

चाँद भी कहीं, देखो बादलों में छुप गया,
अक्स देख तेरा, रश्क से मुँह छिपाया है।

ऐ चाँद, तेरी चाँदनी की जरूरत नहीं मुझे,
मेरे महबूब के नूर से सारा समाँ नहाया है।

कोशिशें लाख कर ली, नज़रें हटती नहीं,
तुमने हुस्नो-नज़ाकत कुछ ऐसा पाया है।

बेशक हमने, कमाई नहीं दौलत बेशुमार,
तेरी मोहब्बत का साया, मेरा सरमाया है।

देवेश साखरे ‘देव’

अक्स- प्रतिबिम्ब, रश्क- ईर्ष्या, सरमाया- संपत्ति

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by देवेश साखरे 'देव'

परेशाँ क्यूँ है

November 14, 2019 in ग़ज़ल

दिले-नादाँ, तू इतना परेशाँ क्यूँ है।
खता क्या हुई, इतना पशेमाँ क्यूँ है।

इज़हारे-इश्क, कोई गुनाह तो नहीं,
तेरे चेहरे की रंगत, फिर हवा क्यूँ है।

इंतज़ार तो कर, इकरारे-ज़वाब का,
यकीं तो रख, ख़ुद पर शुबहा क्यूँ है।

ज़रूरी नहीं, पूरा हो इश्क सभी का,
गम के प्याले में तू फिर डूबा क्यूँ है।

वो भी तुम्हें चाहे, ये ज़रूरी तो नहीं,
एक तरफ़ा प्यार से तू ख़फा क्यूँ है।

शायद मंजिल तेरी कुछ और तय हो,
बजा सोचा जिसने, वो ख़ुदा क्यूँ है।

देवेश साखरे ‘देव’

पशेमाँ- शर्मिंदा, शुबहा- संदेह, बजा- उचित

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by देवेश साखरे 'देव'

मय ही मय

November 13, 2019 in शेर-ओ-शायरी

हमें तो पता ही न था, ये नशा क्या शय है।
हिज्र-ए-महबूब के बाद, बस मय ही मय है।
दुनिया हमारी शराफ़त की मिसाल देती थी,
शरीफ़ों मे ही नहीं, रिंदों के बीच भी गये हैं।

देवेश साखरे ‘देव’

रिंद- शराबी

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by देवेश साखरे 'देव'

मसरूफ़

November 13, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता

यह सब बहाने ही हैं कि वक़्त नहीं।
इतना भी मसरूफ़ कमबख़्त नहीं।

मिला करो कभी कभार,
जो हमसे करते हैं प्यार।
इतना भी दिल को करो सख्त नहीं।
यह सब बहाने ही हैं कि वक़्त नहीं।

मिलो कभी बगैर तलब,
कभी यूँ ही बिना मतलब।
मतलब से मिलने की जरूरत नहीं।
यह सब बहाने ही हैं कि वक़्त नहीं।

क्या पता कल हों ना हों,
दिल में कोई मलाल ना हो।
प्रेम ज़रूरी, संबंध ज़रूरी रक्त नहीं।
यह सब बहाने ही हैं कि वक़्त नहीं।

मिलने से कम होती खाई,
रिश्तों को मिलती गहराई।
दूरियाँ कम होने में दिक्कत नहीं।
यह सब बहाने ही हैं कि वक़्त नहीं।

मिलो तो मिलता सुकून,
रिश्तों को मिलता यकीन।
अपनों से बड़ा कीमती वक़्त नहीं।
यह सब बहाने ही हैं कि वक़्त नहीं।

देवेश साखरे ‘देव’

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by देवेश साखरे 'देव'

तेरी खुबसूरती

November 12, 2019 in शेर-ओ-शायरी

तेरी कातिल निगाहें देखकर, मैं गज़ल पढ़ दूँ।
तेरी खुबसूरती पर क़सीदे, मैं हर पल गढ़ दूँ।
तेरी खुबसूरती अल्फ़ाज़ों की मोहताज़ नहीं,
गर तू कहे तो, तारीफों के चार चाँद जड़ दूँ।

देवेश साखरे ‘देव’

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by देवेश साखरे 'देव'

ख्वाब

November 12, 2019 in ग़ज़ल

खुली आँखों का ख्वाब जरूर मुकम्मल होता है।
नींद में दिखा ख्वाब तो, याद भी ना कल होता है।

ज़िद है, ख्वाब पूरे होंगे अपने एक दिन यकीनन,
खुद पर यकीन रख, फिर मन क्यों बेकल होता है।

भाव का कद्र तो उसे पता, जिसने अभाव देखा हो,
उसके प्रभाव से ही दुनिया, उसका क़ायल होता है।

घमासान जंग छिड़ी है, जिंदगी और मेरे दरम्यान,
देखें कौन सूरमा होता है और कौन घायल होता है।

आओ आज को जी भर जी लें, कल किसने देखा,
आज को ना खो दें, अनमोल हर एक पल होता है।

देवेश साखरे ‘देव’

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by देवेश साखरे 'देव'

वक्त

November 11, 2019 in शेर-ओ-शायरी

वक्त से मैं बेवक्त उलझता रहा।
वक्त से बड़ा कद समझता रहा।
वक्त ने इस कदर उलझाया मुझे,
वक्त ना वक्त पर सुलझता रहा।

देवेश साखरे ‘देव’

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by देवेश साखरे 'देव'

शायर

November 11, 2019 in ग़ज़ल

इश्क का दरिया जब ज़ेहन के समंदर से मिलता है।
दिल के साहिल से टकरा, गज़ल बह निकलता है।

हिज़्रे-महबूब का गम हो, या वस्ले-सनम की खुशी,
ज़ेहन में अल्फ़ाज़ों का सैलाब उफनता, उतरता है।

जिसने भी कभी इश्क किया, वो शायर ज़रूर हुआ,
इश्क रब से करता है, या फिर महबूब से करता है।

दिल से निकले जज़्बात, उनके दिल में उतर जाए,
हो गई गज़ल, फिर ज़रूरी नहीं क़ाफ़िया मिलता है।

देवेश साखरे ‘देव’

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by देवेश साखरे 'देव'

प्रेम

November 10, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता

मेरी लेखनी में अभी जंग लगा नहीं।
प्रेम के सिवा दूजा कोई रंग चढ़ा नहीं।

प्रेम में लिखता हूँ, प्रेम हेतु लिखता हूँ।
प्रेम पर लिखता हूँ, प्रेम ही लिखता हूँ।
प्रेम के सिवा मुझे कोई ढंग पता नहीं।
प्रेम के सिवा दूजा कोई रंग चढ़ा नहीं।

प्रेम श्रृगांर लिखता हूँ, प्रेम मनुहार लिखता हूँ।
प्रेम अपार लिखता हूँ, प्रेम उद्धार लिखता हूँ।
प्रेम से भला कभी कोई तंग हुआ नहीं।
प्रेम के सिवा दूजा कोई रंग चढ़ा नहीं।

प्रेम रोग लिखता हूँ, प्रेम वियोग लिखता हूँ।
प्रेम योग लिखता हूँ, प्रेम संयोग लिखता हूँ।
प्रेम से वह अछूता जो संग चला नहीं।
प्रेम के सिवा दूजा कोई रंग चढ़ा नहीं।

प्रेम राग लिखता हूँ, प्रेम अनुराग लिखता हूँ।
प्रेम त्याग लिखता हूँ, प्रेम वैराग लिखता हूँ।
प्रेम से किसी का मोह भंग हुआ नहीं।
प्रेम के सिवा दूजा कोई रंग चढ़ा नहीं।

देवेश साखरे ‘देव’

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by देवेश साखरे 'देव'

जां तक निसार हुआ

November 9, 2019 in ग़ज़ल

तुम्हीं ने कहा था, हां मुझे भी तुमसे प्यार हुआ।
हुई क्या खता, तुम्हारी नजरों में गुनहगार हुआ।

हमने तो डाल दी, सारी खुशियां तुम्हारे दामन में,
क्या रह गई कमी, प्यार में जां तक निसार हुआ।

करते रहे हम, सारी उम्र बेपनाह मोहब्बत तुमसे,
मेरी मोहब्बत का फिर भी ना, तुझे ऐतबार हुआ।

कल तक जो थकते ना थे, लेते नाम हमारा,
आज क्यों तुम्हारे वास्ते, ‘देव’ खतावार हुआ।

देवेश साखरे ‘देव’

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by देवेश साखरे 'देव'

तिरंगा

November 8, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता

तिरंगे का रंग जब सर चढ़ता है।
बेजान शख्स भी उठ पड़ता है।
झुकाने की औकात नहीं किसी की,
दुश्मन लाख अपनी एड़ी रगड़ता है।
केसरिया रंग बांध अपने सर पर,
जवान जब सरहद पर लड़ता है।
श्वेत रंग दिलों में जो धारण किया,
शांति का पाठ दुनिया में पढ़ता है।
हरे रंग की चादर से लिपटी धरती,
हरित क्रांति किसान पसीने से गढ़ता है।
अशोक चक्र बांध अपने रथ पे ‘देव’,
मेरा भारत प्रति पल आगे बढ़ता है।

देवेश साखरे ‘देव’

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by देवेश साखरे 'देव'

संगदिल हमराज

November 7, 2019 in ग़ज़ल

ताज है मोहताज, सरताज कहाँ से लाऊँ।
बना रखा है ताज, मुमताज कहाँ से लाऊँ।

साथ निभाने का वादा करते थे कल तक,
बीता हुआ वो कल, आज कहाँ से लाऊँ।

संगदिल कहूँ या फिर दिले-कातिल कहूँ,
किस नाम पुकारूं, अल्फ़ाज़ कहाँ से लाऊँ।

जो कल तक थे, मुझ बेजुबां की आवाज,
फिर बुला सकूँ, वो आवाज़ कहाँ से लाऊँ।

दिल जोड़ना, फिर तोड़ना, क्या फन तुम्हारा,
करार दे दिल को, वो साज कहाँ से लाऊँ।

छोड़ा बीच राह, यहीं तक था साथ हमारा,
विरान कर गई जहाँ, हमराज कहाँ से लाऊँ।

देवेश साखरे ‘देव’

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by देवेश साखरे 'देव'

क्या हो तुम

November 6, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता

मेरी हर गीत, हर साज़ हो तुम ।
कल को भूला दूँ, वो आज हो तुम ।
कैसे बयान करूँ, क्या हो तुम,
मुझ बेज़बां की, आवाज़ हो तुम ।।

मेरी हर नज़्म, हर ग़ज़ल हो तुम।
तुम ही ज़िंदगी और अजल हो तुम।
कैसे बयान करूँ, क्या हो तुम,
ख़ुदा की हँसीन, फ़ज़ल हो तुम।।

मेरी ज़िंदगी, हर साँस हो तुम ।
ज़िन्दा रहने की आस हो तुम ।
कैसे बयान करूँ, क्या हो तुम,
मेरी आख़िरी तलाश हो तुम ।।

मेरी हर राह, हर मंज़िल हो तुम ।
बहता दरिया हूँ, शांत साहिल हो तुम ।
कैसे बयान करूँ, क्या हो तुम,
तन्हां ज़िंदगी में, भरी महफ़िल हो तुम ।।

मेरी हर ज़ंग, हर जीत हो तुम ।
मधुर सूरों की, संगीत हो तुम ।
कैसे बयान करूँ, क्या हो तुम,
खुद को मिटा दूँ, वो प्रीत हो तुम ।।

मेरे ख़ुदा, मेरी हर परस्तिश हो तुम ।
शराब हो या शीरा-ए-कशिश हो तुम ।
कैसे बयान करूँ, क्या हो तुम,
जां से अज़ीज़ ‘देव’ की मोनिस हो तुम ।।

देवेश साखरे ‘देव’

अजल- मौत, फ़ज़ल- पुण्य, परस्तिश- पूजा,
शीरा-ए-कशिश- मीठा लगाव, मोनिस- साथी

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by देवेश साखरे 'देव'

कमी है कुछ तुम में

November 5, 2019 in ग़ज़ल

तुम्हें देख यूँ लगा कुछ भी नहीं माहताब।
सोचता हूँ तुम हकीकत हो या फिर ख्वाब ।

किया इजहारे-मोहब्बत, कल पे टाल दिया,
सारी रात आँखों में कटी, पाने को जवाब ।

कहते हैं तुमसे दोस्ती है, मोहब्बत तो नहीं,
मुझे पाने के कैसे सजा डाले तुमने ख्वाब ।

कर दिया इनकार ‘देव’ कमी है कुछ तुम में,
सोचा भी कैसे इकरारे-मोहब्बत तुमने जनाब ।

देवेश साखरे ‘देव’

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by देवेश साखरे 'देव'

सहारा तू ही साकी

November 4, 2019 in ग़ज़ल

आबाद जहां करने को, उम्मीद एक ही बाकी है,
अब न कोई ज़िंदगी में, सहारा तू ही साकी है ।

हिज्र-ए-महबूब ने मुझे, क्या से क्या बनाया,
खुद को डूबोया प्याले में, शराब तू ही साथी है ।

आज दस्तकश वो कहते, अजनबी तुम हो कौन,
कल जिन्हें ऐतराफ़ था, मैं चिराग़ तू ही बाती है ।

कुछ भी ना रही आरज़ू जिंदगी में, तेरे सिवाय,
ना किसी शय का तलबगार, शराब तू ही भाती है ।

कोई रहगुज़र नहीं याद, मयकदा ही मेरी मंज़िल,
गुज़रे जो ‘देव’ किसी कूचे से, याद तू ही आती है ।

देवेश साखरे ‘देव’

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by देवेश साखरे 'देव'

प्यार करके तो देखो

November 3, 2019 in ग़ज़ल

कभी दिल के करीब आकर तो देखो।
प्यार का जज़्बात जगा कर तो देखो।

लगने लगेगी सारी जिंदगानी हंसीन,
किसी को ज़िंदगी में लाकर तो देखो।

ना बहकने देंगे हम, तुम्हारे कदम,
कभी गाम-दर-गाम मिलाकर तो देखो।

तुम हो हकीकत, तुम ही ख्वाब हो,
ख्वाब हंसीन प्यार के, सजाकर तो देखो।

थाम लेंगे ‘देव’ ता उम्र तुम्हारा हाथ,
कभी प्यार का हाथ, बढ़ा कर तो देखो।

देवेश साखरे ‘देव’

गाम-दर-गाम – कदम से कदम

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by देवेश साखरे 'देव'

हाथों में तेरा हाथ

November 2, 2019 in ग़ज़ल

शायद ख्वाब है, जो हाथों में तेरा हाथ है ।
एक चाँद आसमां में है, एक मेरे साथ है ।

तेरी सूरत चाँद की सूरत, है मरमरी मूरत,
तुझसा ना हँसीन कोई, तेरी क्या बात है ।

गर तू शम्मअ है, तो मैं भी हूँ परवाना,
बेशक बरसों पुराना, तेरा मेरा साथ है ।

कहते प्यार किया नहीं जाता, हो जाता है,
भीगे ‘देव’ के संग तू, प्यार की बरसात है ।

देवेश साखरे ‘देव’

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by देवेश साखरे 'देव'

मैं बदला नहीं

November 1, 2019 in ग़ज़ल

माफ़ करना मेरी आदत है, इसमें दो मत नहीं।
मैं बदला नहीं, बदला लेना मेरी फ़ितरत नहीं।

मैं जहाँ था वहीं हूँ, मैं वही हूँ और वही रहूँगा,
लिबास की तरह बदलने की मेरी आदत नहीं।

मैं कभी सूख जाऊँ या फिर कभी सैलाब लाऊँ,
गहरा समंदर हूँ, मुझमें दरिया सी हरकत नहीं।

शजर की झुकी डाल हूँ, पत्थर मारो या तोड़ लो,
फल ही दूँगा, बदले में कुछ पाने की हसरत नहीं।

आज कल मिलते हैं लोग, यहाँ बस मतलब से,
बगैर मतलब मिलने की, किसी को फुर्सत नहीं।

देवेश साखरे ‘देव’

शजर- पेड़

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by देवेश साखरे 'देव'

तलाश

November 1, 2019 in ग़ज़ल

खुद को तलाशते गुमनामी में कहीं खो न जाऊँ।
शोहरत की हसरत में गुमनाम कहीं हो न जाऊँ।

चढ़ते सूरज को तो सारी दुनिया सलाम करती है,
डरता है दिल की मैं अंधेरे में कहीं सो न जाऊँ।

सितारे की मानिंद रौशनी आती रहे, धुंधली सही,
भीड़ में मगर, नज़रों से ओझल कहीं हो न जाऊँ।

सुना है, हाथों की लकीरों में नसीब छिपा होता है,
अश्कों से मैं हाथों की लकीरें कहीं धो न जाऊँ।

यूँ तो हमेशा प्यार के ही फूल खिले, पर डरता हूँ,
दिले-ज़मीं पर नफ़रत के बीज कहीं बो न जाऊँ।

देवेश साखरे ‘देव’

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by देवेश साखरे 'देव'

अब होश ना रहे

October 31, 2019 in ग़ज़ल

ऐ साकिया अब होश ना रहे, तू इतना पीला ।
फिर ना जिंदगी से करूं, कोई शिकवे-गिला ।

करते रहे हम सारी उम्र, बेपनाह बवफाई,
बेवफाई के सिवा हमें, और कुछ ना मिला ।

जिसे ज़िंदगी समझा, उसने ही लूट ली जिंदगी,
मेरी मुहब्बत का तूने, दिया है अच्छा सिला ।

बागबां ने ही उजाड़ कर रख दिया, खुद बाग,
फिर ना कभी बहार आई, ना कोई गुल खिला ।

अब ना रही जिंदगी से कोई, जुस्तजू ना आरज़ू,
खुद ‘देव’ माँगे ख़ुदारा बस मुझे तू मौत दिला ।

देवेश साखरे ‘देव’

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by देवेश साखरे 'देव'

तलाश

October 30, 2019 in ग़ज़ल

खुद को तलाशते गुमनामी में कहीं खो न जाऊँ।
शोहरत की हसरत में गुमनाम कहीं हो न जाऊँ।

चढ़ते सूरज को तो सारी दुनिया सलाम करती है,
डरता है दिल की मैं अंधेरे में कहीं सो न जाऊँ।

सितारे की मानिंद रौशनी आती रहे, धुंधली सही,
भीड़ में मगर, नज़रों से ओझल कहीं हो न जाऊँ।

सुना है, हाथों की लकीरों में नसीब छिपा होता है,
अश्कों से मैं हाथों की लकीरें कहीं धो न जाऊँ।

यूँ तो हमेशा प्यार के ही फूल खिले, पर डरता हूँ,
दिले-ज़मीं पर नफ़रत के बीज कहीं बो न जाऊँ।

देवेश साखरे ‘देव’

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by देवेश साखरे 'देव'

इंतज़ार तुम्हारा

October 29, 2019 in ग़ज़ल

चंद हर्फ़ तुम्हारी नज़र करता हूँ ।
तुम पे कुर्बान दिल-ओ-जिगर करता हूँ ।

मेरे ख्वाबों की ज़ीनत हो तुम,
इंतज़ार तुम्हारा हर पहर करता हूँ ।

काँटों से दामन इस कदर उलझा,
सुलझाने की कोशिश हर कसर करता हूँ ।

कभी न कभी तो मिलोगी किसी मोड़ पर,
इसी उम्मीद में जिंदगी बसर करता हूँ ।

गर आये कभी मौका जां-ए-आजमाइश का,
तुम्हें अमृत खुद को ज़हर करता हूँ ।

जहाँ भी हो खुशियों के बीच रहो,
दुआ मैं ‘देव’ शब-ओ-सहर करता हूँ ।

देवेश साखरे ‘देव’

हर्फ़- शब्द, ज़ीनत-सुन्दरता, शब-ओ-सहर- रात और दिन

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