कस्तूरी मृग
October 29, 2019 in हिन्दी-उर्दू कविता
कस्तूरी अपनी नाभि में रख मृग,
सुगंध के पीछे भागती सारे वन में।
काम, मोह, माया के पीछे भाग,
व्यर्थ समय ना गंवाओ जीवन में।
धैर्य, शील, शांति पाना कठिन नहीं,
खोज सकते हैं स्वयं अंतर्मन में।
देवेश साखरे ‘देव’