ज़िन्दगी पर कविता

ज़िन्दगी ने मुझको जीना सिखा दिया

ज़िन्दगी ने मुझको जीना सिखा दिया

ज़िन्दगी ने मुझको जीना सिखा दिया अकेले होकर भी खुश रहना सिखा दिया रहती है यादें अब खुशियों के दरम्या यादों ने आसूंओ से दामन छूड़ा लिया »

ज़िद्दी ज़िन्दगी

ज़िन्दगी मुझ से बस अपनी ही मनवाती है कभी मेरी सुनती नहीं बस अपनी ही सुनाती है… कभी जो पूछू सवाल उस से,माँगा करू जवाब उस से बस वो धीरे से मुस्कुराती है ज़िन्दगी मुझ से बस अपनी ही मनवाती है… कई बार बतलाई अपनी ख्वाहिशे उसको , इल्तजा भी की कोई जो पूरी कर दो वो मेरी अर्ज़ियाँ मुझको ही वापस भिजवाती है ज़िन्दगी मुझ से बस अपनी ही मनवाती है … मुझसे कहती है आज न सही, कल पूरी कर दूंगी ख्वाहि... »

मुश्किल ए ज़िन्दगी

मैंने ज्यादा किताब पढ़ा नही पर मुश्किल ए ज़िन्दगी ने बहुत कुछ सीखा दिया »

ज़िन्दगी कोरा कागज़ थी हमारी

ज़िन्दगी कोरा कागज़ थी हमारी तुमने कुछ रंग भर दिए आये हो तोह रुक जाओ इतनी जल्दी क्या जाने की पर रोक तोह हम सकते नही वरना रब बुरा मान जाएगा उसे भी तोह अच्छे लोगों की जरूरत है एक मैं ही महिरूह सा रह गया रंगों के बौछार के बावजूद एक मैं ही बेरंग सा रह गया »

ज़िन्दगी

इतनी भी नाराज़गी ठीक नहीं की फासले उम्र भर का हो जाये पल भर का जीना है यारों बेगाने लोगों को छोड़ यहाँ अपनो से फुरसत नहीं। »

ये ज़िन्दगी कैसी

परत दर परत यूँही खुलती सी नज़र आती है ज़िन्दगी, उधेड़ती तो किसी को सिलती नज़र आती है ज़िन्दगी, हालात बदलते ही नहीं ऐसा दौर भी आ जाता है कभी, के जिस्म को काट भूख मिटाती नज़र आती है ज़िन्दगी, दर्द जितना भी हो सहना खुद ही को तो पड़ता है जब, चन्द सिक्कों की ख़ातिर बिकती नज़र आती है ज़िन्दगी।। बदलती है करवटें दिन से लेकर रात के अँधेरे में इतनी, सच में कितने किरदार निभाती नज़र आती है ज़िन्दगी।। राही अंजाना »

ज़िन्दगी

पहली बार जब रोया तोह भूख और प्यास थी दूसरी बार जब रोया स्कूल का पहला दिन था तिसरी बार जब रोया तब स्कूल का आखरी दिन था कॉलेज के दिन तोह रुलाने के थे दुसरो को छोड़ो ना उस बात को और मुझको लगता था सबसे ज्यादा गम तेरे छोड़ने का था पढ़ जब सोचने और लिखने बैठा तोह देखा यह एक मामूली घटना हैं जो तकरिबन सबके साथ हुआ हैं हम ज़िन्दगी में भूल जाते हैं की तवज्जो किस बात को देना है दोस्तों यह चंद लाइन बेहद निजी है पढ़... »

ज़िन्दगी

ज़िन्दगी

बचा कर चन्द सामान ले जाने की जद्दोजहद में, देखो कैसे जिंदगी को अपनी कोई डुबा बैठा है।। राही »

ज़िन्दगी

ये जिंदगी थोडा अपनी रफ़्तार को धीमा तो कर हम जब तक कुछ समझे तू और आगे निकल जाती है।। »

स्वप्न तेरे साथ ज़िन्दगी का देखकर

स्वप्न तेरे साथ ज़िन्दगी का देखकर

स्वप्न तेरे साथ ज़िन्दगी का देखकर, सदियाँ बीत गई ‘राही’ की सोते सोते।। राही (अंजाना) »

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