ज़िन्दगी पर कविता

ज़िन्दगी ने मुझको जीना सिखा दिया

ज़िन्दगी ने मुझको जीना सिखा दिया

ज़िन्दगी ने मुझको जीना सिखा दिया अकेले होकर भी खुश रहना सिखा दिया रहती है यादें अब खुशियों के दरम्या यादों ने आसूंओ से दामन छूड़ा लिया »

ज़िद्दी ज़िन्दगी

ज़िन्दगी मुझ से बस अपनी ही मनवाती है कभी मेरी सुनती नहीं बस अपनी ही सुनाती है… कभी जो पूछू सवाल उस से,माँगा करू जवाब उस से बस वो धीरे से मुस्कुराती है ज़िन्दगी मुझ से बस अपनी ही मनवाती है… कई बार बतलाई अपनी ख्वाहिशे उसको , इल्तजा भी की कोई जो पूरी कर दो वो मेरी अर्ज़ियाँ मुझको ही वापस भिजवाती है ज़िन्दगी मुझ से बस अपनी ही मनवाती है … मुझसे कहती है आज न सही, कल पूरी कर दूंगी ख्वाहि... »

मुश्किल ए ज़िन्दगी

मैंने ज्यादा किताब पढ़ा नही पर मुश्किल ए ज़िन्दगी ने बहुत कुछ सीखा दिया »

ज़िन्दगी कोरा कागज़ थी हमारी

ज़िन्दगी कोरा कागज़ थी हमारी तुमने कुछ रंग भर दिए आये हो तोह रुक जाओ इतनी जल्दी क्या जाने की पर रोक तोह हम सकते नही वरना रब बुरा मान जाएगा उसे भी तोह अच्छे लोगों की जरूरत है एक मैं ही महिरूह सा रह गया रंगों के बौछार के बावजूद एक मैं ही बेरंग सा रह गया »

ज़िन्दगी

इतनी भी नाराज़गी ठीक नहीं की फासले उम्र भर का हो जाये पल भर का जीना है यारों बेगाने लोगों को छोड़ यहाँ अपनो से फुरसत नहीं। »

ये ज़िन्दगी कैसी

परत दर परत यूँही खुलती सी नज़र आती है ज़िन्दगी, उधेड़ती तो किसी को सिलती नज़र आती है ज़िन्दगी, हालात बदलते ही नहीं ऐसा दौर भी आ जाता है कभी, के जिस्म को काट भूख मिटाती नज़र आती है ज़िन्दगी, दर्द जितना भी हो सहना खुद ही को तो पड़ता है जब, चन्द सिक्कों की ख़ातिर बिकती नज़र आती है ज़िन्दगी।। बदलती है करवटें दिन से लेकर रात के अँधेरे में इतनी, सच में कितने किरदार निभाती नज़र आती है ज़िन्दगी।। राही अंजाना »

ज़िन्दगी

पहली बार जब रोया तोह भूख और प्यास थी दूसरी बार जब रोया स्कूल का पहला दिन था तिसरी बार जब रोया तब स्कूल का आखरी दिन था कॉलेज के दिन तोह रुलाने के थे दुसरो को छोड़ो ना उस बात को और मुझको लगता था सबसे ज्यादा गम तेरे छोड़ने का था पढ़ जब सोचने और लिखने बैठा तोह देखा यह एक मामूली घटना हैं जो तकरिबन सबके साथ हुआ हैं हम ज़िन्दगी में भूल जाते हैं की तवज्जो किस बात को देना है दोस्तों यह चंद लाइन बेहद निजी है पढ़... »

ज़िन्दगी

ज़िन्दगी

बचा कर चन्द सामान ले जाने की जद्दोजहद में, देखो कैसे जिंदगी को अपनी कोई डुबा बैठा है।। राही »

ज़िन्दगी

ये जिंदगी थोडा अपनी रफ़्तार को धीमा तो कर हम जब तक कुछ समझे तू और आगे निकल जाती है।। »

स्वप्न तेरे साथ ज़िन्दगी का देखकर

स्वप्न तेरे साथ ज़िन्दगी का देखकर

स्वप्न तेरे साथ ज़िन्दगी का देखकर, सदियाँ बीत गई ‘राही’ की सोते सोते।। राही (अंजाना) »

ज़िन्दगी एक रेस है जिसमे दौड़ना ही होगा

ज़िन्दगी एक रेस है जिसमे दौड़ना ही होगा

ज़िन्दगी एक रेस है जिसमे दौड़ना ही होगा, वक्त रहते वक्त का मुँह मोड़ना ही होगा, कालचक्र का काम है चलना, चलेगा दोस्तों, हमें अपने मन को एक बार फिर टटोलना ही होगा, ऋतुएँ परिवर्तित हों इससे पहले ही सुन लो, हवाओं के रुख से तुम्हें फिर बोलना ही होगा।। राही (अंजाना) »

पिघलती रही,बदलती रही जिन्दगी

पिघलती रही,बदलती रही जिन्दगी

कभी आइस– क्रीम की तरह पिघलती रही जिन्दगी, हवा की रूख की तरफ बदलती रही जिन्दगी, लाख समझया उसे पाने की जिद ना करो– पर इक वच्चे की तरह जिद ठानी रही जिन्दगी। मंजिल पर कैसे पहुच पाते सीढ़ी ही थी फिसलन वाली, कोशिश तो बहुत की लेकिन फिसलती रही जिन्दगी, मैने तो अब हार चुका हूँ जिन्दगी से, क्योकि वो मंजिल ही थी जिन्दगी।। ज्योति मो न० 9123155481 »

पिघलती रही,बदलती रही जिन्दगी

पिघलती रही,बदलती रही जिन्दगी

कभी आइस– क्रीम की तरह पिघलती रही जिन्दगी, हवा की रूख की तरफ बदलती रही जिन्दगी, लाख समझया उसे पाने की जिद ना करो– पर इक वच्चे की तरह जिद ठानी रही जिन्दगी। मंजिल पर कैसे पहुच पाते सीढ़ी ही थी फिसलन वाली, कोशिश तो बहुत की लेकिन फिसलती रही जिन्दगी, मैने तो अब हार चुका हूँ जिन्दगी से, क्योकि वो मंजिल ही थी जिन्दगी।। ज्योति मो न० 9123155481 »

अरे, ओ जिन्दगी से निऱाश आदमी सुनो।

अरे ,ओ जिन्दगी से निऱाश आदमी सुनो— सड़क पर भटकते हो क़्यो सुनो। कुछ तो कर्म करो—– अपने स्थिति को देखो कुछ तो शर्म करो।। कब –तक कोसते रहोगे,अपने भाग्य को, अंधकार से निकलने का कुछ तो कर्म को करो । अपने आप को समझों कुछ तो प्रयत्न करो, अपने आप को समझो,उठाओ कदम मत रूकना जब तक ना मिले सफलता। देखना मिट्टी भी हो जाएगी सोना !!! »

ज़िन्दगी जैसे शतरंज की बिसात हो गई

ज़िन्दगी जैसे शतरंज की बिसात हो गई

ज़िन्दगी जैसे शतरंज की बिसात हो गई, जिसने समझ ली उसकी जीत ना समझा जो उसकी मात हो गई, ज़िन्दगी जैसे…… बंट गए हैं चौंसठ खानों में हम कुछ इस तरह, जैसे खाने से हटते ही मोहरे की काट हो गई, ज़िन्दगी जैसे…. तलाशते हैं खामियां अब लोग कुछ इस तरह, जैसे किले से निकली और रानी कुरबान हो गई, ज़िन्दगी जैसे…. राही (अंजाना) »

माना के ज़हरीली ज़िन्दगी है

माना के ज़हरीली ज़िन्दगी है मगर जिगर पाक रखते हैं, हम इन्सा नहीं जो दिल में कोई बात रखते हैं, यूँ तो गले लगाने की फितरत नहीं हमारी, मगर इरादे जो भी हो हम साफ़ साफ़ रखते हैं॥ राही (अंजाना) »

ज़िन्दगी

यूँ तो हल्की सी है ज़िन्दगी, वजन तो बस ख्वाइशों का है।। राही (अंजाना) »

नयन अश्कों से भिगोता रहा हूं मैं जिन्दगी भर

नयन अश्कों से भिगोता रहा हूं मैं जिन्दगी भर । गजल उनको ही सुनाता रहा हूं मैं जिन्दगी भर । दरख्ते उम्मीद अब है कहां लगतें तेरे जमी पर रकीबों सा अब तड़पता रहा हूं मैं जिन्दगी भर। दुआओं का रुख बदलता रहा ताउम्र,गिरगिटों सा, मुबारक फिर भी से करता रहा हूँ मैं जिन्दगी भर। फ़िकर अब किसको रहा है जमाने में देख दिलवर, दरद अपनी अब भुलाता रहा हूं मैं जिन्दगी भर। मुकद्दर भी कब सही था हमारा इस दौर “योगी... »

ज़िन्दगी की किताब

अभी ज़िन्दगी की किताब के चन्द पन्नों को पटल कर देखा है। अपने बचपन को जैसे सरसरी निगाहों से गुजरते देखा है, यूँ तो खुशियों के पायदान के पृष्ठ पर आज पैर हैं हमारे, मगर हमने भी दुखों के हाशियों पर खड़े रहकर देखा है॥ राही (अंजाना) »

नोच खाने को बैठी है एक ज़िन्दगी

नोच खाने को बैठी है एक ज़िन्दगी

एक नज़र चाह कर भी मिलाने को तैयार नहीं, ज़िन्दगी एक पल भी सर उठाने को तैयार नहीं, नोच खाने को बैठी है एक ज़िन्दगी ज़िन्दगी को कैसे, क्यों एक लम्हा भी कोई ठहर जाने को तैयार नहीं। राही (अंजाना) »

ज़िन्दगी की किताब

ज़िन्दगी की किताब

  अभी ज़िन्दगी की किताब के चन्द पन्नों को पटल कर देखा है। अपने बचपन को जैसे सरसरी निगाहों से गुजरते देखा है, यूँ तो खुशियों के पायदान के पृष्ठ पर आज पैर हैं हमारे, मगर हमने भी दुखों के हाशियों पर खड़े रहकर देखा है॥ – राही (अंजाना) »

जिन्दगी के तजुर्बे

“**जिन्दगी के तजुर्बे”** ************ जिंदगी के तजुर्बे सताते बहुत हैं , हँसाते बहुत हैं , रुलाते बहुत हैं । कभी हों अकेले , हाँ बिल्कुल अकेले, तजुर्बे साथ मन से निभाते बहुत हैं । *********^^^^^^^^************ *** जानकी प्रसाद विवश**** »

ऐसी बेबसी भरी जिन्दगी “रहस्य “देवरिया

ऐसी बेबसी भरी जिन्दगी “रहस्य “देवरिया

Happy mother day मेरे तरफ से एक छोटी सी कोशिश उम्मीद करता हूँ सबको पसंद आएगा €€€€€€€€€€€€€ ऐसी बेबसी भरी जिन्दगी देने की वजहा बता देता, ऐसा क्या किये थे तू मुझे मेरी खता बता देता,, ********** अपने भूख प्यास को भूला के तूझे पालते रहे, अगर हैं ये खता तो मुझे मेरी सजा बता देता,, ********** जरूरत पडीं तो आज भी जान निसार करदू तूझपे, तूझे काबिल बनाने मे कमी रही हो तो वो कमी बता देता,, ********** आज कमजो... »

ज़िन्दगी

इस तरह उलझी रही है जिन्दगी,,,,,, कोन कहता है सही है जिन्दगी।।।।। उलझनो का हाल मै किससे कहु,,, आँख के रस्ते बही है जिन्दगी।।।। अब नही पढना नशीब में इसे,,, गर्द सी मुझपे जमी है जिन्दगी।।। ना सुकूँ है दिल बडा बेचैन है,,, आग के जैसे जली है जिन्दगी।।।। उलझनो में ही सदा उलझा रहा,,,, मकङियो के जाल सी है जिन्दगी।।। ख्वाब है ना आखँ में नींदे कहीं,,,,, खार सी चुभने लगी है जिन्दगी।।। फुरसतो के पल नही मिलते म... »

जिन्दगी

“ऐ दिल” तुझसे फुर्सत मिले जिन्दगी को तभी तो समझूँगा मैं। पारुल शर्मा »

“ज़िन्दगी का तुम”

ज़िन्दगी का तुम भी एक उसूल बना लेना मोहब्बत ना करना, उसको फ़िज़ूल बना लेना देव कुमार »

हमारी ज़िन्दगी का एक हिस्सा…..

तन्हाई खुद-बा-खुद बन गयी हमारी ज़िन्दगी का एक हिस्सा चलो कोई ये तो नहीं कहेगा अब, ये तन्हा है दुनिया में………………..!! D K »

ज़िन्दगी

………………….…Few lines on life …………………..…… Kabhi gam to kabhi khushiyon ki saugat hai zindagi. Kabhi dhoop to kabhi chhaon mein tahalatee ek aash hai zindagi . . ….. Kudrat ka diya ek anmol sa uphaar hai zindagi. Meennato ke bad mila kudrat ka pyar hai zindagi……………. Har roj naye-naye sabak sikhati ek raj hai zindagi. Vastavikta ka ehsaa... »

कचरे में छिपी ज़िन्दगी की चाबियाँ

बन्द कर अपने जज़्बातों के सभी दरवाजों को, लगाये लब्जों पर हम खांमोशी के बड़े तालों को।   देखो किस तरह ढूंढने में लगे हैं हम कचरे में छिपी अपनी जिंदगी की चाबियों को॥   यूँ तो तमाम रिश्तों के धागों में बंधे हुए हैं हम भी मगर, नज़र आते हैं दो रोटी की खातिर खोजते हम न जाने कितने ही कचरे के ढेर मकानों को॥   जहाँ तलक भी नजर जाती है फैली गन्दगी ही नज़र आती है, फिर भी ढूढ़ते हैं कूड़ा कवाड़ा हम रख... »

कुछ लोग यूँ भी ज़िन्दगी बसर कर रहे है……..

कुछ लोग यूँ भी ज़िन्दगी बसर कर रहे है……..

कुछ लोग यूँ भी ज़िन्दगी बसर कर रहे है बीन कर कचड़ा सब्र कर रहे है ज़िन्दगी सिर्फ अमीरों की नहीं है ये तो तोहफा है खुदा का, ये गरीबों की भी है क्यों करते हो नफरत तुम इन सब को देख कर ये हम जैसों की ज़िन्दगी को सरल कर रहे है जब आते है गली मे, कुत्ते भोंकते है इन पर सब देखते है इनको शक की नज़र से कभी झाँक कर देखो इन सब के घर और आंगन मे ये अपनी ज़िन्दगी का क्या हस्र कर रहे है अक्सर हम फैंक देते है कचरे को यू... »

रोटी तलाशती ज़िन्दगी।

रोटी तलाशती ज़िन्दगी।

तलाशती ये ज़िंदगी कचरे के ढेर में रोटी. फेक देते हैं हम जो अनुपयोगी समझ के. कैसे करते गुजर बसर ये भी इंसान तो हैं जिंदगी ये पाकर मौत गले लगाये चल रहे. ज़हर भरे स्थानों में इन्हे अमृत की खोज है. ये जगह दो जून की रोटी देती ही रोज है. कुछ कपडे ही मिल जायें फटे तन ढकने को. यही हैं ताकती निगाहें थोड़ा सा हँसने को. लेकर वही फटी मैली बोरी चल दिये रोज. मन में विश्वास लिये आज मिलेगा कुछ और. भूखा है पेट इनका औ... »

ज़िन्दगी अपनी……

ताश के पत्तों की तरह हो गई है ज़िन्दगी अपनी, जो भी आता है बस खेल कर चला जाता है………………!!                                                          ………………D K »

पूरी ज़िन्दगी……..

इतना भी आसान नहीं, किसी को इश्क़ मे पा लेना पूरी ज़िन्दगी दाव पर लगनी पड़ती है, हर तरह से किसी का होना पड़ता है…………..!!                                                 …………D K »

गुमनाम-ऐ-ज़िन्दगी

सब कुछ तो छोड़ आया मैं अपना अतीत के पन्नों में सख्शियत मेरी अब इंसान -ऐ -आम रह गई है खुशियों की सुबह न जाने कब से नहीं देखी बस ज़िन्दगी में गमो की शाम रह गई है बेच कर खुद को हमने खरीदी थी मोहोब्बत किसी की अब हर खुवाईशैं नीलाम रह गई है होता नहीं यकीं अब हमको इस इश्क़ पैर हाथों में चाहत -ऐ -जाम रह गई है खुसी लौट नहीं सकती फिर से ज़िन्दगी में हमारी हमारी हर दिल -ऐ -आरज़ू बदनाम रह गई है उधेड़ -बून और ख़ोज-बी... »

मौत ने तोहफा दिया ज़िन्दगी

मौत ने तोहफा दिया ज़िन्दगी मिल जाए तो सवरती बिखरती कट जाती है रो रो कर गुजरती लम्हे सी हस्ती दिल खोल बोलती सोच कर ये मौत ही देती है ज़िन्दगी देती तोहफे हज़ार इक बार न जाने कभी हक़ीक़त जीए ख्वाब बन,या जीया इक अफसाना,फ़साने की राह पर तुम मरे ,मरे पल पल जीते रहे मर मर कर तोहफे में तोहफा मरने का दिया जिंदगी जब वक़्त की रेत जिस्म को खोखली कर रूह को आज़ाद कर रही तब मौत ने अपनाया तोहफे से न ललचाया न उलझा फिर ज्ञ... »

ज़िन्दगी से क्या कहे आसान हो जाओ।

ज़िन्दगी से क्या कहे आसान हो जाओ। खामियां खुद में है साहिल क़बूल करते है।। @@@@RK@@@@ »

ज़िन्दगी जीने की वजह कोई।

ढूंढ रहे है जिंदगी जीने की वजह कोई। तुम्हारी यादें न हो है ऐसी जगह कोई।। , हक़ीक़त बयान करना अगर जुर्म है गर। फिर बोल दो हमारे लिए भी सजा कोई।। , दर ब दर घुमे है न जानें किस जुस्तजू में। जबकि न कोई मंजिल है न है पता कोई।। , इक जख़्म हरा होता रहा यादों के सहारे। जिसके लिये न मरहम है,न है दवा कोई।। , सूख गई अरमानो की फ़सल बिना बारिश के। कब समझा आखिर मौसमो की अदा कोई।। , सूखे पत्तो की तरह बिछे थे ख्वाब र... »

जिन्दगी भर भटका किये राह-ए-उम्मीद में,

जिन्दगी  भर  भटका  किये  राह-ए-उम्मीद  में, कभी   पहुँच   ही  ना  पाये  दयार-ए-हबीब में, शाम  ढ़ल  गयी  और  हम  यूँ  ही  बैठे रह गये, वो आये और जा बस गये निगह-ए-अंदलीब में, क्या   खता   खुदा  की  क्या  उनकी खता थी, जब  लिख  दिये  हो  किसी  ने  ग़म-नसीब  में, जब  वो  अक्स-ए-रूख थे देख रहे मेरे रकीब में, हम पूँछते ही रह गये क्या कमीं थी मुझ गरीब में, वो आके हमसे पूछते क्या हो किसी तकलीफ में, हम  घुट... »

ज़िन्दगी का खेल

तेरा डूबना मुश्किल था “राही” मगर, क्या करते जब दूर तक साहिल नहीं था, कहाँ कब किससे गुफ्तगू करते “राही”, जब दूर तलक कोई सफर में मुसाफिर नहीं था, सबसे ज्यादा उसके करीब था “राही” मगर, शायद वो तुमसे मुखातिब नहीं था, ज़माने से अनजान थी “राही” तेरी राहें मगर, तू लोगों की नज़र में अंजाना नहीं था, वो जो टूट गया “राही” आइना था मगर, सच ये है के वो को... »

तुम्हें ज़िन्दगी के उजाले

तुम्हें ज़िन्दगी के उजाले

तुम्हें ज़िन्दगी के उजाले मुबारक अंधेरे हमें आज रास आ गए हैं तुम्हें पा के हम ख़ुद से दूर हो गए थे तुम्हें छोड़कर अपने पास आ गए हैं तुम्हें ज़िन्दगी के… तुम्हारी वफ़ा से शिक़ायत नहीं है निभाना तो कोई रवायत नहीं है जहाँ तक क़दम आ सके आ गए हैं अंधेरे हमें आज… तुम्हें ज़िन्दगी के… चमन से चले हैं ये इल्ज़ाम लेकर बहुत जी लिए हम तेरा नाम लेकर मुरादों की मंज़िल से दूर आ गए हैं अंधेरे हमें आज̷... »

कैसी ये ज़िन्दगी

हर एक कश के साथ धुंए में अपनी ज़िन्दगी उड़ाते हैं, देखो आजकल के मनचले कैसे अपने कदम भटकाते हैं, पाते हैं कितने ही संस्कार अपने घरों से मगर, हर सिगरट के साथ वो रोज उनका अंतिम संस्कार कर आते हैं, जिस दिन हो जाती हैं खत्म उनकी ज़िन्दगी की साँसे, वही सिगरट की राख वो अपनी चिता में पाते हैं॥ राही (अंजाना) »

‘ना जाने क्यों उन्होंनें जिन्दगी ही नाम कर दी

मैं उनसे चन्द पल की ही तो मोहलत माँगता था, ना जानें क्यों उन्होंनें जिन्दगी ही नाम कर दी हैं, मैं सोया हूँ नहीं दिन रात जबसे देखा हैं उनको, निगाह-ए-इल्तिफातों में सुबह से शाम कर दी हैं, उसी कूचे में रहता हूँ जिधर से तुम कभी गुजरीं, हिकायतें इस कदर फैली मुझे बदनाम कर दी हैं, बज्म़ यारों की कभी लगती थी जहाँ कल तक, आज उस चौखट को मयखाने के नाम कर दी हैं, पैरहन   तक   हैं   तेरे   ही   नाम   के  अब  तो... »

जिन्दगी का फलसफा

जिन्दगी का फलसफा

जिन्दगी का फलसफा कौन समझ पाता है हालात बदलते है नहीं वक्त गुजर जाता है कल ये हुआ,कल क्या होगा इस कशमकश में, पल पल पिस जाता है कल बदलता है नहीं आज बिगड़ जाता हैा ** ” पारुल शर्मा ” ** »

जिन्दगी

एक ताज़ा ग़ज़ल के चन्द अश’आर आप हज़रात की ख़िदमत में पेश करता हूँ; गौर कीजिएगा… चाहता था जिसे जिन्दगी की तरह, वो रहा बेवफ़ा जिन्दगी की तरह। हाँ मेरा प्यार था बस उसी के लिए, जिसने लूटा मुझे था सभी की तरह। दूर जाके मुझे आजमाता रहा, जो ज़ेहन में बसा सादगी की तरह। पास आया न मेरे कभी वो देखो, मुझमें शामिल रहा तिश्नगी की तरह। कैसे बीते सफ़र अब ये काफ़िर भला, रूह में उतरे वो शायरी की तरह। #काफ़िर (10/0... »

जिन्दगी और कविता

जब होश संभाला तो तुमसे जिंदगी को समझाया जाता था अब कुछ भी समझता हूँ तो तुम्हारा सृजन होता है जब मस्तिष्क का ताल दिल के तारों को छेड़ता है तो झंकृत हो तुम बाहर आती हो तुम तब भी होती हो जब रात चोरी-छिपे दिन से मिलकर भाग रही होती है और तब भी, जब नदी किनारे आसमान वसुंधरा की गोद में अपना सर रख अपने प्यार का इजहार कर रहा होता है तुम जीवन की हरेक खुशहाली में शहद की तरह घुली तो हो ही जीवन के नीम अँधेरे में... »

बहुत अमीर है जिन्दगी

बहुत अमीर है जिन्दगी, लफ़्जो को सलीके से, बिठाने में वक्त बिताया करती, गर्मी में सर्दी, सर्दी में गर्मी, यूँ  विपरीत परिस्थतियों को, मात देते हुए खेल आगे बढ़ाया करती, बहुत अमीर  है  जिन्दगी, न कोई गिला न शिकवा , लम्हों पर अपनी हूकूमत जताया करती, फरमाईशो  से  जुदा, वो तो फरमाईशो को निभाया करती, बहुत  अमीर है  जिन्दगी, चाँदनी रात में हो नौका विहार, कहकशो से हो दिल की बात, ऐसे विचारों से मन को बहलाया... »

जिन्दगी ठहरी रही

**ज़िन्दगी ठहरी रही और उम्र आगे चल पड़ी::गज़ल** (मध्यम बहर पर) उस ख्वाब की ताबीर जब शम्म-ए-फुगन में जल पड़ी, तब ज़िन्दगी ठहरी रही और उम्र आगे चल पड़ी l फ़िर कैफियत का ज़िक्र भी मुझको अजाबी हो गया, हर कैफियत की बात पर सोज-ए-निहां पिघल पड़ी l तू जब तलक पहलू में था ख्वाबों के दिल पर तख्त थे, हिज़रत हुई तुझसे तो यादें सांस-सांस ढल पड़ी l हर शय को मैंने मात दी दौर-ए-खुमारी के तहत, फ़िर उम्र ठंडी हो गयी और दास... »

ज़िन्दगी खफा है अब मनाऊँ किस तरह

ज़िन्दगी खफा है अब मनाऊँ किस तरह दिल पे चोट है अब मुस्कुराऊँ किस तरह चोट कोई अंदर है जिससे टिस उठती है चिर से दिल दर्द अब दिखाऊँ किस तरह आँखों के तलवों निचे,काई जमी रहती है आँसुओं को आँखों में छिपाऊँ किस तरह न सोता है न चैन से मुझे सोने देता है दिल को अपने अब बहलाऊँ किस तरह जल जल के हिज्र में दर्द खीरा हो गया भीतर लगी आग को बुझाऊँ किस तरह दिल तो सीने से “पुरव” निकलता नहीं दर्द-ए-दिल ग़ज़ल... »

ज़िन्दगी में तजुर्बों की इक किताब रख

ज़िन्दगी में तजुर्बों की इक किताब रख चेहरे देख परख और उनका हिसाब रख !! मुझे बे-घर कर दिया नींद के फरिश्तों ने सूनी आँखों पे पहले तू कोई ख्वाब रख !! खुद ही खुद को लिख रहा हूँ खत कब से मेरे खतों के कभी तो तू कोई जवाब रख !! भीतर से मैं आज भी बच्चा ही हूँ बहला ले लाकर हथेली पे मेरी कभी माहताब रख !! मेरे अंदर झाँक कर,अंदर से देख मुझको कभी काँटों के बिच तू कोई गुलाब रख !! पढ़ लेंगे लोग चेहरे से हाल-ए-दिल ... »

जान भी तू है ज़िन्दगी तू है

जान भी तू है ज़िन्दगी तू है

जान भी तू है ज़िन्दगी तू है जाने जाँ जाने शायरी तू है खुश्बू-ए-इश्क से धुली तू है मेरी सांसो मॆं बस गई तू है रूबरू ख़्वाब मॆं हक़ीक़त मॆं मेरी रग रग मॆं दौड़ती तू है किरने बिस्तर पे मेरे पड़ती हैं जैसे खिड़की से झांकती तू है शाम के वक़्त छत पे आ जाना मुझको किस दर्ज़ः चाहती तू है फूल जैसा हँसी बदन तेरा उम्र गुज़री मगर वही तू है तेरा आरिफ है मुतमईन जानाँ दूर रह कर भी पास ही तू है आरिफ जाफरी »

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