कितना अच्छा होता! अगर ऐसे ही हमारे नाम भी अलग होते , और काम भी अलग-अलग होते , मगर, जात और धर्म एक ही होती, इंसानियत।
कितना अच्छा होता! अगर ऐसे ही हमारे नाम भी अलग होते , और काम भी अलग-अलग होते , मगर, जात और धर्म एक ही होती, इंसानियत।
“मित्र” वो मेरा सगा नहीं है , मगर भाई से बढ़कर है। कोमिडन नहीं है, मगर हंसाता है; कार्टून से बढ़कर है। थोड़ा जिदी है, मगर इतराता नहीं है। बेपरवाह है खुद के लिए, पर […]
आजकल वफ़ा और कदर सोने के भाव है, मगर धोखा यहां पुलिस की तरह , हर चौराहे पर मिलता है।
एक दूसरे से प्यार करना , फिर एक दूसरे को समझना, फिर शादी कर लेना, और फिर खुशहाल जीवन जीना, ये सब काल्पनिक सा लगता है।
जब तुम उदास हो, कोई भी ना पास हो, तब जो सहारा देती है , सब दुख बाट लेती है, वो मां ही तो है। बिस्तर गीला किया मैंने, वह सो गई गीले में , […]
मेरे रोम- रोम में बसे तेरा नाम , कण कण में तू रग- रग में तू, अद्वितीय तू, अखंड तू, क्षण- क्षण में रमा है तू, सुक्ष्म रूप भी है तेरा , और विशालकाय पर्वत […]
तू हड़बड़ाता क्यों है , और घबराता क्यों है, तेरे दुख दर्द को , कोई देख रहा है, तू अपने ज़हन में , झांक जरा सा । वो रमा है तेरे ही, अंतर्मन में; मन […]
कहां है वो , सबकी नींव धरने वाला! सबका दाता कहलाने वाला! कैसे खा गए , वो दरिंदे उस कच्ची सी कली को, बहुत ख़रोंचे है, मोम जैसे हाथों पर ! निकली है बाहर आंखें, […]
अरे तुम होगें ,खिलाड़ी किसी बड़े मैदान के! मगर मेरे अपनों से मुकाबला कहा होगा, वो दिलो के साथ बहुत अच्छा खेलते हैं!
वो कोई सुखद घटना ही नहीं, मानो सुखों का वरदान था मेरे लिए। उसका आना, हृदय का आह्लादित हो जाना , मेरे आंगन की मुस्कुराहट सी, कुदरत की बनावट सी, मानो खुशियों का भण्डार था […]
हम अपनी बेबसी पर, बेबस रहना पसंद करते हैं। ज़माना लाख बेवफाई करें हमसे , हम अब भी वफ़ा की उम्मीद करते हैं। ******************************
“क्योंकि मैं इंसान हूं ” इंसानियत है मेरे अंदर, क्योकि मैं इंसान हूं । धर्म है मेरे में मानवता का; और बंधन भी है , नैतिकता का अंदर; क्योंकि मैं इंसान हूं। अगर मैं मान […]
 बात ऐसी हो गई कि नींद नहीं आएगी ; हमें आज। वो लोयल नहीं, ढोंगी थे, उजागर हुई , मगर ये बात। आंखों से वो बड़े भोले लगते, शर्म हया का ,क्या नाटक करते […]
मत उछालो मेरे ज़हन को; मत उछालो मेरे ज़हन को, खिलौना समझ कर, मेरा मिजाज कुछ कोयले सा है! कब लपट बनजाए कुछ पता नहीं।
#इंसान हूं मगर ,काल्पनिक सा” जैसे पशु और पक्षियों का अपना वर्ण और रूप होता है , वैसे ही मैंने जन्म लिया ; इंसान के रूप में। पर ये क्या हुआ, मैं इंसान तो था […]
मेरे आशिक ,तूने मुझे पुकारा! तो मैं जरूर आजाऊंगी, किसी के पास देर से आती हूं , किसी के पास जल्दी से आती हूं, तुमने ललकारा है तो क्षण में आ जाऊंगी । तू कर […]
मत काटो मेरी पंख ;मेरे अपनों मैं बुलंदी के आसमानों में उड़ना जानता हूं। छोड़ दो मुझे मेरे रास्ते पर , मैं ठोकरो से संभलना जानता हूं।
वो नन्ही नन्ही आंखें मुझे निहारती रहती हैं वो छोटे छोटे हाथों की शरारत , और होठों की चिल्लाहट , मुझे बुलाती रहती है । अब कितना सबर करूं? कि वो मुझे ; कब पापा […]
“रोटी का टूक” वह रो रहा था, सुबक-सुबक कर हाथों से छाती ,पटक-पटक कर आंखें हैं लाल ,पसीने से बुरा हाल सामने पड़ी दो लाशें, कहने को शरीर ,पर दिखने में कंकाल ! वीडियो बना […]
ए जिंदगी तू खूबसूरत है, मगर औरों के लिए । मेरे लिए तो तू; केवल बोझ सी, बन कर रह गई। मैंने तुझे जितना भी जिया, तूने मुझे उतना ही दिया, दर्द! मैं लड़ाता रहा, […]
जो है बात दिल में , वो लब पे आए । चिट्ठी सा बन कर , उस तक पहुंच जाए, हाले दिल को ; शब्द जाल से , कुछ कहकर बतलाना है ; शायरी तो बहाना […]
चलो इंसान बनते हैं। कब तक जकड़े रहेंगे , हम भेदभाव की जंजीरों में । कब तक पकड़े रहेंगे हम , धर्म- भ्रम की बेड़ियों से। मानवता की चलो , पहचान बनते हैं भगवान […]
चलो फिर से कुरेदते है बीती सुध को, चंद निमेषों को, अनुराग भरें संदेशों को, चलो फिर से कुरेदते है। क्या अनुपम वेला! आह्लादों का मैला! प्रेम-क्रीडा से; मैं था खेला, गुजरे वक्त की किताबो […]
” बुढ़ापे का अकेलापन ” बहुत ही मुसीबतों के दौर से गुजरा है,ये जीवन पर किसे समझाऊं ? कैसे समझाऊं? और क्यो समझाऊं! जब कोई समझता ही नहीं है। अपनों के दुख से; दर्द […]
हालात दुख देते हैं। हां नहीं निभा पाया मैं वो वादें, तुम्हें खुश रखने के वो इरादे, याद है मुझे। बहुत हालातों से की मैंने बंदगी, मगर दुश्मन है ये जिंदगी! जो चाहूं, वो कर […]
बर्फ के टुकड़े सा है ये प्यार, दगा का सूरज कब पींघला दे, पता नहीं चलता। वक्त बदले या ना बदले, इंसान कब बदल जाए, पता नहीं चलता। अनजान चहरे समझ लेते हैं हमें ; […]
मजदूर हूं मैं जरूरत तो पड़ेगी मेरी , क्योंकि मैं निर्माता हूं । माना झोली खाली है मेरी, मजदूरी करके खाता हूं। बहा कर खून-पसीना ; खुशहाल देश बनाता हूं। पूछो उन दीवारों से, भवनों […]
देर नहीं लगती कोई क्यों इतना एहसान फरमा रहा, कुछ तो है जो संग आ रहा खाली जेब को, कभी किसी की नजर नहीं लगती , रिश्ते कब मतलबी हो जाए , देर नहीं लगती। […]
मैं अखण्ड हूं, प्रचंड हूं, निडर हूं ,अजर हूं, संतोषी हूं , मुस्कराती हुई ख़ामोशी हूं, कड़े दर्द से लड़ सकता हूं, मैं सह सकता हूं।- २ लोगो के बहानो को, अपनों के तानों को, […]
उदासी मधुमक्खी के छत्ते सा है ये ज़हान , यहां सब, मतलब से झांकने वाले हैं। अब किसे मैं यहां अपना कहूं, यहां सब काटने वाले हैं । मां को छोड़कर, सब लोभी है, ढोंगी […]
बूंद बूंद बूंदें बूंद बूंद बूंदें बूंद बूंद बरसती है , आंखों से मेरी । तूने क्यों की रुसवाई , जज्बातों से मेरे। बूंद बूंद बूंदें बूंद बूंद बूंदें तू धूप सा चुभता रहा, मैं […]
बहुत-बहुत सुंदर है वो, प्यार का समंदर है वो , फीखा है हर रिश्ता , पर उसका कोई तोड़ नहीं, देखी होगी आपने बहुत सी देवियां , पर मेरी मां की कोई होड़ नहीं, मेरी […]
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