तन मन में ऐसो रमो राम- श्याम का नाम काया हो गई श्याम रंग मन में राम का नाम, मन में राम का नाम लगन अब प्रेम की लागी राम से मिलने शबरी जैसी पीछे […]

मित्रता करने को हाँथ फ़ैल जाते हैं उड़ने को आसमान में पंख खुल जाते हैं जी करता है एक लम्बी साँस लूँ उड़ चलूँ गगन में बादलों से करूं आँख मिचौली बैठूँ सितारों के साथ […]

देखा बांहे फैलाये आसमान खड़ा है गुलाब में कुछ नई कोपलें फूटी, अजूबा सर उठाये खड़ा है शायद ये कल की बारिश का नतीजा है, जो सूखे पत्तों में भी जान फूंक दी।।

बुरा कोई नहीं, बुरी हमारी सोंच है मन के अन्दर ही बैठा पापी, कहने में क्या संकोच है। ढूँढ़ोगे जहान में यदि तुम अच्छा इन्सान, मिलना तब तो मुश्किल है जब बुरी तुम्हारी सोंच है।।

आसमान में स्याह बादलों के पीछे, मैने तुम्हें देखा सफेद रंग की टोपी लगाए लाल रंग की शर्ट पहने तुम कोई चित्र बना रहे थे किसी की घनी जुल्फें, गोरी रंगत, पैरों में पायल होंठो […]

सो जाते हैं हम एक लम्बी साँस लेकर, नींद में तुम्हें देखने की तमन्ना रखते हैं । बार-बार खोलते हैं हम आँखें, इस तरह तुम्हारे इन्तज़ार में हम पूरी रात नहीं सोते हैं।।

ये भारत भूमि है अपनी मैं भारत माँ की जाई हूँ किसी दीवाने के दिल की मैं मीठी सी रुबाई हूँ मेरे संबंध है सब कुछ यही अब मेरी दौलत हैं नहीं ये पूंछो अब […]

तबाही मेरे मन की तुम हंसी में लेके मत डोलो मेरे गीतों को अपने प्रेम के भेंट मत बोलो जो कभी मरते-मिटते थे मेरे अल्फाजों के दम पर, कि अब देकर हमें कसमें वो अब […]

आज अर्ध-निद्रा में ही कुछ जागने की चेष्टा की जाने कितनी दूर चलकर मैं जाने कहाँ पहुँच गई ! अर्द्ध विक्षिप्त अवस्था में, देखा तो हजारों पुष्प सोने के सरोवर में स्नान करके पूजा करने […]

हृदय पर कितने पत्थर रखे हैं हिसाब नहीं हम तुम्हें याद कर कितना रोए हैं हिसाब नहीं। तुम देते रहे सितम अपनी मदहोशी में हमारे जमीर को कितनी चोट लगी हिसाब नहीं।।

मन बूढ़ा हो गया मगर ना मन की पीर गई सडकों पर ही जन्म लिया और सड़कों पर ही मर गई, कोढ़ की काठी, कोढ़ की काया, कोढ़ हुआ यह जीवन मन खनके कितने कंगना […]

भारतीय संस्कृति, अमिट अडिग अति सुन्दर मनभावन, स्वीकृत भावों की भंगिमा है जिसे अपनाया सहेजा संवारा और ह्रदय तल से स्वीकृत किया जाता है जो सदा सबका हित लिये रहती है और संस्कारों की धरोहर […]

बीच सड़क पर जलते देखो शोले और अंगारे, बूढ़े बच्चे और जवान इस अशांति से हारे। प्रेम से रहने का पाठ पढ़ाती है हमारी संस्कृति, अंतरराष्ट्रीय शांति पर कितनी लिखी जा चुकी हैं ​कृति। पर […]

ये रिश्ते अब अमानत इन्हें तुम ऐसे मत तोड़ो अगर कोई शिकायत है तो हमसे बेझिझक बोलो मगर ए हुस्न के मालिक ! ना इतरा तू इस तरह से क्षणिक है हुस्न की महफिल इसे […]

दिल के दर्मियां कुछ जख्म हरे हो रहे हैं वो हमारे और करीब हो रहे हैं वह अब यह नहीं जानते इन रिश्तों से मेरा दम घुटने लगा है हमें अब उनके सहारे से ज्यादा, […]

फूलों से भी प्यारा लगता रिश्तों का यह मेला जिन रिश्तों ने मुझको पाला दिया जीवन को नया सवेरा कुछ रिश्ते दम घोंट रहे जो स्वार्थ की करते सवारी हैं जो देते हैं मुझे प्रेरणा […]

रुदन कर रही देखो प्यारे गौ माता निज राहों में अपने बछड़े को मनुहार से बुलाती आजा प्यारे बाहों में अब यह दुनिया नहीं रही विश्वास के लायक गौ माता बस एक जानवर हो चाहे […]

अदृश्य, अकल्पनीय, प्रारब्ध की ऊँघ, उच्छ्वास प्रकृति का है मां का प्यार प्रभाकर की रोशनी से भी तीव्र है ममता की लौ जिसमें पुलकित होते हैं नन्हें सुमन और देते हैं जहान को सुन्दर सुगंध […]

विश्वास रखते हैं पर फिर भी टूट जाता है जब कोई जनाजा सामने से गुजरता है क्या कमी थी इस जहान में सब कुछ तो था इतनी खूबसूरत थी दुनिया कोरोना का डर ना था […]

कुछ उम्मीदों के सिक्के यूं ही खनकते रहते हैं हम आगे बढ़े, तुम आगे बढ़ो ये ही कहते रहते हैं पर क्या करें पैरों में बेड़ियां हैं सपने बड़े हैं पर रास्ते में रोड़ियां हैं […]

चांद आया है जमीं पर आज मिलने को गले रमजान पूरे हो गए और ईद मिलने हम चले रोंकती राहें हमें है मिलने जा तू ना कहीं खौफ दिल में ये भरा है साँस थम […]

ना सोचा था हमने कभी भी ऐसे दिन में आएंगे घर में बैठकर तोडेंगे रोटी कमाने कहीं ना जाएंगे होंगे इतने आराम पसंद दरवाजे पर ही सब्जी लेंगे जो बन जाएगा वह खा लेंगे दिन […]

मोहब्बत का पैगाम लेकर आया है यह चांद अम्मी, अब्बू, खाला और आओ भाई जान बड़े तसव्वुर से गुजरे रोजे-रमजान ईद मुबारक हो सबको हिंदू हो या मुसलमान मस्जिद से आया बंदों एक जरुरी पैगाम […]

मानवता निष्प्राण पड़ी है कब से देखो तड़प रही है कोई सहारा देने ना आया कितने लोगों की भीड़ लगी है कोई खींचता फोन से फोटो मेरी लाईव वीडियो वायरल हुई है हाय करे कोई […]

कोरोना से सिमटते परिवारों की व्यथा:- कैसा जीवन हाय ! हमारा लगता ना कोई भी प्यारा मम्मी, पापा, दादी, बाबा भाई जो कल ही था दुनिया में आया, चले गए सब छोड़ मुझे अब कौन […]

असमंजस में जीवन गुजरा विपरीत दिशा जाती सांसें कोहराम मचा चहुँ ओर रोती बिलखती दिखती आंखें पीर उठे दिल में ‘प्रज्ञा चीख उठे पत्थर दिल भी ऐसे दृश्य ना देखे हमने कल्पना भी कभी न […]

है नामुमकिन मिटा पाना मेरे दिल से मोहब्बत को तेरी नजरों की शोखी को होंठों के हस्ताक्षर को जो तन से लेकर मन तक छपे उन मौनी चुंबनो के ठप्पे मिट कैसे पाएगें लगे तन […]

मेरी कलम और मेरी स्याही लिखते लिखते बोल रही ओ सखि ! तू किन ख्वाबों को पन्नों पर उकेरती रहती है ? रातों को जगकर खामोंखा जाने क्या लिखती रहती है! मैं बोली- ओ बावरी […]

तू किसी रेल-सी गुजरती है मैं पटरी-सा थरथराता हूँ दूर तुझसे नहीं रहता तेरा स्पर्श पाता हूँ जवाबों की सवालों की कहाँ बातें रहीं अब तो तू मेरी साँसों जैसी है मैं जीवनदान पाता हूँ […]

जो गज़लों में मोहब्बत हो तो कैसा हो ? तो कैसा हो ? जो आँखों में शरारत हो तो कैसा हो ? तो कैसा हो ? छनक कर तू मिले लफ्जों-सा मुझसे चूम ले मुझको […]

हर पन्ने पर तुम मोहब्बत को लिखते हो किसी की मोहब्बत में खोए से लगते हो आज पढ़ी तुम्हारे दिल की डायरी उलटकर मोहब्बत की तालीम लिये से लगते हो यूं तो हमारे बीच कोई […]

जो मनुज होते हैं धरातल पर ही रहते हैं जो दनुज होते हैं पवन में उड़ते रहते हैं रावण का अहंकार जब हद से बढ़ता है, लेकर धनुष और तीर राम संहार करते हैं यह […]

मदर्स डे स्पेशल:- माँ तेरे आँचल में छुप जाने को जी चाहता है थक कर चूर हूँ मैं आज जिंदगी से तेरी गोद में सर रखकर सो जाने को जी चाहता है कोई नहीं डाटता […]

जरा- सा वक्त लगेगा तुमको समझने में, जान पाने में पर जब तक दिलों के बीच दूरियां हैं तब तक नजदीक ना आना… जब तुम्हारी सांसों की खुशबू मेरा मन भिगाएगी, तुम्हारी रूह की गर्मी […]

वो हमसे कहते हैं कुछ ढंग का लिखा करो प्रज्ञा, जिन्हें खुद कलम पकड़ना नहीं आता. आज वो हमको बेशर्म कह रहे हैं जिन्हें खुद शर्माना नहीं आता कैसे कैसे दिन देखने पड़ रहे हैं […]

रद्दी है सरकार बदल डालो तुम इसको सिस्टम है लंगड़ा पकड़ा लाठी दो उसको विकलांग हो गई सोंच सोंच को बदलो अपनी वोट की खातिर तुम जान जोखिम में ना डालो अपनी क्या हो गया […]

कोरोना का कहर है हर गली हर शहर है फिर भी लोकतंत्र का पर्व है सोशल डिस्टेंसिग किधर है ? वोट पड़ रहे हैं धड़ाधड़ वो कहाँ है जिन्हें कोरोना से लगता डर है कैसा […]

इस जीवन की कुछ कविताएं तुमको आज सुनाती हूँ बैठी-बैठी सोती हूँ और सोती-जगती रह जाती हूँ सहमी-सहमी हुई हवाएं मेरे इस जीवन पथ की धूप लगे कष्टों की और छांव लगे मनुहारों की कविता […]

कुछ कल्पनाएं कविता का रूप लेती हैं कुछ विस्मृत हो जाती हैं कुछ सपनों में मिलती हैं तो कुछ मद में बह जाती हैं लेकिन कुछ कल्पनाएं कल्पानाएं ही रह जाती हैं सुबक-सुबक कर रोती […]

कुछ लिखने का मन ना करता शब्द न जाने छीने किसने बिखरी-बिखरी मेरी कल्पनाएं रूढ़ हुए जाते सपने प्यारी लगती अब तो तन्हाई मीठी मीठी तेरी यादें पर फिर भी ना लिख पाऊं मैं स्याही […]

पृथ्वी दिवस (22 अप्रैल) स्पेशल ——————————– इन दो हाथों के बीच में पृथ्वी निश्चित ही मुसकाती है पर यथार्थ में वसुंधरा यह सिसक-सिसक रह जाती है जा रही है पृथ्वी अब प्रदूषण के हाथों में […]

यह जीवन है अजर-अमर तो क्यों द्वेष-भाव तुम रखते हो वाचन से तो अच्छे हो पर मन में विष क्यों रखते हो, मन में विष क्यों रखते हो जीवन चार दिनों का जीवन ना देता […]