प्रदूषण मुक्त हो हमारा भारत यही कोशिश करनी है। स्वच्छ भारत स्वस्थ भारत की जगानी है जन-जन में अलख और स्वयं भी स्वच्छता की बात करनी है। हवाओं में कितना जहर भर गया है गांवों […]
प्रदूषण मुक्त हो हमारा भारत यही कोशिश करनी है। स्वच्छ भारत स्वस्थ भारत की जगानी है जन-जन में अलख और स्वयं भी स्वच्छता की बात करनी है। हवाओं में कितना जहर भर गया है गांवों […]
“बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” ———————————- एक बेटी को शिक्षित करने से दो कुल शिक्षित हो जाते हैं। फिर भी ना जाने क्यों लोग अपनी बेटियों को नहीं पढ़ाते हैं । जल्दी शादी करने की जाने […]
“नशा नाश का दूजा नाम तन, मन, धन तीनों बेकार।।” ++++++++++++++++++++++++++++++++ नशा नहीं जिंदगी अपनाओ अपने परिवार को हादसों से बचाओ। होली हो या हो दिवाली या हो कोई त्यौहार जुआ चरस गांजा से बच […]
“होली का त्यौहार” ×××××××××××××× होली में जल गए सभी के दुख और कलेश चूनर ओढ़ी थी बुआ ने जा लिपटी विष्णु भक्त के बैरी जलकर भस्म हुए बच गए भक्त प्रह्लाद विष्णु ही सत्य है […]
रंगने नहीं आया सांवरिया मुझको ए सखी ! मैं बैठी हूं पलके बिछा कर आया ना सखि साजन मोरा! सब खेले गुलाल पिचकारी मैं बैठी हूं कोरी- कोरी जिसके रंग में रंगना चाहूँ वह ना […]
जो है अपने खुद ही दर्द को पहचान लेंगे मुनासिब नही है जाहिर वो हर बात करे आपके दर्द से वाकिफ़ पूरी तरह से है, नासूर न बने दर्द इसलिये चुप रहते है। दुआ है […]
मैं गुजरा हुआ वक्त हूँ… समंदर की लहर नही जो लौटकर फिर साहिल पर आऊँगा। फैसला आपका है… कदर करो या यूं ही जाने दो मुझे पर मैं फिर से मौका न दे पाऊँगा।
अंतस् में है पीर पीर का रोना रोकर नहीं भला कोई बन पाया है सब कुछ कर-कर कदम- कदम दे साथ फिर गया छोंड़ वह राह उसकी राह निहारती है प्रज्ञा दिन-रात रात ये बड़ी […]
तारीफों जो पुल बांधते हो अच्छें लगते हैं बातों ही बातों में हँसा देते हो ये अंदाज अच्छे लगते हैं यूं तो मोहब्बत हम भी करते हैं पर उसे सरेआम नहीं करते हैं बुरे नहीं […]
होगी बेशुमार दौलत आपके पास पर हमारे पास गजब का हुनर है देर से ही सही पर इंसान समझ जाते हैं किसी दूसरे पर आश्रित ना होकर खुद कमाते हैं और खुद खाते हैं जिस […]
जवाब तो तुम्हारी हर बात का है हमारे पास पर हम तुम्हारी किसी बात का जवाब देना जरूरी नही समझते.. ये मत समझना ना समझ हैं हम और कुछ नहीं समझते हम तो उनमें से […]
प्यार के धोखों से इतना तंग आ गये हम कि अब मोहब्बत के सिवा सब अच्छा लगता है… कहने को तो मोहब्बत हमने भी बहुत की थी…
बेबस बालक की होली कैसे हो रंगों से भरी ? एक तो तन पर फटे पुराने चीथड़े लिपटे हैं दूजे दो निवालों की खातिर दुधमुहे बालक तरसते हैं कितना कठिन होगा इनका जीवन यही सोंचकर […]
होली की धूम मची कान्हा की खातिर राधा सजी बैठी नैन बिछाकर होंठों पर रंग लगाकर श्याम के रंग में रंग जाऊं बन जाऊं मैं चाँद पुष्पों के संग खेलकर कब आएंगे श्याम ? कब […]
कुछ गलतफहमियां पाल ली तुमने हमें लेकर गलत धारणा बना ली हम बुरे हैं भले हैं जैसे भी हैं बस तुम्हारे हैं किसी और की आली क्यों मान ली तुमने।।
पावस बहती आंखों में तुम नीर-सा बनकर आए अविरल बहते रहे हृदय में कितने छाले उभर आए किंकर्तव्यविमूढ़ बने हम तेरा साथ पाकर के जो बन पाने को आतुर थे वह ना हम बन पाए […]
एक सुनहरी धूप थी तुम ओ सखी ! पर गैर की टुकड़ी में तुम जा मिल गई । ना सोच पाई मैं ना संभल सकी बस अकेली थी अकेली रह गई ।।
खोजता मन है खिलौना आसमां छत धरा बिछोना गेहूं की बाली सी कोमल और स्वर्ण सी जटाएं बोलती मिश्री हैं मन में काली-काली ये फिजाएं धुंध छाए आसमां पर कौंध बिजली की उठी लिपटकर स्वर्ण […]
तुम मेरी भावनाओं का अनुवाद हो तुम मेरी आकांक्षाओं का आकार हो साकार होगा हर स्वप्न मेरा गर तुम जो मेरे साथ हो तुम्हारे स्वप्न मेरे स्वप्नों के बिम्ब हैं तुम हमारे हम तुम्हारे प्रतिबिम्ब […]
इतना आसान नहीं होता किसी अपने से बिछड़ जाना जलाना हर रोज दिल को पड़ता है। याद आती है उसकी रह-रह कर फिर भी भूल जाना पड़ता है। भूल जाने की जद्दोजहद में दिल के […]
आज आसमान छूने को जी चाहता है मेरा, मगर यह दिल रोक लेता है। क्योंकि आसमान पाने की ख्वाहिश में कुछ अपने छूट जाएंगे।।
कैसे जिया जाए यह जीवन नीरस-नीरस लगता जीवन | बह जाती है सांस कहीं तो बह जाती है धड़कन | रूठ जाएं कभी सारे अपने बन जाएं कभी गैर भी अपने | उपजे मन में […]
मैं तुम्हें फिर मिलूंगी किसी टूटे दिल के अनगिनत टुकड़ो में, किसी गरीब की फटी हुई झोली की सच्चाई में, एक कटी पतंग की बेसहारा होती उम्मीदों में मैं तुम्हें फिर मिलूंगी…. कांच के उन […]
विश्वसनीयता *************** आज डायरी के अथाह पन्ने पलटने के बाद मिला मुझे एक ऐसा शब्द जिसके मायने ढूंढने, समझने और समझाने में जमाने गुजर गये विश्वसनीयता’ क्या है ?? किसमें है ?? किस पर है […]
ओह !! कितनी मेहनत करनी पड़ती होगी तुम्हें यह सब करने में ! कितना वक्त जाया होता होगा ! सच में मैंने तुम्हारी जिंदगी में दस्तक देकर, तुम्हारी आसान राहों को कितना मुश्किल बना दिया… […]
कुछ सिसकिंयाँ सिमट कर बिखर गईं फिर से तुम्हारी याद आ गई जब रोया करते थे तुम्हारे कंधे पर सिर रखकर वो पल अब कहाँ खो गये ?? बेशुमार दौलत है अपने पास आज पर […]
अब ना ढूंढना कभी मुझे मन के उजालों में अंधकार की ओर बस एक कदम बढ़ा लेना बिखरें हों जहाँ कंटक बेशुमार बस वही पर मेरा निशान मिलेगा… अब ना ढूंढना कभी मोतियों की चादर […]
क्यों अपनों के बीच अपनेपन का एहसास नहीं होता क्यों वो हर एहसास खास नहीं होता कुछ तो कमी होगी मेरे ही अन्दर, जो कोई अपना होकर भी साथ नहीं देता….
हलधर की व्यथा सुनने को नहीं है वो तैयार जिसने बनाई थी नीतियाँ किसानों के लिए अपार किसानों के लिए अपार नीतियाँ बनाकर बैठ गये बंगले में और गरीब किसान बैठ गये धरने में धरना […]
क्यों करता है मन को कलुषित भरकर ह्रदय में विष का सागर प्रेमबीज बो कर ही, उगता है एक वृक्ष धरा पर । वृक्ष धरा पर उगकर देता सुंदर फल है, उसे सींचता सदा ही […]
🍁 नेताओं की नगरी 🍁 ******************** समसामयिक राजनीति को समर्पित ++++++++++++++++++++++ कितना तुझको मोह है नश्वर गद्दी से सुन पगले ! मैं देखती हूं तुझको पैनी नजरों से पैनी नजरों से देख मार डालूंगी तुझको, […]
कौन है सच्चा कौन है झूठा यह तो है किस्मत का फेर तू अच्छा बनके खेलता है नफरत का खेल, है नफरत का खेल खेलता तू अच्छा बन, बनकर तू अच्छा दिखला ना बच्चा बन […]
सच्चाई की माला फेरे घूमें नेता गली-गली तेरा भला करने का झांसा देकर अपना भला करते हैं मुँह को अपने उजला करके कालिख मन में रखते हैं कालिख रखकर मन वो कितना पाक-साफ रखते हैं […]
तुम क्यों कहते हो मुझे कवयित्री हूँ मैं टूटा-फूटा राग हूँ और जोगन हूँ मैं जैसे मीरा लिखती रही भक्ति के पद रोज वैसे मैं लिखती हूँ सदा विरहाग्नि को कर जोड़ विरहाग्नि को कर […]
चंद्रोदय मुझसे कह रहा:- कविता लिखने की बात, मैं कविता के मामले में हूँ ठनठन गोपाल. हूँ ठनठन गोपाल ना आती कविता मुझको फिर भी सब कहते हैं क्यों कवयित्री मुझको ! कवयित्री यदि होती […]
बोली लेखनी आज मिटा तू घनघोर अंधेरा विगत माह से तूने मुझसे नाता तोड़ा नाता तोड़ा तूने मुझसे जोड़ जरा-सा मैं (कलम) तेरे भावों और हूँ स्याही की प्यासा लिखकर कविता और नज्म तू मेरी […]
मिट गया हर संताप दूर अब हुआ अँधेरा घिर कर मेघ ने मेरे घर-आंगन को घेरा घर-आंगन को घेर मेघ मारे किलकारी नीर बहाए प्रज्ञा’ हाय ! रोये बेचारी सुनकर आया मोर मोर ने शोर […]
दीप जलाकर रख दिये आप ही अपने द्वार आ गया मुझको आप ही अपने ऊपर प्यार अपने ऊपर प्यार यार आया जब मुझको इन नैत्रों में दिख गये सांवरे साजन मुझको देखकर साजन हुई शर्म […]
किंचित ही तू मूढ़ है कहता मेरा मन ! क्यों फोड़ा सिर तूने निरमोही के आंगन निरमोही के आंगन में फलता प्रेम कहाँ है !! जिसको तू प्रियतम समझे वह मोहब्बत का खुदा कहाँ है […]
कैसे बन्धु ? कैसे रिश्ते ? कैसा यह संसार कैसा जीवनसाथी भाई ? स्वार्थ पड़े तब प्यार स्वार्थ पड़े तब प्यार किया है यहाँ सभी ने बैरी भी घूमे बन मीत दिल की प्रेम गली […]
कर्म कर तू कर्म कर कर्म पथ से ना तू भटक दिशाएं भले विपरीत हों बोये पथ में शूल हों ना तू डर और ना हिचक कर्म कर तू कर्म कर |
मेरी मनसा थी यहाँ बोना प्रेम के बीज पर उग आया है यहाँ काँटा बन कर विष काँटा बन कर विष उगा है यहाँ पर जबसे ना आए हैं साजन हे सखि ! यहाँ तभी […]
ठन जाती है मौत से एक दिन सबकी यार मुश्किल कहना है यहाँ किसको किससे प्यार किसको किससे प्यार नहीं मालूम किसी को घर आया मेहमान ना भाता कभी किसी को जायेगा कब यह निश्चित […]
💞 महाशिवरात्रि स्पेशल 💞 ************************** शिव की महिमा सब जग गाए पार्वती जी को मन से पूजा जाये मोहित करते हैं घनश्याम सबसे पहले गणपति का नाम | विघ्नविनाशक मंगलकर्ता यह भक्तों के कर्ता-धर्ता शिव […]
शिवरात्रि का भोर भोर जीवन में लाया भाँग- धतूरा चढ़ा के मैंने शिव को मनाया शिव-शंभू हे नाथ ! अरज मेरी सुन लीजे मेरे श्याम की राधा केवल मुझको कीजे मुझको कीजे नाथ बड़ा उपकार […]
उगल रहा है आदमी विष के ऐसे बोल विष के ऐसे बोल बोलकर थकता ना तू मैं तेरा ही अंश मुझको पहचाना ना तू कैसे दिन आए अंतस में पीर उठी है द्वारे पर बैठी […]
पतंगे की कहानी:- ********************** शाम हुई लेकर तम को अपने संग आई, नहीं दिखा कुछ भी मुझको तो माचिस ले आई. जला दिया और गुनगुन करके गीत सुनाया तभी उधर से उड़कर एक पतंगा आया […]
मैं हूँ असहाय कोई मुझको सम्भाल ! कट रही हूँ मूल से सब देखें घूर के गिर रही हूँ धरा पर कट गये हैं सभी पर डोर से मैं बँधी थी सिर उठाये खड़ी थी […]
यक्षिणी की वेदना के शूल:- *********************** प्रश्न करेंगे खुदा से अभी हम क्यूं ना आया है चंदा रोज देखें गली हम… वो नादान है थोड़ा दिल का है नाजुक उसके रस्ते में गुलशन के माफिक […]
यह जीवन है वरदान कभी यह जीवन है अभिशाप कभी… मिलते हैं सच्चे मित्र यहाँ तो बन जाते हैं शत्रु कभी… प्रज्ञा’ का जीवन बेमोल रहा तो बन बैठा उपहार कभी… बस रह जाता है […]
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