खुदकिस्मत हो निन्दक साथ दे गया, इतिहास गवाह है निन्दक बर्बाद कर गया। हौसलों को तोड़ना फितरत था उनका, निन्दक मेहरबान था आबाद कर गया।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
खुदकिस्मत हो निन्दक साथ दे गया, इतिहास गवाह है निन्दक बर्बाद कर गया। हौसलों को तोड़ना फितरत था उनका, निन्दक मेहरबान था आबाद कर गया।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
निन्दक को भविष्य की चिंता नहीं होता, खुद को अच्छा बनाना फितरत नहीं होता। उनके खून में निंदा हैं समाहित होता, जिसके बदौलत वह खुद को महान समझता।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
दया धर्म को ना छोड़िए जब तक चले सांस, पाप की गठरी पर ना करो कभी तुम आस। बुरा किसी का कभी ना करो जब तक रहें जान, धर्म पर चलने वालों का कुछ नहीं […]
धन दौलत को पाकर प्राणी, तन मन से जाता बौराय। धतुरा के सेवन से प्राणी, बल बुद्धि को देता खोय।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
कनक लालसा अंधा करता, नर नारी को कुलक्षित करता। स्वर्ण को देखें आंखें चमके, लालच इंसा के बुध्दि को हरता।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
हार कर राह ना छोड़ो तुम, अपने राह को ना मोड़ों तुम। अस्त्र शस्त्र के बल पर मित्र, लड़ते लड़ते वीर सपूत कहलाओ।। महेश गुप्ता जौनपुरी
दया धर्म के बल पर प्राणी, जीत लेता है विश्व संसार। कर्म धर्म को करते रहना, कभी ना मानना तुम हार।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
जो दया धर्म के राह चलते, उसका कोई बिगाड़ नहीं सकता। दिन दुखी का जो सेवा करते, सदा उनका जयकारा होता।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
कर्मभूमि पर न्योछावर करके, अपनों को जो गले लगाते है। निष्ठावान से जो धर्म सेवा करते, जग सदैव वीरों को गले लगाती है।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
दया धर्म की पोटली बांधकर, जो राह पर अपने चलते हैं। कर्म भूमि को याद करके, जो राह पर अपने बढ़ते हैं।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
विनाश के चक्कर में पड़कर, जीवन को क्यों बर्बाद करना। दया धर्म कर्म करके इंसान, मानवता का तुम उध्दार करना।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
सत्य राह पर चलो आहिस्ते आहिस्ते, झूठ फरेब को खदेड़ो दौड़ा दौड़ा कर। धर्म कर्म निती पर रखकर विश्वास, हे मानव दिखलाओ कुछ अलग कर।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
ए मेहज़बी , दिलनशी , मेहक़शी , ए गुलबदन । नजरे चार हो उससे पहले ले आए अपनी कफ़न ।।
उनका महकना भी एक अजीब अदा है। इसलिए तो हर शायर उन पर फ़िदा है।।
ए ग़ालिब जरा जरा देख तो सही, कहीं वो वही बे -वफा तो नहीं। जो कभी दिल के बदले दर्द दिया था, कहीं वो वही ज़हरीली नागन तो नहीं।।
माना अपनी जवानी पे जोड़ नहीं। फिर भी हम किसी से कम नहीं।।
Mahol gham gusar hai kese manaye eed… Dil sakht be qarar hai kese manaye eed. Har rah khar zar h kese manaye eed. Jn in ki ye pukar hai kese mnayen eed Pani bhi misl […]
नजरों से बातें होती है और जुबान खामोश है। अजीब सी दुनिया है ये मधुर प्रेम का आगोश है ।।
वृक्ष लगाओ वृक्ष बचाओ जीवन को खुशहाल बनाओ, धरा को सुसज्जित करके वायुमंडल को स्वच्छ बनाओ। वृक्ष लगाओ वृक्ष बचाओ तन मन को प्रफुल्लित कर जाओ, सुखी धरती पर वृक्ष लगाकर बादल से वर्षा करवाओ।। […]
झर-झर आँसू बहते उनके झरना बनकर आँखों से। मरणासन्न कर छोड़ा उनको दुष्ट काटकर पाँखों से।। परवाह नहीं थी निज दुख की वश राम नाम का जाप सदा। करते विनती रुको काल तुम राम लखन […]
पत्थर का पर्वत होकर भी आखिर पानी सबको देता है। बिना नाक और मूँह के बृक्ष सबको सुरभित वायु देता है।। बिन ईंधन के जलकर सूरज नित्यहि ताप जगत को देता है। ‘विनयचंद ‘परोपकारी बनकर […]
किसने कितना फ़र्ज निभाया, किसने कितने पत्थर फेंके… हमने इस कठिनाई के दौर में, लोगों के असली चेहरे देखे… डॉक्टर,पुलिस और सफ़ाईकर्मियों में जीवन्त मानवता के लक्षण देखे… इस बुरे वक्त के अविस्मरणीय पलों में […]
हिंदी ग़ज़ल २४/०५/२०२० रचनाओं के सुर-सागर में उतर गया हूं। सृजनशीलता मैं भी देखो कर गया हूं। कल्पनाओं की कोपलताएं फूट पड़ी हैं। शब्दों की बगिया में पलछिन ठहर गया हूं। डोर प्रीत की थाम […]
जिंदगी ये मेरी जिंदगी मुझे क्या से क्या बना दिया। इस लाकडाउन में जीना मरना सिखा दिया।। उम्र में पहली बार सुकून के पल दे दिया । परिवार के संग हंसने खेलने का वक्त दे […]
सुखी बंजर भूमि करें पुकार, वृक्ष लगाकर करो श्रृंगार । भूमण्डल का बिगड़ा संतुलन, वृक्षों से ही है सबका जीवन।। महेश गुप्ता जौनपुरी
आयी विपदा न कोई सहाय हुआ छूटा रोजगार बहुत बुरा हाल हुआ तुम्हारा कष्ट भी किसी ने न जाना पसीने से सींचा जिन शहरों को… किसी ने तनिक एहसान न माना सुनो लला!अब परदेश न […]
ज़िन्दगी की राहों का है ये कौन चितेरा, धूमिल -धूमिल गलियारों में है करता कौन सवेरा। घनघोर घटा से केशों पर डोले मुग्ध पपीहा, किसने उपवन रंगीन किया है ये कौन चितेरा। अलि मंडराते पुष्पों […]
रूखी सूखी खाकर भी अमृत का पान कराती है। वो तो गैया मैया है अपनी जो हर विपदा से बचाती है।।
देवव्रत का भीष्मप्रतिज्ञा या धृतराष्ट्र का अंधापन। गंधारी के आँखों की पट्टी या कुन्ती का अबलापन।। किसको दोषी कहूँ मैं आखिर सब हैं कारण महाभारत के। सबके जिद ने नाश किया अगणित जन गण भारत […]
जिम्मेदार किसे ठहराया जाय आखिर महाभारत के युद्ध का। उत्तर मांग रहा तत्काल हमार ये कैसा धर्मयुद्ध प्रबुद्ध का।।
वटसावित्री का पूजन किया बड़गद की टहनी रोपकर। वृक्षराज को देकर कलेश कैसी पूजा है ये शोकहर।।
तप रही धरा को सुसज्जित फिर से करना है, वृक्षारोपण करके धरा को हरा भरा बनाना है। वृक्षारोपण का संकल्प इंसा को लेना होगा, वायुमंडल को बचाने के लिए वृक्ष लगाना होगा।। महेश गुप्ता जौनपुरी
तन मन 💕 में आग 🔥लगाए ए जलता पानी। जरा थम थम के बरस ए बरखा रानी । ।
पूरब से बही सावन के बयार। झूम के आयी बरखा बहार।।
जिसका जन्म हुआ यज्ञ की प्रज्वलित अग्नि से जो द्रुपद की पुत्री कहलाई फूलों की नर्म सेज पर सोई एक दिन हुई पराई जिसके स्वयंवर में स्वयं कृष्ण जी आये वनवासी अर्जुन ही मछली की […]
सोचा था जो वो पुरा ना हो सका बदलते हालात को देख मैं अपना ना हो सका आंखों के आंसूओं को मैं अपने पोंछ ना सका टुटते बिखरते देखता रहा मैं कुछ कर ना सका […]
तेरी यादों में डूबी रहती हूँ , तेरे इश्क को ही मैं इबादत कहती हूँ ।
सावन के एक एक बूंद गिरा जो मेरे होंठों पे। कैसे बयां करू अपनी उल्फतें दासतां सुर्ख होंठों से।।
सिस्कियाँ लेता रहा मैं उसकी याद में रात भर वो पानी पी-पीकर हिचकियाँ लेती रही ।
अकेला रह जाऊँगा माँ मैं तेरे बिन तू छोड़ कर ना जाना मेरा दामन
जब पहुँचा था उनसे मिलने मैं बड़ा जोश में था , वापस आया तो लुटी हुई दुनिया लेकर ।
कृष्ण के प्रेम में हुई दिवानी मीराबाई लिखे दोहे और किया प्रकट कृष्ण का आभार कृष्ण के प्रेम में मीरा पी गई विष का प्याला कृष्ण के प्रेम ने विष को अमृत कर डाला । […]
यह धरती बोले काँटे मत बोना हे मानव! फूल ही फूल उगाना बन कर महक तू हर ह्रदय को महकाना
निष्काम ना बैठ मन तू कर सृजन, तू कर सृजन गूंज बन भंवरा जगत में कर गुन्जन तू कर गुन्जन
बचपन पर ना डालो इतना बोझ, खेल कूद उत्पात मचा लेने दो। याद करके अपने बचपन को, बच्चों को मौज कर लेने दो ।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
किसान अपने परिवेश को छोड़, खुद को कलंकित नहीं है करता। खून पसीने को बहाकर अपने, देश से गद्दारी नहीं है चाहता ।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
किसान अपने परिवेश को छोड़, खुद को कलंकित नहीं है करता। खून पसीने को बहाकर अपने, देश से गद्दारी नहीं है चाहता ।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
किसान जंग जब छेड़ता है, सरकार घुटने टेकता है । मनवा कर अपना सारा शर्त किसान, सरकार का अक्ल ठिकाने लगा देता है।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
भ्रष्टाचार के जंजीरों में ना जकड़ो सरकार, किसान को किसान ही रहने दो मेरे सरकार। अलाप नहीं रोना मुझको नेता के पकड़ पांव, खून पसीने को मेरे देश में करो ना बदनाम मेरे सरकार।। ✍ […]
अन्न की कद्र जाने किसान, खेत को पुजे समझ भगवान। पैसे वाले कद्र क्या जाने अन्न का, उनके अन्दर समां गया है शैतान।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
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