खुदकिस्मत हो निन्दक साथ दे गया, इतिहास गवाह है निन्दक बर्बाद कर गया। हौसलों को तोड़ना फितरत था उनका, निन्दक मेहरबान था आबाद कर गया।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

निन्दक को भविष्य की चिंता नहीं होता, खुद को अच्छा बनाना फितरत नहीं होता। उनके खून में निंदा हैं समाहित होता, जिसके बदौलत वह खुद को महान समझता।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

कर्मभूमि पर न्योछावर करके, अपनों को जो गले लगाते है। निष्ठावान से जो धर्म सेवा करते, जग सदैव वीरों को गले लगाती है।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

सत्य राह पर चलो आहिस्ते आहिस्ते, झूठ फरेब को खदेड़ो दौड़ा दौड़ा कर। धर्म कर्म निती पर रखकर विश्वास, हे मानव दिखलाओ कुछ अलग कर।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

वृक्ष लगाओ वृक्ष बचाओ जीवन को खुशहाल बनाओ, धरा को सुसज्जित करके वायुमंडल को स्वच्छ बनाओ। वृक्ष लगाओ वृक्ष बचाओ तन मन को प्रफुल्लित कर जाओ, सुखी धरती पर वृक्ष लगाकर बादल से वर्षा करवाओ।। […]

झर-झर आँसू बहते उनके झरना बनकर आँखों से। मरणासन्न कर छोड़ा उनको दुष्ट काटकर पाँखों से।। परवाह नहीं थी निज दुख की वश राम नाम का जाप सदा। करते विनती रुको काल तुम राम लखन […]

पत्थर का पर्वत होकर भी आखिर पानी सबको देता है। बिना नाक और मूँह के बृक्ष सबको सुरभित वायु देता है।। बिन ईंधन के जलकर सूरज नित्यहि ताप जगत को देता है। ‘विनयचंद ‘परोपकारी बनकर […]

किसने कितना फ़र्ज निभाया, किसने कितने पत्थर फेंके… हमने इस कठिनाई के दौर में, लोगों के असली चेहरे देखे… डॉक्टर,पुलिस और सफ़ाईकर्मियों में जीवन्त मानवता के लक्षण देखे… इस बुरे वक्त के अविस्मरणीय पलों में […]

हिंदी ग़ज़ल २४/०५/२०२० रचनाओं के सुर-सागर में उतर गया हूं। सृजनशीलता मैं भी देखो कर गया हूं। कल्पनाओं की कोपलताएं फूट पड़ी हैं। शब्दों की बगिया में पलछिन ठहर गया हूं। डोर प्रीत की थाम […]

जिंदगी ये मेरी जिंदगी मुझे क्या से क्या बना दिया। इस लाकडाउन में जीना मरना सिखा दिया।। उम्र में पहली बार सुकून के पल दे दिया । परिवार के संग हंसने खेलने का वक्त दे […]

आयी विपदा न कोई सहाय हुआ छूटा रोजगार बहुत बुरा हाल हुआ तुम्हारा कष्ट भी किसी ने न जाना पसीने से सींचा जिन शहरों को… किसी ने तनिक एहसान न माना सुनो लला!अब परदेश न […]

ज़िन्दगी की राहों का है ये कौन चितेरा, धूमिल -धूमिल गलियारों में है करता कौन सवेरा। घनघोर घटा से केशों पर डोले मुग्ध पपीहा, किसने उपवन रंगीन किया है ये  कौन चितेरा। अलि मंडराते पुष्पों […]

देवव्रत का भीष्मप्रतिज्ञा या धृतराष्ट्र का अंधापन। गंधारी के आँखों की पट्टी या कुन्ती का अबलापन।। किसको दोषी कहूँ मैं आखिर सब हैं कारण महाभारत के। सबके जिद ने नाश किया अगणित जन गण भारत […]

तप रही धरा को सुसज्जित फिर से करना है, वृक्षारोपण करके धरा को हरा भरा बनाना है। वृक्षारोपण का संकल्प इंसा को लेना होगा, वायुमंडल को बचाने के लिए वृक्ष लगाना होगा।। महेश गुप्ता जौनपुरी

जिसका जन्म हुआ यज्ञ की प्रज्वलित अग्नि से जो द्रुपद की पुत्री कहलाई फूलों की नर्म सेज पर सोई एक दिन हुई पराई जिसके स्वयंवर में स्वयं कृष्ण जी आये वनवासी अर्जुन ही मछली की […]

सोचा था जो वो पुरा ना हो सका बदलते हालात को देख मैं अपना ना हो सका आंखों के आंसूओं को मैं अपने पोंछ ना सका टुटते बिखरते देखता रहा मैं कुछ कर ना सका […]

कृष्ण के प्रेम में हुई दिवानी मीराबाई लिखे दोहे और किया प्रकट कृष्ण का आभार कृष्ण के प्रेम में मीरा पी गई विष का प्याला कृष्ण के प्रेम ने विष को अमृत कर डाला । […]

भ्रष्टाचार के जंजीरों में ना जकड़ो सरकार, किसान को किसान ही रहने दो मेरे सरकार। अलाप नहीं रोना मुझको नेता के पकड़ पांव, खून पसीने को मेरे देश में करो ना बदनाम मेरे सरकार।। ✍ […]