जग में मिलते विभिन्न विचार के प्राणी, शुध्द आत्मा विचार को समझना हैं भारी, ना जाने कितने रंग के हैं चोले ओढ़े, देख दुनिया करतुतों को दंग हुयी है सारी।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

न्याय बिकता है अन्ययाय बिकता है, मेरे भारत देश में स्वाभिमान बिकता है। कानून बिकता है कानून ब्यवस्था बिकता है, नेता जी का इमान सुबह शाम बिकता है।। महेश गुप्ता जौनपुरी

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा बहुत प्यारा है नाक के नीचे बेटी मरती ऐंसा हिन्दुस्तान हमारा है जोर शोर में लगे है नेता जी बेटी को बचाने में नेता जी के कार्यक्षेत्र में दम […]

आज उनकी गली में उजाले होंगे जमीं पर पर बिखरे अनगिनत सितारे होंगे पैरों तले होंगे आसमां कितने? नजरों में जन्नत के नजारे होंगे कितनी मसरूफ है जिंदगी अपनी उनके जहां में सुकून के आलम […]

चलो साथी फिर से गांव चलते है कुछ बचें होंगे पेड़ गर वहां छांव ढूंढते हैं आम भी तो आए होंगे,जामुन भी इतराए होंगे बचपन के फिर से वो पल ढूंढते हैं चलो साथी फिर […]

मैं आज की नारी हूँ न अबला न बेचारी हूँ कोई विशिष्ठ स्थान न मिले चलता है फिर भी आत्म सम्मान बना रहा ये कामना दिल रखता है न ही खेला कभी women कार्ड मुश्किलें […]

अब तो घर में भी रहना कारावास है क्योंकि दरबाजे पे बैठा कोरोना कहर। देख विरयानी में भी है खिचड़ी का स्वाद क्योंकि दरबाजे पे बैठा कोरोना कहर।। क्यों अनजाना -सा लगता है अपना शहर […]

भीष्म पितामह श्रेष्ठ योद्धा भारत का मान बढ़ाते हैं अपनी प्रतिज्ञा नहीं तोड़ते रण में लड़ने जाते हैं हस्तिनापुर की सीमाएं सुरक्षित करने का प्रण ह्रदय में लेकर वह प्रिय पाण्डवों के सामने उपस्थित हो […]

सचिव सयाने कुटिया में रहते थे चाणक्य यहाँ पर। निर्मल हृदयकुञ्ज मनोहर निर्मल गंगा बहे जहाँ पर।। एक छत्र राज था भारत मुँह की खाई जहाँ सिकन्दर। ह्वेनसांग भी हतप्रभ रह गया झाँक झाँक भारत […]

फूलों की खुशबू को बोलो आखिर किसने देखा? बहती हवाओं को बोलो आखिर किसने देखा? खुशबू हीं तो तितली है और खुशबू हीं तो मधुकर है। सुरभित पवन नासिका होकर दिलो दिमाग बीच सुघर है।।

वायरस ——– वायरस हो क्या! जो लहू में संक्रमण की तरह फैलते ही जा रहे हो। या फिर परिमल जिस की सुगंध खींच लेती है अपनी ओर। या व्योम में अंतर्ध्यान शिव जो जग को […]

दर्द ए दिल कि दवा चाहिए तु बस आ,कुछ ना चाहिए खामियाजा महोब्बत का भुगत रहा हूँ तुझसे दुर होने का हौसला चाहिए तुम बीन जिना,अब मुश्किल सा हो गया है अब तु ही बता,और […]

अर्थतंत्र पर लोकतंत्र को हावी कर दो यार । जातिवाद को छोड सदा मानवता का बनाओ संसार ।। झूठ फरेब छल दम्भ से होगा माया का विस्तार । दया धर्म समता से बनेगा न्याय का […]

वक्त की नुमाइश मंदि हम क्या करेंगे, वक्त तेरे पीछे – पीछे हम भी चल पड़ेगें। वक्त जरा तमिज सिखा देना मुझे भी, वक्त तेरे आने पर सरीखे हम भी सीख लेंगे।। महेश गुप्ता जौनपुरी

धन्य हो अन्नदाता इस वैश्विक कोरोना महामारी में लड़ते किसान सुबह शाम खेत में बन्द पड़े सब कमा काज दबे देखो कोरोना का राज देश के मेहनती किसान है देखो बहुत ही परेशान नहीं है […]

मुद्दत बाद ए दोस्त भेजा उसने मेरे नाम इश्क़ ए पैगाम। गुजर गया वो जमाना कभी याद करते थे उनको सुबह शाम।। न मै बेवफा थी न वो बेवफा था बेवफा था ए ज़ुल्मी जमाना।। […]

एक सैनिक की यही दास्तां है वैसे तो सदा वह गुमनाम होता है हो जाए शहीद बस तभी नाम होता है देश की रक्षा कर चिर ख़ामोशी में सो जाता है फिर कौन याद करता […]

चंद मुक्तके – विजय हमारी है | प्रभु की माया होगा कोरोना का सफाया | इसी मंसा मोदी ने लोक डाउन लगाया | चहुं ओर मचाया हाहाकार छुपा दुशमन | धीरे धीरे सबने मिलकर है […]

कविता- जीत लेंगे | अबतक तो जीते है हम आगे भी जीत लेंगे| विजय भारत नाम इतिहास पन्नो लिख लेंगे | लड़ी है लड़ाइया कितनी हार ना मानी हमने | छुपे दुश्मन कोरोना को हम […]

आज फिर गूँज उठा कश्मीर सुन कर ये खबर दिल सहम गया और घबरा कर हाथ रिमोट पर गया खबर ऐसी थी की दिल गया चीर हैडलाइन थी आज फिर गूँज उठा कश्मीर फ़ोन उठा […]

अब से मैं प्यार लिखूंगी तो तुमको लिखा करूंगी वो शामें मेरी ,जो तुम पर उधार हैं , उन पर ख्वाब लिखूंगी तो तुमको लिखा करूंगी वो गलियाँ जिन पर तेरे वापस आने के निशान […]

दायरे ____ **** दायरे थे ही नहीं मानव की लालसा के! हर तरफ फैलाव था पैर पसारे। जीव सीमट रहे थे दायरो में…. लुप्त और लुप्तप्राय होते जीव सिर्फ किताबो में छपी तस्वीर बनते जा […]

मुझे अच्छा नहीं लगता यूँ मलिन वस्त्रों में लिपटे रहना। यूँ अपनी स्मृति खोकर बेसुध पड़े रहना मुझे अच्छा नहीं लगता। गीतमाला सजाकर चंद्र को ताकते रहना मुझे अच्छा नहीं लगता। अब बिन वजह गगन […]

आज की रात कयामत की रात है। गर तुम हो मेरे साथ तो जन्नत की बात है।। थी जुस्तजू तुम्हें पाने को मगर। क्या करू सब की अपनी मुकद्दर है।। डर है मुझे कहीं ए […]

एक दोपहर ऐसी भी:’ मैं कुछ उधड़-बुन में थी अपनी आकांक्षाओं की निर्मम हत्या करके अपने दंश भरे पलंग पर लेटी… कुछ आराम पाने की अभिलाषा हृदय में लेकर… तभी तुम्हारी स्मृतियों के चक्रव्यू ने […]

=राही पथ से न भटक=योगेश ध्रुव”भीम” ××××××××××××××× अडिग मन राह शांत हो, निश्छल जीवन लेकर चल, चाहे भटके मन: चंचल, जीवन नाथ के तू चल, पथ के राही न भटक ऐसे पथ में तू चल […]

एक पीड़ है हृदय में एक दर्द है भयंकर। तड़प रही है धरती और रो रहा है अंबर।। जिसने मुझे है लूटा ज़िन्दगी बनाई बदतर। कहता मुझे लुटेरा आखिर बताओ क्योंकर।। मेहमाॅ बानाके जिसको रखा […]

मजदूर हूँ मैं मजबूर नहीं। नहीं कभी चिंता अपन रोटी की सबका घर मैं भरना चाहूँ। चिलचिलाती धूपों ने जलाया, कभी बारिश के पानी ने भींगाया। कपकपाती ठंढी से भी लड़ना चाहूँ।। क्योंकि मजदूर हूँ […]

इन तीखी नजरो से देखा ना करो दिल बहक जाएगा उम्र तो अठारह के पार है जवानी में फिसल जाएगा फिर न कहना ये तुमने क्या कर दिया दिल के बहक जाने में हूइ खता […]

मुझे ताउम्र ये मलाल रहेगा तुम क्यों आये थे मेरी ज़िन्दगी में ये सवाल रहेगा जो सबक सिखा गए तुम वो बहुत गहरा है चलो प्यार गहरा न सही पर उसका हासिल सुनहरा है गैरों […]

राह में रोडे़ है ए नारी तुझे चलना ही होगा। दुःख सहने वाली ए देवी तुझे जीना ही होगा।। माना कि, पुरूष के हाथों तू हमेशा छलती आई। फिर भी हर हाल में तुझे मुकाबला […]

कोरोना योद्धा सभी वंदनीय हैं। पर ना जाने क्यों कुछ अराजकता तो इन पर पत्थर फेंकते हैं, जिन पर फूलों की वर्षा करनी चाहिए । हर पल तत्पर होकर इस महामारी में अपनी देशभक्ति निभा […]

करोना योद्धा सभी वंदनीय हैं। पर ना जाने क्यों कुछ अराजकता तो इन पर पत्थर फेंकते हैं, जिन पर फूलों की वर्षा करनी चाहिए । हर पल तत्पर होकर इस महामारी में अपनी देशभक्ति निभा […]

औरत खिलौना नहीं उसमें भी जान होती है…. औरत होती है ममता की मूर्ति प्यार की उपमा हजारों फूलों की खुशबू विद्यमान होती है उसमें…. औरत पैरों की जूती नहीं सिर का ताज है… तपती […]

औरत खिलौना नहीं उसमें भी जान होती है औरत होती है ममता की मूर्ति प्यार की उपमा हजारों फूलों की खुशबू विद्यमान होती है उसमें औरत पैरों की जूती नहीं सिर का ताज है तपती […]

कोई तकलीफ नहीं है हमको उजालों से बस ज़िन्दगी के अँधेरे से डर लगता है रोज़ ही रूठना रहता था तुम्हारा भी बिछड़ने में गम ना होगा चलो अच्छा है तुम भी कहां रहे हो […]

मेरे दर्द सिर्फ मेरे हैं इन्हें अपनी आँखों का पता क्यों दूँ तरसे और बरसे इन्हें अपने दर्दों से वो लगाव क्यों दूँ मेरा अंधापन मेरी आँखों को चुभता है पर अपने लिए फैसलों पर […]

कहाँ खो गई तेरी इन्सानियत ओ इन्सान कहलाने वाले। गन्दी हो गई क्योंकर नीयत ओ इन्सान कहलाने वाले।। हर सुख सुविधा भोजन पानी सुलभ तुम्हारे घर में है। फिर काहे का झगड़ा भैया बोले आज […]

वो बैठते हैं आजकल मेरे रकीबों के साथ जिनके हाथों में रहता था मेरा हाँथ बुरा नहीं लगता है मुझे पर अच्छा भी नहीं प्रतीत होता है क्या करूँ दिल दिल ही दिल में रोता […]

उनके मस्त अदाओं के जाल में,हम गिरफ्तार हो गए। जुस्तजू के मेले में हमारी मुकद्दर, हम से ही खफ़ा हो गए।। वफा से बे -वफा बनेंगे वो , हमने ऐसा सोचा ही कब था । […]