कुछ खुशबुएँ महकती हैं कायनात में लिपटे हैं हम पुरानी यादों के दामन में ।
कुछ खुशबुएँ महकती हैं कायनात में लिपटे हैं हम पुरानी यादों के दामन में ।
तुम उस दिन जो हाँ कर देते तो किसी को नया जीवन देते पर तुम्हारी ज्यादा सतर्क रहने की आदत ने देखो किसी का मनोबल दबा दिया कोई पढना चाहता था तुम्हारी मदत से आगे […]
इज़हार ना हो वोह इश्क़ का जो हम तुझसे करते है कुछ रिश्ते बेज़ुबान ही अच्छे है
कहर ढा रही प्रकृति हर पल, कितनी आहें समेटे भीतर, हर दरिंदगी, हर हत्या का चुकता आज हिसाब यही है, एक तरफ पलड़े में आहें, एक तरफ संपूर्ण विश्व है, इतनी बड़ी कायनात पर एक […]
चमक उठा जब चांद गगन में कोटि सितारे टीम -टीम रह गए। सूरज के आने से पहले हीं सब के सब ये मद्धिम रह गए।। लाख हौसला हो जुगनू में अन्धकार कब मिटा सका है। […]
उस रात का फ़ितूर अब भी है तेरे होठों से पिया था जी भरकर, जाम-ए-उल्फ़त का नशा अब भी है । बहुत खलतीं हैं तुमसे ये अब दूरियाँ क़रीब आने की वजह अब भी है […]
तूफानों को आने दो मज़बूत दरख्तों की औकात पता चल जाती है पेड़ जितना बड़ा और पुराना हो उसके गिरने की आवाज़ दूर तलक़ आती है सींचा हो जिन्हें प्यार से उन्हें यूं बेजान देख […]
मैं अकेला ही ख़ुश हूँ, इन राहों में कोई साथ नहीं है यह तनहा सी शब है, और हाथों में कोई हाथ नहीं है। न कोई मंज़िल है अपनी, न कोई हमसफ़र मेरा एक आवारा […]
मेरी स्मृति में अब भी कुछ अवशेष शेष हैं तुम्हारी यादों के कुछ पल मेरे मस्तिष्क में उपस्थित हैं
सोचती हूँ, क्या इस बार तुम्हारे आने पर पहले सा आलिंगन कर पाऊँगी या तुम्हें इतने दिनों बाद देख ख़ुशी से झूम जाउंगी चेहरे पे मुस्कान तो होगी पर क्या वो सामान्य होगी तुम्हें चाय […]
लेकर दर्द घूमती हूँ हर दर पर पर तेरा दर नहीं मिलता जाऊँ मैं किधर!!!!!
कुछ साथी साथ निभाएंगे कुछ बीच रास्ते में छोड़ जाएंगे कुछ विश्वास तुम पर दिखाएंगे कुछ हर वक्त नीचा दिखाएंगे ना रुकना ना घबराना बस चलते जाना मिल जाएगी एक दिन मंजिल वहां खड़े होकर […]
सभी को मयस्सर नहीं जिंदगी की गुलजार शामें किसी को जलते दिनों से भी काम चलाना पड़ता है….
ये कैरोना कहाँ से है आया बलम। मौत बनके जगत में है छाया बलम।। जूठ खान-पान से पनपे ये बिमारी सनम। अशुद्धि में पले -बढ़े है ये बिमारी सनम।। ना जूठा खाऐंगे ना जूठा पीऐंगें। […]
लोग कहते हैं कि मैं बड़ा कमाल लिखती हूँ मैं उसका ही दिया हर दर्द उसके नाम लिखती हूँ
मैने बहुत सोचा अब नहीं मिलूंगी तुमसे, नहीं कहूंगी कुछ भी। कोई फरमाइश नहीं करूंगी कन अंखियों से देखूंगी भी नहीं। पर इस दिल का क्या करू, तुम्हारी आहट, पदचाप महसूस करते ही, धड़कने बहकने […]
चिरायु,चिरकाल तक रहने वाला चिरंतन है प्रेम, निष्काम, निः संदेह निश्चल है प्रेम। पुनरागमन, पुनर्जन्म ,पुनर्मिलन है प्रेम। संस्कार, संभव संयोग है प्रेम, लावण्य, माधुर्य, कोमार्य सा प्रेम। निर्वाक,निर्बोध,निर्विकल्प है प्रेम, यामिनी,मंदाकिनी, ज्योत्सना सा प्रेम। […]
मै और तुम ————- अतीत के फफोले, मरहम तुम। अध्याय दुख के सहारा तुम। तपस्या उम्रभर की, वरदान तुम। बैचेनिया इस दिल की, राहत तुम। दिल में फैली स्याही, लेखनी तुम। अक्षुष्ण मौन इस दिल […]
🇮🇳सीतापुरिया अवधी भाषा:-🇮🇳 घर ते निकरई मा जियरा डेराति हई कोरोना वायरस खाए जाति है।😩😩 हरि घंटा हम हाँथ धोइति हन खाना- पीना हम संतुलितई खाईति हन खाँसी आवई मा जियरा डेराति है कोरोना वायरस […]
सोचता हूँ अक्सर कि तुमको देखे बिना पता नहीं कितनी सदियाँ गुजर गयीं हों जैसे और तुम अभी भी बुन रहे होगे मेरी दुनिया से परे मेरे लिए कुछ और इल्ज़ाम कि जब अचानक किसी […]
FacebookWhatsAppTwitterEmailCopy LinkShare सर्दी खाँसी हो जाती है बहुत तेज ज्वर आता हांथो पैरों का दर्द बढ़ता ही जाता है पहले सूखी खाँसी आती है फिर ज्वर ज्वलंत हो जाता है बचाव:- बचाव ही निदान है […]
वन-वन भटका खोज में, गूलर के फूल के। आखिर खोज न पाया मैं सिवा एक उसूल के।। फूल नहीं होता इसमें होते केवल फल अगणित। बिन फूलों के फल कहाँ से बोलो आए अगणित।। जैसे […]
मैं जानती हूँ कि तुम भी मुझे ही गलत ठहराओगे कुछ कहने से कोई फायदा नहीं—- मैं कह भी दूँ मैं सही थी पर तुम कहाँ मानोगे— तुमने जो जिम्मेदारी दी थी उसी को पूरा […]
मै जानती हूँ मुझमें गुस्सा थोड़ा ज्यादा है पर मै दिल की बुरी हूँ जरूरी तो नहीं….. बड़ो के आगे झुकना चाहिए पर हमेशा मैं ही झुकूं ये जरूरी तो नहीं…. आग दिल में लिये […]
हर दर्द का इलाज है जहान में पर अपनो के दिए ज़ख्म कहाँ भरते हैं टूट जाते हैं जो रिश्ते तो फिर कहाँ जुड़ते हैं कैसी कश्मकश है जिंदगी में जो प्रिय होते वही बिछड़ते […]
दिलों में गर्मी बहुत है थोड़ी हवा चल जाये तो अच्छा है
वो तो गूलर का फूल लगता है मेरे दिल का फ़ितूर लगता है । ना शाम लगता है ना सुबह लगता है सर्दी की दोपहर वो लगता है । वो तो भीगा गुलाब लगता था […]
तुम्हारी चादर में लिपटे कुछ शक के दाग थे। तुम मेरी मंज़िल और तुम्ही हमराज थे। क्या थे दिन और क्या लम्हात थे। कुछ अंजाम और कुछ आगाज़ थे। इल्जाम लगा किस्मत और हालात पर […]
जरा देखूं तो सही तुम्हारे दिल में उतर कर दिल है अभी या दिल है ही नहीं दिल है तो उसमें पत्थर हैं या मांस के कुछ लोथड़े भी हैं एहसास है या है ही […]
उनके आने की खबर से मैं यूँ बेचैन हो गई खिड़की से देखती रही दरवाज़ा खोलना भूल गई
पर्त दर पर्त तू खुलता जा रहा है ये दिल तुझसे दूर होता जा रहा है
किताब जब खोलोगे तुम यादों की मेरा नाम सबसे नीचे होगा पन्ने जब पलटोगे वफ़ा के मेरा ही चेहरा दिखेगा
पहले खफ़ा थे हम उनसे अब वो निभा रहे हैं जितना मैं पास जाऊँ उतना ही दूर जा रहे हैं
वो मुझे यूँ रुला रहा है जैसे याद कर रहा है । यूँ देखता है जैसे मुझे प्यार कर रहा है ।
तेरी एक अच्छाई बताऊँ:- अगर तू बेवफा ना होता तो मैं शायर ना होती कदर खुशियों की कैसे जानती जो रात भर ना रोती ।
वो मुझे कुछ यूँ चाहता था कि मेरी साँसो से मुझे पहचान लेता था एक दिन उसके दोस्तों ने पूंछा क्या है तुम्हारी ख्वाहिशे—— उसने छोटी सी लिस्ट सुनाई जिसमें पहला नाम भी मेरा था […]
रोंक लिया है हमनें अपने आप को जैसा चाहते थे तुम मैनें खुद को बना लिया
बहारें आने वाली थीं लेकिन ना आई कली जो खिलने वाली थी शाख पर ही ना आई
कौन जाने यहाँ किसको सब व्यस्त हैं खुद में किसी से क्या शिकायत जब तू खुद ही तेरे मद में
कौन जाने यहाँ किसको सब व्यस्त हैं खुद में किसी से क्या शिकायत जब तू ही खुद ही तेरे मद में
छिपा कर ज़ख्म घूमती हूँ तेरे दिए हुए तड़प उठती है तन्हाई किसी का हाथ पड़ने से
धुँधली यादों की परछायी छुपाने की जो कोशिश की मिट गई सांसों की रेखा लिपट कर आ गयी यादें
भूल जाऊँ मैं सब कुछ नामुमकिन है ये खुद को भुला सकना मेरे बस में फिर भी है तेरा नाम मिटा सकना नहीं बस में नहीं हद में
तेरे इश्क में किया है हमनें मै से मैखाने का सफ़र
रात भी खत्म हो गई बस तेरा जिक्र बाकी है तूने तो मुझे मार डाला पर मेरी साँस बाकी है
मैं बनूँ फूल बगिया का तमन्ना है यही है मेरी। भला हो मुझसे जगिया का तमन्ना है यही मेरी।। बीच झाड़ी लताओं के लाल पीले गुलाबी -सा। हरे उपवन की हरियाली में मस्त झूमूँ शराबी-सा।। […]
कोशिश नाकाम ही रही गज़ब फ़ितूर छाया है लगता है क्यूँ ऐसा तेरा अक्श आया है
लौट आओ मुसाफिर देर हो चुकी है जिंदगी हमेशा मौका ना देगी
बादल गरज़ यूं रहे थे के बरस ही जायेंगे बिज़ली कड़क के हमको तेरी याद दिला रही कुछ बर्फ के टुकड़े पड़े है सड़क पर—– बूँद तो बरस रही हैं स्नेहिल झीसियाँ थी पड़ रही […]
इत्मिनान से पढ़िए — मेरे दिल के हैं अल्फ़ाज़— हर बात का मतलब नहीं होता कभी तो दिल से काम लीजिये तू ही तू बस नज़र आयेगा हर नफ़स ।
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