कहीं दिन है कहीं रात है, कहीं धूप कहीं बरसात है। सुख और दु:ख आना-जाना है, यही ज़िन्दगी का अफ़साना है। लेकिन कुछ सुख-दुःख, ठहर से जाते हैं जीवन में सुख का ठहरना तो मन […]
कहीं दिन है कहीं रात है, कहीं धूप कहीं बरसात है। सुख और दु:ख आना-जाना है, यही ज़िन्दगी का अफ़साना है। लेकिन कुछ सुख-दुःख, ठहर से जाते हैं जीवन में सुख का ठहरना तो मन […]
जख़्म देकर वो मुझसे कहता है पीर दिल में तो नहीं उठती है । आँसू हैं तेरे या पानी हैं तू उदास क्यों नहीं दिखती है। तेरे होंठों की जो रंगत है क्यों मुझे फीकी […]
जब दिल में दर्द सा उठा एक तीर सा चुभा, जो कल था मेरी निगाहों से मारा गया। आज मेरे ही दिल का कातिल बना। वो फरेबी भी है, वो आशिक भी है, मेरी सांसों […]
कुछ दिनों से दिल में लहरें सी उठती थी, उसके नाम से मन में एक आस सी जगती थी। वो मेरी आंखों का सिर्फ एक धोखा था, प्यार तो बहुत था पर प्रज्ञा’ पर एक […]
मेरी हर सांस में तुम ही हो मेरी हर बात में तुम ही हो। जीवन की सुंदर छवि में जब ढूंढती हूँ मैं, मेरे मन मन्दिर के प्राणनाथ तुम ही हो। परिवर्तन की इस लहर […]
किताबें और कलम होती हैं हमारी मार्गदर्शिका* हमारे जीवन में निभाती है महत्वपूर्ण भूमिका* ताउम्र हम सीखते हैं इनसे, ये हैं हमारी विरासत मानव विकास के लिए हैं सर्वोपरि दिग्दर्शिका* –✍️एकता गुप्ता *काव्या* उन्नाव उत्तर […]
क्या बात है कुछ बीते लम्हों की, ठहर से गये हैं जीवन में। बस गये तन मन में मेरे, जीवन की पूंजी बन कर के। बचपन की कुछ याद पुरानी, बस गई बन कर एक […]
हुकुमत की जंग में रिश्ते, नाते , सच्चाई, जुबाँ की कीमत कुछ भी नहीं होती । सिर्फ गद्दी हीं महत्त्वपूर्ण है। सिर्फ ताकत हीं काबिले गौर होती है। बादशाहत बहुत बड़ी कीमत की मांग करती […]
जीवन ज्योति की एक ललित सरिता बहे सुंदर सुकोमल कविता बने, हो चहुँ ओर प्रकाश फैला हुआ मेरी लेखनी में वो बात रहे। नहाए हुए से लगे शब्द मेरे भाव तो जैसे खो ही गए […]
जो सितारों को मुँह चिढाएँगे, आज वो दीप हम जलाएँगे। आँख दुनिया की चौंधियाएँगी, इस कदर रोशनी लुटाएँगे। जीते हैं अबभी जो अँधेरों में, उनको हम रोशनी में लाएँगे। जो हैं रूठे उन्हें लगाके गले, […]
अमावस की रात है , सुलगते से जज्बात हैं। एक दिया जलाकर करूँ रौशनी वो कहते यह बात हैं। दिया जलाकर मिटे अंधेरा, मन के तम का क्या करूँ। आज बाहर है रौशनी, मन के […]
इस दीवाली सबके हृदय में दया , शांति, करुणा और क्षमा का उदय हो, क्रोध और ईर्ष्या का नाश हो और प्रेम का प्रकाश हो।दीपावली के शुभ अवसर पर सबके शुभेक्षा की कामनाओं के साथ […]
धन का होना बहुत जरूरी है, धन से ही जिंदगी की भौतिक जरूरतें पूरी होती हैं। वर्तमान दौर में धन पर सम्मान टिका है, धनवान का सम्मान दिखा है। जिंदगी की दौड़ है, धन कमाने […]
गुड़ पिघल गया था मीठा सा जल हुआ, तुमने हमारे हेतु जब की थी जरा दुआ। गुड़ थे हम पिघल गए थे उस प्यार की नमी से, कोपल बने उगे थे पत्थर भरी जमीं से। […]
शिवजी के समक्ष हताश अश्वत्थामा को उसके चित्त ने जब बल के स्थान पर स्वविवेक के प्रति जागरूक होने के लिए प्रोत्साहित किया, तब अश्वत्थामा में नई ऊर्जा का संचार हुआ और उसने शिव जी […]
तुम्हारे बिन ये चार दिन हमने कैसे काटे हम नहीं जानते, तुम मेरे जीवन साथी हो पर मेरे कब तक हो यह भी हम नहीं जानते। तुम्हें रातों में नींद तो जरूर आई होगी, पर […]
जीवन की सत्यता में झांक कर अपने फर्ज को अदा करना सीखा है। गिरे तो कई बार पर गिर कर उठना भी सीखा है। यूं तो हम खड़े रहते हैं अपने फैसलों पर, पर कभी-कभी […]
आ रही है दीवाली अंधेरा दूर कर लूँ, तन में वो हो या मन में अंधेरा दूर कर लूँ। जहां तम भरा हो वहां पर एक दीपक रख दूँ, छोटी छोटी कमियाँ न ढक दूँ, […]
सूनी-सूनी सी फ़िज़ाऍं हैं, सूनी सी सब दिशाऍं हैं। आप नहीं हैं मेरी ज़िन्दगी में अगर, सूनी-सूनी सी लगती है ड़गर। हमें ही हमारी नहीं है खबर, किसी की हमको लगी है नजर। जुबाॅं चुप […]
करवा चौथ के नाम पर जो झूठ बोलते हैं खा पी के भूखे रहने का ढोंग करते हैं उनसे अच्छे तो हम हैं साहब! व्रत भी रहते हैं और चुप रहते हैं।
( इस बार आर्यपुत्र आर्यन सिंह ने किसी प्रेमिका को याद करते हुए और करवा पर्व की कल्पना को संजोकर इस कविता को लिखा होगा ) कैसे कहें हम बात दिलों की हैं ये मोहब्बत […]
दो पल का है यह *स्वर्णिम जीवन* बाकी *सुख दुख* तो लगा रहेगा साथी नैतिकता* मानवता* सादगी* का गहना पहनकर सत्कर्म* करो मेरे साथी मत अभिमान करो इस तन पर यह तन तो हो जाना […]
मन के भाव लिखा करती हूँ, ज़िन्दगी की धूप और छाॅंव लिखा करती हूँ। कभी “खुशियाँ” तो कभी, “घाव” लिखा करती हूँ। आभार आपका आप इसे कविता कहते हैं, मैं तो बस जज़्बात लिखा करती […]
हम अपनी तकलीफें किसी को बता नहीं सकते, कोई तमाशा ना बना दे मेरी बेबसी का इसलिए किसी को दिल के छाले दिखा नहीं सकते।
मेरी शराफत को लोग मेरी कमजोरी समझते हैं नासमझ है वह लोग जो मुझे नासमझ समझते हैं।
गूंगी नहीं हूं मैं मुझे भी बोलना आता है बस मेरे संस्कार मुझे मौन कर देते हैं।।
एक दुआ है खुदा से कि खुदा ऐसे ख्वाब ना दिखाएं जो पूरे ही ना हो ऐसे लोगों से ना मिलाए जो कभी अपने ना हो होठों पर मुस्कुराहट रलाने वाले लोग भले ही ना […]
दामिनी चमक रही है, यामिनी लरज़ रही है। अम्बर पर मेघा छाए, नीर बरसता ही जाए। मन मेरा घबराए देख कर ऐसा मौसम, तिमिर मुझको डराए। डर बढ़ता ही जाए, पवन चल रही सीली-सीली, भीग […]
अब आर्यपुत्र आर्यन सिंह का हृदय सांसारिक वस्तुओं से हटकर बैराग्य की तरफ आकर्षित होने लगा सो उन्होने विशुद्ध सरल भावनाओं को लेखनी के माध्यम से हम तक पहुंचाया – शून्य मार्ग पर चला पथिक […]
विपरीत परिस्थितियों में एक पुरुष का किंकर्तव्यविमूढ़ होना एक समान्य बात है । मानव यदि चित्तोन्मुख होकर समाधान की ओर अग्रसर हो तो राह दिखाई पड़ हीं जाती है। जब अश्वत्थामा को इस बात की प्रतीति […]
खूब बरसात हो रही है आहट है सर्दियों की पानी है सब तरफ तर हो गई धरा है। जाने कहाँ से उड़कर आकाश में समुंदर, पहुँचा हुआ है देखो मन सोच यह रहा है। कोई […]
सर्द पवन का झोंका लेकर, आई ये बरसात है। बे मौसम ही आई लेकिन, कुछ तो इसमें बात है। भीगे सारे बाग-बगीचे, भीगे पुष्प और पात हैं। भीग गया है तन-मन सारा, भीग गये जज़्बात […]
मौन की भाषा में लिखकर आपको जो पंक्ति भेजी, वो समझ पाये नहीं क्या या रहा कुछ और कारण। राह में जो फूल हमने आपके स्वागत में डाले, आपने समझे वो कंटक या रहा कुछ […]
जीवन में बहुत सी कठिनाईयाँ आती हैं जाती हैं कभी तो रुलाती है तो कभी कुछ सिखाती हैं हम नहीं जान सकते हमारा भविष्य क्या है पर ये जो पल है हमारे हाथ में है […]
साहित्य ऐसा रचना कवि, जिसमें दिखाई दे समाज की छवि। बातें हों ऊंचे पर्वत, गहरे सागर की कभी बहती पवन कभी उगता रवि। दुख-सुख की चर्चा करे कवि, कभी बातें हों मुस्काने की। विरह की […]
अधूरी सी हो गई है ज़िन्दगी, अधूरा सा हो गया संसार है। पूरी ना हो पाई कुछ अभिलाषा, अधूरा सा रह गया प्यार है। अभी दर्द में बहुत हूँ, थोड़ा समय लगेगा मुस्काने में। दर्द […]
क्यों न कही कोई कविता बताओ, क्यों चुप हो ओ! कवि तुम। चारों तरफ है घोर अंधेरा, गाकर कविता कर दो सवेरा। फैल उजाला भीतर पहुँचे नहीं है निराशा यह मन कह दे। सोए हुए […]
लिख भेजा एक संदेश जा पहुंचा उनके पास आया ना कोई खत मुझे ना आया कोई जवाब ऐसा प्रेम किया हमनें ऐसी कैसी प्रीत ना ही मेरी हार हुई और ना ही हुई है जीत।
आओ कविता की रौनक लो दर्द भुला दो, प्यार बढ़ा दो, जीवन के रंग छक लो। भीतर भीतर जो पीड़ा हो, पीड़ा को ढक लो। आओ, कविता की रौनक लो।
मन के रावण को मारने के लिए, दशहरा मनाया जाता है। किस-किस ने रावण को मारा कौन राम-मय हो कर आया है। दशहरा शुभ हो…. यह गीत तो सभी ने गाया है। कब यह देश […]
सदा रहेगी सच की जीत हारेगा वह रावण, जिसमें हो अन्याय भरा छल छन्द और घमंड। राम हमेशा लेंगे अवतार करेंगे लीलाएं सच को खूब सहारा देंगे, दुष्टजनों को दण्ड।
आहुति ——– अम्मा! तुमसे कहनी एक बात.. कैसे चलीं तुम? बाबूजी से दो कदम पीछे… या चलीं साथ। कैसे रख पाती थीं तुम बाबूजी को हाथों ही हाथ? जब मनवानी होती थी तुम्हें कोई बात.. […]
पल में काफी ताकत है उलट-पुलट कर देता है पल, अर्श से फर्श बता देता है, पल में प्रलय करता है पल पल में काफी ताकत है। अभी ठीक सब कुछ लेकिन पल में बिगड़ […]
करो प्रयास कुछ ऐसा युवा अब राह पा जायें खड़ा सकंट है रोजी का रोजगार पा जायें। पढ़ाई इस तरह की हो, पड़े मत बैठना खाली, पढ़ाई से बढ़ें आगे रहें ना एक भी खाली।
सभी पाठको और सभी लेखकों और कवियों को प्यार भरा प्रणाम। आप सबके प्रेणना से मैने भी कुछ लिखना शुरू किया है। आप सबके आशीर्वाद की आकांक्षी।
हम गलत हैं या सही हमें कुछ भी पता नहीं पता बस इतना चला है ये दिल मचल चला है फिर एक बार गुनाह करने चला है क्या करें, क्या कहे हम नहीं जानते ये […]
जिन्दगी में परेशानियां जब हद से बढ़ने लगे ये निगाहें निगाहों से लड़ने लगे मुकद्दर भी जब मुह फेर ले कोई तड़पता हुआ ही छोड़ दे तब जीवन में आगे बढ़ो अपने भावों को आवाज […]
तसव्वुर में भी हमने आज तक ऐसा नहीं सोचा नकबब्त इस कदर होगी नजर से दूर जाओगे। मगर जाओ भले ही दूर लेकिन हम निराली सी निगाहों से परस्तिश आपकी करके बुला लेंगे स्वयं के […]
जिंदगी जिस राह पर चल रही है, उसकी कोई मंजिल नहीं है, कश्ती साहिल पे थी सही, मजधार में डूब रही है, कत्ल हुआ है सर-ए-आम, पर तू मेरा कातिल नहीं है।
जिंदगी जिस राह पर चल रही है, उसकी कोई मंजिल नहीं है, कश्ती साहिल पे थी सही, मजधार में डूब रही है, कत्ल हुआ है सर-ए-आम, पर तू मेरा कातिल नहीं है।
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