जिंदगी जिस राह पर चल रही है, उसकी कोई मंजिल नहीं है, कश्ती साहिल पे थी सही, मजधार में डूब रही है, कत्ल हुआ है सर-ए-आम, पर तू मेरा कातिल नहीं है।

जिंदगी जिस राह पर चल रही है, उसकी कोई मंजिल नहीं है, कश्ती साहिल पे थी सही, मजधार में डूब रही है, कत्ल हुआ है सर-ए-आम, पर तू मेरा कातिल नहीं है।

मैं कौन हूँ, मेरा अस्तित्व क्या ? आशाकिरण हूँ, जलता दीया, गतिहीन हूँ, पर अचल नहीं, निर्भय ना सही, भयभीत नहीं। गुणवान नहीं, निर्गुण भी नहीं, तेजस ना सही, शीतल भी नहीं, आकारहीन, निराकार नहीं, […]

मैं कौन हूँ, मेरा अस्तित्व क्या ? आशाकिरण हूँ, जलता दीया, गतिहीन हूँ, पर अचल नहीं, निर्भय ना सही, भयभीत नहीं। गुणवान नहीं, निर्गुण भी नहीं, तेजस ना सही, शीतल भी नहीं, आकारहीन, निराकार नहीं, […]