उठ जा कविता लिख इंसान कुछ तो सृजन कर धरती पर, पत्थर को दे जान, जितना अर्जित करता है तू उसमें से दे दान। और की सत्ता से मत डर तू रब की सत्ता मान। […]

अवनि तुम माता हो सबकी तुम जीवन टिक पाया है, तुम पर जीवन हो पाया है, लाखों-अरबों प्राणी तुम पर करते हैं माँ बसेरा। जीवन के नयनों का उनके होता यहीं सवेरा। भोजन, आश्रय सब […]

कैसे हो पूछता हूँ कहते हैं खूब अच्छे हर बार पूछता हूँ, कहते हैं खूब अच्छे। भीतर का दर्द जो है वो भी बता न पाए हम भी न पूछ पाये बस बोल बोलने हैं […]

फूल की महकी कली हैं बेटियाँ, नूर सी सबको मिली हैं बेटियाँ। रंजिशो औ’ नफ़रतों के दौर में, आज भी कितनी भली हैं बेटियाँ। मतलबी लोगों की फ़ैली भीड़ में, हाथ थामे संग चली हैं […]

कभी फुर्सत मिले तो हमको भी तुम याद कर लेना भले झूँठी ही हो आहें मगर एक आह भर लेना। हम भी हैं तुम्हारी राह के एक मुरझाए हुए से पुष्प, जब कभी हो अकेले […]

जाने कैसी है तुम्हारी याद वक्त बेवक्त आती है कभी मुह ढक कर कभी मुह दिखाई के लिए आती है तुम्हारे नाम का सिन्दूर लगा कर मुझे रोज चिढ़ाती हैं सिरहाने पर बैठ कर कोई […]

कूलंकषा बहती रही, निज राह में, किस चाह में, साथ बहते रहे कण पर न जाने किस चाह में। बीतता चलता रहा क्षण निरंतर राह में दे गया खुशियां किसी को, कुछ रहे बस आह […]

माँ के आँचल में छुप गए जब डर लगा पापा ने हिम्मत सिखाई और राह चलना सिखला दिया बहन ने रखी पहनाई स्नेह से घर भर दिया कौन कहता है कि रिश्ते दर्द देते हैं […]

डॉटर्स डे स्पेशल:- बेटियां हैं पराई तो क्या मान और सम्मान देती हैं, आँख में आते हैं आँसू तो हाँथों से पोंछ देती हैं। जिन्दगी में कोई भी हो तकलीफ मगर होंठो पर मुस्कान रखती […]

नफरतों ने दिशा बदल डाली मन घिरा जाल में स्वयं अपने बांटी नफरत तो पाई नफरत थी फिर भी मन में रही है कुछ गफलत। अपनी मेहनत का फल मिलेगा ही कटु रहे या भले […]

मन के घोटक में बैठ कर दौड़ा किस दिशा में कहाँ चला राही, इस तरफ उस तरफ धरा-अंबर आया क्या हाथ में बता छनकर। खूब रख ईप्सा चला दौड़ा, वैसी ले दीक्षा चला दौड़ा, मन […]

अब भी ऐसे ख्याल आते हैं बिछुड़े गम गीत बन के आते हैं, जो फिसल कर गिरे थे हाथों से दाने मडुवे के गिरा जाते हैं। जिनसे उम्मीद न थी वे ही मिले स्वप्न के […]

कभी कभी अक्सर रातों में बीते कल की दृश्य नजरों के सामने एक फिल्म के रील की भाँति न जाने क्यों चलती है हंसता हुआ वो चेहरा रूठने की वो अदा फिर अचानक दिल छू […]

पत्थर से फूल पे ,यों न वार कीजिये जरा सोच समझ के एतवार कीजिये हमारे इशारे पे ही घटा रंग बदलते है कोई कोई तो कुर्बान भी हो जाते है टक्कर देना तुम्हें आया ही […]

पूरब को पत्र भेजा, पश्चिम पहुँच रहा है, भेजी जिसे मुहब्बत नफरत समझ रहा है। खाली पड़ी थी थैली भर दी थी उसमें दौलत हम चाहते थे भरना दिल में जरा मुहब्बत।

आँचल में तेरे ओ माँ! कितना स्नेह है ना, सब कुछ भरा हुआ है मन में तेरे दुआ है। तेरी दुआ से ओ माँ! हर पथ है मेरा रोशन, तूने दिया है इतना अनमोल मुझको […]

सुन्दर हरीतिमा यह फैली हुई धरा में, देती सुकून मन को, लगता है हूँ हरा में। लहलाते पेड़ डाली महकी हुई धरा में देती सुकून मन को लगता है हूँ हरा मैं। अब फूल खिल […]

नयनों की पुतलियां झपकी अनेक बार हृदय की धड़कनें धड़की अनेक बार, पंजों के मोड़ जाने कब-कब खुले जुड़े सच्चे के सामने कब कर खुले जुड़े। साँसें स्वयं चली, आशा कभी बनी आशा कभी गली, […]

जीत ली तुमने दुनिया तो क्या हमारा हृदय न जीत सके देश जीते होगे तुमने पर प्रेम को न जीत सके। एक वक्त था जब तुम मेरे लिये गीत गाते थे स्वयं गाते थे उसे […]

नहीं करनी हमें तुमसे बराबरी क्योंकि तुम हमसे एक कदम आगे हो अच्छाई में भी आगे और बुराई में भी आगे हो। कल जब कोई तिनका भी तुम्हारा साथ ना देगा कल जब तुम्हें कोई […]

संस्कार है हमारे जीवन का आधार जिसकी दहलीज़ पार करने पर समाज बहिष्कृत कर देता है और जिसका पालन करने पर महापुरुष की उपाधि देता है। जीवन में संस्कार और शुद्ध आचरण हमें दैवीय शक्तियों […]

आगे बढ़ने की ललक में घमंड आड़े आता है, इंसान बढ़ना चाहता है दम्भ आड़े आता है। जिसके भीतर बारिश तो हो पर दम्भ उग आए, उसे साफ करना होता है वरना वह आड़े आता […]

फुरसतों के पल न जाने हैं कहाँ आजकल गर वो होते तो हमें मिलते जरा मुश्किल के हल। खूब बारिश हो चुकी सूखे पड़े हैं जल के नल, आज जो भी न हो प्रातः होनी […]

तब की बातें अलग थी जब हम भी बिना पते के, पाती लिखा करते थे। बुझते हुए दीये को बाती दिया करते थे। हम सादा लिफाफा भेज दिया करते थे, वे उस पर अपना नाम […]

नहीं बैठ पाया वो पंक्षी किसी भी डाल पर, जिसके बच्चों को वृक्ष सहित गिराया गया हो। विश्वास अब किस पर करे वह जब यह कृत्य देवरूपी दिग्गजों ने किया हो। अब कहाँ रहे वो […]

देखो श्राद्ध आ गए स्वर्ग लोक से पितृ देख रहे अपने पुत्रों को देखो श्राद्ध आ गए हंस रहे अपनी ही परंपराओं पर सोच रहे काश जीते जी भी कोई क्रिया या करम होता तो […]

जल की बूॅंदें गिरी सारी रात, रात भर होती रही बरसात। तिमिर छाया रहा भोर में भी, ऐसे हो गये थे हालात। ना चन्द्र दिखे ना सूर्य ही आए, मोती गिरते रहे सारी रात। भीग […]

हम कहते रहे वक्त हमारा है जब ठोकर लगी तब ख्याल आया ज़माना सही कहता है वक्त न हमारा है न तुम्हारा है उसे तो बस चलते ही जाना है हम इन्सान क्यों नही वक्त […]

ख्वाहिशें मेरी मुझे स्वप्न नित दिखाती हैं एक पूरी हुई अन्य उभर आती हैं। जिनको मालूम नहीं पता मेरी निगाहों का नैन के तीर मेरे दिल में चुभा जाती हैं। उड़ रही तितलियां दूर बहुत […]

तुम ककड़ी सी शीतल मैं नमक सा स्वाद, मिर्च सी बहस से होता है विवाद। मुहब्बत नहीं है अपवाद क्यों करना समय बर्बाद आओ स्नेह को कर दें आबाद। खुशियों के पुष्प खिलेंगे जब मूल […]

सीमा में तैनात सिपाही तुझे सलाम है, देश के लिए की जा रही तेरी सेवा बेमिसाल है। सीमा सुरक्षित है तब हम सुरक्षित हैं, तू सीमा में खड़ा है सिपाही! तब हम सुरक्षित हैं।

कुर्सी आप भी निराली हो, तरह तरह के लोगों के लिए तरह-तरह की छवि वाली हो। अलग-अलग लोग अलग अलग तरह की कुर्सी, छोटी-बड़ी, कच्ची-पक्की स्टाइलिश, साधारण लकड़ी की प्लास्टिक की, कठोर, आरामदायक। हर तरह […]

लड्डू कितने मीठे हो तुम गोल-गोल, पीले-पीले, लाल-लाल बेमिसाल। गणपति के प्यारे हो, रसना के दुलारे हो, खुशियों के सहारे हो, खुशी में प्यारे हो, शुभ अवसर पर खाये जाते हो, सफलता पर बांटे जाते […]

ऐ दिल! तू गम की बात न कर आराम फरमा काम की बात न कर। कितना सजने लगा है अब वो किसी और के लिए, हम बिखर गए अब संभलने की बात न कर।

जीवन की उलझनों से फुर्सत लेकर आओ बैठो मेरे पास कुछ पल निहारो देर तक मुझे आगोश में ले लो मुझे मैं बैठा हूं तुम्हारे इंतजार में तड़पता रहता हूं तुम्हारे प्यार में मैं तुम्हारा […]

पितृ पक्ष आया है श्रद्धा का पक्ष है, विस्मृति पर अब स्मृति लानी है। उन्हें याद करना है जन्म दे गए जो, पाल-पोस कर हमें बड़ा कर गए जो, हमें सौंप संसार, विदा हो गए […]

फूल करेले के हैं फल बहुत कड़वे हैं, पाने तुझे ओ मंजिल ! छिल गए तलवे हैं। खूब बारिश हुई मुहब्बत की, आ गई बाढ और मलवा है, ऐसा लगता है घोंट कर रिश्ते आज […]

फूल करेले के हैं फल बहुत कड़वे हैं, पाने तुझको ओ मंजिल ! छिल गए तलवे हैं। खूब बारिश हुई मुहब्बत की, आ गई बाढ और मलवा है, ऐसा लगता है घोंट कर रिश्ते आज […]

अब धीरे-धीरे समेटने लगी है वह अपने साजो – सामान को, तपती गर्मी से झुलसती धरती को नहलाने आयी थी, प्यासे प्राणियों को खूब पानी पिला गई। धरती पर पड़े बीजों को उगा गई। ये […]

गुनगुना दे कोई तराना तू, सीख ले प्यार को निभाना तू। अपने मन को पहुंचने दे मुझ तक, दूर से मत मुझे लुभाना तू। कोरे कागज में नाम मत लिखना, खाली छाया की भांति मत […]

भारत देश हमारा, खूब फले-फूले, चारों तरफ हरियाली हो जन मन में खुशहाली हो, महके आँगन आँगन महक उठे कोना कोना, खुशियों का उगना खुशियों को बोना। अपना अपना फर्ज निभाएं सब, उन्नति होगी तब।