जंग लड़ी थी गहरे जख्म पुराने थे, रंग लगे थे चेहरे पे गरम छुड़ाने थे, घाव लगे थे दिल पर सब बेमाने थे, महबूबा के प्रेम में चरम दीवाने थे, धुंधले थे पर चेहरे सब […]

धरती बिछा कर आस्मां ओढ़ कर सो जाते हैं, ये गरीब हैं अपना रस्ता छोड़ कर सो जाते हैं, मिलती नहीं जो रौशनी की किरण उनसे आके, जलाके माचिस की तीली मोड़ कर सो जाते […]

है कौन जो तुम्हारी यहां फिकर कर रहा है, हर लम्हा जो एक तुम्हारा जिकर कर रहा है, हर एक कश के साथ जो जला रही है जिगर, वो सिगरट तुम्हारे सफर को बेअसर कर […]

तुम्हें देख यूँ लगा कुछ भी नहीं माहताब। सोचता हूँ तुम हकीकत हो या फिर ख्वाब । किया इजहारे-मोहब्बत, कल पे टाल दिया, सारी रात आँखों में कटी, पाने को जवाब । कहते हैं तुमसे […]

अश्क आँखों से बहता हो लबों पर मुस्कुराहट हो। दया से दिल लबालब हो मन में प्रेम की आहट हो।। निकलकर भाव जो आये वही तो काव्य है प्यारे।। लगे प्रेमालाप में पक्षी परम आनन्द […]

कमरा तो कोई दिखता नहीं इस दिल में मगर, हम फिर भी मेहमाँ कई इसमें बिठाये फिरते हैं, क्यों देखने पर भी कुछ नज़र नहीं आता हमको, आढ़ धर्म की लेकर हम खुदको छिपाये फिरते […]

राज़ ए दिल को दिल में छुपाने से क्या फायदा, बात दिल की दिल में ही दबाने से क्या फायदा, मोहब्बत की राहों में यूँ भटकने से क्या फायदा, लिखा पत्र भेजा नहीं उसे गुमाने […]

रौशन आज मिलकर सब अपने घर कर लेंगे, और मासूम परिंदे अपने भीतर पर कर लेंगे, पूरा आसमां जगमगाऐगा बिना तारों के ऐसे, के सितारे ज़मी को मानो अपने सर कर लेंगे, कोना – कोना […]

जिंदगी एक पहेली है तो सुलझाओ न तुम, मैं पहले ही उलझा हूँ और न उलझाओ तुम, हर कदम पर जानता हूँ अनसुलझे सवाल हैं, कोई तो हल होगा न हमें बतलाओ न तुम, अरे […]

हिन्दी कविता- आसमान की बुलंदी गिरा तो फिर भी उठ जाएगा | झुका नहीं तो तू टूट जाएगा | छूना है आसमान की बुलंदी | पाँव उठा तो आधार छुट जाएगा | हारा भी तू […]

अब लोगों में वो पहले जैसी बात कहाँ है, दिल है पर वो पहले जैसे जज़्बात कहाँ है, आखिर है कौन यहाँ जो गुनेहगार नहीं है, सच में सच वो पहले जैसे पहरेदार कहाँ है, […]

आबाद जहां करने को, उम्मीद एक ही बाकी है, अब न कोई ज़िंदगी में, सहारा तू ही साकी है । हिज्र-ए-महबूब ने मुझे, क्या से क्या बनाया, खुद को डूबोया प्याले में, शराब तू ही […]

बसावट मेरे दिल में अजनबी तुम क्यों बसाते हो? चलो छोड़ो! बहुत अब हो चुका मिलना, मेरे दिल को अभी भी तुम ठिकाना क्यों बनाते हो? दूर बैठे हो तुम कितने! कि मुझ से मिल […]

बसावट मेरे दिल में अजनबी तुम क्यों बसाते हो? चलो छोड़ो! बहुत अब हो चुका मिलना, मेरे दिल को अभी भी तुम ठिकाना क्यों बनाते हो? दूर बैठे हो तुम कितने! कि मुझ से मिल […]

बसावट मेरे दिल में अजनबी तुम क्यों बसाते हो? चलो छोड़ो! बहुत अब हो चुका मिलना, मेरे दिल को अभी भी तुम ठिकाना क्यों बनाते हो? दूर बैठे हो तुम कितने! कि मुझ से मिल […]

श्याम ने मुरली बजाई कि घर से गोपियाँ निकली। इधर से गोपियाँ निकली उधर से गोपियाँ निकली श्याम ने मुरली बजाई कि घर से गोपियाँ निकली।। पीलाती दूध बच्चे को कलेबा कर रही कोई। लगी […]

कभी दिल के करीब आकर तो देखो। प्यार का जज़्बात जगा कर तो देखो। लगने लगेगी सारी जिंदगानी हंसीन, किसी को ज़िंदगी में लाकर तो देखो। ना बहकने देंगे हम, तुम्हारे कदम, कभी गाम-दर-गाम मिलाकर […]

डगर पर जो भी मिला वह दौड़ता भागता मिला ज़िंदगी जिसकी भी मिली उससे पुराना वास्ता मिला जब भी शाम होते घर गया दर्देदिल ही जागता मिला| बीते साल की तरह फिर नए साल का […]

सूर्योदय सी केसरी सुनहरी, रश्मिया तुम्हारी सखी सहेली। मोतियों सी जगमग हंसी तुम्हारी, सहस्त्र फूलों के इत्र सी महक तुम्हारी। दिलकश निगाहें होंठ अंगारे, घनघोर घटा सी जुल्फें तुम्हारे। चाल बड़ी मदमस्त नशीली सुंदरता की […]

दिलकशी से तुम मिले!!! निगाहों में अक्स तुम्हारा रोशन क्या हुआ! हजारों चिराग इस दिल में जल उठे। सर चढ़ रहे हो अजनबी हालत क्या बयां करूं हलचल सी मची दिल में तूफान में घिरा […]

जीवन मृत्यु सच जीवन का इनसे ना कोई बच पाया है। सब जानते हैं जाना है वहां! जहां परमात्मा का साया है। फिर भी भटके भटके रहते, लालच में हम अटके रहते। नहीं जान सके […]

अपने कलेजे से लगाकर सदा रखती मुझे, हर बुरी नज़र से बचाकर लाड करती मुझे, माँ बापू के बगिया की एक सुंदर कली मैं, तो पलभर में क्यूं रौंद डाला दरिंदो ने मुझे।। एक लड़की […]

इससे बत्तर हयात में और क्या होगा, ख़्वाबों का कारवां पल में ख़ाक होगा, देखकर मंजर कुछ अजीब लम्हों का, जज्बातों का मेहर पल में राख होगा।। हर फरेब का चेहरा अब बेनकाब होगा, सच […]

शायद ख्वाब है, जो हाथों में तेरा हाथ है । एक चाँद आसमां में है, एक मेरे साथ है । तेरी सूरत चाँद की सूरत, है मरमरी मूरत, तुझसा ना हँसीन कोई, तेरी क्या बात […]

काली कजरारी आंखों से जब मेघ बरसता है आंसू में बह कर वह नेह निकलता है खूबसूरत लगती हो तुम जब पौछती जाती हो दुपट्टे के कोने से उन आंसुओं की धारा बहता सा काजल […]

फितरत किसी इंसान की बदलती नहीं जनाब। चाहे जिंदगी में आ पड़े कितने भी अजाब। बचपन की आदतें समाई होती हैं इस कदर, बदला यदि खुद को तो नया इंसान ले जन्म। बचपन सुधारा जिसने […]

किताबें दोस्त थी मेरी, दुख सुख की साथी, अकेलेपन में किसी की कमी ना खलने देने वाली, हंसती मुस्कुराती। मुझे जहां भी कोई किताब मिल जाती मेरे पुस्तकालय में सुशोभित हो जाती। इंटरनेट ने तो […]

पार्थिव शरीर विह्वल हुए लोग शांत चेहरों में वेदना समाई है हसती खेलती कोई पुण्यात्मा परमात्मा से मिलने को आज अकुलाई है चार दिन का साथ छोड़ आज ऐसे जा रही मुसाफिर खाने से छूटकर […]

आंखों के सामने छा जाता है तुम्हारा सुरूर मुझे खुद पर ही होने लगता है गुरूर नींद भी अपना रास्ता भूल जाती है जब याद मुझे तुम्हारी इस कदर आती है कुछ यादें कुछ मीठी […]

मेरा मन विचलित था विह्वल था, कान्हा ने मुझे उबार लिया। अपना अद्भुत सा साथ दिया, भटकन को मेरी वही थाम लिया। मेरे अंतःकरण की शुद्धि की, मुझे बीच भंवर से निकाल लिया। कैसा अद्भुत […]

चिंतामणि सी अकुलाती हो मुझ में क्या अद्भुत पाती हो? चंचल मृगनयनी सी आंखों से क्या मुझ में ढूंढा करती हो? चंद्रमुखी सी हंसी हंस-हंसकर अंतरात्मा को चहकाती हो। नहीं भान जरा नहीं मान जरा […]

कभी होंठों को देखते हो। कभी बालों को देखते हो।। कभी आँखों को देखते हो। कभी गालों को देखते हो।। दिल में उतर के देखो तो फिर कवि कहलाओगे।। कभी लंबू को देखते हो। कभी […]

कुछ अलग सी पगली हो तुम! नैन लड़ाती हो कुछ कहना भी चाहती हो बस मुस्कुरा कर ही रह जाती हो। मेरे इशारों में उलझ कर घबरा जाती हो जैसे गिर ही पड़ोगी मेरे जरा […]

माफ़ करना मेरी आदत है, इसमें दो मत नहीं। मैं बदला नहीं, बदला लेना मेरी फ़ितरत नहीं। मैं जहाँ था वहीं हूँ, मैं वही हूँ और वही रहूँगा, लिबास की तरह बदलने की मेरी आदत […]

खुद को तलाशते गुमनामी में कहीं खो न जाऊँ। शोहरत की हसरत में गुमनाम कहीं हो न जाऊँ। चढ़ते सूरज को तो सारी दुनिया सलाम करती है, डरता है दिल की मैं अंधेरे में कहीं […]

कृष्ण के भजने पर कभी राम पराए नहीं होते। पंथ बदलने पर भी भगवान पराए नहीं होते।। दम है अरदास में तो अजान पराए नहीं होते। कतरा-ए-लहू एक हो तो इंसान पराए नहीं होते।। खुदगर्ज […]

उड़ चलता है हर पक्षी घोंसला बनाने होते ही उम्मीदों का सवेरा श्याम को थक्कर ढूंढता फिरे अपना ही रैन बसेरा भटकती फिरे हर मधुमक्खी फूल फूल पत्ता पत्ता करके शहद इकट्ठा हजारों फूलों को […]

तिनका तिनका जोड़ -जोड़ कर, चिड़िया नीड़ बनाती है। छोटे-छोटे बच्चों को ऊंची उड़ान सिखाती है। एक दिन नीड छोड़कर बच्चे दूर गगन उड़ जाते हैं, मां-बाप का कलेजा क टता है वह याद बहुत […]

बातों को कुछ तोल के, मीठे बोल तू बोल ले, बानी में मिश्री घोल के, सबको खुश तू कर दे, जग ये तेरा न मेरा है, एक दिन सबको जाना है, क्या पाएगा किसी को […]

श्याम रंग विराट ललाट, लाल तिलक सोहे मुख भाल। तिरछी नजर कान्हा जब डालें, गोपियों के दिल भये मतवाले। कान्हा कान्हा रटते रटते, गोपियों ने सुध बिसराई थी। कान्हा के संग रास रचाने, सभी गोपियां […]

तुझे मेरी याद न आई, ओ कान्हा तूने कैसी ये प्रीत निभाई, छोड वृंदावन चले गए तुम, लौट के फिर आए नहीं तुम, हमजोली संग रास रचाया, गोपियों को भी खूब सताया, ,तूझ बिन मै […]