मैं स्त्री हूँ , और सबका सम्मान रखना जानती हूँ कहना तो नहीं चाहती पर फिर भी कहना चाहती हूँ किसी को ठेस लगे इस कविता से तो पहले ही माफ़ी चाहती हूँ सवाल पूछा […]

सेतु बनाकर सेना संग राम जब लंका। लंका के गलियों में होने लगी ये शंका।। जिसके नाम का पत्थर भी सागर पे गया है तैर। स्वामी तोसे करु विनती नहीं बढ़ाओ उनसे बैर।। चमत्कार तो […]

मेरी लेखनी में अभी जंग लगा नहीं। प्रेम के सिवा दूजा कोई रंग चढ़ा नहीं। प्रेम में लिखता हूँ, प्रेम हेतु लिखता हूँ। प्रेम पर लिखता हूँ, प्रेम ही लिखता हूँ। प्रेम के सिवा मुझे […]

आना मिलने बादलों के पार, शिकायतों का पुलिंदा भरा है दिल में मेरे। पिछले और उससे भी पिछले कई जन्मों में जो तुमने कुछ दर्द दिए थे! और मेरे आंसू निकल पड़े थे। उन सब […]

हनुमान गदाधारी श्रीराम के प्यारे हैं। करते हैं सदा भक्ति सीता के दुलारे हैं।। सुग्रीव पे विपति पड़ी। रिशमुक पे चरण धड़ी।। श्रीराम मिलाए हैं दुखरे को मिटाए हैं। हनुमान गदाधारी श्रीराम के प्यारे हैं।। […]

तुम्हीं ने कहा था, हां मुझे भी तुमसे प्यार हुआ। हुई क्या खता, तुम्हारी नजरों में गुनहगार हुआ। हमने तो डाल दी, सारी खुशियां तुम्हारे दामन में, क्या रह गई कमी, प्यार में जां तक […]

पृथ्वी के कण-कण में देखो एक राम समाये थे, मन के पावन मंदिर में सबने एक राम बसाये थे, छोड़ राज पाठ घर से जब जंगल में वो आये थे, चौदह वर्ष संघर्षों का जीवन […]

पान खाने गया था वो पनवाड़ी के पास। एक सलौना सा सूरत था नजरों के पास।। लाल लाल होंठ थे उसके और घुंघराले बाल। श्याम रंग और तिरछी चितवन टेढ़े मेढ़े चाल।। कोमल कोमल पाँव […]

रक्तिम अधर रक्तिम कपोल श्याम वरण था उसका। कजरारी नयना थी उसकी नरम चरण था उसका। घुंघरे घुंघरे बाल थे उसके मेरा वो चितचोर था। विनयचंद वो रसिया जिसका नाम नन्दकिशोर था।

हम हैं वीर जवान साथियों शरहद पे लड़नेवाले। हमसे देश सुरक्षित हम नहीं किसी से डरनेवाले।। भूख-प्यास को छोड़ा छोड़ा घर परिवार। देश भक्ति का जज्बा दिल में छोड़ेगे संसार।। विनयचंद हम देश के खातिर […]

गर्भ के भीतर और बाहर का ज्ञान समाया है, मनोविज्ञान की शाखा में बालविज्ञान समाया है, बाल अवस्था से प्रौढ़ावस्था का भान कराया है, बालविज्ञान ने असहज को सहज कर दिखाया है, मस्तिष्क में चल […]

मेरी ज़िन्दगी बदल गई तेरे द्वार आके। हो गया मैं प्यारा सबका तेरा प्यार पाके।। चला जा रहा था दिशाहीन पथ पर। उदसीन होकर मैं दुनिया के रथ पर।। तूने सम्हाला मुझको अपने द्वार लाके। […]

कोई तो करतब कोई तो जादू दिखलाना चाहिए, धरती पे रहने वालों को आसमां पे जाना चाहिए, बहाने बनाने को तो बैठे हो तुम हजार मेरे यार, कभी झूठ को भी सच्चा आईना दिखाना चाहिए, […]

कल-कल बहती नदिया कहलाती हूँ मैं, पृथ्वी के हर एक जीव को महकाती हूँ मैं, जोड़ देती हूँ जिस पल दो किनारों के तट, लोगों के लिए फिर तटिनी बन जाती हूँ मैं, सर- सर […]

सिर्फ एक बार दर्शन तू दे दो और कोई भी दिल की तमन्न।नहीं है। साथ कितना मिला जगत में मुझे। सारे नातों के दीपक पलक में बुझे।। मुझे अपनी शरण में तो ले लो और […]

तिरंगे का रंग जब सर चढ़ता है। बेजान शख्स भी उठ पड़ता है। झुकाने की औकात नहीं किसी की, दुश्मन लाख अपनी एड़ी रगड़ता है। केसरिया रंग बांध अपने सर पर, जवान जब सरहद पर […]

आधा चांद खिला होगा जिस दिन उस दिन मिलने आऊंगा। अपनी नीलकमल सी आंखों में मेरा इंतजार रखना। मैं चंद्रकांता का वीरेंद्र बनकर आऊंगा। महुआ के पेड़ से पक कर झड़े फूल से तैयार ताजी […]

हिन्दी गजल- दिल की किताब | दिल की किताब तेरी पढ़ लूँ तो क्या होगा | बिन कहे बात तेरी जान लूँ तो क्या होगा | जितना चाहो छिपा लो छिपा ना सकोगे | भाषा […]

बात उन दिनों की है जब बचपन में घरोंदा बनाते थे उसे खूब प्यार से सजाते थे कही ढेर न हो जाये आंधी और तूफानों में उसके आगे पक्की दीवार बनाते थे वख्त गुज़रा पर […]

कश्ती को किनारे लगा दो, मेरी नैया को अब तुम ही संभालो, बीच भंवर में फंसी है मेरी नैया, अब तुम ही इसे पार लगा दो, तू ही साथी, तू ही सहारा, तू ही है […]

कश्ती को किनारे लगा दो, मेरी नैया को अब तुम ही संभालो, बीच भंवर में फंसी है मेरी नैया, अब तुम ही इसे पार लगा दो, तू ही साथी, तू ही सहारा, तू ही है […]

ऐ जिंदगी, तू गम की राहों से निकल, चल जहां गम के साए न हो, चल वहां जहां खुशियों की जन्नत हो, बहारे आएंगी और जाएंगी, जीवन तो सुख और दुख का मेला है, उसी […]

ब्रजरज का मस्तक पे चन्दन करू। मैं श्रीराधे के चरणों में वन्दन करू।। मैंने जीवन किए अब हवाले तेरे। आके इसको सम्हालो दाता मेरे। सामने किसके जाने क्रंदन करू। मैं श्रीराधे के चरणों में वन्दन…..

जब रण में अर्जुन घबराया। जब उसने युद्ध न करने को अपने भय को दिखलाया। तब परमेश्वर ने कृपा करके उसको विराट रूप दिखलाया । जितना दीप्ति अचानक था हरि रूप भयानक था । ज्वाल […]

बादलों को देख मोर झूम-झूम नाचता। मोरनी है साथ फिर व्योम क्यों निहारता।। बादलों की चाह में मोरनी के प्यार में, या फिर नयनश्रवा के हार में पंख को पसारता। बादलों को देख मोर झूम-झूम […]

बादलों को देख मोर झूम-झूम नाचता। मोरनी है साथ फिर व्योम क्यों निहारता।। बादलों की चाह में मोरनी के प्यार में, या फिर नयनश्रवा के हार में पंख को पसारना। बादलों को देख मोर झूम-झूम […]

ताज है मोहताज, सरताज कहाँ से लाऊँ। बना रखा है ताज, मुमताज कहाँ से लाऊँ। साथ निभाने का वादा करते थे कल तक, बीता हुआ वो कल, आज कहाँ से लाऊँ। संगदिल कहूँ या फिर […]

मुझ शरणागत की रख ले लाज प्रभु। मैं दर तेरे पे आया हूँ देखो आज प्रभु।। तुमने कितने पापी तारे नाम गिनाया जा नहीं सकता। जो भी तेरे दर पे आता खाली झोली जा नहीं […]

रहने को बहुत बड़ा है लेकिन रहने में क्यों डर लगता है एक अपने ही घर में क्यों बोलो, तुमको सब कुछ खलता है। कहने को तो सब चलता है सूरज रोज निकलता है एक […]

कानों में ठूठे लगाए, बहर भट्ट सी! ज्ञान के प्रभाव से आत्मचित्त, मोहक सुवर्णा सी। चेहरे पर कठोर भाव, प्रेम में टूटी शहतीर सी। तापसी! बिन प्राणों के शवास सी। स्वरागिनी! खुद में डूबी आत्ममुग्ध […]

रहने को बहुत बड़ा है लेकिन रहने में क्यों डर लगता है अपने ही घर में क्यों बेटी भला तेरा ये मन खलता है। कहने को तो सब चलता है सूरज रोज निकलता है एक […]

बीती रात कमल दल फूले, हम उनके सपनों में फूले, उनकी रंग भरी बातों में, हम भूली बिसरी यादें भूले, आँख खुली तब हमने देखा, हम भ्रम की बाहों में झूला झूले, वो बन्द कली […]

ऐ जिंदगी, तुम गम की राहों से निकल, चल जहां गम के साए न हो, चल वहां जहां खुशियों की जन्नत हो, बहारे आएंगी और जाएंगी, जीवन तो सुख और दुख का मेला है, उसी […]

जीवन के इस राह में, कौन है अपना कौन पराया, जो साथ दिया हो दुख में, उसे ही तुम अपना समझो, जो झटक दिया हो दुख मे, उसे ही तुम पराया समझो, कुछ ऐसे भी […]

मेरी हर गीत, हर साज़ हो तुम । कल को भूला दूँ, वो आज हो तुम । कैसे बयान करूँ, क्या हो तुम, मुझ बेज़बां की, आवाज़ हो तुम ।। मेरी हर नज़्म, हर ग़ज़ल […]

तेरे आने से बाहरे आती है, तेरे जाने से बाहरे जाती हैं, महफिल मे गर आ जाओ तुम तो चार चांद लग जाए, मौसमे बाहरे महफिल में छा जाए, कितना चाहती हूं तुझे यह पता […]

तुम फूल हो तो मैं कोई काँटा नहीं जानम। तेरा स्पर्श कोमल है मेरा चाँटा नहीं जानम।। तुम चाँद हो नभ के, मैं चकोर हूँ जानम। तुम मेघ अम्बर के , मैं तो मोर हूँ […]

शहर को देखने वाले जरा तुम गाँव भी देखो। वदन पे गर्द मत देखो फटे वो पाँव भी देखो।। गुजरते नार कीचड़ से हमें नित फीड हैं देते। मखाना वो कहे जिसको लोटस सीड हम […]

तेरी सूरत सदा रहती नजरों के पास नाम हाथों पे लिखने से क्या फायदा? तुम रहते सदा मेरे दिल में प्रिये सामने आके मिलने से क्या फायदा? दिल जख्मों को सहता मेरा इस कदर अब […]

कवि का ‘सरयू से ‘ गुजरना – सुरेंद्र वाजपेयी ———————————————— सुहृदयी कवि ,लेखक एवं सामाजिककार्यकर्ता श्री सुखमंगल सिंह कृत्य ‘कवि हूँ मैं सरयू तट का ‘ एक भावनात्मक काव्य संग्रह है | इसमें सरयू महिमा […]

तानाशाह से तुम! क्रोध की तीव्रता में कर देते…. सब कुछ हवन। बचपन में झेली गई मानसिक प्रताड़ना, ने बना दिया तुम्हे शिला, ज्यो थीअंदर से नरम। प्यार भी आंखें दिखा- दिखा करते हो, हंसी […]

गाना न कोई अब रिन्दाना मैंने पीना छोड़ दिया। बोतल तोड़ी जाम मैं तोड़ा साकी से नाता तोड़ लिया। मैंने पीना’……… . ….. . ।। पीबाकों से नहीं अब याराना नहीं अपने रहे अब बेगाना […]