Author: Deepak

  • कुछ बूंदे

    तस्वीर तेरी रात भर तकती रही दो बोझल आँखें।

    पिघले हुए कुछ ख्वाब, आंसूं बनकर बहते रहे ।।

     

    आसमान में बेख़ौफ़ उड़ने की अजब ज़िद थी उन्हें ।

    कुछ परिंदे, जो तल्ख हवा के नश्तर सहते रहे ।।

     

    वो बूंदे जो खो गयी इश्क के समंदर में कहीं ।

    कुछ मुसाफिर, जो रहगुज़र को ही मंज़िल कहते रहे ।।

     
    https://lonelymusafir.com/category/poetry/

New Report

Close