—————-–————————— दुनियादारी के बाज़ार में फँस गए हम व्यापार में लाभ-हानि में हुई बेवकुफियाँ मान-हानि भी व्यवहार में नज़र-नज़र की बात निराली नज़र ने नज़र से हर बात कह डाली नज़र की नज़र से हुई […]
—————-–————————— दुनियादारी के बाज़ार में फँस गए हम व्यापार में लाभ-हानि में हुई बेवकुफियाँ मान-हानि भी व्यवहार में नज़र-नज़र की बात निराली नज़र ने नज़र से हर बात कह डाली नज़र की नज़र से हुई […]
लिखेगी लेखनि कौन सा अक्षर स्याही के रंग क्या होंगे–? लफ़्जें कहेंगी कहानी कौन सी कथाओं में उमंग क्या होंगे—? झलकेगा इनमें कौन सा रूप झूठ बोलेगा,सच होगा चुप उपहासें या खिलखिलाहटें हँसी के […]
जिंदगी का हँसी सवेरा है , दिल से इसका सभी सत्कार करो । बात करना ही है तो , कर डालो , खुल कर बस. प्यार की ही बात करो । जिंदगी को ना झंझटों […]
दिल ले लेना , दिल दे देना यह बच्चों का ,खेल नहीं । लाख जमाना कुछ भी करले, साथ न पल भर भी छूटे । जानकी प्रसाद विवश प्यारे मित्रों, मंगलमय प्रभात की सर्व सुखकारी […]
मित्रता – तीर्थ ना जो जा पाया व्यर्थ मानव का जन्म है पाया। मित्र बिन जिंदगी मरुस्थल सी , मित्रता जल ने उसे हरियाया । मेरे प्यारे मित्रो , प्रातःकाल की मधुर अनुभूति की सुहानी […]
शीत के सवेरे में , गरमागरम राम राम , भज ले मन राम राम , बन जायें बिगड़े काम। पल भर निर्मल मन से जोभी याद करता है । वह विपदाओं से ,कभी , तिल […]
दुआएं सुबह करें ,शाम करें , प्यार कुछ मित्रता के नाम करें । अपने हर मित्र का भला चाहें , जिंदगी मित्रता का धाम करें। जानकी प्रसाद विवश प्यारे मित्रो…. सपरिवारसहर्ष , मित्रतामय सवेरे की […]
सुवह सुवह ये गुनगुनी सी , धूप रूप की , लगी है सेंकने ये , शीत -थरथराए तन । उमग जगाने लगी , मन में तपन प्यार की , कि रूप का अलाव तापे , […]
मधुर सुवह का प्यार मित्रो , मधुर सुवह का प्यार । नहीं मित्रता से बढ़ कोई , है कोई उपहार । सदा मित्रता भाव हृदय में , प्रेम-सुधा बरसाते । रोम रोम हर्षाता , हर […]
अपने मित्रों की पीर हरण , जो करता है । मित्रता -कसौटी , जगजाहिर, वो करता है । जब विपदाओं के ,चक्रव्यूह में, मित्र फँसे , फिर अर्जुन जैसा बन कर मित्र , कर्तव्य उजागर […]
होते ही शाम तेरी प्यास चली आती है! मेरे ख्यालों में बदहवास चली आती है! उस वक्त टकराता हूँ गम की दीवारों से, जब भी यादों की लहर पास चली आती है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
पास हो कर भी जरा सा दूर हो तुम! हुस्न पर अपने बहुत मगरूर हो तुम! तेज हैं तलवार सी तेरी निगाहें, बेवफाओं में मगर मशहूर हो तुम! मुक्तककार – #मिथिलेश_राय
जब से लबों पे आया है तेरा नाम फिर से! जैसे लबों पे आया है कोई जाम फिर से! तेरी याद बंध गयी है साँसों की डोर से, मुझको तरसाती हुई आयी है शाम फिर […]
तेरे सिवा दिल में कोई आता नहीं कभी! तेरे सिवा दिल को कोई भाता नहीं कभी! मुझे मंजिल मिल न पायी तकदीर से लेकिन, सिलसिला तेरी यादों का जाता नहीं कभी! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
मेरी नजर से दूर तुम जाया न करो! मेरी चाहत को तुम तड़पाया न करो! तेरे लिए बेचैन हैं मेरी ख्वाहिशें, मेरे प्यार पर गमों का साया न करो! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
मुझसा कोई तेरा दीवाना नहीं होगा! मुझसा कोई तेरा परवाना नहीं होगा! हार चुका हूँ मंजिल को तकदीर से लेकिन, मुझसा कभी मशहूर अफसाना नहीं होगा! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
मंजिल की तलाश में तूफान मिल जाते हैं! रास्तों में ख्वाबों के शमशान मिल जाते हैं! उस वक्त भीग जाती हैं आँखें अश्कों से, जब कभी भी यादों के निशान मिल जाते हैं! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
कविता – ऐसा वक्त कहाँ से लाऊं वेफिकरी की अलसाई सी उजली सुबहें काली रातें हकलाने की तुतलाई सी आधी और अधूरी बातें आंगन में फिर लेट रात को चमकीले से तारे गिनना सुबह हुए […]
मैं कबतक राह देखूँगा तेरे आने की? तुमको राहे-जिन्दगी में फिर से पाने की! धीरे धीरे चुभ रही है तन्हाई दिल में, जाग उठी है जुस्तजू फिर से पैमाने की! #महादेव_की_मुक्तक_रचनाऐं
क्यों तुम शमा-ए-चाहत को बुझाकर चले गये? क्यों तुम मेरी जिन्दगी में आकर चले गये? हर गम को जब तेरे लिए सहता रहा हूँ मैं, क्यों तुम मेरे प्यार को ठुकराकर चले गये? मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
मेरे दिल से तेरी बेवफाई न गयी! मेरी नजर से तेरी रुसवाई न गयी! मुश्किल से अंजाम को भूला हूँ लेकिन, तेरे प्यार की कभी अंगड़ाई न गयी! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
जो दिल में छुपी हुई है उस बात को समझो! जो मुझको तड़पाती है उस रात को समझो! कभी नींद नहीं आती है तेरी चाहत को, मेरी इस बेचैनी की हालात को समझो! मुक्तककार – […]
जिन्दगी जब भी किसी से प्यार करती है! हर वक्त उसी का इंतजार करती है! शाम गुजर जाती है उसी की यादों में, रात तन्हाई की बेकरार करती है! रचनाकार- #मिथिलेश_राय
जिन्दगी जब भी किसी से प्यार करती है! हर वक्त उसी का इंतजार करती है! शाम गुजर जाती है उसी की यादों में, रात तन्हाई की बेकरार करती है! रचनाकार- #मिथिलेश_राय
मेरी याद आए तो आवाज दे देना! अपनी उमंगों को नया साज दे देना! ढूंढ लेना तस्वीरें चाहत की फिर से, जिन्दगी को एक नया अंदाज दे देना! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
काश तुमको फिर से याद मैं आ जाऊँ! काश तुमको फिर से जिन्दगी में पाऊँ! तेरे दर्द को भूल सकता हूँ लेकिन, कैसे तेरे प्यार को दिल से मिटाऊँ? मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
तेरी बेकरारी आज भी कमाल है! मेरी जिन्दगी को तेरा ही ख्याल है! भूल गया हूँ दर्द के अंजाम को मगर, तेरी जुदाई का आज भी मलाल है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
फाल्गुन की ब्यार में, कोयल की थी कूक गिरते हुए पत्तों की सरसराहट उर में उठाती थी हूक॥ जीवंत हो उठी झंझाएँ मानो कुछ कहती थीं रह-रहकर आती चिड़ियों की चहचहाहट निज क्रंदन का राग […]
तेरी बेकरारी आज भी कमाल है! मेरी जिन्दगी को तेरा ही ख्याल है! भूल गया हूँ दर्द के अंजाम को मगर, तेरी जुदाई का आज भी मलाल है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
सामने है साकी मंजिल भी शराब है! मेरी जुस्तजू में तेरा ही शबाब है! तिश्नगी जाती नहीं है तेरी जिगर से, तेरी #अदा_ए_हुस्न इतनी लाजवाब है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
कभी गम कभी मुझको तन्हाई मार देती है! तेरी तमन्नाओं को जुदाई मार देती है! मैं राहे-इंतजार में बैठा हुआ हूँ लेकिन, ऐतबार को तेरी रुसवाई मार देती है! मुक्तककार – #मिथिलेश_राय
तेरी बेवफाई से कहीं मैं बदल न जाऊँ? इंतजार की ज्वाला से कहीं मैं जल न जाऊँ? मुझे दर्द डराता है हर वक्त तन्हाई में, सब्र के चट्टानों से कहीं मैं फिसल न जाऊँ? मुक्तककार- […]
yes i am im not the only one,im spoilt in many ways,thats because of the tree, she seduced me into eating of the fruit,said no harm will come of thee,she was decietfull now my days […]
कुछ लोग जिन्दगी में यूँ ही चले आते हैं! कुछ लोग वफाओं को यूँ ही भूल जाते हैं! कई लोग तड़पते हैं किसी की जुदाई में, कुछ किसी के दर्द पर यूँ ही मुस्कुराते हैं! […]
मैं जिन्दगी में मंजिले-मुकाम तक न पहुँचा! मैं जिन्दगी में प्यार के पयाम तक न पहुँचा! यादों की डोर से बंधा हूँ आज भी मगर, मैं अपनी चाहतों के अंजाम तक न पहुँचा! रचनाकार – […]
किसतरह तेरी यादों की रात जाएगी? किसतरह तेरे गम की सौगात जाएगी? जागे हुए हैं ख्वाब भी आँखों में कबसे, कब तेरी चाहत से मुलाकात जाएगी? मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
तेरी उम्र तन्हाई में गुजर न जाए कहीं! तेरी जिन्दगी अश्कों में बिखर न जाए कहीं! क्यों इसकदर मगरूर हो तुम अपने हुस्न पर? कोई गम कभी दामन में उतर न जाए कहीं! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
आरजू हालात की मोहताज नहीं होती है! ख्वाहिशों में लफ्जों की आवाज नहीं होती है! जब रोक देती है कदमों को तकदीरे-मंजिल, हर आदमी की कोशिश आगाज नहीं होती है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
आरजू हालात की मोहताज नहीं होती है! ख्वाहिशों में लफ्जों की आवाज नहीं होती है! जब रोक देती है कदमों को तकदीरे-मंजिल, हर आदमी की कोशिश आगाज नहीं होती है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
जब हमारा किसी से रिश्ता टूट जाता है! प्यार का हाथों से गुलिस्ताँ छूट जाता है! हम खोजते हैं मंजिलें वफाओं की लेकिन, रास्तों में वक्त का फरिश्ता रूठ जाता है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
आज भी मुझको तेरा हसरत-ए-दीदार है! आज भी मेरी नजर को तेरा इंतजार है! जोड़ता रहता हूँ तेरी चाहतों की कड़ियाँ, आज भी मुझको तमन्ना तेरी बार बार है! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
मैं तेरी तमन्ना को छोड़कर आया हूँ! मैं दर्द की बंदिश को तोड़कर आया हूँ! मैं भूल गया हूँ मंजिलें राह-ए-इश्क की, अश्कों के तूफान को मोड़कर आया हूँ! मुक्तककार – #मिथिलेश_राय
मेरा सकून तेरी मुलाकातों में है! तेरी तमन्ना दिल के जज्बातों में है! हरवक्त खींच लेती है तेरी जुस्तजू, तेरी यादों की खूशबू रातों में है! मुक्तककार – #मिथिलेश_राय
जबसे तेरी चाहत में नाकाम हो गया हूँ! दर्द और तन्हाई का पैगाम हो गया हूँ! मैं ढूंढता रहता हूँ सब्र को पैमानों में, तेरी याद में भटकी हुई शाम हो गया हूँ! मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
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