तेरा साया मेरे साये में कुछ ऐसे समा जायेगा, के तेरे चेहरे में मेरा चेहरा कोई ढूंढ नहीं पायेगा, जिस तरह रहती है हवा दरमियाँ हर किसी के, हमारा वजूद भी हर किसी के चेहरे […]

तुम्हारे आने की खबर सुन कर  अच्छा लगा | आओ मैं प्रतीक्षा में हूँ लम्बी क़तर में खड़ा पंजों  के बल उचक उचक कर  जैसे कोईइन्तजार  करता है -टिकिट विंडो पर | आओ जैसे पूरनामी […]

भले वक्त में तो सभी ,नित अपनत्व लुटाए , बुरे बक्त , परछांई भी , दूर दूर न दिखाए। जानकी प्रसाद विवश आदरणीय प्यारे मित्रो, सवेरे की मधुर छटा में आप सभी का हार्दिक अभिवादन […]

शीत के सबेरे में , मित्रता की गर्माहट, प्यार मोहब्बत के सूरज की, सुनकर आहट , भावों के पंछी चहक उठते । अंगुलिया ठिठुर जाएँ , भावना उनींदी सी , प्यार के गरमागरम संदेश मगर […]

सुखद है मित्रों का संसार , बरसता निशदिन प्यार अपार। नहीं भौतिक है, है अध्यात्म , मित्र की महिमा अपरंपार । – जानकी प्रसाद विवश

प्यारे मित्रो….. नाचो -गाओ मन, नव-गीत गुनगुनाना , नये वर्ष खुशी खुशी ,सबके मन बहलाना । जन जन का मन से ,यह नम्र निवेदन है , मन की पीड़ा का , प्रस्तुत आवेदन है । […]

रहता है कहाँ है कहाँ घर तेरा, नाम आंसु से परिचय हुआ क्यों तेरा, ख़ुशी-ग़म का आँखों से रिश्ता तेरा, हर इंसा से नाता जुड़ा क्यों तेरा, समझ के रंग सा न किसी अंग सा, […]

खुल के भले ही न कहा हो कभी पर अपनी “देह-बोली” से कितनी ही बार जताती है वो तुमसे कितना ….. कभी ख्याल किया तुमने तुम्हारे कमरे के करीब से गुजरते वक़्त ठिठक कर कितनी […]

खून का रंग- कैसे तय होता है? विज्ञान की मानें तो आर बी सी से परिवार की माने तो माँ-बाप से समाज की माने तो जाति, धर्म,वर्ण से राजनीति की माने तो वोट और नोट […]

आज कुछ खाली – खाली लगता है …२ यूँ जो छोड़ गए तुम मुझके … हर चेहरा सवाली लगता है … आज कुछ खाली – खाली लगता है … हँस के मिलती हूँ जब भी […]

जनवरी आता है , नयी उम्मीदों को पंख लगाता है, फरवरी फर्र फर्र न जाने कब बीत जाता है , मार्च सुहाना मौसम लेकर आता है, उम्मीदों को परवाज देते देते पहला तिमाही गुजर जाता […]

मैं अकेला था अकेला हूँ अकेला रह गया, ज़िन्दगी की धूप छाँव सब खुशी से सह गया। टूटा हूँ पत्ते सा क्यूँकि मेरी सूखी डाली है, न खता हवा के झोंकों की न दोसी कोई […]

*ओ बाबुजी…* बहुत याद आते हो ओ बाबूजी दिल को रुलाते हो ओ बाबुजी ।। जीना तुम्हारे बिन गवारा नहीं धड़कते हो सीने में ओ बाबुजी।। अंधेरी है दुनिया अंधेरी है राहें अंधेरी है खुशियां […]

नभ के अरुण कपोलों पर, नव आशा की मुस्कान लिए, आती उषाकाल नव जीवन की प्यास लिए, दिनकर की अरुणिम किरणों का आलिंगन कर, पुष्प दल मदमस्त हुए,डोल रहे भौंरे अपनी मस्ती में, मकरन्द का […]

नये साल की पवन बेला पर पहुचे तुम्हे बधाई.. देश प्रेम है धर्म हमारा,हम सब हैं भाई भाई .. मान और सम्मान बढे,जीवन हो श्रेष्ठ शिखर पर.. मानवता हो कर्म हमारा,हर जाती धर्म से बढ़कर.. […]

भूल जाना मोहब्वत को मुमकिन नही भूल जाने की तुम यूँ ही जिद्द न करो अश्को को तुम छुपा लोगे माना मगर इन नजरों को कैसे संभालोगे तुम ये होठो की लाली झूटी सही इन […]

#selflove #happiness जिसे ढूंढा ज़माने में, जाने छुपी थी किस ठिकाने में आधी उमर निकल गयी पता लगाने में, जाने छुपी थी किस ठिकाने में खोजा तुझे अपने चाहने वालो में, तलाशा तुझे पुरानी यादो […]

जल उठे थे बुझ के हम, शमा – ए – लौ से प्यार की; फिर तेरी हर एक झलक, पे नज़रों को झुका जाना; गर कही जो चल पड़े, तेरे बुलाने पे सनम; वो तेरा […]

बदला बदला सब कुछ लगता हरपल अदल-बदलती आशा । करवट वक्त ले रहा जानेअब कैसी बदली पल पल रिश्तों की परिभाषा । प्यारे मित्रो ,सवेरे की मधुर बेला में सपरिवारसहर्ष , पुलकित मंगलकामनाएँ स्वीकार करें […]

रंग क्या होंगे—? ————————- लिखेगी लेखनि कौन सा अक्षर स्याही के रंग क्या होंगे–? लफ़्जें कहेंगी कहानी कौन सी कथाओं में उमंग क्या होंगे—? झलकेगा इनमें कौन सा रूप झूठ बोलेगा,सच होगा चुप उपहासें या […]

ग़ालिब के जन्मदिन पर सभी शायरों, कवियों को हार्दिक शुभकामनाये… ग़ालिब ये किस जहान में तू हमे छोड़ गया है ना सच्चाई है ना अफसाने ना यार रहे ना दीवाने @प्रदीप सुमनाक्षर

तेरी यादों का समन्दर कभी सुखता नही। आँखों में खुशी है मगर दर्द मिटता नही। चौमासें सावन सा बरसता गम है सीने में, जुदा-ए-सनम तुम बीन दिल अब लगता नही। लाख बोई फस्लें आरजुओं की […]

“तारीख” ********* “तारीख”…!! हाँ.! वही तारीख़…वही माह…! बस वर्ष बदल गया… तुम्हारी तरह ! तारीख़ रह गया…मेरी तरह ! नहीं बदल पाया वो… इस गतिमान समय चक्र के साथ… रह गया पीछे…तन्हा और भ्रमित… देखता […]

“*पहला नमन “* *—***—** हर सुवह का पहला नमन आपको अर्पण करें। मनमीत मेरे आप खुश हों खुशियाँ पदार्पण करें । जानकी प्रसाद विवश मेरे परम प्रिय मित्रो , क्रिसमस -प्रेम पर्व की मंगल घड़ियों […]

पल महीने दिन यूँ गुजरे, कितने सुबह और साँझ के पहरे , कितनी रातें उन्नीदीं सी, चाँदनी रात की ध्वलित किरणें, कितने सपने बिखरे-बिखरे, सिमटी-सिमटी धुँधली यादें, कुछ कर जाती हैं आघाते , कभी सहला […]

रात पिघल जाती है यादों की जलन से! बात बदल जाती है लफ्जों की चुभन से! गरूर बना देता है दिलों में दूरियाँ, फासले मिटते नहीं इंसा के जेहन से! रचनाकार- #मिथिलेश_राय

ओ शीत से आविष्ट निशा के घोर तिमिर, व्योम के पथ, इस शुक्ल पक्ष लौटा वह एक बार फिर ! लेकिन, क्या कौतुक ? पीतवर्णी हिमाशिक्त रश्मियों के उतप्त होने का भ्रम, चतुर्दिश व्याप्त शीतलता […]

ये नये साल का मौसम भी खुशगवार नही ऐसा लगता है मुझे अब किसी से प्यार नही कई सालो से मुझे ग़म बहुत सताते है कई सालो से मेरे साथ में ग़मख्वार नही जान दे […]

आ गया अब शीत का मौसम कंपकंपी के गीत का मौसम । झील सरिता सर हैं खामोश अब न लहर में तनिक भी जोश वृक्ष की शाखें नहीं मचलें लग रहा अब है न तनिक […]

अब तो तुम मुझे मेरे हाल पे छोड़ दो, मोहब्बत का सफर नये साल पे छोड़ दो ! आने लगी है प्यार की खुश्बू मेरे शर्ट से , जो मुझसे न हो उस सवाल पे […]