चलो थोड़ा जादू करते हैं जनता के दिल को छूती हुई एक कविता लिखते हैं झोपड़ियों में पल रही भूख से टकराते हैं छोटे छोटे मासूमों की चीख और डूबती हुई ज़िंदगियों को कविता का […]

ज़्यादा दिमाग़ न आज लगाया जाए सिर्फ मन में ज़मी मैल को बहाया जाए धर्म और परंपरा की ऐसी भी न कट्टरता हो कि होलिका की तरह औरत को जलाया जाए सौहार्द और प्यार का […]

जिन बाज़ारों में बड़ी रौनक़ है कल सन्नाटा उनमे छाएगा बंद होनी हैं दुकाने सब ऐसा बाज़ार नहीं रह पाएगा नफ़रत के अंधेरों में जो सौदेबाज़ी होती है जिन जिन लोगों की भी उसमे हिस्से […]

अच्छी कविताएँ लिखना उतना महत्वपूर्ण नही है उन्हें अच्छे से प्रमोट होना बहुत ज़रूरी है ऑफिस में काम भी उतना आवश्यक नहीं आपका गुड बुक्स में नोट होना बहुत ज़रूरी है सामाजिक प्रतिबद्धता उतनी महत्वपूर्ण […]

हर लम्हा तुमसे मैं बात किया करता हूँ! यादों से मैं मुलाकात किया करता हूँ! हर ख्वाब़ बेइंतहाँ जलाते हैं मुझे, खौफ से गुफ्तगूँ’ हर रात किया करता हूँ! Composed By #महादेव

आ चलें फ़लक तले आसमाँ पुकार रहा होगा, नूरीं की खिदमत में आफ्ता़ब भी तो आ रहा होगा, क्या पता हो जायें तुझे दीदार तिरी माहता़ब का, देखा था मैंने भी डोली में कोई चला […]

जिसने समझा आपको अपना उसको ना समझा आपने अपना जिसको समझा आपने अपना उसने ना समझा आपको अपना है यह कैसी और किसकी तलाश होगी कैसे खत्म यह सबकी तलाश                               …… यूई

राहतें सकून आराम चैन इत्मिनान यह सब कहां है आशिकों के निशान बेचैनीयाँ घबराहटें उन्नीदे उम्मीदे यह सब हैं उनके गहने और पहचान                                          …… यूई

ज़िन्दा है दिल तो उसे धड़कने दो याद में उसे किसी की तड़पने दो चाहतों को जी भर कर मचलने दो अरमान हजारों उसमें पनपने दो                                       …… यूई

मिलें होंगे आप हज़ूर हजारों दिल से मिलिएगा ज़रूर कभी हमारे दिल से होंगी सभी शिकायतें जो उन सब से मिट जाएगी एक पल में मिल हमसें                                        …… यूई

अपना कह देने से कभी कोई अपना नही होता अपना आप लुटा देने से कोई अपना नही होता सालों तमाम वफ़ाए उनपे ऊपर वार कर देखी जो है ही बेवफा वोह कभी किसी का नही […]

सिर्फ मिलने से ना बात बनेगी सिर्फ़ कहने से ना बात बनेगी गर दिल में नही है प्यार आपके बात कभी भी फिर यह ना बनेगी                                …… यूई

वह आसमान में सीढियां लगाए चढ़ा जा रहा है जो पीछे था आगे बढ़ा जा रहा है देखता जा रहा है वह सपने पे सपने यथार्थ के बल ने टेके हैं घुटने वह हरी दूब […]

कहने को होंगे हजारों दीवाने यहां यहां जाने होंगे कितने परवाने यहां दिल जो सिर्फ़ आपके लिए हो बना ख़ुद ही देगा अपनी आवाज़ सुना यहां                           …… यूई

वह अदृश्य गंध अनाम सी अपरिभाषित सी मन में बसी हुई जानी पहचानी सी जिसकी खोज ज़ारी है कल्पना के कितने ही क्षण जी उठते हैं अनिरवचनीय आंनद के रस पी उठते हैं हवा में […]

कुछ तो मजबूरियाँ तेरी भी रहीं होंगी कुछ तो मजबूरियाँ मेरी भी रहीं होंगी , सब की मजबूरियों में मजबूर थे हम तेरी नजदीकियों से दूर थे हम , अरे जाओं ज़नाब तुम क्या समझोगे […]

तेरे सिवा दिल में कोई उतरता नहीं है! तूफान तेरी चाहत का गुजरता नहीं है! रूठी है मेरी मंजिल रूठी है जिन्दगी, तेरा ख्वाब़ रूठकर मगर मुकरता नहीं है! Composed By #महादेव

जिन्दगी जब मेरी खामोशियों में होती है! शाँम-ए-गुजर मेरी मदहोशियों में होती है! आजमाइशों में दिन गुजर जाता है मगऱ, रात तन्हाँ दर्द की सरगोशियों में होती है! #महादेव mkraihmvns@gmail.com

कुछ यूँ कटेगी बेरहम सी  जिन्दगी  हमनें  सोचा ना था, वक्त के हाथों ही होगी ख्वाबों की खुदकुशी हमनें सोचा ना था, तन्हा  रातों में  ही  हो जायेगा  कत्ले आम साँसों का, आँखें खुलेंगी और […]

जब भी कोई शिकायत होते है तुमसे आईना उठा के ख़ुद मिलता हू खुदसे अकसर तो वो शिकायत ही नही बचती   रह भी जांए अगर तो ख़ुद से ही रह्ती                        …… यूई

मैं तो ता-उमर दिखाता रहा हूँ तुझको तेरा जो था असली चेहरा तुमने ना माना अपना उसको चेहरा तुझको था पसंद तेरा नक्ली चेहरा                        …… यूई

कभी कभी ये ख्याल आता है कि कभी उनका ख्याल ना आये तो दिल को राहत मिले| मिलते रहते है हमें अपना कहने वाले कई हमें जो वाकई अपना समझे कभी कोई ऐसा मिले|

आईने को तोड़ने से क्या होगा सच्चाई से मुँह मोड़ने से क्या होगा इन दोनों से आँखें मिला कर देख ज़िन्दगी की सच्चाई अपना कर देख झूठ की परतें गिर कर टूट जाएँगी ज़िंदगी जन्मो […]

बाहर सब यह जो हमारे दिखता हमको अन्दर हम जैसे वैसा सब दिखता हमको यह जो जमाने से है शिकायतें लाख हमको जमाने के दिल में है वैसी ही लाखो हमसे                                         …… यूई

यदि जड़ें ऊपर हो और तने नीचे तो न जड़ें गहराई पा सकती हैं और न तने का ही विकास होता है यदि जहां खिड़की होनी चाहिए वहां दरवाजे हों जब शांत वातावरण की चाहत […]

मेरे बाहर के यूनिवर्स को और मेरे अंदर के यूनिवर्स को मेरे अंतर्द्वंद को और बहिर्द्वंद को कविताएँ तराज़ू की तरह दोनों पलड़ों पर बिठाए रखती हैं कभी यह पलड़ा भारी हो जाता है तो […]

कुछ समीकरण पारस्परिक खींचतान झूंठी प्रतिस्पर्धा ईर्ष्या ,द्वेष अहंकार सृजन और विसर्जन व्यक्तित्वों का टकराव झूठी अफवाहें सूनी निगाहें आत्मिक वेदना कम होती चेतना शीत युद्ध अलग- अलग ध्रुव विलगित से निकाय न भरने वाले […]

कुछ समीकरण पारस्परिक खींचतान झूंठी प्रतिस्पर्धा ईर्ष्या ,द्वेष अहंकार सृजन और विसर्जन व्यक्तित्वों का टकराव झूठी अफवाहें सूनी निगाहें आत्मिक वेदना कम होती चेतना शीत युद्ध अलग- अलग ध्रुव विलगित से निकाय न भरने वाले […]