सागर के सीने पर उठने वाले ये विकराल तूफ़ान, वास्तव में उसकी पीड़ाएँ हैं, जो रह-रह के उद्वेलित होती रहती हैं, उस नदी की प्रतीक्षा में जिसे सागर में विलीन होने के पहले ही सोंख […]

मानवता की सच्ची सेवा है सच्चे सुख का श्रोत है सहयोग चले गए अंग्रेज बापू का असहयोग आंदोलन जारी है बापू ने तो अत्याचार के खिलाफ चलाया था बड़ा भयानक है आज अपनो के ख़िलाफ़ […]

रामायण में जिक्र आता है कि रावण के साथ युद्ध शुरू होने से पहले प्रभु श्रीराम ने उसके पास अपना दूत भेजा ताकि शांति स्थापित हो सके। प्रभु श्री राम ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि […]

समूची इंसानियत के हक-हकूक की बात ऊंचे-ऊंचे ओहदे पर आसीन जनों की असली औकात भुला पाना आसान नहीं। बदतरी में बेहतरी‌ तलाशने की नाकाम‌ कोशिश क़ातिल पंजों की पकड़ से निकलने की कोशिश भुला पाना […]

अब मिठास बची कहां ना रिश्तो में ना नातों में ना अपनों की बातों में कड़वाहट के बीज बोयें जा रहे ना जाने कहां-कहां ? अब मिठास बची कहां ? बातें भी शुरू होती सिर्फ […]

यह मन बड़ा चंचल कभी डोलता इधर कभी डोलता उधर ना जाने कब हो जाए किधर कभी दूजे की कभी अपनी फिकर मन में चलता रहता उछल-पुथल कभी रहती सद्भावना कभी रहता स्वार्थ कभी सोचे […]

अदृश्य, अकल्पनीय, प्रारब्ध की ऊँघ, उच्छ्वास प्रकृति का है मां का प्यार प्रभाकर की रोशनी से भी तीव्र है ममता की लौ जिसमें पुलकित होते हैं नन्हें सुमन और देते हैं जहान को सुन्दर सुगंध […]

परिवार है एकता के सूत्र की माला, जिसमें हर सदस्य समाया है, जीवन रूपी नैया को, रंग बिरंगे रंगों से सजाया है, परिवार है हमारा रक्षा कवच, जिसने ढाल बनकर, हमारा अस्तित्व बचाया है, बिखरे […]

परिवर्तन प्रकृति का नियम है बदल जाएगा कोरोना संसार से सदा के लिए भाग जाएगा फिर से पटरी में दौड़ेगी समय की ट्रेन इंतजार कर फिर से हँसेगा और मुस्कुराएगा

मेरे मन अकेला जानकार मुझे सहानुभूति का भाव भरो अर्जुन नहीं हूँ परंतु अभिनय करना है श्रीकृष्ण सा समझाया करो भगवान् का अस्तित्व स्वीकार है खाली समय प्रभु भक्ति में विताया करो प्रदूषण में भी […]

जग गया हूं प्रभु फिर एक बार शुक्रिया धन्यवाद कोटि-कोटि बार हर दिवस का जब होता अवसान अंदेशा रहता होगा कि न होगा बिहान तुझ पर भरोसा है भारी होगा कल्याण सांसों की पुंजी का […]

जुल्म सितम बढ़ रहा था हर तरफ मै हुयी बिल्कुल अकेली ना कोई पास मेरे ना कोई साथ मेरे किससे करूं हंसी ठिठोली तभी नजर आई मुझे कलम कलम बोली मुझसे क्यूँ रहती हो अकेली […]

दुख दर्द किसको सुनाए सब अपने मे खोए हुए हैं बुरा सपना देखकर जागे हम सब सोए हुए हैं मन का बोझ हल्का होता कुछ बाते करने से गैरों का क्या कहना जब अपनो से […]

हम पर तुम्हारी चाह का इल्ज़ाम ही तो है दुश्नाम[1]! तो नहीं है ये इकराम[2] ही तो है करते हैं जिस पे ता’न[3], कोई जुर्म तो नहीं शौक़े-फ़ुज़ूलो-उल्फ़ते-नाकाम ही तो है दिल मुद्दई के हर्फ़े-मलामत[4] […]

मुक्तक —————- मै मुर्गी खाऊ वो पाप बताते हैं वो कुकुरमुत्ता खाएं गर्व से स्वाद बताते हैं आगे से निकला पीछे से निकला उसका ऐसा वैसा स्वाद बताते हैं, शाकाहारी मांसाहारी कह करके सुबह शाम […]

गम के दौर में भी खुशी खोज लेना है बांट ले दुख दर्द अपनो का साथ देना है घर में हंसी खुशी का वातावरण रहे डूबे न नाव करना तैयार एक सेना हैं

घर की चारदीवारी से बाहर कब जाएंगे कोरोना से हार गयी जिंदगी इसे कब हराएंगे गति रुक गई है दुनिया की प्रश्न गूंजते हौसला के पंख फिर से कब आयेंगे

विश्वास रखते हैं पर फिर भी टूट जाता है जब कोई जनाजा सामने से गुजरता है क्या कमी थी इस जहान में सब कुछ तो था इतनी खूबसूरत थी दुनिया कोरोना का डर ना था […]

कुछ उम्मीदों के सिक्के यूं ही खनकते रहते हैं हम आगे बढ़े, तुम आगे बढ़ो ये ही कहते रहते हैं पर क्या करें पैरों में बेड़ियां हैं सपने बड़े हैं पर रास्ते में रोड़ियां हैं […]

जारी रहता है जीवन में समस्याओ का आना जाना मुकाबला करो इनका मत बनाओ बहाना संघर्ष बिना जीवन में सौंदर्य नहीं आता गिरना स्वभाव है मगर फिर से संभल जाना

सावन परिवार के सभी सदस्यों को विश्व परिवार दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।। ना पड़े रिश्तो में कोई दरारें अब न टूटे न बिखरे कोई परिवार मिलता रहे सभी को अपनों का स्नेह और प्यार जात-पात […]

चांद आया है जमीं पर आज मिलने को गले रमजान पूरे हो गए और ईद मिलने हम चले रोंकती राहें हमें है मिलने जा तू ना कहीं खौफ दिल में ये भरा है साँस थम […]

मेरे गतिशील पैरों को आखिर तुमने रोक लिया फूल तुम्हारा शुक्रिया नतमस्तक हूँ तुम्हारे निश्छल स्वभाव के सामने थकी उबी आँखो के तारा हो तुम हिरण की तरह उछलने वाले मन को ठहरे हुए जल […]

ना सोचा था हमने कभी भी ऐसे दिन में आएंगे घर में बैठकर तोडेंगे रोटी कमाने कहीं ना जाएंगे होंगे इतने आराम पसंद दरवाजे पर ही सब्जी लेंगे जो बन जाएगा वह खा लेंगे दिन […]

मोहब्बत का पैगाम लेकर आया है यह चांद अम्मी, अब्बू, खाला और आओ भाई जान बड़े तसव्वुर से गुजरे रोजे-रमजान ईद मुबारक हो सबको हिंदू हो या मुसलमान मस्जिद से आया बंदों एक जरुरी पैगाम […]

अभी तो शुरू ही हुई थी मेरी उड़ान पंख थे नए बस चाहत थी ऊपर उड़ने की कुछ करने की मेहनत बना था जुनून सफलता पाने की तीर निकलने ही वाला था धनुष से यह […]

अभी तो शुरू ही हुई थी मेरी उड़ान पंख थे नए बस चाहत थी ऊपर उड़ने की कुछ करने का महीना तो बना था जानू सफलता पानी के 3:00 निकलने ही वाला था धनुष से […]

अभी तो शुरू ही हुई थी मेरी उड़ान पंख थे नए बस चाहत थी ऊपर उड़ने की कुछ करने का महीना तो बना था जानू सफलता पानी के 3:00 निकलने ही वाला था धनुष से […]

मानवता निष्प्राण पड़ी है कब से देखो तड़प रही है कोई सहारा देने ना आया कितने लोगों की भीड़ लगी है कोई खींचता फोन से फोटो मेरी लाईव वीडियो वायरल हुई है हाय करे कोई […]

देखो बरस रही ठंडी फुहार, बदलियां भर आई। काले-काले मेघा उमड़ घुमड़ रहे, गरज गरज कर शोर सुना रहे, फिर दामिनी तड़की आया झंझावात, बदलियां भर आई। वन में नाचे मोर -मोरनी, प्रकृति का कैसा […]

इक्कीसवीं सदी के बच्चे हैं अपनी संस्कृति से अंजान, रामचरितमानस हो या हो भगवत गीता,इनका तनिक भी नहीं ज्ञान, पूछा कुछ बच्चों से….. कौन था रावण और कौन थे श्री राम, कौन थी अपनी सीता […]

झूठ की मिट्टी डालकर दफनाया गया है सत्य को परंतु वह अभी भी जीवित है मरा नहीं देर से ही सही भयानक रूप धारण कर सामने आएगा एक दिन वह एक दिन ऎसी अंधेरी रात […]

कविता- कुष्ठ रोग से पीड़ित माँ ————————————— साहब मुझको पैसा दे दो बच्चों को मेरे भोजन दे दो ठंड लगती है भारी अब तो इन बच्चों को कपड़ा दे दो क्या है गरीबी जाने बच्चे […]

पलक झपकते ही खो हो गए कितने ही मुस्कुराते चेहरे, जो कल तक थे हमारी कहानी का हिस्सा जैसे किसी चलचित्र में क्षण में बदल जाते हैं दृश्य…!! कितना कुछ बाक़ी रह गया जो कहा […]

सदियों पुरानी मर्यादाओं को क्षण भर में तोड़ देना अपने अब वही है जो जानते हैं नीबू जैसे निचोड़ लेना बहुमंजिला इमारत के नीव के पत्थर गायब है फिर ऎसा विश्वाश कैसे आया कि इमारत […]

कोरोना से सिमटते परिवारों की व्यथा:- कैसा जीवन हाय ! हमारा लगता ना कोई भी प्यारा मम्मी, पापा, दादी, बाबा भाई जो कल ही था दुनिया में आया, चले गए सब छोड़ मुझे अब कौन […]

असमंजस में जीवन गुजरा विपरीत दिशा जाती सांसें कोहराम मचा चहुँ ओर रोती बिलखती दिखती आंखें पीर उठे दिल में ‘प्रज्ञा चीख उठे पत्थर दिल भी ऐसे दृश्य ना देखे हमने कल्पना भी कभी न […]

प्रभु तुम्हारे चरणों में प्रातः वन्दन करता हूँ। जग का संकट दूर करो पीड़ित क्रन्दन करता हूँ।। व्याकुलता में सब जन तेरे कोरोना के मारे हैं। रक्षा करो करुणामय स्वामी पूत कपूत तुम्हारे हैं।।

सुबह का चाय बड़ा हीं मीठा । मीठी सोच विचार भी मीठा।। गमी खुशी से दूर कहीं कवियों का संसार भी मीठा। सुप्रभात विनयचंद आखे सावन का परिवार भी मीठा।।

केवल आकार का अंतर होता है आग की लपट और चिंगारी में परन्तु समान होता हैं उनका ताप और गुणधर्म उसी प्रकार सुख भी चाहे छोटा हो या बड़ा, हो क्षणिक या दीर्घकालिक, उसकी प्रकृति […]

गलियों को छोड़ हम इन्कलेभ में आ गए। छोटे छोटे घर आज महलों में छा गए।। दूर हो गए चाचे – ताए पड़ोसियों में छाया मतभेद। पाकर अकेलापन में बन्धु विनयचंद के मन में खेद।।

हे ईश्वर हम सब तेरी ही संतान करती हूं प्रार्थना इतनी सी, प्रभु दे दो वरदान मत छीनो हम बच्चों से मां पापा के साए लौटा दो अपने बच्चों की फिर से मुस्कान मत छीनो […]