सगे संबंधियों को भी बुलाते हैं केक काटने से पहले मोमबत्ती भी बुझाते हैं पर यह क्या ?? जिस कुलदीपक और घर की लक्ष्मी की खातिर मंदिरों में दिए जलाते हैं जिन के खातिर पूजा […]

बेटी को घर की लक्ष्मी और बेटे को घर का कुलदीपक बुलाते हैं, आए जब भी बेटी और बेटे का जन्म दिवस, बड़ी धूमधाम से जन्मदिन मनाते हैं, हुई सजावट रंग-बिरंगे गुब्बारों से, मंगाया सुंदर […]

रास्ते से एक विछिप्त महिला थी गुजर रही, याकायक मेरी नजर पड़ी, चली जा रही थी अपनी धुन में, ना जाने क्या थी बड़बड़ा रही, कुछ बच्चों ने उस पर पत्थर चलाएं, कुछ बच्चे उसे […]

हरदम शिकायत तूं मुझे माना करती कहां निमकी-खोरमा छिपा के रखती कहां भाई से‌ ही‌‌ स्नेह मन में तेरे यहां रह के भी तूं रहती कहां। जब भी कुछ बनाती, आंखें छलक आती तेरी गर […]

यह तन तो है माटी का बंदे, माटी में मिल जाएगा, जब अंत समय आएगा तो, सब यहीं धरा रह जाएगा। किस बात का है अभिमान तुझे, किस बात पर तू इतराता है, यह पैसा- […]

मन में उल्लास धधकता रहे अंगार की तरह हार के बाद भी जीत जाने की संभावना बनी रहे बीपत्तियों का सामना करे पहाड़ की तरह उम्मीद के दीपक जलाकर अंधेरे में चले अपनो के विश्वाश […]

माँ मैं फिर जीना चाहती हूँ, आपका प्यारा बच्चा बनकर, माँ मैं फिर सोना चाहती हूँ, आपकी गोद का झूला लेकर, माँ मैं फिर से दुनिया से अनजान बन कर आप के आँचल की छाया […]

माँ के बारे में कविता लिखना बहुत ही खुशी की बात है| पर मेरी माँ के बारे में चंद शब्दों में व्यान नहीं हो सकता है| माँ मेरे लिए ही नहीं हर किसी के लिए […]

मेरी नन्ही सी गुड़िया, मेरी जान, मेरी बच्ची, मुझे अच्छा नहीं लगता तुम्हें यूँ ही छोड़ कर ऑफिस आना, मेरी इच्छा है कि हर पल तेरे पास और तुम्हें गोद में लिए रहूँ। तेरी तोतली-2 […]

नई रौशनी कर रही है तेरा इंतजार यॅंहा । तू है वहाॅं, उसे भी तेरा इंतजार है। आजा लौट कर, बहुत सुनहरी दुनियाँ है, तेरे लिए सजाया है प्रभु ने सुखद संसार यहाँ॥ ____✍गीता

मैं अर्धविक्षिप्त अवस्था में थी, निकाल कर ला रही हूँ धीरे-धीरे स्वयं को । मेरे पाॅंव में डाली हुई आपकी नेह की डोर, लेकर आ रही है मुझे जिंदगी की ओर। आपके नेह का ऑंचल […]

है नामुमकिन मिटा पाना मेरे दिल से मोहब्बत को तेरी नजरों की शोखी को होंठों के हस्ताक्षर को जो तन से लेकर मन तक छपे उन मौनी चुंबनो के ठप्पे मिट कैसे पाएगें लगे तन […]

मेरी कलम और मेरी स्याही लिखते लिखते बोल रही ओ सखि ! तू किन ख्वाबों को पन्नों पर उकेरती रहती है ? रातों को जगकर खामोंखा जाने क्या लिखती रहती है! मैं बोली- ओ बावरी […]

तू किसी रेल-सी गुजरती है मैं पटरी-सा थरथराता हूँ दूर तुझसे नहीं रहता तेरा स्पर्श पाता हूँ जवाबों की सवालों की कहाँ बातें रहीं अब तो तू मेरी साँसों जैसी है मैं जीवनदान पाता हूँ […]

जो गज़लों में मोहब्बत हो तो कैसा हो ? तो कैसा हो ? जो आँखों में शरारत हो तो कैसा हो ? तो कैसा हो ? छनक कर तू मिले लफ्जों-सा मुझसे चूम ले मुझको […]

हर पन्ने पर तुम मोहब्बत को लिखते हो किसी की मोहब्बत में खोए से लगते हो आज पढ़ी तुम्हारे दिल की डायरी उलटकर मोहब्बत की तालीम लिये से लगते हो यूं तो हमारे बीच कोई […]

जो मनुज होते हैं धरातल पर ही रहते हैं जो दनुज होते हैं पवन में उड़ते रहते हैं रावण का अहंकार जब हद से बढ़ता है, लेकर धनुष और तीर राम संहार करते हैं यह […]

मदर्स डे स्पेशल:- माँ तेरे आँचल में छुप जाने को जी चाहता है थक कर चूर हूँ मैं आज जिंदगी से तेरी गोद में सर रखकर सो जाने को जी चाहता है कोई नहीं डाटता […]

एक ही घर में चार चूल्हे रख लिए, मां को निकाल बाहर करो,करो नई गृहस्थी की शुरुआत, जिस मां की उंगली थाम दुनिया देखी, उस मां को साथ लेकर चलने में आज बेटे भी शर्मात […]

वाह भाई क्या बात है, पर समझ ना पाया आदमी की क्या औकात है, सुबह से मना रहे मातृ दिवस,स्टेटस पर स्टेटस लगा रहे, व्हाट्सएप, इंस्टा, फेसबुक, शेयर चैट, कुछ भी बाकी नहीं भेज दिया […]

मां मेरी इल्तजा, मां मेरी प्रार्थना, मां की ममता का मोल चुका पाऊं ना, मां वेद भी है,मां पुराण भी है, मां है ईसा की बाइबिल,मां मोहम्मद की कुरान है, मां का प्यार असीम है […]

हरी हरी बाग में सुगंध देती साग हैं बह रहा पानी मिट्टी की बुझी आग है झूम रहे तरु मानो खेल रहे फाग हैं हरियाली घास की मखमल सा बाग है बौर लगी आम में […]

माँ, तुम्हारे बारे में लिखना कठिन है या यूँ कहूँ कि ये असमर्थता समानुपातिक है उस सहजता के जिससे तुम मेरे मौन के पीछे छिपी गहरी उदासी पढ़ लेती हो..!! तुम जलती रहीं निरन्तर एक […]

” है शत शत बार प्रणाम तुझे माँ ” जो शब्द था पहला बोला मैंने वो शब्द था पहला बोला “माँ” जो ऊँगली पहली थामी मैंने वो ऊँगली थी पहली तेरी “माँ” तेरे सीने लग […]

सर्द रातों में मुझे,अपने आंचल में छुपा लेती है मॉं, गर्मी की तपती दोपहरी में, असीम ठंडक का एहसास कराती है मॉं, खुद गीले बिस्तर पर सो कर, बच्चोंको फूल जैसी सेज देती है मॉं, […]

माता कुमाता नहीं हो सकती परंतु पुत्र नहीं सुपुत्र रहा मां, धरती मां, भारत मां, प्रकृति मां , नदी मां, गौ मां आज सभी पीड़ित, उपेक्षित, असहाय महसूस कर रही है स्वार्थ ने मां बेटे […]

मां तूं है ममता का सागर करुणामयि अमृत की गागर श्रृजनता अतुल्य अपरम्पार तेरा ऋणि ये सारा संसार सुमन सी प्रफुल्लित चंचल सन्मिष्ठा सी मधुर मनमीत सरिता सी जीवनधार लिए स्वाति सी सूझबूझ व प्रीत […]

माँ के जीवन की सब साँसे बच्चों के ही हित होती हैं चोट लगे जब बालक के तन को आँखें तो माँ की रोती हैं ख़ुशी में हमारी ,वो खुश हो जाती है दुःख में […]

हवा हवा में उड़ नहीं, सोच समझ इंसान, हवा बिना ये फेफड़े, नहीं करेंगे काम। नहीं करेंगे काम, जिन्दगी उड़ जायेगी, बिना सजग रहे सब, धूल में मिल जायेगी। कहे लेखनी काम कर रही आज […]

तुम एक पहेली सी लगती हो समझ ही नही आती हो जब मैं खुश होती हूँ तुम दूर खड़ी मुस्कुराती हो जब मैं पीड़ा में होती हूँ तुम धीरे से कंधा सहलाती हो जब खुद […]

घर के आँगन में हँसते खेलते बच्चे दुनियादारी से अनजान खिले हुए फूल की तरह सौंदर्य और सुगंध बिखेर रहे हैं भौरो की तरह मन प्रतिदिन करता है रसपान भूल जाते हैं तनाव सब भूल […]

बिन नारी इस जीवन की संकल्पना अधूरी है, खुशहाल जीवन के लिए, महिला सशक्तिकरण जरूरी है। समाज में फैली कुप्रथाओं नें, इनके अधिकारों का हनन किया, कभी सती हुई,कभी बाल विवाह, आज दहेज के दंश […]

जरा- सा वक्त लगेगा तुमको समझने में, जान पाने में पर जब तक दिलों के बीच दूरियां हैं तब तक नजदीक ना आना… जब तुम्हारी सांसों की खुशबू मेरा मन भिगाएगी, तुम्हारी रूह की गर्मी […]

कभी-कभी आसपास पानी होने का भ्रम चंद साँसों का इजाफ़ा कर देता है तड़पकर मरते हुए किसी प्यासे मुसाफ़िर की ज़िन्दगी में तुम भी मेरे जीवन में एक मरीचिका की तरह हो तुम कहीं नहीं […]

कविता-शान्ति के दूत हो ——————————– शांति के दूत हो जीवन के स्त्रोत हो, अशोक तुम महान हो, प्रिय दर्शी राजा सबके सम्मान हो, शोषित उपेक्षित के, तुम ही उत्थान हो, कुल का गौरव, बुद्ध के […]

कविता- बुद्ध भक्त भीमराव ———————————— बुद्ध भक्त भीमराव, आपको फिर से आना होगा, उत्तर दक्षिण पूरब पश्चिम, भारत को बौद्धमय बनाना होगा, अशोक चंद्रगुप्त के सपनों को, भारत के घर-घर पहुंचाना होगा, हिंदू मुस्लिम सिख […]

कविता- राम मेरे आदर्श हैं ———————————– राम मेरे आदर्श हैं भाई भारत माँ के पुत्र हैं भाई, जीसस मोहम्मद गुरु नानक बुद्ध से पहले राम दुनिया के भगवान हैं भाई, रघुकुल के प्राण हैं, शबरी […]

कविता- मां पछताई होगी ——————————– मां बहुत पछताई होगी, बेटी को जन्म देकर रोई होगी, पढ़ी अखबार में- दो वर्षीय बच्ची के रेप की घटना जब, मां बच्ची को सीने से लगाकर रोई होगी, लाखों […]

प्यार से पहले कमाई करो धन हो या शिक्षा उसकी रोपाई करो, भूखे कभी न रहोगे ठग कभी न जाओगे, दुनिया तुम्हें रुलाएंगी, है ज्ञान तो रोने से बच जाओगे, शिक्षा- संघर्ष सवाल देती है […]

कर्म करते रहिए कभी बेकार नहीं जाते हैं आज नहीं तो कल कर्मो का फल पाते हैं हर काम के बदले पैसा न लीजिए रखिए सदा ही याद जो संस्कार सिखाते हैं

वो हमसे कहते हैं कुछ ढंग का लिखा करो प्रज्ञा, जिन्हें खुद कलम पकड़ना नहीं आता. आज वो हमको बेशर्म कह रहे हैं जिन्हें खुद शर्माना नहीं आता कैसे कैसे दिन देखने पड़ रहे हैं […]

ये देश है हमारा इसे हमे ही बचाना है दअप‍हतर में हो या घर में मास्क तो लगाना है अनमोल है जीवन और देश हमारा सहयोग से सबके महामारी को हराना है