कविता विचारों को व्यक्त करने का बहाना है कविता सच्चाई को सुनना और सुनाना है कविता अक्सर बन जाती है अपने आप कविता संसार से रागात्मक संबंध बनाना है

एक रोटी के लिए अक्सर कुत्ते लड़ जाते हैं आदमी वो है जो मिलबाँट कर खाते हैं आदमी वो है भूखे रहकर मां की तरह खाते हैं बाद में पहले खिलाते हैं

सावन की आभा खिले खिले विश्व में चहुँ ओर लेखनी मेरी प्रखर हो हो दीप्तिमान चहुं ओर नेह की सुंदर कलम से लिखा हुआ साहित्य स्वार्थ हीन हो हिय मेरा ईर्ष्या हीन कर्तव्य दीनों के […]

मिलता प्रेम अपार है मिलता यहां सम्मान अपनी लेखनी से सदा बढ़े विश्व का मान बढ़े विश्व का मान लेखनी ऐसी हो मेरी ना मन में हो कलेश ना किसी से द्वेष, यही आकांक्षा मेरी […]

जीत हार से परे है काव्य की अनुपम छटा नवांगतुक कविजन लिखते बहुत ही अच्छा लिखते बहुत ही अच्छा चाहे जो भी जीते जीत हार की काव्य में नहीं हैं रीतें मुझे नेह है मिल […]

सावन में आज फिर बहे प्रेम की धार गा रहे कवि सभी मीठा मीठा राग मीठा मीठा राग गायें मिल सभी कविजन, ना मन हो छोटा यह है सावन का आँगन बिना अनर्गल बातों में […]

जरूरतमंद आए नजर तो न करें वहां से ‘पलायन’ करें मदद उसकी दें कुछ उसे ‘उपायन’ निज तन से करी मदद उसकी ना करें चहुंओर ‘गायन’ अपने संग दूजे का होता रहे ‘कलायन’ कदम बढ़ाए […]

कहीं लाऊं मैं खुशियां कहीं खुशनुमा माहौल लाती हूं कभी लिखती हूं कविताएं कभी भजन गुनगुनाती हूं चहुंओर बरसे प्रेम, स्नेह ऐसी बहार लाती हूं हो रही स्पर्धा में अपनों को जिताने में चलो मैं […]

साहित्य एक विधा है न कुछ दिनों की संविदा है लिखूं कुछ ऐसा जिसकी सबको प्रतिक्षा है कहीं मिले आलोचना कहीं मिले सुंदर समीक्षा है अभी मैं हूं एक ‘नन्हीं कलम’ पर आकाश छूने की […]

दहेज प्रथा का प्रचलन किसने चलाया ? यह सवाल मन में बार-बार उठता है दहेज प्रथा के कारण ही बेटियां जलाई जाती हैं। दुनिया में आने से पहले ही कोख में मार दी जाती हैं। […]

वृक्षारोपण कवच है वृक्षारोपण ही वैक्सीन वृक्षारोपण से धरती सुंदर हो हो मन हरा रंग भरा रंगीन हो मन हरा भरा रंगीन सुगंधित पुष्प खिलेंगे धरती उपवन बनेगी देवता आन मिलेंगे।।

सुंदर-सुंदर वृक्ष हैं सुंदर-सुंदर पात वृक्षारोपण करके ही प्रदूषण से मिलेगी निजात प्रदूषण से मिलेगी निजात सैकड़ों वृक्ष लगाओ अपने जन्मदिवस पर एक-एक पौधा सभी लगाओ वृक्ष लगाने से ऑक्सीजन लेवल बढ़ेगा महामारियों से निजात […]

कोरोना से जूझता था हर एक परिवार तभी कहीं से आ गया ब्लैक फंगस का वार, ब्लैक फंगस का वार हाय ! है बड़ा भयानक जिसको यह लग जाए मृत्यु हो जाए अचानक कैसे-कैसे लोग […]

“मैं ये पल बार -2 लेना चाहती हूं और जन्मदिन की शुभकामनाओं के लिए सभी को “धन्यवाद” कहना चाहती हूं। यह मेरे लिए बहुत मायने रखता है कि आपने अपना सारा समय अपने व्यस्त जीवन […]

तन मन में ऐसो रमो राम- श्याम का नाम काया हो गई श्याम रंग मन में राम का नाम, मन में राम का नाम लगन अब प्रेम की लागी राम से मिलने शबरी जैसी पीछे […]

मित्रता करने को हाँथ फ़ैल जाते हैं उड़ने को आसमान में पंख खुल जाते हैं जी करता है एक लम्बी साँस लूँ उड़ चलूँ गगन में बादलों से करूं आँख मिचौली बैठूँ सितारों के साथ […]

देखा बांहे फैलाये आसमान खड़ा है गुलाब में कुछ नई कोपलें फूटी, अजूबा सर उठाये खड़ा है शायद ये कल की बारिश का नतीजा है, जो सूखे पत्तों में भी जान फूंक दी।।

बुरा कोई नहीं, बुरी हमारी सोंच है मन के अन्दर ही बैठा पापी, कहने में क्या संकोच है। ढूँढ़ोगे जहान में यदि तुम अच्छा इन्सान, मिलना तब तो मुश्किल है जब बुरी तुम्हारी सोंच है।।

आसमान में स्याह बादलों के पीछे, मैने तुम्हें देखा सफेद रंग की टोपी लगाए लाल रंग की शर्ट पहने तुम कोई चित्र बना रहे थे किसी की घनी जुल्फें, गोरी रंगत, पैरों में पायल होंठो […]

सो जाते हैं हम एक लम्बी साँस लेकर, नींद में तुम्हें देखने की तमन्ना रखते हैं । बार-बार खोलते हैं हम आँखें, इस तरह तुम्हारे इन्तज़ार में हम पूरी रात नहीं सोते हैं।।

आँगे बढ़ने प्रतियोगिता में सब हुए हिस्से दार पग बढ़ रहे हैं भीड़ के लगातार मुश्किल है भीड़ को पहचान पाना भीड़ में अपनी पहचान बनाना प्रतियोगिता में पिछड़ने वालो को अपराधी मानते हुए उपेक्षित […]

दिन पर दिन दिखा रही प्रकृति रौद्र रूप फिर भी हम कर रहे प्रकृति की अवहेलना अभी भी मानव ने नहीं बंद किया प्रकृति से खेलना गर अभी नहीं सचेते रे मानव ना जाने क्या-क्या […]

दो वक्त की रोटी भी ना दे सके वो बच्चे “उनको” (बूढे मां-बाप ) जिनके खातिर ‘खुद’ का जीवन लगा दिया कमाने में उस घर में एक कोना भी ना ” उनका” “जिन्होनें” सारी उम्र […]

भारत – माता  की जय बोल।  हरित  रंग  में  रंगी   धरित्री  रंगों  की   बिखरी   बरसात,  गेंदा, अड़हुल, मस्त- चमेली  पवन  संग   झूमे पारिजात।         वल्लरियाँ  गातीं  नित   डोल   […]

ये भारत भूमि है अपनी मैं भारत माँ की जाई हूँ किसी दीवाने के दिल की मैं मीठी सी रुबाई हूँ मेरे संबंध है सब कुछ यही अब मेरी दौलत हैं नहीं ये पूंछो अब […]

मानवता का मत हनन करो ईर्ष्या द्वेष नफरत को अब दफन करो ना जाने कब रुक जाएं यें सांसे ? अब तो अच्छे कर्म करो खुद में जगाकर मानवता प्रेम से रहने का जतन करो […]

तबाही मेरे मन की तुम हंसी में लेके मत डोलो मेरे गीतों को अपने प्रेम के भेंट मत बोलो जो कभी मरते-मिटते थे मेरे अल्फाजों के दम पर, कि अब देकर हमें कसमें वो अब […]

ना जाने ज़मीर कहां खो गया उनका, जो आतंकियों का साथ निभाते हैं, हिंसा, नफरत का पाठ सीख कर, दहशत,डर फैलाते हैं। मजहब ,जिहाद के नाम पर, मानव जाति को लड़वाते हैं, स्वयं आतंक की […]

आज अर्ध-निद्रा में ही कुछ जागने की चेष्टा की जाने कितनी दूर चलकर मैं जाने कहाँ पहुँच गई ! अर्द्ध विक्षिप्त अवस्था में, देखा तो हजारों पुष्प सोने के सरोवर में स्नान करके पूजा करने […]

तलाश करने जो चले सुकून के पल घूमकर आ गये वहीं जहां से चले होके बेकल। मन में भी सुकून नहीं फिर ढूंढते फिरते कहां जीवन पे ही छाया ग्रहण छिनती सांसों की गिनती कहां […]

किसका शौक पूरा हुआ है, गम खुशी में जीवन रहा है, जो दिखावा कर रहे जमाने में, खुशी के लिए बहुत कुछ सहना पड़ रहा है, हालत ने पटका ऐसे, जो कल जी रहें थे […]

हृदय पर कितने पत्थर रखे हैं हिसाब नहीं हम तुम्हें याद कर कितना रोए हैं हिसाब नहीं। तुम देते रहे सितम अपनी मदहोशी में हमारे जमीर को कितनी चोट लगी हिसाब नहीं।।

मन बूढ़ा हो गया मगर ना मन की पीर गई सडकों पर ही जन्म लिया और सड़कों पर ही मर गई, कोढ़ की काठी, कोढ़ की काया, कोढ़ हुआ यह जीवन मन खनके कितने कंगना […]

भारतीय संस्कृति, अमिट अडिग अति सुन्दर मनभावन, स्वीकृत भावों की भंगिमा है जिसे अपनाया सहेजा संवारा और ह्रदय तल से स्वीकृत किया जाता है जो सदा सबका हित लिये रहती है और संस्कारों की धरोहर […]

बीच सड़क पर जलते देखो शोले और अंगारे, बूढ़े बच्चे और जवान इस अशांति से हारे। प्रेम से रहने का पाठ पढ़ाती है हमारी संस्कृति, अंतरराष्ट्रीय शांति पर कितनी लिखी जा चुकी हैं ​कृति। पर […]

ये रिश्ते अब अमानत इन्हें तुम ऐसे मत तोड़ो अगर कोई शिकायत है तो हमसे बेझिझक बोलो मगर ए हुस्न के मालिक ! ना इतरा तू इस तरह से क्षणिक है हुस्न की महफिल इसे […]

दिल के दर्मियां कुछ जख्म हरे हो रहे हैं वो हमारे और करीब हो रहे हैं वह अब यह नहीं जानते इन रिश्तों से मेरा दम घुटने लगा है हमें अब उनके सहारे से ज्यादा, […]

फूलों से भी प्यारा लगता रिश्तों का यह मेला जिन रिश्तों ने मुझको पाला दिया जीवन को नया सवेरा कुछ रिश्ते दम घोंट रहे जो स्वार्थ की करते सवारी हैं जो देते हैं मुझे प्रेरणा […]

रुदन कर रही देखो प्यारे गौ माता निज राहों में अपने बछड़े को मनुहार से बुलाती आजा प्यारे बाहों में अब यह दुनिया नहीं रही विश्वास के लायक गौ माता बस एक जानवर हो चाहे […]

यारों ! ये कैसा कहर हो गया। बंद खिड़कियों का शहर हो गया।। बाहर बीमारी, भीतर लाचारी देख आबोहवा भी जहर हो गया।। मुँह पे पट्टी चढ़ी, पेट में खलबली दवा संग दुआ भी बेअसर […]

रिमझिम रिमझिम बरस रहा पानी है चल रही शीतल हवा शाम ये सुहानी है हरी हरी घास से धरती करे मुस्कान कह रही प्रिय तम से मिलने की कहानी है

आई है जब से महामारी ये मितवा हर तरफ का मंजर दुखदाई है मितवा न हर्षित मन न पुलकित तन गुनगुनाया जाये न‌ कोई गीतवा सरकार अऊ डॉक्टर देते एकै संदेशवा ‘दो गज दूरी’ और […]

अकसर ये ख्याल उठते जेहन में रात तूं किधर ठहर जाती पलक बिछाए दिवस तेरे लिए तूं इतनी देर से क्यूं आती।। थक गये सब जर-चेतन थका हारा है सबका मन आने की तेरी आहट […]