घड़ी की मरम्मत तो करा लूं मगर, अपने समय को ठीक कराऊँ कैसे।। राही (अंजाना)
घड़ी की मरम्मत तो करा लूं मगर, अपने समय को ठीक कराऊँ कैसे।। राही (अंजाना)
यादों की पोटली तेरी खोल के न देखूंगा, आँखों की कोठरी मैं खोल के न देखूंगा, तू जब समझी नहीं मेरी ज़ुबानी ये कहानी, तो अब खामोशी के एहसासों की कोई टोकरी न देखूंगा।। राही […]
हुनर तुम्हारे तुम पर ही आजमाए गए, तुम जुल्मी बस हमारे ही कहाये गए।। Rahi
सपने पूरे करने की चाहत होनी चाहिए, खुद हिम्मत करो तो हर रात तैयार है। अरे कोशिश करके तो देखो, कदम बढ़ा कर तो देखो, सफलता की सीढ़ियां तो कब से तैयार हैं।।
चाहा था उनको दिल से, हर याद अपनी लिख डाली थी। प्यार के इज़हार का तो मौका ही न मिला, बची-खुची दोस्ती भी उन्होंने तोड़ डाली थी।
कई बार थोडा सा मज़ाक कर लेता हूं, कई बार लोगों को थोड़ा सा परेशान कर देता हूं। इस मस्ती के पीछे का प्यार वह समझ नहीं पाते हैं पता नहीं क्यों फिर भी लोग […]
दर्द तो दुनिया ने बहुत दिए, पर दुनिया वाले भी अपने थे, इसीलिए खुशी-खुशी सह लिए। अपने यारों से उम्मीदें बहुत थी, पर वह भी मुझे समझ न पाए। दुखी तो बहुत था दिल पर […]
कुछ सोच रहा हूं मैं, कुछ खोज रहा हूं मैं। जिंदगी के इन घने जंगलों में, खुशी की कुछं टहनियां ढूंढ रहा हूं मैं। वह हसीन वादियां कहीं खो सी गई हैं, नदियों के किनारों […]
ए बादल इतना बरस कि सारी नफरतें धुल जांयें इंसानियत तरस गई है, मोहब्बत के सैलाब को
ढह गए कितने ही ईमान ऐ मकाँ एक बोतल की चाहत में, मगर बोतल ने बिक कर भी अपना ज़मीर नहीं छोड़ा।। – राही (अंजाना)
डर अब अँधेरी रातों से नहीं लगता, क्योंकि रातें अपने आगोश में सुला लेती है। डर तो रौशनी की किरणों से लगता है, क्योंकि रौशनी सब कुछ साफ़ साफ़ दिखा देती है।
बारिश के मौसम में कागज़ की कश्ती डूबने का इंतज़ार ही करती रह गयी। और ये बच्चे उड़ने के सपने लिए उस कागज़ को पढ़ते ही रह गए।
ज़िन्दगी की जंग के मैदान में, तुम भी खड़े हो मैं भी खड़ी हूँ। फ़र्क है तो इतना की मैं किसी को मारना नहीं चाहती, और तुम किसी और से मरना नहीं चाहते।
ढह गए कितने ही ईमान ऐ मकाँ एक बोतल की चाहत में, मगर बोतल ने बिक कर भी अपना ज़मीर नहीं छोड़ा।। राही (अंजाना)
बातों में से बात निकलती है, चुप रहता हूँ आवाज़ निकलती है, शब्दों का ही खेल है मानो, जैसे समन्दर से सौगात निकलती है।
मैं प्यादा हूँ मुझे प्यादा ही रहने दो, यूँ हाथी और घोड़ों से न भिड़ाओ तुम, मैं तो शतरंज का खिलाड़ी हूँ दोस्त, मुझे सांप सीढ़ी में न उलझाओ तुम।। राही (अंजाना)
लड़ते लड़ते ज़माने की रीतिरिवाजों से थक गया हूँ, मगर कमाल ये ही की मैं अब भी किताब पढ़ता हूँ।। राही (अंजाना)
अपनी मोहब्बत की इन्तहा तुम्हें क्या बताऊँ, गर हवा भी तुम्हें छूकर गुजरे तो शोले भड़कते हैं।। राही (अनजाना)
छोटी सी ख़ता पे दोस्ती तोड़ दे, रिश्तों के समन्दर का जो मुँख मोड़ दे, उम्मीदों पर टिकी हुई दुनियाँ छोड़ दे, वो सम्बन्ध ही क्या जो बन्धन छोड़ दे।। RAAHI
वो न दिन देखती है न रात देखती है, वो बस एक मुझसे मिलने की बाट देखती है।। राही (अंजाना)
सौ लाख झूठी कसमें खाकर भी वो मुझसे प्यार को कुबुलने को तैयार नही हुआ।। राही (अंजाना)
कोई पानी पीकर अपने तन को जेसे तैसे भर लेता है, और मन को देखो खुद ब खुद ही ये अपने घर को भर लेता है।।
कलम की स्याही से शब्दों के औजार बनाकर, कल्पनाओं के चित्रों को मैने सरेआम ठोक दिया।। राही (अंजाना)
मैं ही हल हूँ उस उलझे सवाल का, जिसे किसीने अब तक पूछा नहीं।। राही (अंजाना)
चल आज तू मुझे अपना रहनुमा बना दे, इसी बहाने मेरी ज़िन्दगी भी खुशनुमा बना दे…….!! -Dev Kumar
चल आज तू मुझे अपना रहनुमा बना दे, इसी बहाने मेरी ज़िन्दगी भी खुशनुमा बना दे…….!! -Dev Kumar
चली कलम फिर आज कागज पर एक नगमा सा वो बन गया तन्हाई ने फिर करवट बदली एक गमो का जलसा सा वो बन गया देव कुमार
खुली आँखों का खुवाब अच्छा नहीं होता बेबसी का रुआब अच्छा नहीं होता जो अपने बन कर भी न बन सके अपने उन पर मोहोब्बत का दवाब अच्छा नहीं होता देव कुमार
Es dil ki Ek zid hai Bas wo puri Ho jaaye….! Ham aur hamari mohobbat Dono uske liye jaruri Ho jaaye….!! -Dev Kumar
Logo se apna chehra chupa ke rona Ke aansuon ko ankhon main chupa ke rona…….! Log padh lete hai har lakiron ko Jab bhi Rona lakiron ko meeta kar Rona…….!! Dev Kumar
कुछ तो बात जरूर रही होगी तुम दोनो के दार्मियां मोहोब्बत का रिश्ता क्यू समझोते पर आ गया मिला हैं तुमको भी वंही उससे बदले में दिल के जो तुमने उसको इस मोहोब्बत में दिया…………..!! […]
लोग करने लगे है दिल्लगी और रिस्तों को ताड ताड….! कुछ इसलिये भी मोहोब्बत अब बदनाम हो गई है….!! – देव कुमार
एक नज़र उसे देखने के बाद उस रोज़ से, मेरी आँखों को और कोई चेहरा नहीं दिखता।। राही (अंजाना)
रूठी हुई मोहब्बत को मनाते मनाते, हम उन्हीं के चेहरे के दीवाने हो गए।। राही
Harshit Shukla रूठी हुई मोहब्बत को मनाते मनाते, हम उन्हीं के चेहरे के दीवाने हो गए।। राही
लोग जबसे खामोशी को मेरी कमजोरी समझने लगे, राही उसी दिन से बहुत ज्यादा बोलने लगा ।। राही (अंजाना)
जब दुनियाँ की भीड़ में मुझे कोई सुनने वाला न था, उसने मेरे दिल पर हाथ रखा और सब समझ गई।। राही (अंजाना)
शोर तो बहुत था मेरे चारों तरफ सफर में, मगर मुझे सिर्फ उसकी खामोशी सुनाई दी।। राही (अंजाना)
हम दिए जलाते हैं रौशनी ही करेंगे, अब कागज़ हो या यादें दिल में राख ही बनेंगे।। राही (अंजाना)
नुमाइश मेरी बरबादी का लगाकर, वो मुस्कराहट सरे बाजार बेचता है।। राही (अंजाना)
जब किसी ने न देखा पलटकर मुझको, तब आइना भी मुझे देखकर मेरे साथ रोया, जब सूख गया मेरे दिल का हर एक कोना, तब समन्दर भी मेरे बिस्तर पर साथ सोया। राही (अंजाना)
बस चन्द पन्ने पलते और किताब छूट गई, मोहब्बत के विषय पर हमारी पकड़ बहुत थी।। राही (अंजाना)
बहुत कुछ कहते हैं मगर सामने नहीं आते, कुछ लोग अपनी हरकतों से कभी बाज नहीं आते।। राही (अंजाना)
जो प्रश्न उसने कभी पूछा ही नहीं, उसके जवाब में रात दिन उलझा हूँ।। राही (अंजाना)
जहाँ भी रहे नज़र आती है, वो हवाओं सी मुझे सुहाती है, हाथ आये न आये वो मेरे, वो तितली अपनी ओर बुलाती है।। राही (अंजाना)
बन्द आँखों में भी नज़र आने लगा है, एक चेहरा मुझे इस तरह सताने लगा है।। राही (अंजाना)
गम और तन्हाई का साथ नहीं मजबूरी हैं साहिब ये और कुछ नहीं इश्क में मिली मजदूरी हैं साहिब….!! -देव कुमार
हमारी तारीफ क्या पुछते हो, बस इतना सुन लो साहिब…! ज़िसका कोई जवाब नही, ऐसा एक सवाल हैं हम…!! -देव कुमार
ठिकाना भी मिल जाएगा, और दर्द-एे-गम की दवा भी….! माना दुनिया मतलबी हैं मगर, कुछ लोग दिलजले भी हैं साहिब….! -@ देव कुमार
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