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UE Vijay Sharma

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UE Vijay Sharma

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by UE Vijay Sharma

पहली नजर का मेरा इश्क है

March 27, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

पहली नजर का मेरा इश्क है
बिन हिसाब का मेरा इश्क है
ख़ुद में ही पावन यह इश्क है
अकारण बिन-व्जह का इश्क है
कह लो के पागल यह इश्क है
माना तो सही के यह इश्क है

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

एहसास तेरी पह्ली छुअन का

March 27, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

एहसास तेरी पह्ली छुअन का मुझमें
जिंदा बच गया मर कीं भी मुझमें

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

इक आग सी मुझमें सहर गई

March 27, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

अपने साजन संग मैं फहर गई
इक आग सी मुझमें सहर गई
अंग गोरे मोरे इक लहर गई
बन तरंग सी मुझमें तैर गई

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

मोहे अब कोई रंग ना फबता

March 27, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

मोहे अब कोई रंग ना फबता
सिवा तेरे अब कोई ना जचता

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

तेरी हर राह् में बिछ गई मैं सजना

March 27, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

रंग जोगिया तेरा मोहे भा गया सजना
इश्क तेरा मोरे दिलपे छा गया सजना
मै तोरे प्यार में बस खो गई सजना
रूह मेरी तोरी जोगन हो गई सजना
लाज़ शर्म सब ताक आई मैं सजना
तेरी हर राह् में बिछ गई मैं सजना

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

अ‍ब तो अंग लगा ले सजना

March 27, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

रंग तेरे में रंग गई सजना
इश्क तेरे में रंग गई सजना
दिल अपने में बसा ले सजना
अ‍ब तो अंग लगा ले सजना

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

कैसे तुम सबसे ही वफ़ा निभा लेते हो

March 27, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

सबको एक नजर में अपना बना लेते हो
कैसे तुम सबसे ही वफ़ा निभा लेते हो

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

कैसा यह नजरोँ का खेल रचाया है

March 27, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

कैसा यह नजरोँ का खेल रचाया है
रकीबों को भी इस खेल में नचाया है

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

अपनो को एक नजर में कैसे ज़ुदा कर जाते हो

March 27, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

नजरो नजरोँ में ही कैसे नजर घुमा जाते हो
अपनो को एक नजर में कैसे ज़ुदा कर जाते हो

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

नजरोँ में ही मेरी नजर अपनी बना लेते हो

March 27, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

नजरो नजरोँ में ही मेरी नजर चुरा लेते हो
नजरोँ में ही मेरी नजर अपनी बना लेते हो

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

नज़र कही ना लग जाए ख़ुद की मुझको

March 27, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

इस कदर प्यार से ना देखो मुझको
नज़र कही ना लग जाए ख़ुद की मुझको

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

दुनिया के रंग ना अब मोहे भाते हैं

March 27, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

अंग अंग अपना रंगाया तेरे इश्क में
अपनी रूह को नहलाया तेरे इश्क में
सब रंग अपने अपने चाहे दिखाते हैं
दुनिया के रंग ना अब मोहे भाते हैं

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

जो थे बरसों रकीब हमारे प्यार में

March 27, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

घूमाई ऐसी नजर यार ने प्यार में
बेवफाई कीं तसवीर दिखाई प्यार में
जो थे बरसों रकीब हमारे प्यार में
हमेे ही हो गए रकीब उनके प्यार में

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

अब रकीबों से दीवाने

March 27, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

जिन नजरों में सुनते थे अपने दिल के फ्साने
उनही नजरोँ में हैं हम अब रकीबों से दीवाने

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

तेरी नजरों में ही बसा करते थे

March 27, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

हमारा एक ऐसा वक्त गुज़रा है
अपना था पर वोह अब गुज़रा है
तेरी नजरों में ही बसा करते थे
हाल-ए-दिल अपना पड़ा करते थे

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

तू दिल का हाल लिखता है

March 27, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

सब कहते हैं तू दिल का हाल लिखता है
तेरे शब्दों का यह जाल खूब बिकता है
जो चाह कर भी कभी तू लिख ना पाएगा
मेरे दिल को तेरा वौह कलाम दिखता है

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

वौह दिल के तार

March 27, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

ज़िकर तेरे ने फिर छेड़ दिए वौह दिल के तार
जो कब्के भुला दिए थे हमने पिछली बहांर

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

जो जाने की तैयारी में थे परसो

March 27, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

महफिल में लेते ही नाम तेरा
जी उठे फिर वह तमाम चेहरे
जो जाने की तैयारी में थे परसो
वही जम गए वौह फिर बरसो

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

जाने कब वौह बरसात गई

March 27, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

बात निकली तेरी तो रात गई
जाने कब वौह बरसात गई
…… यूई

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by UE Vijay Sharma

उस महफिल में नही रमता दिल मेरा

March 27, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

ज़िकर जिस महफिल में ना हो तेरा
उस महफिल में नही रमता दिल मेरा

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

ज़िकर जब भी तेरा कही उठता है

March 27, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

ज़िकर जब भी तेरा कही उठता है
जाने दिल मेरा क्यों खिल उठता है

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

आँखों से जो यह अश्क निकले हैं

March 27, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

आँखों से जो यह अश्क निकले हैं
यही तो मेरी रूह के चिथड़े हैं

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

मेरी रूह को वोही तो पकड़े हैं

March 27, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

दर्द तेरे दिल को जो जकड़े हैं
मेरी रूह को वोही तो पकड़े हैं

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

दुआ में कभी हाथ उठा ना पाए तुम

March 27, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

दुआ में  कभी हाथ उठा ना पाए तुम
दवा मेरे गम की क्या तुम कर पाओगे
…… यूई

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by UE Vijay Sharma

मेरे दर्द-ए-गम की दवा तेरे पास नही

March 27, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

मेरे  दर्द-ए-गम की दवा तेरे पास नही
तेरे मर्ज-ए-इश्क की दवा मेरे पास नही
…… यूई

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by UE Vijay Sharma

मेरे अश्कों के दर्द

March 27, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

मेरे अश्कों के दर्द क्या तुम सुल्झओगे
इनकी आग में ख़ुद ही भस्म हो जाओगे

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

दर्द ख़ुद के ही अश्कों का समझ ना पाया

March 27, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

दर्द ख़ुद के ही अश्कों का समझ ना पाया
ज़िन्दगी का यह खेल मुझ को ना भाया

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

बेश्मकीमतें नगीने यह अरमानो के

March 27, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

अश्कों में छुपी एक जान होती है
इनकी ज़िन्दगी शानदार होती है
रंग दिखने को बस बेरंग रखा है
हर रंग इन्होंने ख़ुद में समा रखा है
बेश्मकीमतें नगीने यह अरमानो के
बहाना ना इनको बेवफ़ा इंसानो पे

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

क्यों आँखें रह गई नम

March 27, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

सोचा था पी के भूला देंगे तेरे गम
ना जाने फिर क्यों आँखें रह गई नम

….. यूई

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by UE Vijay Sharma

दर्द-ए-दिल जितना भी छुपा लो

March 27, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

पैमाना कितना भी सम्भालो छलक जाता है
दर्द-ए-दिल जितना भी छुपा लो झलक जाता है

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

आज तलक ना संभाल पाए

March 27, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

सालों पहले जो तोड़ दिया था
दिल जो आपने भरी दोपहर में
आज तलक ना संभाल पाए
उसे हम ज़िन्दगी की सहर में

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

ज़िकर जब भी उठता है तेरा शहर में

March 27, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

ज़िकर जब भी उठता है तेरा शहर में
दिल डूब सा जाता है किसी लहर में

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

मौत के इंतज़ार में ही शाम हुई

March 27, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

ज़िन्दगी की राहें अब आसान हुई
मौत के इंतज़ार में ही शाम हुई

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

तेरे सर के सारे इल्ज़ाम मै लूट गया

March 27, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

आने का वादा तेरा मुझसे टूट गया
तेरा इंतज़ार अब मुझसे ही रूठ गया
अच्छा हुआ यह खेल अपना छूट गया
तेरे सर के सारे इल्ज़ाम मै लूट गया

….. यूई

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by UE Vijay Sharma

डर जितने भी थे अपनी बर्बादी के

March 26, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

अन्धेरे मुझे अब रास आ गए है
तन्हाईया मुझे अब अपना गई है
डर जितने भी थे अपनी बर्बादी के
संग उनके अब मुझको भा गए है

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

छोड़ा है जिनको तुमने अकेले

March 26, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

छोड़ा है जिनको तुमने अकेले
मिलेंगे फिर तुझको वोह इस मेले

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

हूँ मैं जब तक तेरे हुक्म में

March 26, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

गिर जाऊँ जो मैं तेरी नजर से
कर देना दफन मुझे सत्व में
हूँ मैं जब तक तेरे हुक्म में
जिंदा हू तब तक स्थल में

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

कब्र ख़ुद की खोद के गिरना

March 26, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

उठना गिरना यूँ है उसके हाथ
कब्र ख़ुद की खोद के गिरना
यह कहाँ की लियाकत है
…… यूई

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by UE Vijay Sharma

गिर कर उठना दीवानों की हसरत है

March 26, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

उठ कर गिरना इंसानो की फितरत है
गिर कर उठना दीवानों की हसरत है

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

तेरी सारी सोच मन्सूबे तदबीरें

March 26, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

तेरी सारी सोच मन्सूबे तदबीरें
इनमें कुछ भी कम ना आएगा
वक्त जब अपना फ़ैसला सुनाएगा
तब तेरा कुछ भी बच ना पाएगा

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

गिर गया है गर समाज

March 26, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

गिर गया है गर समाज
तो इसे खोना ही चाहिए
वक्त की गहरी क़ब्रों में
अब इसे सोना ही चाहिए

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

अच्छा बुरा सब एक वक्त के है दो पहलू

March 26, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

अच्छा बुरा सब एक वक्त के है दो पहलू
जिन शमशीरों ने सामाजो को बचाया है
उन्ही ने लाखों का खून भी बहाया है

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

कौन किसका यहां फ़ैसला करे

March 26, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

कौन अच्छा है कौन बुरा
कौन किसका यहां फ़ैसला करे
पल पल बदलते रंगों में
कौन सफेद स्याह का रंग चुने

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

जीवन यहां पे सबको है

March 26, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

यही प्रथा है इस ग्रह की
जीवन यहां पे सबको है
ज़िन्दगी की कवायत यहां की
जिंदा है रिवायत वहां की

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

उस बाज़ी में

March 26, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

उस बाज़ी में
कभी ना थी तूने मानी
इस बाज़ी में
अब किसी ने ना तेरी मानी

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

जब था वक्त

March 26, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

जब था वक्त
तब किसी की ना मानी
जब ना अब वक्त
तब ना किसी की मानी

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

गम सारे जमाने के मिटाने की

March 25, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

गम सारे  जमाने के मिटाने की
क्या तुमने अकेले कसम खाई है
……यूई

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by UE Vijay Sharma

रुक जाओ ख़ुद के लिए

March 25, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

बस करो  रुक जाओ ख़ुद के लिए
प्यास अपनी को बड़ा लो मेरे लिए

……यूई

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by UE Vijay Sharma

डूब तुझमें भी तुझको छू ना पाया

March 25, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

तेरे दिल के रंग सुनसान से पाए
तेरी आँखों में ख्वाब वीरान से पाए
तेरे मन की उमंगें निर्जन सी पाई
तेरी राहे ख़ुद से अनजान सी पाई
तेरे मन की बातें बेजान सी पाई
तूने होगा मेरा प्यार अधूरा पाया
डूब तुझमें भी तुझको छू ना पाया
……यूई

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by UE Vijay Sharma

उदासी अपनी की वज़ह तो बता इक बार

March 25, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

समुंदर में रह कर भी तूं प्यासा क्यों है
अरमानो भरा प्यार पाकर उदासा क्यों है
उदासी अपनी की वज़ह तो बता इक बार
तमाम खुशियाँ जीवन की दूँ तुझ पे वार

……यूई

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