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UE Vijay Sharma

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UE Vijay Sharma

@UEVijay • Joined Jun 2015 • Active 5 years ago

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by UE Vijay Sharma

वोही तो लौटी हैं आज बन खंजर सीने में

March 25, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

क्या हुआ आज एक हाथ ही तो छूटा है
वक्त-बेवक्त कईयों को तूने भी लूटा है
लूटते हुए जो खुशियाँ खिलीं थी सीने में
वोही तो लौटी हैं आज बन खंजर सीने में

……यूई

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by UE Vijay Sharma

ख़ुद पे भरोसा खोता क्यों है

March 25, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

उम्मीद टूटी तो रोता क्यों है
ख़ुद पे भरोसा खोता क्यों है

……यूई

Tags: शायरी Comments Off on ख़ुद पे भरोसा खोता क्यों है

by UE Vijay Sharma

दिल से गर तूं साँचा है

March 25, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

दिल से गर तूं साँचा है
यार के दिल का कांचा है

……यूई

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by UE Vijay Sharma

वफ़ा कहने को बस एक लफ्ज

March 25, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

वफ़ा कहने को बस एक लफ्ज
निभाना इसको है सबसे सहज़
अडिग है गर तेरा खरा ईमान
ता-उमर पयेगा साथ निष्ठावान

……यूई

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by UE Vijay Sharma

आईने आपके घर में टूट गए

March 25, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

इल्ज़ाम-ए-बेवफाई सच तो नही
झूठे तेवर आपको जच्ते नही
आईने आपके घर में टूट गए
या आपने सँँवरना छोड दिया

……यूई

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by UE Vijay Sharma

फिज़ा यहाँ की बदरंग हुई

March 25, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

क्या फिज़ा यहाँ की बदरंग हुई
यहाँ सोच ही सब की तंग हुई

……यूई

Tags: शायरी Comments Off on फिज़ा यहाँ की बदरंग हुई

by UE Vijay Sharma

बिकती नही वफाएँ बाज़ारों में

March 25, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

बिकती  नही वफाएँ बाज़ारों में
दिखती भी नही यह हजारों में
……यूई

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by UE Vijay Sharma

बदला ख़ुद को तो

March 25, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

बदला ख़ुद को तो कुछ पा जाएगा
ना बदला ख़ुद को सब खो जाएगा

……यूई

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by UE Vijay Sharma

दिल को बना लो

March 23, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

वफाएँ चाहते हो सच मैं ही पाना
दिल को बना लो वफादार तुम जाना

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

वापस पास तेरे आयीं हैं

March 23, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

बेवफाईया जो तूने उमर भर लुटाई हैं
वोही लौट कर वापस पास तेरे आयीं हैं
…… यूई

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by UE Vijay Sharma

ख़ुद की औलाद

March 23, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

तुझे पाने वाला ख़ुद का नसीब कहता है
लुटने वाला ख़ुद को बद‍नसीब कहता है
हैं दोनों ही तेरी राह् के भटके मुसाफिर
तूँ तो दोनों को ख़ुद की औलाद कहता है
…… यूई

Tags: शायरी Comments Off on ख़ुद की औलाद

by UE Vijay Sharma

अनमोल कमाई

March 23, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

वफा वोह अनमोल कमाई है
जो सबके नसीब ना आयी है

 

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

कमाए तूने पत्थर, चाहता है हीरे बंदिया

March 23, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

ता-उमर लगायी दौलत कमाने मैं तूने
जो कमाया अब वोही तो तेरा है बंदिया
बेवफ़ाई पे मेरी क्यों तूँ इतना बिखर गया
वफ़ा तूने क्मायी ही कहा, जो ढूँढे बंदिया
हाँ दौलत से मिलती नही वफा बाज़ार मैं
ना यह अब तलक़ तूँ समझ पाया बंदिया
कमाए तूने पत्थर, चाहता है हीरे बंदिया
यह तो ना है मेरे दर का इंसाफ बंदिया

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

अ‍ब क्या शिकवा करे

March 23, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

उम्मीदों की तामीर की
ख्वाबों की बुनियाद पे
अ‍ब क्या शिकवा करे
अपनी ही बुनियाद से

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

इंतज़ार में मरना

March 23, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

इंतज़ार में रखना
है तो फितरत उम्मीद की
इंतज़ार में मरना
है किस्मत विश्वास की

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

मैं और धोखा

March 23, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

हमनें पूछा उम्मीद से
फिर दे गई धोखा
उम्मीद ने कहां
मैं और धोखा
यह तो तेरा
तुझको ही धोखा
…… यूई

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by UE Vijay Sharma

उम्मीद की तो फितरत है धोखा

March 23, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

उम्मीद की तो फितरत है धोखा
किस उम्मीद ने तुझे है रोका

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

रहना जैसे डूबते किनारे

March 23, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

ज़िन्दा रहना उम्मीद के सहारे
है बस रहना जैसे डूबते किनारे

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

तेरे हौंसलों में मैं ज़िन्दा थी

March 23, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

तेरे हौंसलों में मैं ज़िन्दा थी
तेरे जाते ही मैं बस खो गयी
शरीर तेरा था तूँ ले जाता
मन का साथ तो दे जाता
तेरे मन का साथ मरते ही
उम्मीदे मेरी सारी खो गयी

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

डूबना मेरी कश्ती का

March 23, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

डूबना  मेरी कश्ती का
हो गया था तय तभी
जब छोड़ साथ अपनों का
अर्पण किया था तुझे सभी

…… यूई

Tags: शायरी Comments Off on डूबना मेरी कश्ती का

by UE Vijay Sharma

इंसानो को नही तौलते

March 23, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

मालूम हैं मुझे के में ना खरा उतरा
तेरी आस्मानी उम्मीदो के पैमानों पर
हाँ मैँ ही तुझे यह समझा ना पाया
इंसानो को नही तौलते खुदा के पैमानों पर

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

तूँ मेरा हमदम नही

March 23, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

मैंने उम्मीद की इसका गम नही
इससे समझा के तूँ मेरा हमदम नही

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

हजारों में एक होती है

March 23, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

ऐसा नही के उम्मीद पूरी नही होती
होती है पर हजारों में एक होती है

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

गुनाह् नही

March 23, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

गुनाह् नही,  कोई उम्मीद करना
गुनाह् है , उम्मीद को ना-उम्मीद करना

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

उम्मीद

March 23, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

उम्मीद तेरी यह कैसे होती पूरी
इमारत की तामीर थी हवाओं में
…… यूई

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by UE Vijay Sharma

देख आईने में

March 23, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

वफाएँ हासिल करने का दम भरते हो
सर उठा कर चेहरा तो देख आईने में

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

सोच तो मैं क्या ही पता

March 23, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

अता ना की होती यह
गर रोशनी ख़ुद की तूने
सोच तो मैं क्या ही पता
लिखना तो कभी ना भाता

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

तेरा नाम रोशन

March 23, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

लिखवाता जा रहा है तूँ मुझसे
नाम मेरा हो रहा है रोशन
मैंने भी ना रखा कुछ मुझमें
रोज़ किया तेरा नाम रोशन
…… यूई

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by UE Vijay Sharma

नाम हो रहा मेरा

March 23, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

कहने को बस नाम हो रहा मेरा
तू तो जानता है यह है काम तेरा

…… यूई

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by UE Vijay Sharma

खामोशियाँ मेरा गहना हैं

March 22, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

उसकी रज़ा में रह्ता हूँ

ख़ुद में ही मस्त रह्ता हूँ

खामोशियाँ मेरा गहना हैं

मैं उनमें उसमें रह्ता हूँ

 

….. यूई

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by UE Vijay Sharma

अबकी बारी मेरी है

March 22, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

खामोश हूँ कमजोर नही

जमाने ने मारा है मुझे

मैंने जमाने को नही

अबकी बारी मेरी है

 

….. यूई

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by UE Vijay Sharma

हालत को समझा है मैंने

March 22, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

खामोशियोँ को मेरी कमजोरी ना समझ

हालत को समझा है मैंने,  हारा नही

 

….. यूई

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by UE Vijay Sharma

सिमटा हूँ ख़ुद में

March 22, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

मैं खामोश हूँ

खामोश ही रह्ने दो

सिमटा हूँ ख़ुद में

सिमटा ही रह्ने दो

 

 

….. यूई

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by UE Vijay Sharma

खामोशियोँ की चादर

March 22, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

जब सब शोरो-ओ-गुल से खेला लिए

तब खामोशियोँ की चादर ओड़ा लिए

 

….. यूई

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by UE Vijay Sharma

खामोशियाँ ही इसकी पहचान होती है

March 22, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

ख़्वाहिशें दिल में ही दफन होती हैं

कह्ते हैं दिल की भी ज़ुबान होती है

यह कभी ना बोल के बयाँ होती है

खामोशियाँ ही इसकी पहचान होती है

 

….. यूई

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by UE Vijay Sharma

क्यों इतने दुःख सह्ता तूं

March 22, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

कह्ते हैं सब में रह्ता तूं

क्यों इतने दुःख सह्ता तूं

क्या इससे बेहतर काम नही

या हममें तुझको मान नही

 

….. यूई

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by UE Vijay Sharma

कैसे तेरी पहचान करूँ ?

March 22, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

कोई कहता तू ऐसा है

कोई कहता तूं वैसा है

मिल जाऊँ कभी तुमसे तो

कैसे तेरी पहचान करूँ ?

 

….. यूई

Tags: #shayri 2 Comments »

by UE Vijay Sharma

क्या मैं तेरे जैसा नही

March 22, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

मैं इतने जो पाप करूँ

क्यों मैं इतना नीचे गिरूँ

क्या मैं तेरे जैसा नही

या तेरा मैं वो रुप नही

 

 

….. यूई

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by UE Vijay Sharma

तू सबके दुःख हर जाता है

March 22, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

मुझे ख़ुद की लगी रहती है

तुझे सबकी पड़ी रहती है

मैं ख़ुद के समेट ना पाता हूँ

तू सबके दुःख हर जाता है

 

….. यूई

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by UE Vijay Sharma

सबके अन्दर बसता है

March 22, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

मैं सोच ही ना पाता हूँ

कैसे तू यह सब करता है

सबके अन्दर बसता है

सबको ख़ुद में रखता है

 

….. यूई

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by UE Vijay Sharma

तुझसे आगे ना सोच पाया

March 22, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

ख़ुद का करके सब देख् लिया

ख़ुद का चाह के भी देख् लिया

अंत में जब सबको जोड़ पाया

पाया तुझसे आगे ना सोच पाया

 

….. यूई

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by UE Vijay Sharma

तुझको हर दर पर तो पाता हूँ

March 22, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

नास्तिक सब कह्ते हैं मुझको

क्यों ना तेरे दर पे जाता हूँ

अब कैसे समझाऊं मैं सबको

तुझको हर दर पर तो पाता हूँ

 

….. यूई

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by UE Vijay Sharma

सोच की लाज

March 22, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

तूने सोच का जो बीज भरा

कुछ तो सोच के होगा भ्ररा

उस सोच की लाज रखता हूँ

हर कदम सोच के बडता हूँ

 

….. यूई

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by UE Vijay Sharma

हर दिन इक जीवन

March 22, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

हर दिन इक जीवन जीता हूँ

उसको हाँ पर पूरा जीता हूँ

जो भी तूने आज कम दिए

उनको पूरा करके मरता हूँ

 

….. यूई

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by UE Vijay Sharma

अब तैयारी है

March 22, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

जब से यह एहसास हुआ

मेरा है जो सब कुछ यहा

वोह असल में तो तेरा है

तबसे हलका हो गया हू

उड़ने की अब तैयारी है

 

….. यूई

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by UE Vijay Sharma

तेरी मर्ज़िया

March 22, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

कहते है जो कुछ होता है सब यहा

होती सब में सिर्फ़ तेरी मर्ज़िया है

होता था पहले कभी शक़ मुझको

अब बची ना कोई शिकायत है

 

….. यूई

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by UE Vijay Sharma

कोई शिकायत नही तुमसे

March 22, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

जाने क्यों कोई शिकायत नही तुमसे

मालूम नही के कैसा तुझ्से रिश्ता है

हाथ उठ भी नही पाते दुआ में तेरी

रह्मत तेरी पहले ही बरस जाती है

 

….. यूई

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by UE Vijay Sharma

तेरी रहमत और बरकतो का अंत ना हुआ

March 22, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

ए मालिक मेरी चाहतों का अंत ना हुआ

तेरी रहमत और बरकतो का अंत ना हुआ

शायद मेरी चाहतो में थी छुपी रज़ा तेरी

या मेरी नादानियों को ना मिली सजा तेरी

 

….. यूई

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by UE Vijay Sharma

क्यों में आराम करू

March 21, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

पृथ्वी, सूरज, तारे और ग्रह

सब चलते ही तो रहते है

में भी ब्रह्मांड का हिस्सा हू

फिर क्यों में आराम करू

 

                         …… यूई

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by UE Vijay Sharma

सदियों से यह ऐसा ही है

March 21, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता

हम उसकी रज़ा में जीते है

जिसमे सब चलता रहता है

सदियों से यह ऐसा ही है

जैसा यह अबके दिखता है

 

                       …… यूई

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