वोही तो लौटी हैं आज बन खंजर सीने में
March 25, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
क्या हुआ आज एक हाथ ही तो छूटा है
वक्त-बेवक्त कईयों को तूने भी लूटा है
लूटते हुए जो खुशियाँ खिलीं थी सीने में
वोही तो लौटी हैं आज बन खंजर सीने में
……यूई
March 25, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
क्या हुआ आज एक हाथ ही तो छूटा है
वक्त-बेवक्त कईयों को तूने भी लूटा है
लूटते हुए जो खुशियाँ खिलीं थी सीने में
वोही तो लौटी हैं आज बन खंजर सीने में
……यूई
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March 25, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
उम्मीद टूटी तो रोता क्यों है
ख़ुद पे भरोसा खोता क्यों है
……यूई
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March 25, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
दिल से गर तूं साँचा है
यार के दिल का कांचा है
……यूई
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March 25, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
वफ़ा कहने को बस एक लफ्ज
निभाना इसको है सबसे सहज़
अडिग है गर तेरा खरा ईमान
ता-उमर पयेगा साथ निष्ठावान
……यूई
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March 25, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
इल्ज़ाम-ए-बेवफाई सच तो नही
झूठे तेवर आपको जच्ते नही
आईने आपके घर में टूट गए
या आपने सँँवरना छोड दिया
……यूई
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March 25, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
क्या फिज़ा यहाँ की बदरंग हुई
यहाँ सोच ही सब की तंग हुई
……यूई
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March 25, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
बिकती नही वफाएँ बाज़ारों में
दिखती भी नही यह हजारों में
……यूई
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March 25, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
बदला ख़ुद को तो कुछ पा जाएगा
ना बदला ख़ुद को सब खो जाएगा
……यूई
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March 23, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
वफाएँ चाहते हो सच मैं ही पाना
दिल को बना लो वफादार तुम जाना
…… यूई
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March 23, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
बेवफाईया जो तूने उमर भर लुटाई हैं
वोही लौट कर वापस पास तेरे आयीं हैं
…… यूई
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March 23, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
तुझे पाने वाला ख़ुद का नसीब कहता है
लुटने वाला ख़ुद को बदनसीब कहता है
हैं दोनों ही तेरी राह् के भटके मुसाफिर
तूँ तो दोनों को ख़ुद की औलाद कहता है
…… यूई
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March 23, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
वफा वोह अनमोल कमाई है
जो सबके नसीब ना आयी है
…… यूई
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March 23, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
ता-उमर लगायी दौलत कमाने मैं तूने
जो कमाया अब वोही तो तेरा है बंदिया
बेवफ़ाई पे मेरी क्यों तूँ इतना बिखर गया
वफ़ा तूने क्मायी ही कहा, जो ढूँढे बंदिया
हाँ दौलत से मिलती नही वफा बाज़ार मैं
ना यह अब तलक़ तूँ समझ पाया बंदिया
कमाए तूने पत्थर, चाहता है हीरे बंदिया
यह तो ना है मेरे दर का इंसाफ बंदिया
…… यूई
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March 23, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
उम्मीदों की तामीर की
ख्वाबों की बुनियाद पे
अब क्या शिकवा करे
अपनी ही बुनियाद से
…… यूई
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March 23, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
इंतज़ार में रखना
है तो फितरत उम्मीद की
इंतज़ार में मरना
है किस्मत विश्वास की
…… यूई
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March 23, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
हमनें पूछा उम्मीद से
फिर दे गई धोखा
उम्मीद ने कहां
मैं और धोखा
यह तो तेरा
तुझको ही धोखा
…… यूई
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March 23, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
उम्मीद की तो फितरत है धोखा
किस उम्मीद ने तुझे है रोका
…… यूई
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March 23, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
ज़िन्दा रहना उम्मीद के सहारे
है बस रहना जैसे डूबते किनारे
…… यूई
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March 23, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
तेरे हौंसलों में मैं ज़िन्दा थी
तेरे जाते ही मैं बस खो गयी
शरीर तेरा था तूँ ले जाता
मन का साथ तो दे जाता
तेरे मन का साथ मरते ही
उम्मीदे मेरी सारी खो गयी
…… यूई
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March 23, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
डूबना मेरी कश्ती का
हो गया था तय तभी
जब छोड़ साथ अपनों का
अर्पण किया था तुझे सभी
…… यूई
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March 23, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
मालूम हैं मुझे के में ना खरा उतरा
तेरी आस्मानी उम्मीदो के पैमानों पर
हाँ मैँ ही तुझे यह समझा ना पाया
इंसानो को नही तौलते खुदा के पैमानों पर
…… यूई
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March 23, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
मैंने उम्मीद की इसका गम नही
इससे समझा के तूँ मेरा हमदम नही
…… यूई
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March 23, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
ऐसा नही के उम्मीद पूरी नही होती
होती है पर हजारों में एक होती है
…… यूई
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March 23, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
गुनाह् नही, कोई उम्मीद करना
गुनाह् है , उम्मीद को ना-उम्मीद करना
…… यूई
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March 23, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
उम्मीद तेरी यह कैसे होती पूरी
इमारत की तामीर थी हवाओं में
…… यूई
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March 23, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
वफाएँ हासिल करने का दम भरते हो
सर उठा कर चेहरा तो देख आईने में
…… यूई
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March 23, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
अता ना की होती यह
गर रोशनी ख़ुद की तूने
सोच तो मैं क्या ही पता
लिखना तो कभी ना भाता
…… यूई
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March 23, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
लिखवाता जा रहा है तूँ मुझसे
नाम मेरा हो रहा है रोशन
मैंने भी ना रखा कुछ मुझमें
रोज़ किया तेरा नाम रोशन
…… यूई
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March 23, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
कहने को बस नाम हो रहा मेरा
तू तो जानता है यह है काम तेरा
…… यूई
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March 22, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
उसकी रज़ा में रह्ता हूँ
ख़ुद में ही मस्त रह्ता हूँ
खामोशियाँ मेरा गहना हैं
मैं उनमें उसमें रह्ता हूँ
….. यूई
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March 22, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
खामोश हूँ कमजोर नही
जमाने ने मारा है मुझे
मैंने जमाने को नही
अबकी बारी मेरी है
….. यूई
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March 22, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
खामोशियोँ को मेरी कमजोरी ना समझ
हालत को समझा है मैंने, हारा नही
….. यूई
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March 22, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
मैं खामोश हूँ
खामोश ही रह्ने दो
सिमटा हूँ ख़ुद में
सिमटा ही रह्ने दो
….. यूई
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March 22, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
जब सब शोरो-ओ-गुल से खेला लिए
तब खामोशियोँ की चादर ओड़ा लिए
….. यूई
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March 22, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
ख़्वाहिशें दिल में ही दफन होती हैं
कह्ते हैं दिल की भी ज़ुबान होती है
यह कभी ना बोल के बयाँ होती है
खामोशियाँ ही इसकी पहचान होती है
….. यूई
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March 22, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
कह्ते हैं सब में रह्ता तूं
क्यों इतने दुःख सह्ता तूं
क्या इससे बेहतर काम नही
या हममें तुझको मान नही
….. यूई
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March 22, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
कोई कहता तू ऐसा है
कोई कहता तूं वैसा है
मिल जाऊँ कभी तुमसे तो
कैसे तेरी पहचान करूँ ?
….. यूई
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March 22, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
मैं इतने जो पाप करूँ
क्यों मैं इतना नीचे गिरूँ
क्या मैं तेरे जैसा नही
या तेरा मैं वो रुप नही
….. यूई
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March 22, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
मुझे ख़ुद की लगी रहती है
तुझे सबकी पड़ी रहती है
मैं ख़ुद के समेट ना पाता हूँ
तू सबके दुःख हर जाता है
….. यूई
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March 22, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
मैं सोच ही ना पाता हूँ
कैसे तू यह सब करता है
सबके अन्दर बसता है
सबको ख़ुद में रखता है
….. यूई
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March 22, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
ख़ुद का करके सब देख् लिया
ख़ुद का चाह के भी देख् लिया
अंत में जब सबको जोड़ पाया
पाया तुझसे आगे ना सोच पाया
….. यूई
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March 22, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
नास्तिक सब कह्ते हैं मुझको
क्यों ना तेरे दर पे जाता हूँ
अब कैसे समझाऊं मैं सबको
तुझको हर दर पर तो पाता हूँ
….. यूई
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March 22, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
तूने सोच का जो बीज भरा
कुछ तो सोच के होगा भ्ररा
उस सोच की लाज रखता हूँ
हर कदम सोच के बडता हूँ
….. यूई
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March 22, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
हर दिन इक जीवन जीता हूँ
उसको हाँ पर पूरा जीता हूँ
जो भी तूने आज कम दिए
उनको पूरा करके मरता हूँ
….. यूई
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March 22, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
जब से यह एहसास हुआ
मेरा है जो सब कुछ यहा
वोह असल में तो तेरा है
तबसे हलका हो गया हू
उड़ने की अब तैयारी है
….. यूई
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March 22, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
कहते है जो कुछ होता है सब यहा
होती सब में सिर्फ़ तेरी मर्ज़िया है
होता था पहले कभी शक़ मुझको
अब बची ना कोई शिकायत है
….. यूई
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March 22, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
जाने क्यों कोई शिकायत नही तुमसे
मालूम नही के कैसा तुझ्से रिश्ता है
हाथ उठ भी नही पाते दुआ में तेरी
रह्मत तेरी पहले ही बरस जाती है
….. यूई
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March 22, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
ए मालिक मेरी चाहतों का अंत ना हुआ
तेरी रहमत और बरकतो का अंत ना हुआ
शायद मेरी चाहतो में थी छुपी रज़ा तेरी
या मेरी नादानियों को ना मिली सजा तेरी
….. यूई
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March 21, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
पृथ्वी, सूरज, तारे और ग्रह
सब चलते ही तो रहते है
में भी ब्रह्मांड का हिस्सा हू
फिर क्यों में आराम करू
…… यूई
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March 21, 2016 in हिन्दी-उर्दू कविता
हम उसकी रज़ा में जीते है
जिसमे सब चलता रहता है
सदियों से यह ऐसा ही है
जैसा यह अबके दिखता है
…… यूई
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