बहुत मशहूर है तुम्हारे शहर का शोरगुल। साहब!कही इसमे तुम हो न जाना गुम।।
बहुत मशहूर है तुम्हारे शहर का शोरगुल। साहब!कही इसमे तुम हो न जाना गुम।।
बहुत तारीफ़ सुनकर आया हूँ मै तेरे शहर मे… सुना है दिन मै भी यहाँ चांद का दीदार होता है।
सूरज की किरणे भी सुबह-सुबह कयामत ढ़ा रही है, पूछ रही है,कैसे है वो?जिनकी तुम्हे याद आ रही है।
बुरा उन्हे कहूँ तो ये बिल्कुल गलत बात होगी……. शायद मै ही बुरा हूँ तो उनसे मुलाकात क्यो होगी..?
मुझमे ही रह गई खामियां या शायद मेरे प्यार में जो तेरी दहलीजें ना पार कर पाये किस बात पर रोयें करे अफसोस अब कैसा हम कल भी कल भी अकेले थे हम अब भी […]
समझते थे जिन्हें हम अपने दिल के करीब। मेरे खिलाफ शाजिसो में वो निकले शरीक। हमें कोई शिकवा न होता, गर वो गैर होता, पर वो तो थे, हमारे सबसे अज़ीज़ रफ़ीक। देवेश साखरे ‘देव’ […]
_”कोरा कागज़ था और कुछ बिखरे हुए लफ़्ज़,_ _ज़िक्र तेरा आया तो सारा कागज़ गुलाबी हो गया !!”_
दांस्ता सुनाऊं और मज़ाक बन जाऊं, बेहतर है मुस्कुराऊं और खामोश रह जाऊं….!!
जब तक नारियल तैल जम न जाये, युगपुरुष केजरीवाल जी मफलर न बाँधने लगे और बोरो प्लस का विज्ञापन आना न चालू हो जाये…… तब तक मै नही मानता की सर्दी आ गयी!!
छिपे हुये दर्द को आज ताज़ा किया है उसने, दिल को बहुत बेकरार फिर से किया है उसने। याद उसकी आती है हर पल तो आने दो यारो… कसम देकर अपनी मजबूर भी तो किया […]
जरूरत पड़ने पर आज मुकर गये हो तुम, जमाने की तरह कितना बदल गये हो तुम। दोस्त!ये मंजर भी गुजर जायेंगे किसी तरह से, पर आज चुप रहकर बहुत दर्द दे गये हो तुम।।
दोस्तो!वो आईना देखकर अपनी नजरे चुराता होगा। अक्स मेरा जब उन्हे आँखों मे नजर आता होगा।।
शब्दों से शब्द निकलते जाते हैं, रिश्ते रिश्तों को समझते जाते हैं, चलती है इसी रफ़्तार से ज़िन्दगी, राही हम सब आगे बढ़ते जाते हैं।।
रहम ओ करम तो खुदा के हाथ है, अब तुही बता मेरी क्या औकात है।। राही अंजाना
अभी तो बस अभ्यास चल रहा है, तेरी मोहब्बत का अध्याय चल रहा है।। राही अंजाना
तुझसे बिगड़ी हर बात सुलझा लूँ, आ मिल तेरे बालों में हाथ उलझा लूँ।। राही अंजाना
तेरा ही ज़िक्र है, मेरी हर एक नज़्म में। इरादा नहीं तू रूसवा हो, भरी बज़्म में। पढ़ता हूँ कुछ, चला जाता तेरी ही रूख़, हार जाता हूँ मैं, दिलो-ज़ेहन के रज़्म में। पहलू में […]
वों पढ़ लेते हैं आंखों ही आंखों में मेरे दिल का हाल ना बता चाहूं उनको मुझ पर क्या बीता इस साल क्यों ना उनसे कुछ दूरी बढ़ा ली जाए ना पढ़ सके वों मेरे […]
कहां हैं वो किधर ढूँढू नही मालूम मुझको चले आओ उन्हें आवाज़ देती जा रही हूं मैं । ए खुदा! राह में उन्हें दो पल के लिए रोक ले बनकर हवा पहलू में उनके आ […]
दो इन्सान एक हो जाते हैं । हर रिश्ते से खास हो जाते हैं । नज़रों से दूर होते हैं पर दिल के करीब हो जाते हैं । प्रज्ञा शुक्ला
सुबह के सपनें सच होते हैं क्या यूं छोटी छोटी बातों पर नाराज़ नहीं होते अपने से खफ़ा होते हैं क्या? प्रज्ञा शुक्ला
मेरी जुल्फ को नागिन मत कहना एक दिन तुमको डस जाएगी। तीर नजर को मत कहना तेरे अँखियों में धस जाएगी।। काली जुल्फे बदली है जो तुझ पर हीं बरसाएगी। नजरें मेरी नील कमल जो […]
तुम ना होतो जीने की आस किसे है तुम होतो धूप की चादर भी ओढ़ लेंगे हम।मलमल के बिस्तर की आस किसे है।
उनकी चाहत में जीती जा रही हूँ मैं यादों को उनकी दिल में सींती जा रही हूँ मैं प्रज्ञा शुक्ला
आस होगी न आसरा होगा, तेरे बिना मेरा क्या होगा।। राही अंजाना
तेरी बातें बखूबी बड़ी निराली रहीं, सुनकर उनको रातें मेरी खाली रहीं।। राही अंजाना
चुप मत रहो इतना के नाम गुम नाम हो जाये, तुम्हारे हिस्से की ज़मी किसी के नाम हो जाये, नाकामयाबी के सफर से बाहर निकल आओ, कहीं ऐसा न हो कामयाबी की शाम हो जाये।। […]
उतरते साहिल पर शाम का सूरज जवां है हाथ छूट गए लेकिन यादें रवां है इतनी फुरसत कहाँ की लौट कर आयें खैर मसाफ़त से इश्क़ का तजुर्बा बढ़ा है मेरे बहकते कदमों में शराब […]
गुज़र रही है गुज़र जायेगी ये रात भी तेरी यादों में सिमट जायेगी।
शीश जटा एक बेणी लटकत लटकत लट लटकन मुखचंद्र पे वारिद ऐसे लुकछिप खेल करत हो जैसे।।
काली कम्बली काँधे पर शोभित अरुण अधर अरुणाभ कपोल श्याम रंग मुखचंदा विनयचंद नित निरखत बाल मुकुंदा।।
ज़िन्दगी बेरंग है कुछ रंग होने चाहिये है सफ़र लम्बा बहुत एक दोस्त होना चाहिए ।
सब रूठे बैठे हैं हमसे जाने क्यूँ , हमने जबसे तुम्हें अपना कह दिया।
हम पीछे रह गये तुम आगे ही सही तुमसे हार कर भी हम जीत गए हैं देखो।
तुम्हारी तस्वीर को सीने से लगा रखा है। यूं महसूस होता है की तुम हो।
सोचा था किसने सिला यूं मिलेगा। मुहब्बत में मुझको गिला यूं मिलेगा।। कसमे वफा को जो तोड़ जाए तड़पते हुए दिल जो छोड़ जाए सह न सके जो हवा का एक झोंका कागज का मुझको […]
कितना अच्छा होता तुम होते और हम होते। कुछ खुशियाँ होतीं कुछ गम होते।
हमने किया था एक वादा तुमसे याद है या भूल गये? कहा था एक दिन छोड़ जायेगें तुम्हें लो छोड़ दिया जी लो तुम।
लो खत्म हो गया मुलाकातों का सिलसिला, जो घर आता था घर भूल गया।
हम जो चाहें वो कर सकते हैं । बस हौंसला बनाकर रखना चाहिए । जरूरी नही जीत ही हांसिल हो, हार भी स्वीकार करनी चाहिए ।
छुप कर मेरी बातें सुनते रहते हो। मेरे सपनो की रातें चुनते रहते हो । मिलने की फुर्सत जब तुमको होती है। तो मेरी ही राहें चुनते चुनते रहते हो।
आगे बढ़ने का नाम है ज़िन्दगी सफलता ठोकर खाकर ही मिलती है। हँसते रहने का नाम है ज़िन्दगी ।
बात करने से बात बनती है । मुलाकात करने से बात बनती है। कुछ भी तो नही है हमारे पास हमारे हुनर से ही हर बात बनती है।
कुछ सपनॉ की बातें है। कुछ अपनों की बातें हैं। अधूरी कुछ बातें थीं । अधूरी कुछ बातें हैं ।
कुछ सपनॉ की बातें है। कुछ अपनों की बातें हैं। अधूरी कुछ बातें थीं । अधूरी कुछ बातें हैं
धीरे-धीरे बढ़ रहा है काफ़िला। धीरे-धीरे कम हो रहे हैं फासले मंज़िल है बस कुछ ही दूर। तू अपनी हिम्म्मत भांप रे।
धीरे-धीरे बढ़ रहा है काफ़िला। धीरे-धीरे कम हो रहे हैं फासले मंज़िल है बस कुछ ही दूर। तू अपनी हिम्म्मत भांप रे।
मंज़िल है नही आसान बहुत मशरूफ हैं राहें । जीत जायेगें हम दुनिया दो कदम रोज़ चलकर के।
मंज़िल है नहीं आसान । बहुत मशरूफ हैं राहें । जीत जायेंगे हम दुनिया दो कदम रोज़ चलकर के।
सुबह के मीठे सपनों जैसा है तुम्हारा एहसास । रहते हो यूं दिल में जैसे हो साँस ।
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