दिल से अपनी मगर धकड़न से मैं पराई हूँ, न जाने किस घड़ी में, इस घर में मैं आई हूँ, आँखों ही आँखों में आँखों में मैं घिर आई हूँ, सबकी अपनी मगर न जाने […]

शोलों सा जला मैं, बरसा बादलों सा कभी। हालाते-दीवानगी पर, कहकशे लगाते सभी। मजनूँ ना सही, इश्क मेरा भी कुछ कम नहीं, तुम कहो तो तुम्हारे वास्ते, मैं जाँ दे दूँ अभी। देवेश साखरे ‘देव’

तेरे हाथ सौगात, मेरे हाथ भी सौगात। मेरे मन में पाप और तेरे नेक जज़्बात। तुमने दिया हमें, जीने की नेमतें सारी, मैं खुदगर्ज तुझपे करता रहा आघात। मिटा कर वज़ूद तेरा, किसे छला मैंने, […]

सावन कि बारिश का खूब फायदा उठाया मैंने बहा दिए पानी मे वो लम्हे जो थे मेरी यादों में और कश्ती बना कर तिरा दिए तेरे खत जो कभी छुपा कर रखे थे मैंने किताबों […]

खो गया था मैं अपने आप में ही और तेरी याद में तड़पता रहा इतने सालों बाद तेरी गलियों में कदम रखा नाम लेकर तेरा पुकारता तुझे भटकता रहा. इस उम्मीद में कि तुम कहीं […]

सौभाग्य हमारा है बंधु, हम सब भारतवासी हैं। सुखी रहे सब लोग यहाँ, इसके हम अभिलाषी हैं।। धरती को हम माता कहते गैया पूजी जाती हैं। वृक्ष सभी यहाँ देव रूप हैं नदियाँ पूजी जाती […]

••• जब सुनता हूँ कभी दिल की ज़ेहन ये कहता है संभल कमबख़्त किस उलझन में तू उलझा रहता है शाम ढले सर्द हवा कुछ सहमी सी ख़ामोश फ़िज़ा। शब-ए-तन्हाई में दिल पर कुहासा रहता […]

फ़ैशन की चरम तो देखो। लोगों की भरम तो देखो। कांच की अलमारी में बंद, ऊँची कीमत बढ़ा रही शान। तार-तार सा हुआ चिथड़ा, टंगा बनकर एक परिधान। उस चिथड़े के करम तो देखो। फ़ैशन […]

जिंदगी की दौड़ में ना पहचान पाए अपने और अनजानो को क्या खाक तजुर्बा पचपन का जो पहचान ना पाए शैतानों में से इंसानों को. मोहब्बत अगर किसी से है तुम्हें तो क्या उसके जज्बात […]

इस वक्त हवा मेरे खिलाफ है पर हौंसले मेरे बढ़ते रहेंगे मै कितना भी थक जाउ कदम मेरे वक्त के साथ मंजिल की सीढ़ियां चढ़ते रहेंगे.

सहारा चाँद को भी एक दिन लगाने चल दिया, कुछ समझ आया नहीं बस समाझाने चल दिया, मैं ज़मी पर रहा और आसमाँ झुकाने चल दिया, उम्मीदों का रुका हुआ जहाज उड़ाने चल दिया।। राही […]

भज ले राम राम तू राम। योग यज्ञ व्रत देव न ऐसा, न हीं तारक धाम। सेवा पूजा ध्यान न लावे, जप ले मात्र सुनाम।। भज….. निश दिन पाप करे बड़ प्राणी. उल्टे सीधे काम। […]

ओ श्याम रे….. कहा छुपे हो मोरे श्यामरे, तुझे ढूंढे मोरे नैना, तेरे बिन मुझे ना एक पल चैना, छोड़ सखी तुझसे मिलने आई, करके लाख उनसे बहाने, तेरी बंसी की धुन सुनने को आई, […]

सीसा का एक टुकड़ा हूँ कहते लोग मुझे हैं दर्पण। गुण औगुन को दर्शाने नर समाज को मेरा समर्पण।। सबको उसका रूप दिखाता। मेरे सम्मुख जो भी आता।। कीट पतंग और नर तन। मैं तो […]

तुम हो मेरी चाहत, यह तुमने भी तो है माना। अगर तुम न हुई मेरी तो, कुछ भी कर सकता है दीवाना। दिल के करीब फिर भी कितनी दूर हो। दुनिया से या फिर खुद […]

यूँ तो चला है चाँद पर घर बसाने के लिए पर ढंग से धरती पर जी पाया है क्या आदमी ज्ञानी ,ध्यानी दानी और संस्कारी भी बना पर इंसान बन पाया है क्या आदमी .

बात करने के कुछ इस तरह लोग बहाने ढूंढते हैं, के दिल में उतरने के लिए मानो तैखाने ढूंढते हैं।। भटकते हैं जो दर बदर नशे में घर अपना छोड़के, वो दूसरों की आँखों के […]

जो चाहता नहीं, वही गुज़र जाता है। रहा – सहा जज़्बात भी मर जाता है। जिन से थोड़ी बहुत उम्मीद होती है, वही हम से आंखें फेर जाता है। जिन्हें सर आंखों पर बिठाना चाहिए, […]

दिल में उम्मीदों का दीपक जलाकर, कर रही हूं मैं तेरा इंतजार, घडी इंतजार की लंबी हो रही है, अब चले भी आओ मेरी जान जा रही है, ओ चांदनी न जाना तुम, जब तक […]

सावन बीता जाये प्रियतम तुम न आये। मस्त पवन संग डोले किसलय ताल – तलैया, सागर में लय, बादल नभ पर छाये प्रियतम तुम न आये। कलियों पर है छायी लाली झूमे बेसुध कोमल डाली, […]

मैंने घर बदला और वो गलियाँ भी फिर भी तेरी याद अपने संग इस नए घर में ले आया एक मौसम पार कर मैं फिर खड़ी हूँ, उसी मौसम की दस्तक पर, वही गुनगुनाती ठंड […]

तुझसे इतनी मोहब्बत करते हैं सनम। कुर्बान तुझपे जान कर सकते हैं हम। नहीं कहता चांद तारे तोड़ कर ला दूंगा। नहीं कहता कि ज़मीं-आसमां मिला दूंगा। जिंदगी तेरे नाम करने की खाते हैं कसम, […]

है मोल कहाँ इस दुनिया में जो बूंद एक का चुका सके। मात पिता का कर्ज है कोई दिल देकर भी मुका सके।। कहना कभी विरुद्ध नहीं। होके इन पर क्रुद्ध नहीं।। सेवा में होवे […]

जब जन्नत की चाहत हो माँ की आँचल में आ जना। शाश्वत स्वर्ग सुखों को तुम पल में आकर पा जाना।। नंदनवन भी यहीं मिलेगा यहीं मिलेगा इन्द्रासन। बेशक मिट्टी के होंगे पर ऐरावत होगा […]

कहते हैं वक्त के साथ हर जख्म भर जाता है पर वो जख्म कैसे भरे जो तुम हमें दे गए मांग लिया होता दिल अपने आप ही दे देते पर तुम सीना चीर कर निकाल […]

ये कैसा जहरीला इश्क है तुम्हारा? लहू में गर्म शीशे सा फैल जाता है। सीने में हलचल मचाकर कर भी भला, खामोशी से कोई गीत गुनगुनाता है। गहरी कत्थई आंखों से मुझ में कुछ ढूंढते […]