चाँद तारे आसमाँ सब की निगरानी करना, जब तक मैं न आऊँ इतनी मेहरबानी करना, जिस्म ऐ मोहब्बत पर जब तक रूह का रंग न चढ़े, गुज़ारिश ये के तुम इस कागज़ी पैहरन की क़ुरबानी […]

मैं अधूरा सा हूँ तेरे नाम के बग़ैर। यादों की तड़पाती हुई शाम के बग़ैर। मैं देखकर ज़िन्दा हूँ तेरी तस्वीरें- आँखें भी सोती नहीं हैं जाम के बग़ैर। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

बेचकर चूड़ियाँ अपना घर चलाया करती है, चेहरे पर गम छुपाये कैसे मुस्कराया करती है, रहती तो है रंग बिरंगे काँच के टुकड़ों के संग, मगर बेरंग जीवन को यूँही बहलाया करती है।। राही (अंजाना)

तेरी गली से आज फ़िर होकर गुज़रा हूँ। तेरी गली से आज फ़िर रोकर गुज़रा हूँ। आवाज़ दे रही थी मुझे तेरी तिश्नगी- तेरी गली से दर्द को छूकर गुज़रा हूँ। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

टूट गई साँसों की माला जैसे कोई साज, सुनी नहीं किसी ने मेरे दिल की वो आवाज़, बन्द हुए जब अंत समय में आँखों के मेरे काज, उड़ गए मेरे पंख पखेरू जैसे कोई बाज़।। […]

रिश्ते रूह में अब बंधा नहीं करते, वो हमसे हम उनसे कुछ कहा नहीं करते, मान लिया है मैंने के बस एक जिस्म हूँ मैं, और टूटे दिल को हम कभी सिया नहीं करते।। राही […]

बेवजह, बेसबब सी खुशी जाने क्यों थीं? चुपके से यादें मेरे दिल में समायीं थीं, अकेले नहीं, काफ़िला संग लाईं थीं, मेरे साथ दोस्ती निभाने जो आईं थीं। दबे पाँव गुपचुप, न आहट ही की […]

चाँद और सितारों की चाँदनी को भूलाकर ढूंढते हैं, चलो आज सब जुगनू की रौशनी के सहारे ढूंढते हैं, हुए बहुत दिन गहरे समन्दर की बाँहों में झूलते, चलो आज मिलकर हम सब उथले किनारे […]

राणा प्रताप का रक्त और हम कुंभा की कुर्बानी है हम है गीता की कृष्ण ध्वनि निर्मल गंगाजल पानी है उबल रहा है बीर शिवा का शोणित निज भुजदंण्डो मे हम हाड़ी की बलिदान कथा […]

जिस्म में शामिल रूह का आज खुलासा देखिये, खुद ही इस भीड़ में घुस कर आप तमाशा देखिये, बदल सकता है तस्वीर जो इस सारे ज़माने की, उसी युवा के चेहरे पे आई आज हताशा […]

छोटे-छोटे से दिखते हैं बड़े मासूम लगते हैं, मेरे दिल के जो टुकड़े हैं बड़े बखूब दिखते हैं, बमुश्किल जोड़ कर रखता हूँ मैं इनको अमानत हैं, मेरे महबूब की आहट में ये तो फानूस  […]

दिल को धड़कन की आवाज़ जब सुनाई नहीं देती, आँखों को रौशनी की जब कोई रात दिखाई नहीं देती, उलझे न रहें गर रिश्ते पैसों की चरखी में लिपट कर, तो अच्छे व्यक्तित्व को ये […]

निकल कर ख़्वाबों से बाहर मेरे ख्वाब आना चाहते हैं, हकीकत के आईने में मानो चेहरा आप लाना चाहते हैं, रहे हों जो अँधेरे की बाहों में कैद बेसुध मुसलसल, आज रौशनी के समन्दर में […]

रुख़्सत कुछ इस तरह हो गए वो जिंदगी से मेरी, मानो बिन मौसम की बरसात झट से गिरकर तेज़ धूप सी खिला जाती हो, कम्बख़त मुझे थोड़ा तो भींग लेने देते कुछ देर उसके जाने […]

✋✋✋✋✋✋माँ का आशीर्वाद✋✋✋✋✋✋✋ जिंदगी का वो फसाँना आज भी है याद मुझको माँ की वो लोरी का गाना आज भी है याद मुझको जिंदगी के काफिले मे ताजशाही कम नही है माँ तुम्हारी ही दुआ […]

कलाई पर मौली और माथे पर रोली लगाया करती हैं, बहनें छोटी हैं मेरी मगर बातें बड़ी ही बनाया करती हैं, चुप रहती हैं कभी मुख से कुछ भी माँगा नहीं करती हैं, के बांधकर […]

मस्त हवाओं के हवाले से मैं तेरा पैगाम लेता हूँ, जब दिल चाहे मेरा तुझसे मैं तेरा सलाम लेता हूँ, बसा लेता हूँ तेरा चेहरा मेरी आँखों में कुछ इस तरह, के फिर इन आँखों […]

आज गिर गई बूँदें हज़ार, क़ुदरत ने बड़ा शोर मचाया है, समझा था उसकी ख़ुशियों का फुहार है ये वो तो देखते ही देखते तबाही का मंज़र सा ले आया।। -मनीष

तेरी हर बात में मजेदारी है तेरी हर याद बड़ी प्यारी है, मुश्किल के वक़्त तू हँसा देती है और मेरी हर बदमाशियों को तू छुपा देती है ये प्यार, ये दुलार तेरा हमेशा सबसे […]

निशानी ऊँगली पर पहन कर मेरी छुपाते हुए, वक्त-वक्त पर वक्त का गिनना तेरा अच्छा लगा, कहा बहुत कुछ ख़्वाबों में हर रात तुमने मुझसे, और मुझे तेरा मुझसे नज़रें चुराना अच्छा लगा।। – राही […]

क्यों गरीबी की चादर में पैरों को फैलाना पड़ता है, क्यों चन्द ख़्वाबों को इस दिल में दबाना पड़ता है, खेल-खिलौने गुड़िया गुड्डे और वो रेलगाड़ी छोड़कर, क्यों रात दिन इस बचपन को रिक्शा चलाना […]

बाबा की आलमारी लगती थी मुझको पयारी आचारों और चॉकलेट की फुलकारी अनसोचे ख्वाबो का पिटारा कलम किसमिस खिलौनो का पिटारा बचपन के उन ख्वाबो का ही तोह है सहारा आज ना बाबा रहे ना […]

तेरी आरज़ू से मुँह मोड़ नहीं पाता हूँ। तेरी तमन्नाओं को छोड़ नहीं पाता हूँ। यादों में ढूंढ़ लेता हूँ तेरी तस्वीरें- तेरे प्यार से रिश्ता तोड़ नहीं पाता हूँ। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

तेरी आरज़ू से मुँह मोड़ नहीं पाता हूँ। तेरी तमन्नाओं को छोड़ नहीं पाता हूँ। यादों में ढूंढ़ लेता हूँ तेरी तस्वीरें- तेरे प्यार से रिश्ता तोड़ नहीं पाता हूँ। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

सागर से मिलकर जैसे नदी खारी हो जाती है, तुमसे मिलकर वैसे मेरी तबीयत भारी हो जाती है, बहुत हिम्मत जुटाकर भी तुमसे नज़रें मिला नहीं पता, क्यों देखकर मेरी धड़कन तुमपे वारी हो जाती […]

एक नहीं सी जान पर क्यों पहरे हजार रखते हैं, पिंजरे में क्यों हम उसका सारा सामन रखते हैं, छिपाकर क्यों घूमते हैं चेहरे पर चेहरे लगाये, क्यों आईने सी साफ नहीं हम अपनी पहचान […]

रवि’ रंग मोहताज नहीं किसी परिचय के अनुभवों का, स्वतंत्र मन्त्र है ये तो सबके जीवन के अनुदानों का, विषय नहीं कोई भौगोलिक, ये तो है ज्ञान व्यव्हारों का, जीवन हो सुलझा हर पल जैसे, […]

✋✋✋✋✋माँ का आशीर्वाद✋✋✋✋✋ तेरे पैरो की धूल जबसे लगाई है माथे पर जहाँ की हर चमक अब सामने जुगनूँ सी लगती है मेरी औकात क्या है कुछ नही है इस जमाने मे वो तो माँ […]