अपने दिमाग के कुछ खयालों को उड़ जाने दिया, मैंने अपने दिल को इस दिमाग से लड़ जाने दिया, कश्मकश बहुत देर चली फिर हार कर बैठ गया, मैंने अपने एहसासों को फिर यूँही मुड़ […]
अपने दिमाग के कुछ खयालों को उड़ जाने दिया, मैंने अपने दिल को इस दिमाग से लड़ जाने दिया, कश्मकश बहुत देर चली फिर हार कर बैठ गया, मैंने अपने एहसासों को फिर यूँही मुड़ […]
सब कुछ सहना है मगर तुम्हें अपना नाम नहीं लेना है, आदमी तभी हो तुम जब तुम्हें कोई ईनाम नहीं लेना है, रखना है रोककर तुम्हें अपने आँखों के आसुओं को बेशक, अपनी मेहनत का […]
किसी सांचे में भी ढल नहीं पाया हूँ मैं, शायद ठीक से ही बन नहीं पाया हूँ मैं, वक्त बेशक ही लगा है मुझको बनाने में, पर सच है खुद को बदल नहीं पाया हूँ […]
देखा किसी ने नहीं है मगर बहुत बड़ा बताते हैं लोग, कुछ लोग उसे ईश्वर तो कुछ उसे खुदा बताते हैं लोग, पता किसी के पास नहीं है मगर रस्ता सभी बताते हैं लोग, कुछ […]
पहला प्यार जाम की तरह होती हैं जब भरी हो तोह उसका अहसास नहीं होता जब खाली हो तोह उसकी लत छूटती नहीं
अब एन्टिना कोई घुमाता नहीं, छत पर यूँहीं कोई जाता नहीं, बैठे रहता हर एक यहां फैल कर, अब रिमोट से ऊँगली हटाता नहीं।। राही (अंजाना)
कोई लफ़्जों में कैसे बयां करें अपनी दास्ता दर्द हर लफ़्ज के साथ गहराता जाता है
सुरज की स्वर्णिम किरणें जब पड़ती धरा पर, चहचहाते पक्षी मचाते कलरव, हौसलों की भरते वो उड़ान है, देखो जज़्बा उन पंछियों का, छू लेते वो आसमान है। देखकर पंछियों को लगता मेरे मन को, […]
पूरे शहर को इस काले धुंए की आग़ोश में जाना पड़ा, क्यों इस ज़मी की छाती पर फैक्ट्रियों को लगाना पड़ा, चन्द सपनों को अपने सजाने की इस चाहत में भला, क्यों उस आसमाँ की […]
किसी कीं ख़ातिर दिल में मोहब्बत लेकर भटक रहे हैं सब ख़रीददार मिलते हैं, बिकनेवाले नहीं मिलते |
हवा में घुल रहा आज जहर है सांसो को आज तरस रहा आज शहर है बंद कमरे में कब तक कैद रहोगे खुले आम घूम रहा आज कहर है
बहुत कुछ कहते कहते रुक जाया करते हैं, बात ये है के हम इज्जत कर जाया करते हैं, रखते हैं अल्फ़ाज़ों का समन्दर अंदर अपने, और ख़ामोशी से दिल में उतर जाया करते हैं, प्रश्न […]
मेरी आँखों में ही खुद को निहारा करता है, हर रोज़ ही वो चेहरा अपना संवारा करता है, आईने के सही मायने उसे समझ ही नहीं आते, कहता कुछ नहीं बस ज़हन में उतारा करता […]
बन्द मुट्ठी में हैं मगर कैद में नहीं आने वाली, हाथों की लकीरों की नर्मी नहीं जाने वाली, आलम सर्द है मेरे ज़हन का इस कदर क्या कहूँ, के ये बुढ़ापे की गर्मी है यूँही […]
मैं तेरे बग़ैर तेरी तस्वीरों का क्या करूँ? मैं तड़पाती यादों की जागीरों का क्या करूँ? मैं अश्कों को पलकों में रोक सकता हूँ लेकिन- मैं दर्द की लिपटी हुई जंजीरों का क्या करूँ? मुक्तककार- […]
पत्थरों की नगरानी में शीशे के दिल रख दिए, इस नज़्म ऐ जवानी में ये किसने कदम रख दिए, मशहूर अँधेरे बाज़ार में जो मोल लग चुका था मेरा, इस ज़ख्म ऐ निशानी में ये […]
तरकीब कोई और ढूंढो ऐसे तो नज़र नहीं आने वाला, छुप कर बैठा है जो अंदर वो तो बाहर नहीं आने वाला, गहरा समन्दर है बहुत मन के भीतर हम सबके कोई, बिना डूबे तो […]
दिल के मेरे ताले की अजीज़ चाबी ले गया कोई, उम्र भर के लिए जैसे बेताबी दे गया कोई, शरारत कुछ ऐसी मुझसे छिप कर गया कोई, के अच्छे खासे दिल को खराबी दे गया […]
जितना भी देखा है मनो उतना ही कम देख है, मैंने इस दुनियाँ की आँखों में कितना कम देखा है, सड़कों पर पनपती इन बच्चों की कहानी से, किरदार जब भी देखा अपना मैंने विषम […]
आसमाँ छोड़ जब ज़मी पर उतरने लगती हैं फुलझड़ियाँ, हाथों में सबके सितारों सी चमकने लगती हैं फुलझड़ियाँ दामन अँधेरे का छोड़ कर एक दिन ऐसा भी आता है देखो, जब रौशनी में आकर […]
tujhe paya to ye jana h aaj tak sab pakr bhi kuch na paya tha mile hai tujhe to pyar samajh aaya jis din se tumne humne apna mana h iss dil ne bas tujhe […]
सच होते जा रहे हैं मेरे ख्वाब आहिस्ता आहिस्ता, वो दे रही मेरी बातों के जवाब आहिस्ता आहिस्ता, सालों से बेकरार किया है मेरे दिल को जो उन्होंने, लूँगा मैं उनसे अपना यह हिसाब आहिस्ता […]
हाथों की लकीरों की आवाज़ सुनानी होगी, अब दिल में छुपी जो हर बात बतानी होगी, खामोश रहने से कुछ मिलता नहीं सफ़र में, अब खुद से ही खुद को पुकार लगानी होगी, अंदाज़ यूँही […]
तुझे तराशकर फिर कुछ और मैं तराश न सका, तेरे चेहरे के सिवा आँखों में मैं कुछ उतार न सका, बड़ी मशक्कत लगी मुझको तुझको बनाने में मगर, तेरी रगों में मोहब्बत के रंग मैं […]
तुझे तराशकर फिर कुछ और मैं तराश न सका, तेरे चेहरे के सिवा आँखों में मैं कुछ उतार न सका, बड़ी मशक्कत लगी मुझको तुझको बनाने में मगर, तेरी रगों में मोहब्बत के रंग मैं […]
चाहे बिक जाएँ मेरी सारी कविताएं पर, मैं अपनी कलम नहीं बेचूंगा, चाहे लगा लो मुझपर कितने भी प्रतिबन्ध पर, मैं अपने बढ़ते हुए कदम नहीं रोकूँगा, बिक ते हैं तो बिक जाएँ तन किसी […]
Loving you endlessly broke my heart ruthlessly Little was I aware you were someone to beware Once my heart danced in joy now my heart bleeds in pain You were the centre of my universe […]
मेरे दर्द को तेरा अफ़साना याद है। मेरे ज़ख्म को तेरा ठुकराना याद है। लबों को खींच लेती है पैमाने की तलब- हर शाम साक़ी को मेरा आना याद है। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
ज़माने के आईने में चेहरे सभी अजीब दिखते हैं, सच से विलग मानों जैसे सभी बेतरतीब दिखते हैं, जब भी खुद को खुद ही में ढूंढना चाहते हैं हम, अपने ही चेहरे पर गढे कई […]
यार दफन करना मुझे आग तोह तेरे पास भी नहीं होता तोह आज यह नौबत ना आती यार फूलों से सजाना नहीं कुछ तोह अपने पास रख देना कुचलने पढ़ अपने मरहम पढ़ ओढ़ लेना […]
Jalte hue abr ko zehar se bacha lo Fiza ye meharban, kal rahe na rahe Aab ko tezab ke kahar se bacha lo Dariya ki fariyad, kal rahe na rahe… Azadi ka saaz bulandi se […]
वो है बेखबर, शायद न हो उसे खबर! कैसे हुआ ये इश्क़ मुझे न पता चला, इन दिनों इश्क़ इतने करीब से गुजरा की लगा बस हो गया। आते जाते उसे देख खुद में मुस्क़ुरती […]
एक प्रश्न है मुझे, ये इंसान क्या हो गया है तुझे? क्यों कर रहा है ऐसे काम, जिससे हो रहे हो बदनाम। क्या हक़ है तुझे, कर रहा इस सृष्टि को नष्ट, ये इंसान होगा […]
तुम शान थी मेरी , तुम मान थी मेरी , तुम अभिमान थी मेरी , इस दुःख भरी दुनिया में ,खुशियों की पहचान थी मेरी ! जब इस दुनिया में आयी ,पहचान कराया माँ तमने […]
हाँ, नहीं हो तुम साथ मेरे , पर क्यों लगता है तुम पास हो मेरे ! हर घड़ी हर पहर जिंदिगी लगाती है अब ज़हर, तेरी ये नाराज़गी, और कहर लगती है धुप की दोपहर! […]
No matter what you do , not even how you do . Life always has a clue , to let your sky blue. All matters are the days ,when soul and mind says . To […]
मैं नन्ही प्यारी बच्ची थी , दिलो दिमाग से सच्ची थी। दो लड़के मेरे साथी थे , मेरे दीपक के बाती थे। पायल मै खनकाती थी, संग उनके नाचती गाती थी। संग उनका रास ही […]
हमेशा किसी की तलाश रहती है मुझे लगता है जो कुछ है वो अधूरा है अल्फ़ाजों में कहां समाता है जो जहन में गूंजता है वो ही पूरा है
मेरे होकर भी मेरे खिलाफ चलते है, मेरे फैसले देख तब पर भी साथ चलते है।। ज्योति
मेरे होकर भी मेरे खिलाफ चलते है, मेरे फैसले देख तब पर भी साथ चलते है।। ज्योति
हँसकर जीना दस्तूर है ज़िंदगी का एक यही किस्सा मशहूर है ज़िंदगी का बीते हुए पल कभी लौट कर नहीं आते यही सबसे बड़ा कसूर है ज़िंदगी का जिंदगी के हर पल को ख़ुशी से […]
जिनके एक आवाहन पर सबने अपने हाथ उठाये थे, कदम-कदम पर अंग्रेजी शासन के छक्के साथ छुड़ाए थे, जिनके कहने पर अस्त्र वस्त्र सब मिलकर साथ जलाये थे, सत्य-अहिंसा के अचूक तब शस्त्र सशक्त उठाये […]
जिनके एक आवाहन पर सबने अपने हाथ उठाये थे, कदम-कदम पर अंग्रेजी शासन के छक्के साथ छुड़ाए थे, जिनके कहने पर अस्त्र वस्त्र सब मिलकर साथ जलाये थे, सत्य-अहिंसा के अचूक तब शस्त्र सशक्त उठाये […]
साहिर तेरी आँखों का जो मुझपर चल गया, खोटा सिक्का था मैं मगर फिर भी चल गया, ज़ुबाँ होकर भी लोग कुछ कह न सके तुझसे, और मैं ख़ामोश होकर भी तेरे साथ चल गया।। […]
Kabhi kabhi Mai sochta hoon Mai kya kar Sakta hoon Samaj ki rudhiyo se Bandkar jee Sakta hoon Julm sah Sakta hoon yaa Julm karke khus ho Sakta hoon Sach bataye Gaye jhooth Ko Apna […]
मोहब्बत के ख्वाब ने ये कैसा इत्तेफ़ाक कर दिया, दिल्लगी ने धड़कन को ही दिल के खिलाफ़ कर दिया, अच्छी ख़ासी तो चल रही थी ज़िन्दगी ‘राही’ अपनी, फिर क्या हुआ जो इस नशे ने […]
मैं ख़ुद को ख़ुद से बाहर निकालना चाहता हूं, मैं कुछ करके दिखाना चाहता हूं। कोई मेरा साथ दे ना दे, मैं ख़ुद का साथ ख़ुद पाना चाहता हूं। मेरा दिल बहुत डरता है, कभी […]
कुछ फर्ज मेरा है कुछ फर्ज तुम्हारा है देश को स्वच्छ रखना ये फर्ज हमारा है….. देश की स्वच्छता का नारा लगाओ जन सेवा मे हाथ बढाओ ….. झाड़ू हमारा हथियार हो भारत भूमि से […]
पक्षी उड़ान भरता है और इंसान चाल चलता है। पक्षी एक वक्त का खा के भी खुश है और इंसान 7 पीढ़ियों का जोड़कर भी खुश नही।
खिलौना समझ कर ज़िन्दगी से देखो खेलने लगे, चुप रहने वाले भी देखो ज़रा कितना बोलने लगे, चौपाल लगाते दिख जाते थे गाँव में जहाँ तहाँ जो, आज साथ रहने वाले भी देखो अकेले डोलने […]
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