फूलों से फूल कर अक्सर कुप्पा हो जाते हैं, चन्द शब्द मेरे तुमसे जब चुप्पा हो जाते हैं।। – राही (अंजाना)
फूलों से फूल कर अक्सर कुप्पा हो जाते हैं, चन्द शब्द मेरे तुमसे जब चुप्पा हो जाते हैं।। – राही (अंजाना)
बेमोल थे जो झूठे बाज़ार में, वो सारे साहूकार बिक गए, मैं अनमोल ही था सच है,जो मेरा कोई मोल न लगा।। – राही (अंजाना)
बचपन से ही शिक्षक के हाथों में झूला-झूला करते हैं, ज्ञान का पहला अक्षर हम बच्चे माँ से ही सीखा करते हैं, प्रथम चरण में मात-पिता के चरणों को चूमा करते हैं, दूजे पल हम […]
क्या हिम्मत रखता था तू डरता था न मौत से, ठान लिया जब जीतने की सफलता मिली हर ओर से तेरे रुतबे ने ही तो कइयों को राजनीति से प्रेम कराया है, अटल हमेशा अटल […]
✍✍देखो देश को कैसे बचा लिया इसने , देश के खातिर साँसो से लोहा लिया इसने झंडा झुके ना आजादी दिवस की कैसे यमराज को टहला दिया इसने। अटल तेरी गाथाये संसार मे गूँज रहा […]
सरहद के मौसमों में जो बेरंगा हो जाता है, तिरंगे से लिपट कर एक दिन वो तिरंगा हो जाता है।। राही (अंजाना)
ये धरती है वीर बहादुर भगत राज गुरु लालों की, आजादी की जंग में थे शामिल दीवाने दिलवालों की, एक माँ से दूर रहकर एक माँ का आँचल रँगने वालों की, हर मौसम में जो […]
मृत मेरा शरीर है, मैं आज भी मरा नहीं, अटल जिंदगी से एक पल, मैं कभी डिगा नहीं, मौन मेरे नैन हैं पर शब्द कोई हिला नहीं, लौट कर आऊँगा मैं ‘अटल’आज भी डरा नहीं॥ […]
मेरे आँखो मे गुमाण उनका था , वसा ना पाया मेरे आँखो ने किसी दुसरे को दिल मे क्योकि मकान उनका था ! तमाम दर्द -जख्म मिट गये मेरे लेकिन जो ना मिट पाये उसमे […]
ये धरती है वीर बहादुर भगत राज गुरु लालों की, आजादी की जंग में थे शामिल दीवाने दिलवालों की, एक माँ से दूर रहकर एक माँ का आँचल रँगने वालों की, हर मौसम में जो […]
लाल लाल है रक्त उनका लाल लाल मैदान है याद रखना देशवासी जिसने दिया बलिदान है स्वार्थ नहीं था कुछ इनका ना ही कुछ अरमान थे भारत माता ,भारतवासी इन पर ये कुर्बान थे थे […]
रण में उतर जा प्रण कर ले, लड़ते जा तब तक जब तक तू कीचड़ के ढेर में कमल स न खिले, मंज़र कैसा भी हो, ताकत अपनी झोंक दे हिम्मत को हमेशा आगे रखकर […]
सालों पहले मिली आजादी के बाद भी आज हम खुद से लड़ रहे हैं हम कैसे मान लें कि हम प्रगति की ओर आगे बढ़ रहे हैं, कहीं सरहद पर पूरे उत्साह से खड़ा जवान […]
मैं अमन पसंद हूँ, मेरे शहर में दंगा नहीं शांति रहने दो..!! लाल और हरे में मत बांटो, मेरी छत पर तिरंगा रहने दो..!! ??जयहिन्द??✍वाहिद
पहली बार जब रोया तोह भूख और प्यास थी दूसरी बार जब रोया स्कूल का पहला दिन था तिसरी बार जब रोया तब स्कूल का आखरी दिन था कॉलेज के दिन तोह रुलाने के थे […]
काश तेरी उल्फ़त की हर बात भूल जाऊँ। काश तेरी कुर्बत की हर रात भूल जाऊँ। भूल जाऊँ दिल से कभी तेरे सितम को- काश तेरे ज़ख्मों की सौग़ात भूल जाऊँ। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
Looking back in times, When you and me were lonely in the moonlight, Time has passed by, I wait for those times tonight Looking back in times When I was driving you town You flipped […]
बातें बड़ी बनाने लगे, हम शहर में पाँव जमाने लगे, दिन में सोया करते थे, हम रातों को साथ जगाने लगे।। राही (अंजाना)
बड़ी सरलता से वो यूँ अपने बाल संवारा करती है, चोटी की हर गुथ में वो मेरे गम बुहारा करती है।। राही (अंजाना)
न दूध न रोटी के वो टुकड़े नज़र आते हैं, मेरे शहर में पाव और पीज़ा के रगड़े नज़र आते हैं, न मेरे गाँव की हवा न वो छप्पर छावँ नज़र आते है, ऊँची मीनारों […]
किसी को साधन नहीं, दो रोटी क्या दामन नहीं, कोई बस्ती में है बचपन से मस्ती के पैमानों की, बहुत बदल गई है दुनियाँ रस्में रीत गुनाहों की, तोड़ दीवारें लुट जाती हैं अस्मत यहां […]
तेरा नाम कागज़ पर बार-बार लिखता हूँ। तेरे प्यार को दिल में बेशुमार लिखता हूँ। टूटेगा न सिलसिला तेरी तमन्नाओं का- तेरे ख़्यालों पर गमें-इंतज़ार लिखता हूँ। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
मीठी सी है वो हँसी तेरी, आँसू तेरा भी खा़रा है, उन उम्र-दराज़ नज़रों का तू ही तो एक सहारा है। मेंहंदी से सजी हथेली भी करती तुझको ही इशारा है, कानों में गूँजी किलकारी […]
…..………………….Just A Few Lines……………….. उसकी खुशबू से महकी हैं सारी फ़िज़ाये गुलों के रंग भी यूँ फीके पड़ जाए न मय न मय-खाना ये जादू कर पाए उसका नशा यूँ, कोई क्या ही कर पाए…. […]
आज फिर तेरी आँखे नम है पता नहीं किस बात का तुझे गम हैं ज़िन्दगी के पल कुछ कम हैं नहीं तोह हाल ऐ दिल पगली हम भी पूछते ज्यादा ना सही थोड़ा ख्याल हम […]
मुख पर हँसी और दिल में दर्द लिए बैठे हैं, कुछ लोग इसी तरह हमें गुमराह किये बैठे हैं, रहते हैं साथ मगर खुद से दूर किये बैठे हैं, कुछ लोग जलकर भी रौशनी किये […]
मैं तेरी गुफ्तगूं की राह ढूंढ़ता रहता हूँ। मैं तेरी ज़ुल्फ़ों की पनाह ढूंढ़ता रहता हूँ। जब भी नज़र में आती हैं तस्वीरें यादों की- मैं अपनी मयकदों में आह ढूंढ़ता रहता हूँ। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
Ek hasin harkat hai, esa ho jana tumhari ankhon main chalna aur kho jana…
Life is not bona fide. It is house of rent as if it is mine or elase it is the wroth. The price of mud, Breaking the world in the world So the Person is […]
कैसा होगा अपना हिंदुस्तान…! ————————————— सुनो..सुनाई देगी तुम्हें भारत माँ की चीत्कार लहू बहे जो मेरे बेटों के- क्यों होता जा रहा बेकार—? शहादत मेरे लाल की– चुप पत्थरों में सिमट गई है मुझपर मरना […]
चाहतों की चाह में बहुत आगे निकल आये, कुछ लोग देखो अपनों से आगे निकल आये।। राही अंजाना
चलो आज मेरे दर्द की इंतेहा लिखता हूँ, खुद ही हक़ीम बनके एक दवा लिखता हूँ। कोई मिला दे यार से, या दे दे ज़हर कोई। ❤Wahid✍
कलम की स्याही को फीकी होने न देना, जो ज़िंदा हैं इतिहासों में मुर्दा होने न देना, छीन भी ले गर तुमसे कोई कविता तुम्हारी, अपनी कलम का वजूद पर कभी मिटने न देना।। राही […]
उसको चाहा तो मोहब्बत की तकलीफ नजर आई ! वरना इस मोहब्बत की बस तारीफ़ सुना करते थे..!!?Wahid✍
अभी हम नशे में नहीं हैं इसलिए खुशियों भरा संदेश लिख पाए, नहीं तो दर्द लिखकर स्याही ख़त्म कर देने में हम माहिर हैं।।
किरदार कई बदले पर यार न बदला हालात कई बदले पर उसका प्यार न बदला जीवन के सफर में ठोकरें लगी कई हज़ार पर बार-बार वो यही बोला “तू इतनी चिंता क्यों करता है मेरे […]
मेरी दोस्ती पर लिखी ये कविता, दोस्तों को समर्पित ये दोस्ती अल्हड़पन के लंगोटिये, ५० साल से साथ चल रहे हैं दोस्ती की किताब में रोज़, नये अध्याय लिख रहे हैं हमारी दोस्ती जगह, जाति, […]
तुमसे टकराकर मैं हर पल बिखर जाती हूँ, मैं बूंद हर बार मगर जिद्दी पर उतर आती हूँ, सिलसिला रुकता नहीं मैं थमती नहीं कहती हूँ, के आसमाँ से धरती को मैं भिगाने चली आती […]
ह्र्दयतल में बंशीधर ने सखा सुदामा कुछ ऐसे बसाये लिए, दुःख सुख सब जैसे श्रीधर ने सारे आप ही दूर भगाए दिए, रहे ग्वालों और ग्वालिन के संग राधे, प्रेम रस गगरी छलकाए दिए, जब […]
माफ़ करना, ये मैं नहीं, मेरी निराशा बोल रही है नासमझ, मेरी सहनशीलता को, फिर तोल रही है सुकून गायब है, ज़िंदगी उलझी २ सी लग रही है कोशिशों के बाद भी, कोशिश, बेअसर लग […]
ख्वाइशों का पंछी गगन में उड़ता रहता है, बैठता एक पल नहीं धरती से उठा रहता है, आंसुओं का बहना कम नहीं होता एक पल, इंसा का सर बस रब के आगे झुका रहता है।। […]
पैसे की चाहत ने अपनो से दुर किया, माँ ,पिता, दोस्त ,भाई जैसे पवित्र रिस्ते को छोड़ दिया , पैसे की चाहत ने अपनो से दुर किया , जेपी सिह
तुमसे मिलने की तमन्ना अब भी लगा बैठा हूँ,, सुबह से शाम तुम्हारी गलीयो मे चक्कर लगा –लगा कर दिल को समझा रहा हूँ, तुमसे मिलने की तमन्ना अब भी लगा बैठा हूँ, बीत गई […]
सरहद के मौसमों में जो बेरंगा हो जाता है, तिरंगे से लिपट कर एक दिन वो तिरंगा हो जाता है।। राही (अंजाना)
तेरा ख़्याल ख़ुद को समझाने का रास्ता है। तेरी याद दिल को बहलाने का रास्ता है। जब जाग जाती है लबों पर तेरी तिश्नगी- हर शाम मयखानों में जाने का रास्ता है। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
काश मेरी जिन्दगी मे तु होती ना सुबह का इंतजार करती ना शाम का शिर्फ तेरे नीले आँख ो का इंतजार करती। जेपी
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