वर्षो कि कमाई को करना नहीं बेकार कुरवनियो से हो सका है देश बन तैयार ये देश है धरोहर रखना सम्हाल कर हम भी है जिम्मेदार तुम भी हो जिम्मेदार

समझ गया है जमाना बेटा बेटी में फर्क नहीं होता जागरूक होते पहले से तो जीवन नर्क नहीं होता कन्या भ्रूण हत्या करना कराना अपराध है अनमोल है दोनों के बीच और कोई तर्क नहीं […]

गाँव में खेत हरे और है खलिहान गाँव में कूप, नल और है मैदान गाँव में बाग बन और है किसान गाँव में है भारत माता के प्राण गाँव में है कच्ची सड़क कच्चे मकान […]

भूख जब आती है तन मन में हलचल मचाती है भूख को जिंदा रखने के लिए दुनिया क्या क्या नहीं खाती भूख जब भूखी रह जाती है शैतान, हैवान बन जाती है भूख मिटाने के […]

कहा पेड़ ने मानव से कुल्हाड़ी मत चलाना मैं तुम्हारा पांव हूँ जब जाओगे मझधार में मैं तुम्हारी नाव हूं बचोगे तुम भी नहीं मुझे मारकर मैं तुम्हारी छाँव हूं प्यासे मर जाओगे मै बदलो […]

अंग्रेजों के साहित्य और विचार हमारे मन मस्तिष्क में बैठे हैं डेरा डाल फूट डालो शासन करो नीति जैसे है हाल हमारी संस्कृति उपेक्षित है हम उलझे हैं अंधे अनुकरण के जाल हिंदी भाषा शर्माती […]

यह सच है कि जिस रावण को राम ने मारा था वह मर गया था लेकिन कुछ दिनो बाद प्रतिशोध की ज्वाला में जलते हुए आया शुक्राचार्य संजीवनी शक्ति का किया संचार कर दिया रावण […]

बीत गया है ख़ुशी और गम बांटने का जमाना पागलपन है अकेले ही हंसना रोना गुनगुनाना काटते हैं ये जब इन्हें बांटते नहीं हैं कितना मुश्किल है अब सुनना और सुनाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है […]

मतदान से बड़ा कोई दान नहीं होता है एक बार दे दिया तो उसे पांच साल ढोता है यदि चाहते हो सचमुच निज देश का विकास दिन में जागेगा नेता तब देश सुख से सोता […]

आतंकवाद की जड़ को काटने की जरूरत है जेल मे डालो या फांसी दो देखना नहीं मुहूर्त है इसने इंसानियत को शर्मसार किया है इंसान के अंदर छिपे ये शैतान की सूरत है

वस्त्रों के बिना नारी शोभा नहीं पाती है धरती को किया नंगी और शरम नहीं आती है कैसे सपूत हो तुम जब मां तड़प रही पीने को शुद्ध पानी ऑक्सिजन नहीं पाती है प्रथ्वी दिवस […]

कहा बकरी ने मेमने से मैं तुझे जहां भेजती हूँ हंसते हुए जाना ले जाने वाला भगवान् के सामने तेरी काटेगा गर्दन और तेरे जिसम का प्रसाद बांटेगा मगर तुम रोना मत क्यूँकि ये संसार […]

गेंद जैसी गोल धरोहर है अनमोल थकती नहीं दिन रात सूरज के चक्कर लगाती है जीवो को अपने अंचल में बसाती है इसीलिए तो यह धरती माता कहलाती है लेकिन कई दिनो से है यह […]

गेंद जैसी गोल धरोहर है अनमोल थकती नहीं दिन रात सूरज के चक्कर लगाती है सभी जीवो अपने अंचल में बसाती है इसीलिए तो यह धरती माता कहलाती है लेकिन कई दिनो से है बीमार […]

गेंद जैसी गोल धरोहर है अनमोल थकती नहीं दिन रात सूरज के चक्कर लगाती है सभी जीवो अपने अंचल में बसाती है इसीलिए ये हमारी धरती माता कहलाती है लेकिन कई दिनो से है यह […]

तेरे घर की रोशनी क्यूँ देखूँ जब मेरे घर में अंधेरा हो आखिरी रात न हो जाए कही जब तक हर ओर सबेरा हो उसकी ख़ुशी हमारे किस काम की जिसे अहंकार के भूत ने […]

दसो दिशाओ मे बड़े बड़े मोटे मोटे अजगर पड़े हैं तैयार उत्सुक हैं निगल जाने को संसार वो हमारे पास भी आते हैं और कभी हम अपने काम से उनके पास चले जाते हैं इस […]

निभा तो सही सबसे इंसानियत का नाता है कड़ी धूप और बरसात से बचाने वाला छाता है परहित से बड़ा कोई धर्म नहीं होता तेरा ही करम तेरे भाग्य का निर्माता है

आज भी नहाते हैं लोग सुबह उठकर फिर दर्पण के सम्मुख जाते हैं दर्पण मे देखकर चेहरा अपना मुह बनाते हैं, रोते हैं, चिल्लाते हैं फिर उस दर्पण को छोड़ कर या तोड़कर बड़े आकार […]

पर्यावरण बचाइए, हे मानव समुदाय सुख समृद्धि शांति, का है जो पर्याय नदिया पर्वत वन और, वन्य जीव समुदाय मानव दानव से हमे, कोई लेव बचाय धरा वायु जल सब हुए, दूषित सुनो पुकार प्रकृति […]

अपराध नहीं है शेर का हिरण को खाना चिड़ियों का चुगना दाना पेड़ का कड़ी धूप में मुस्कुराना अपराध नहीं है शेर चिड़िया, पेड़ का पाठ शाला न जाना क्यूँकि पाठशाला में जाता है केवल […]