मेरे उड़ान को पंख लगा दो, मेरे सपनों को उजागर कर दो। दिल से दिल का रिश्ता जोड़कर, मुझे अपना हमसफर बना दो ।। ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी
मेरे उड़ान को पंख लगा दो, मेरे सपनों को उजागर कर दो। दिल से दिल का रिश्ता जोड़कर, मुझे अपना हमसफर बना दो ।। ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी
मेरे राहों के हमसफर हो तुम, दोस्त कम हमसफर ज्यादा हो तुम। संग संग जो तुम मेरे रहते बनकर दीप, परछाई में साथ निभाते हमसफर हो तुम ।। ✍🏻 महेश गुप्ता जौनपुरी
रिश्ते का बागडोर संभाल, हमसफर को चुन लिया। तुम्हें देख हो गया कंगाल, अब लो मेरे हमसफ़र संभाल।। ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी
हाथ को पकड़ा है हमसफर का, तो साथ निभाऊंगा मरते दम तक हमसफर का। तुम साथ छोड़ने की बात ना करो हमसर, हम दिल से साथ निभाते हैं हमसफर का।। ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी
हमसफर तो मैंने लिया है चुन, साथ निभाते रहना मेरे साथी तुम। रिश्तों में कोई खटास पनपे तो सुन, हक से निपटारा करना मेरे हमसफर तुम।। ✍🏻 महेश गुप्ता जौनपुरी
सफर में चलने के लिए हमसफर चाहिए, दिल से दिल का रिश्ता जोड़े दिलवर चाहिए, अपनों को अपनों से जो जोड़कर रखें, सुख दुःख में साथ निभाये ऐंसा दोस्त चाहिए।। ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी
फूल खिले हैं तब जब हमसफर मिलें, रिश्तें जुड़े हैं तब जब प्यार मिलें। ठोकर मार गिराने वाले हैं बहुत, दोस्त समझ साथ निभाने के लिए मिलें।। ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी
युध्द को कब तक टाला जायें, भाले को कब तक संभाला जायें। रिश्तों को कब तक पाला जायें, युध्द लड़कर अब विराम लगाया जायें।। ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी
पथिक ही सही हमसफर तो बनोगें, मेरे जीवन के दोस्त तो बनोगें। राह दिखाकर मेरे संग तो चलोगें, मुझे अपना समझ गले तो लगा लोगें।। ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी
त्रिशुलधारी भोले भण्डारी काशी के अविनाशी, डम डम डमरू बाजे मदमस्त नाचे काशीवासी। गले में सर्प का माला धारण किये भोले भण्डारी, झूम झूम कर गा रहें है पृथ्वी लोक के वासी ।। ✍🏻महेश गुप्ता […]
कहां थे और कहां हम पहूंच गये, माडर्न के चक्कर में सब कुछ भूल गये। पीढ़ियों का अन्तर ना हम समझ सकें, फैशन के दौर में बहुत कुछ खो गये ।। ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी
झुठा मैं नहीं कुछ लोग हो गये है, अहम में सब आगे बढ़ गये है । कौन अब किसे समझाये भला, सब अब समझदार हो गये है ।। ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी
बहुत कुछ बदल दिया बदलते दौर ने, रिश्तें की मिठास और अपनों का प्यार ने। पीढ़ी दर पीढ़ी चली एक नई सोच लेकर संग, आज की सोच को बदल दिया आपने।। ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी
सदैव हाथ रखते अपना भोले भण्डारी, करूणा निधान है मेरे भोले बाबा भण्डारी। काशी के है रखवाले भक्तो के है प्यारे, हर हर महादेव नाम गुंजे काशी में भोले भण्डारी।।
परिवर्तन ही संसार का नियम है, समझो मेरे मित्र यार । बूढ़ा बाप अब भी प्यारा है, बदल जाये भले ही दौर।। ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी
सबके दुःख को पल में हरते, मेरे भोले बाबा भण्डारी। नीलकंठ मनोकामना पुरा करते, बड़े दयालु मेरे बाबा है भण्डारी।। ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी
सत्य के राह चलते रहना, कभी ना होना दूर। मुसीबत को भांपते रहना, झूठ का दामन देना छोड़।। ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी
तौर तरीके दुनिया दारी, नारी है सब पर भारी। नारी से ही चलता संसार, नारी समर्पण है कल्याणकारी।। ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी
ये काल की गति मेरा बचपन लौटा दें, गांव की पगडंडी खोया कल लौटा दें। बहुत याद आते है वे गुजरे हुए पल ये मेरी जिंदगी तुम मेरा अतीत लौटा दो।। ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी
कोरोना के प्रकोप से बिलख रहें है लोग, ऐंस की जिंदगी खत्म हुआ समझो सब लोग। भूख आज कल भटक रहा सड़कों के किनारे, क्या थे क्या हो गये इस महामारी में हम लोग।। ✍🏻महेश […]
भूख आज कल दम तोड़ रहा, पेट का भूख लोगों को मरोड़ रहा। फिर भी बाज ना आ रहे हैं, देखो लोग घर बार झोड़ रहे हैं।। ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी
मान गया जीवन एक मोमबत्ती है, आशा विश्वास का दीपक जलाती है, खुद के बदन को पिघलाकर वह खुशियां घर घर बांटती फिरती है ।।
नारी त्याग है बलिदान है, नारी समर्पण की परिभाषा है, नारी मां बहन बेटी और माता हैं, नारी जग में भाग्य विधाता हैं।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
अपने शब्दों में बयां करो नारी का गुणगान, नारी के दुःख दर्द को समझो ना महान। नारी को इज्जत दो करो तुम सम्मान, नारी हित में मोर्चा कर बांटो जग में ज्ञान।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
सोच विचार से निकलेगा, आज कल का परिणाम। चिंता फिक्र से ही उपजेगा, आज कल का इतिहास।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
कोरोना जैसी महामारी में, कर लो पुण्य प्रताप । बांट कर खाने का पैकेट, कवि जी बन जाओ तुम भी महान।।
पुण्य का हिसाब देकर नहीं बनना पाप का हकदार, अवगत इतना बस कराता चाहता। सैकड़ों लोगों का किया भूख से निदान, तुम भी आगे बढ़कर करो कुछ पुण्य प्रताप।। महेश गुप्ता जौनपुरी
सच को आईना ना दिखाईए, झूठ को दो खदेड़ भगाय। मित्र बन्धू को दो तुम जगाए, कुछ दान पुण्य करके बन जाये सहाय।। महेश गुप्ता जौनपुरी
भीड़भाड़ में उलझ कर, मैं अपना अस्तित्व खो दिया हूं। शहर में आकर मैं भूल गया हूं, मेरे यार मेरे दोस्त बता दो मैं कौन हूं।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
मेरे गांव की मिट्टी में रोश बहुत है, लोगों में भाई चारे का प्यार बहुत है। सोंधी महक मिट्टी की याद आती है, मेरे गांव के युवाओं में जोश बहुत है।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
मत मांग मुझे मैं अब हो गया हूं खाली, पहले जैसे नहीं रह गये मेरे गालों पर लाली। थक हार बेचैन सा हो गया हूं मैं दोस्त, अब मैं घास छीलने वाला लगने लगा हूं […]
सब कुछ न्योछावर कर दिया, अब तो बख्स दे मुझे । रहम करके मेरे ऊपर दोस्त, अब मत मांग मुझे ।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
मेरे गांव का मिट्टी मुझे बुला रहा है, मेरे गांव का झप्पर मुझे याद आ रहा है। मेरे मां के हाथों का ब्यंजन और लोरी, मेरा गांव इशारों इशारों में मुझे बुला रहा है।। ✍महेश […]
बचा लो अब अपना अस्तित्व, गांव शहर में बदल रहा है, याद कर लो गांव की सोंधी मिट्टी, अब शहर गांव को निगल रहा है।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
मिट्टी खजानों का अनमोल घर है, जीवन प्रदान कर रहा शहर को है। खनिज पदार्थ खाद्य पदार्थ का खजाना, मिट्टी पर ही अमीर गरीब का नजर है।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
उलझ लेने दो मुझे मुझ में ही, पता तो चले मैं कौन हूं । अपनों से खा खा कर ठोकरें, अपने आपको मैं भूल गया हूं।। ✍ महेश गुप्ता जौनपुरी
खूशबू मिट्टी की तो एक है, तड़प दिल का मित्र अनेक है। सबको याद सताता है गांव, मिट्टी के संग जुड़े प्यारे खरवास है।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
दौड़ खेल कर तो हम भी बड़े हो गये, जिम्मेदारीयां संग शहर में दौड़ गये। पेट की भूख शहर की याद दिला दी, इसलिए अपने वतन मिट्टी को वेबस होकर छोड़ गये।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
बता दो दहाड़ कर डर नहीं लगता, शेर पिंजरे से अब जख्म नहीं देता। शायद भूल गये हो तुम मैं कौन हूं, वरना बातें बनाकर कर नहीं घुड़कते मुझे है पता।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
बुलंदियों से पुछ लिया कौन हो तुम, शेर के भेष में कोई और हो तुम। मुझे भी जान लो ये मित्र कौन हूं मैं, अपने लिबाज़ को उठा देखो मेरे मित्र हो तुम।। महेश गुप्ता […]
इस लाकडाउन में मैं तुम और चाय है साथी, कोरोना जैसी वैश्विक महामारी है सब पर भारी। करो जतन सब मिलकर कोरोना के प्रकोप का कुछ आदमखोर इंसानों से ये दुनिया आज हारी।। महेश गुप्ता […]
मैं मजदूर हूं साहब यह सौभाग्य है मेरा, देश के लिए करना मजदूरी काम है मेरा। करते करते मजदूरी देश को समृध्द बनाऊंगा, आन बान शान का लाज रखना काम है मेरा।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
अभी तो तुमसे मिले थे हम, अभी तुम मुझे छोड़ चले गये। दिखलाकर मुझे सुनहरे ख्वाब, आंखों से दूर कहां तुम चले गये।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
मजदूर ही राष्ट्र का निर्माता, इनको हम क्यों भूल गये । चन्द रूपये पाकर हम, इनको हम क्यो अलग किये।।
हमें गर्व है तुम पर, मेरे मित्र मजदूर । किस्मत को मत कोसों, हम है बहुत मजबूर।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
बहुत आहत हुआ हूं देख तुम्हरा हाल, एक मशाल जलाऊंगा बनकर मैं मिशाल। मजदूर नहीं मजबूर होगा करूंगा मैं प्रयास, मुझ पर भरोसा रखना मैं हूं देश का लाल।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
चादर बांट हौसले मुझे नहीं तोड़ना, मजदूर भाई मुझे तुम्हारा राह नहीं मोड़ना। तुम्हारे हक का हम दे सकें मेहनताना, बड़े बनकर तुम्हारा हक मुझे नहीं है छिनना।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
कभी झांक कर देखना मजदूर के घर, मजदूर कितना मजबूर हो गया है । टूट के बिखर कर कितना दुखी हो गया, पेट के भूख ने ही ऐंसा हाल बना दिया है।। ✍ महेश गुप्ता […]
इस संसार में ना जाने कितने चेहरे है, जिम्मेदारीयों पर बहुत सारे पहरे है। मजदूर परेशान क्यो है जान तो लिजिए, उसके किस्मत पर ना जाने कितने लहरें है।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी
अन्तर्मन की वेदना पढ़ ना सके कोय, मजदूर की मजदूरी दे ना सके कोय। खून पसीने कौन बहता बैठ कर खाते लोग, मजदूर की मेहनत को समझ ना सके कोय।।
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