भोजपुरी देवी गीत- घंटा घनघोर | बजे लागल घंटा घनघोर | भरी गइल अँखिया के कगरी | घेर लेलस माई भाव बड़ी ज़ोर | तरसे मोर बरसत नयनवा | माई काहे दिहली हमरा के छोड़ […]

गजल- खुबसुरत ख्वाब हो | मेरे इश्क ए सफर का तुम जवाब हो | मेरे महबूब तुम एक खुबसुरत ख्वाब हो | सिवा तेरे किसी की चाहत न रहीं अब | बागो बहारों का तुम […]

याद आती हैं वो बचपन की बातें जब पापा के हाथों से चोटी करवाती थी। माँ लोरी गाकर सुलाती थी। कहाँ गई वो बचपन गुड़िया ? जिसकी शादी मैं रोज़ कराती थी। बाबा की भजन […]

महफ़िलों से डर लगने लगा, तन्हाई हमें रास आने लगी दोस्तों में हमें ऐ ख़ुदा, दुश्मनी की बांस आने लगी समझा था जिसे अपना हमसफ़र, उसी ने बदल दी है अपनी डग़र दो राहे पे […]

मुद्दतें बाद आज गला तर हो गया। मर रहा था, अब बेहतर हो गया।। कल जो खाने की तलाश में, कतार में थे खड़े। आज उनके भी कदम, मयकदे को चल पड़े। चेहरे से लाचारी […]

जुबां जो कह नहीं सकती आंखें वो राज़ कहती हैं। दिल में जो कुछ भी चलता है धड़कनें आवाज करती हैं । लगाए लाख भी पहरे दिलों पर चाहे जमाना, मोहब्बत तोड़कर पहरे दिल को […]

ढूंढता है तू जिसको सागर की गहराइयों में वह तो छिपा है खुद तुम्हारी ही परछाइयों में । क्यों दर-दर की ठोकरें खाता है उसे पाने के लिए समझना है तो समझो खुद को जमाने […]

सितम गैरों की बस्ती में सही मेरा भी नाम हो जाए मेरी नींदें छीन कर चैन से सोने वाली आज की रात तेरी नींद भी हराम हो जाए वीरेंद्र

कल फिर महफिलें सजेगी हम भीड़ के हिस्से होंगे । खुद को कैद कर लो आशियाने में वरना हम ना होंगे सिर्फ हमारे किस्से से होंगे । हमसे भी मजबूत देश आज असहाय है कोई […]

हर बीमारी का हल दवा नहीं होती हर छोटी चीज़ रवा नहीं होती भुज जाते है दीये कभी तेल की कमी से हर बार कुसूरवार हवा नहीं होती – हिमांशु ओझा

शहर में छिपा है अन्देखा ,अन्जाना बैरी दोस्तों इससे जीतने की कर लो तैयारी दोस्तों आता नहीं नज़र,पर रख़ता है वो नज़र, ना रहना इससे तुम बेख़बर दोस्तों वो करता है वार, जाते ही बाहर […]

मोहब्बतें -इकरार कर ना सके हम हाले दिल बयां उनको कर ना सके वो आए थे हमारे गलियों में हम दरवाजा भी उस वक्त खोल ना सके वो आवाजें हमें लगाते रहे हम एक दफा […]

जिन्हें पाने की चाहत में, मैं सदा अपनों से लड़ता था वो देंगे दग़ा हमको कभी हमने ना सोचा था मिला आघात भी हमको उस मोड़ पे जा के जहां से लौट के आना बड़ा […]

संस्कार बदलते दौर के साथ बदल गया संस्कार पैसे की होड़ में बिक कर रह गया संस्कार पैर छूने की परम्परा है विलुप्त के कगार हाथ जोड़ अभिवादन का चला है संस्कार मां बाप के […]

मेरी जलती चिता पर लोग रोटी सेंक लेते हैं सहारे की जरूरत पर मेरा ही टेक लेते हैं जमाने ने मुझे समझा किसी माचिस की तीली सा जला करके दिया अक़्सर जिसे सब फेंक देते […]

जख़्म गर नासूर बन जाए, उसे पालना बहुत भारी है। ज़िन्दगी बचाने के लिए, अंग काटने में समझदारी है। यह फलसफ़ा असर करता है, हर उस नासूर पर, चाहे वह शारीरिक हो या फिर सामाजिक […]

भीगी भीगी रातों में जब याद तुम्हारी आती है सच कहता हूं यार मेरे ये आंखें जल बरसाती हैं कैसे कह दूं दोस्त मेरे की मुझको तुमसे प्यार नहीं प्यार असीमित है तुमसे ,इसमें कोई […]

बारीकियों से पढ़ मेरे दिल की किताब को गलती से कोई पन्ना कहीं छूट ना जाए। मिट्टी का खिलौना तुम्हें लगता है दिल मेरा पर ऐसे खेलना कहीं ये टूट ना जाए। Shakti Tripathi “DEV”

गज़ल =”कभी यूं भी आ” ——————————– कभी यूं भी आ मेरी आंख में मेरी नजर को खबर ना हो, मुझे एक रात नवाज दे कि फिर ‘शहर'(सुबह) ना। अंशुमाली में तेरी ही आरजू रहती है […]

शुद्ध रहे ये आबोहवा सदा जीवन के अनुकूल। बृक्ष लगाओ चारों ओर सड़क सरित के कूल।। हरे पौध बृक्षों से है धरती की हरियाली। वातावरण भी सुरभित होंगे होगी जीवन में खुशहाली।।

कर बर्षा आकाश सदा पानी सबको देता है। बृहत उदर का होकर भी आखिर हमसे क्या लेता है? एक वायु का प्यासा है ये शुद्ध हवा तुम देना जी। उन्नत वायु में अपने तुम घोल […]

पत्थर भी पानी देता है पर पानी में क्या घुलता है? धरती पानी लेती है तो फिर फिर पानी मिलता है।। पानी के प्रति पानी रखो ना पत्थर दिल इंसान बनो। पर्यावरण का प्रथम तत्व […]

आज कुदरत भी शर्माया होगा, मानव रूपी दानव जो बनाया l विनायकी नहीं, मानवता ने दम तोड़ा l मानवता का रूह सिहर उठा, मानव द्वारा मानवता का चीर हरण हुआ l मासूमों पर क्रूरता प्रमाण […]

गजल- मै ही अंदर था | बहर – मुजतस मुसम्मन मखमुन महजूफ अरकान -मुफाएलुन फ़एलातुन मुफाएलुन फेलून 1212 1122 1212 22 काफिया – दर ,रदीफ़ – था ************************************* ढूँढना उसे कहा जिधर देखो उसी का […]

याद हैं वो गुजरे जमाने तुमको? जब प्रीत से बढ़कर और कुछ भी न था। याद हैं वो गुलिस्ता मुझको जहाँ तेरे और मेरे सिवा कुछ भी न था। कुछ दूर खड़े तुम थे कुछ […]

नैतिकता हिन्द की आभूषण है, परिचायक इसके प्रभु रामजी हैं l सीतामैया अग्नि परीक्षा दी l कैसी ये नैतिकता थी ? स्वार्थरहित पीड़ा थी l मैया में सभ्य समाज की लालसा थी l यह लीला […]

किस्मत से डरी हुई हूँ मैं ज़िन्दगी के भंवर में फंसी हुई हूँ मैं …. तेरी स्मृतियों की दासी हूँ हालतों की दुविधा से सहमी हुई हूँ मैं ….. गमों की आंधियों ने झकझोर दिया […]

🌴🌴दरख्तों सी है ज़िन्दगी अपनी🌴🌴 कभी हर साख पर हैं पत्तियां टूटती….लहराती…. और मिट्टी में मिल जाती…. कभी हर शाख पर गुल खिलता है कभी दरख्ता वीरान सा नज़र आता है जिसकी हर एक शाख […]

🌴🌴दरख्तों सी है ज़िन्दगी अपनी🌴🌴 कभी हर साख पर हैं पत्तियां टूटती….लहराती…. और मिट्टी में मिल जाती…. 🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂 कभी हर शाख पर गुल खिलता है कभी हर शाख वीरान सी नज़र आती है जिसकी हर […]

तुम्हारी हर एक बात सही है…. वक्त का पता तो चलता ही नहीं है अपनों के साथ, पर अपनों का पता चल जाता है वक्त के साथ। मगर ए हमदम! अपनों के प्रति ऐसी संवेदनाएं […]

गजल – फूल मुरझा नहीं सकता | काफिया – अझा ,रदीफ़ – नहीं सकता बहर- हजज मुसझन सालिम अरकान – मुफाइलून मुफाइलून मुफाइलून मुफाइलून 1222 1222 1222 1222 ये मत समझो खिला जो फूल मुरझा […]

चाँद में दाग है सबने जाना, उसकी खूबसूरती को सबने माना, खूसूरती का रहस्य किसी ने न जाना?                  बादलों का आना चमकने से रोकना,                  दूसरे पल रोशनी को भू तक पहुंचाना,                   सेवा […]

चलते चलते राहों में मिला मुझे हमसफर, सुख दुःख को बांटकर किया सांझा दर्द को। मिला मुझे अनोखा तोहफा हमसफर, भूल गये हम सारे मुसीबतों के मर्ज को।। ✍🏻महेश गुप्ता जौनपुरी