गिरेबां अपनी जब भी झांकता मैं। हर बार पाता, कहाँ तू और कहाँ मैं। आईना मैं भी देखता हूँ, वाकिफ़ हूँ, और भी बेहतर हैं ‘देव’ तुझसे जहाँ में। देवेश साखरे ‘देव’

मौके और मिलेंगे घुमने के फिर बेहद। गर आज ना लाँघे अपने घरों की हद। शिकायत थी, परिवार के लिए वक्त नहीं, समय बिताने का अवसर मिला सुखद। देवेश साखरे ‘देव’

मुहब्बत के नश्तर मिटाने वाले, तुझे क्या पता है चाहत ए आलम। तू ने कभी मुहब्बत 💘की ही नहीं, तू क्या समझे मेरे दर्द ए आलम।।

भूतकाल के डर को वर्तमान में ख़तम कर भविष्य आगे भड़ाना है तुझे कुछ कर दिखाना है तुझे कुछ कर दिखाना है दुनिया के जाल से निकलकर तुझे अपना मान बढ़ाना है तुझे कुछ कर […]

कविता – बरखा तुम आओ मिटे जलन तपन गर्मी बरस तुम जाओ | मनाए हम उत्सव तेरा बरखा तुम आओ | तप रहे खेत ताल नदी पोखर तुम कहा | फटी जमीन प्यासे सब पशु […]

अंतरराष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर बाल श्रमिकों के नाम प्रस्तुत मेरी एक बाल गीत बाल गीत – मजदूरी ना कराना | लगा लॉक डाउन बाल मजदूरी ना कराना | भूखे बच्चो भोजन […]

बाहुबल से सबल रहे, फिर क्यों विफल रहे। केश पकड़ घसीटा गया, भरी सभा मुझे लुटा गया। दुःशासन का दुस्साहस तुम देखते रहे, दुर्योधन का अट्टहास कर्ण भेदते रहे। वरिष्ठ सभासद मूक दर्शक बने रहे, […]

ऐ ज़िन्दगी मैंने तुझको दिया क्या है तेरे लिए किया क्या है तूने मेरे गम पे खुशियों के वस्त्र ढक दिए तेरे लिए मैंने सिया किया है ना रखा तुझे खुश ना रखा ऐशो आराम […]

किसी पत्थर की मूरत में, लगी सूरत खुदा की सी उसे पूजा उसे माना, उसे अपना खुदा जाना बड़ी भूल हुई अरे हमसे, आंखों से आंसू निकल पड़े, व्यर्थ गई सब साधना निरा पत्थर का […]

तुम्हारी जुल्फों की कैद मिले तो हर गुनाह कर जाऊं । कत्ल करूं कातिल बनूं फिर तेरे पहलू में आऊं। वीरेंद्र

धधक रहा है मुल्क, और कुछ आग मेरे सीने में। वफ़ादारी खून में नहीं तो फिर क्या रखा जीने में। वतन परस्ति से बढ़कर, और कोई इबादत नहीं, वतन परस्ति का सुकून, न काशी में […]

कविता- इंसान मे जानवर हाथी एक जानवर मगर इंसान की इंसानियत ढोता रहा | थके मांदे एक शेर के बच्चे को अपनी सुंढ मे ढोता रहा | इंसान कहने को आदमी मगर जानवर से बदतर […]

अबला थी जो नारी अब तक सबला बनके दिखलाएगी पुरुष के हाथों की कठपुतली अब दुनिया को चलाएगी । घुट घुट के यह मरती रही मुंह से कभी भी आह न की पुरुष ने अपनी […]

मीठे मीठे सपने संजोने दो होता है जो उसे होने दो कल का पता नहीं क्या होगा बाहों में और थोड़ा सोने दो ।……….. जागी है अखियां हम सो गए हैं यादों में उनके हम […]

जब मैं हुई उदास, तो तेरा मुस्कुराना याद आया जब हुई तुझसे दूर, तो तेरा पास आना याद आया तू नहीं आया, पर तेरी याद चली आई तेरी याद से मिलकर, मुझे मुस्कुराना याद आया […]

गजल- प्यास पानी हो गई | तुझसे बीछड़ दर्द इश्क अब कहानी हो गई | आँख से उमड़ा समंदर प्यास पानी हो गई | छलकता सागर आंखो से सैलाब की तरह | तेरी यादे मेरी […]

गजल- अवकात नही | चाहे जितना ज़ोर लगा ले दुशमन डर हमे कोई खास नहीं | डरा दे भारत कोई अफसोस मगर इतनी भी अवकात नही | लौकी का बतिया नहीं भारत जो अंगुली देख […]

कविता- इंसान मे जानवर हाथी एक जानवर मगर इंसान की इंसानियत ढोता रहा | थके मांदे एक शेर के बच्चे को अपनी सुंढ मे ढोता रहा | इंसान कहने को आदमी मगर जानवर से बदतर […]

भोजपुरी देवी गीत- घंटा घनघोर | बजे लागल घंटा घनघोर | भरी गइल अँखिया के कगरी | घेर लेलस माई भाव बड़ी ज़ोर | तरसे मोर बरसत नयनवा | माई काहे दिहली हमरा के छोड़ […]

गजल- खुबसुरत ख्वाब हो | मेरे इश्क ए सफर का तुम जवाब हो | मेरे महबूब तुम एक खुबसुरत ख्वाब हो | सिवा तेरे किसी की चाहत न रहीं अब | बागो बहारों का तुम […]

याद आती हैं वो बचपन की बातें जब पापा के हाथों से चोटी करवाती थी। माँ लोरी गाकर सुलाती थी। कहाँ गई वो बचपन गुड़िया ? जिसकी शादी मैं रोज़ कराती थी। बाबा की भजन […]

महफ़िलों से डर लगने लगा, तन्हाई हमें रास आने लगी दोस्तों में हमें ऐ ख़ुदा, दुश्मनी की बांस आने लगी समझा था जिसे अपना हमसफ़र, उसी ने बदल दी है अपनी डग़र दो राहे पे […]

मुद्दतें बाद आज गला तर हो गया। मर रहा था, अब बेहतर हो गया।। कल जो खाने की तलाश में, कतार में थे खड़े। आज उनके भी कदम, मयकदे को चल पड़े। चेहरे से लाचारी […]

जुबां जो कह नहीं सकती आंखें वो राज़ कहती हैं। दिल में जो कुछ भी चलता है धड़कनें आवाज करती हैं । लगाए लाख भी पहरे दिलों पर चाहे जमाना, मोहब्बत तोड़कर पहरे दिल को […]

ढूंढता है तू जिसको सागर की गहराइयों में वह तो छिपा है खुद तुम्हारी ही परछाइयों में । क्यों दर-दर की ठोकरें खाता है उसे पाने के लिए समझना है तो समझो खुद को जमाने […]

सितम गैरों की बस्ती में सही मेरा भी नाम हो जाए मेरी नींदें छीन कर चैन से सोने वाली आज की रात तेरी नींद भी हराम हो जाए वीरेंद्र

कल फिर महफिलें सजेगी हम भीड़ के हिस्से होंगे । खुद को कैद कर लो आशियाने में वरना हम ना होंगे सिर्फ हमारे किस्से से होंगे । हमसे भी मजबूत देश आज असहाय है कोई […]

हर बीमारी का हल दवा नहीं होती हर छोटी चीज़ रवा नहीं होती भुज जाते है दीये कभी तेल की कमी से हर बार कुसूरवार हवा नहीं होती – हिमांशु ओझा

शहर में छिपा है अन्देखा ,अन्जाना बैरी दोस्तों इससे जीतने की कर लो तैयारी दोस्तों आता नहीं नज़र,पर रख़ता है वो नज़र, ना रहना इससे तुम बेख़बर दोस्तों वो करता है वार, जाते ही बाहर […]

मोहब्बतें -इकरार कर ना सके हम हाले दिल बयां उनको कर ना सके वो आए थे हमारे गलियों में हम दरवाजा भी उस वक्त खोल ना सके वो आवाजें हमें लगाते रहे हम एक दफा […]

जिन्हें पाने की चाहत में, मैं सदा अपनों से लड़ता था वो देंगे दग़ा हमको कभी हमने ना सोचा था मिला आघात भी हमको उस मोड़ पे जा के जहां से लौट के आना बड़ा […]

संस्कार बदलते दौर के साथ बदल गया संस्कार पैसे की होड़ में बिक कर रह गया संस्कार पैर छूने की परम्परा है विलुप्त के कगार हाथ जोड़ अभिवादन का चला है संस्कार मां बाप के […]

मेरी जलती चिता पर लोग रोटी सेंक लेते हैं सहारे की जरूरत पर मेरा ही टेक लेते हैं जमाने ने मुझे समझा किसी माचिस की तीली सा जला करके दिया अक़्सर जिसे सब फेंक देते […]

जख़्म गर नासूर बन जाए, उसे पालना बहुत भारी है। ज़िन्दगी बचाने के लिए, अंग काटने में समझदारी है। यह फलसफ़ा असर करता है, हर उस नासूर पर, चाहे वह शारीरिक हो या फिर सामाजिक […]

भीगी भीगी रातों में जब याद तुम्हारी आती है सच कहता हूं यार मेरे ये आंखें जल बरसाती हैं कैसे कह दूं दोस्त मेरे की मुझको तुमसे प्यार नहीं प्यार असीमित है तुमसे ,इसमें कोई […]

बारीकियों से पढ़ मेरे दिल की किताब को गलती से कोई पन्ना कहीं छूट ना जाए। मिट्टी का खिलौना तुम्हें लगता है दिल मेरा पर ऐसे खेलना कहीं ये टूट ना जाए। Shakti Tripathi “DEV”

गज़ल =”कभी यूं भी आ” ——————————– कभी यूं भी आ मेरी आंख में मेरी नजर को खबर ना हो, मुझे एक रात नवाज दे कि फिर ‘शहर'(सुबह) ना। अंशुमाली में तेरी ही आरजू रहती है […]

शुद्ध रहे ये आबोहवा सदा जीवन के अनुकूल। बृक्ष लगाओ चारों ओर सड़क सरित के कूल।। हरे पौध बृक्षों से है धरती की हरियाली। वातावरण भी सुरभित होंगे होगी जीवन में खुशहाली।।

कर बर्षा आकाश सदा पानी सबको देता है। बृहत उदर का होकर भी आखिर हमसे क्या लेता है? एक वायु का प्यासा है ये शुद्ध हवा तुम देना जी। उन्नत वायु में अपने तुम घोल […]