बच्चों की किलकारी पर बोझ लाद रहे हैं हम, नन्हें-मुन्हें मासूम पर जिम्मेदारी लाद रहे हैं हम। अपनी नाकामी को साबित करके महान बने हम खुशियां छिनकर ज्ञान के चक्कर में तौल रहे हैं हम।। […]

भार के आगोश में सजा काट रहा है, बचपन अपना भूल कर समझदार बन रहा है। किताबी संसार को अपना जीवन समझ रहा है, बदलते शिक्षा में कुछ को दोषी समझ रहा है।। ✍महेश गुप्ता […]

चमकते बादल का दर्द किसान से पुछो, हवा के झोंके का हाल किसान से पुछो। कितना दर्द हैं देता ओलावृष्टि का मार, टूटे हुए सपनों का ख्वाब किसान से पुछो।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

अस्त ब्यस्त लस्त में भी खुद को जिंदा रखता, खून पसीने को बहाकर खेत हरा भरा रखता। प्रकृति के हालातों से कभी नहीं झुकता, मेहनत के डर से किसान कभी नहीं भागता।। ✍ महेश गुप्ता […]

शिक्षा और शिक्षक का नाता है भरा बस्ता, ज्ञान की बातों में छुपा है कोई रास्ता। भारी बस्ते से आमदनी है होता, बचपन के बोझ से उनका नहीं कोई वास्ता।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

तन मन की शक्ति आती है योग साधना से, दिल को चैन आता है भगवान के आराधना से, योग वेद पुराण का अलौकिक उपहार है, योग धरा पर ऋषि मुनियों का वरदान है।। ✍ महेश […]

सरकारी बाबू बनकर है बैठे, गरिब मजदूर से पैसे हैं ऐंठे । नमक हलाल से बचाये भगवान, अफसर के भेष में है दलाल बैठे।। ✍ महेश गुप्ता जौनपुरी

पैसे के लोभ में इंसान खुद को भूल गया, अफसर के ओहदे में सुख को भूल गया। चन्द रूपये के लालच में खुद को बेच गया, नाम बड़ा करने में रिस्तें को तोड़ गया ।। […]

पैसे का इमान देता नहीं कभी साथ, गरिबी अमीरी छोड़ कर मिलाओ हाथ। अफसर बनकर भगवान तुम नहीं हुए, सद्भाव गलत कर्मो को माफ करो हे नाथ।। महेश गुप्ता जौनपुरी

मां ये देखो कैसा चांद निकल आया है, बादलों के गर्भ में चांद देखो समाया है। अंधेरे रात में आज चांद रोशनी भूल आया है, चांद के उजाले को बादल ने अपने आगोश में छिपाया […]

तुम्हारी ये सुनहरी जुल्फें और तुम्हारी याद, चेहरे की हंसी और दमकता हुआ ये चांद। मुझे याद बहुत आता है तुम्हारा साथ, रब से करना मिलने का तुम फरियाद।। ✍ महेश गुप्ता जौनपुरी

चांद को पाना सबके बस की बात नहीं, चांद को ख्वाब में देखना हसरत की बात है। चांद का रोशनी रोशन करता है जहां को, चांद को कैद कर दीदार करना सबके बस की नहीं […]

नि:शब्द हूँ निस्तेज मैं मस्तिष्क के आवेश में शब्द भारी पड़ रहे कलम की स्याही से नित यह कह रहे ना उल्लिखित कर पाऊँगा मैं तेरे भाव को ना प्रकट मैं कर पाऊँगा तो मैं […]

पैसे का इमान देता नहीं कभी साथ, गरिबी अमीरी छोड़ कर मिलाओ हाथ। अफसर बनकर भगवान तुम नहीं हुए, सद्भाव गलत कर्मो को माफ करो हे नाथ।। महेश गुप्ता जौनपुरी

भ्रष्टाचार की पोटली खोल रहें हैं अफसर, कुछ इमानदारी से कर रहे हैं उजागर। कुछ टेबल के नीचे से कर रहे हैं पार्सल, घी रोटी खाकर पेट फुलाये बने पड़े हैं अजगर।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

सरकार बेचारी फिसड्डी हो गयी, जनता अब मारी मारी है फिरती। लगकर लाईन में उम्मीद लगाएं, कोरोना का प्रकोप इन्हें है डसती।। ✍ महेश गुप्ता जौनपुरी

अपनी गलती कब तक हम ठेलेंगे, विज्ञान के आड़ में कब तक बम फोड़ेंगे। चुनौतियों से पिछा छुड़ा कर, अपनी नाकामी से कब तक हम भागेंगे।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

मजदूर हू मजबूर नहीं तेरे जैसे वीडियो के सामने मदद लेने से इनकार करता हू लाखों दूर घर की और सफर करता हूँ बिना किसी मदद के पैदल किसी के आगे हाथ नहीं फैलाया कभी […]

आज दिल फिर बच्चा होना चाहता है बचपन की अजूबी कहानियों में खोना चाहता है जीनी जो अलादिन की हर ख्वाहिश मिनटों में पूरी कर देता था, उसे फिर क्या हुक्म मेरे आका कहते देखना […]

जिस नारी को समझ पातकी पति ने पत्थर बना दिया था। दे निज चरणन की धूल रामजी पंचकन्याओं में सजा दिया था।। प्रातकाल उठि सुमिरन करते इनका जो भी नर -नारी। उनके सारे पाप कटे […]

कलम और पेन से अभी नाता कब का छूट चुका है अभी ज़माना ईमेल और मोबाइल का है छोटे उन पन्नो में अपनी भावनाएं सारी लिखने की नौबत अभी नहीं आती अभी तेरे ख़तों में […]

दादाओं के भी दादा थे वो ना जाने कितने युगों से खड़े थे एक पाँव पर अपने घर के पास। खेल कबड्डी गिल्ली डंडे भाग भाग के आँख मिचौनी खेला करते सदा हीं उनके आस-पास।। […]

शिक्षा और शिक्षक का नाता है भरा बस्ता, ज्ञान की बातों में छुपा है कोई रास्ता। भारी बस्ते से आमदनी है होता, बचपन के बोझ से उनका नहीं कोई वास्ता।। ✍महेश गुप्ता जौनपुरी

घर में ही बैठो और रहो मौन ना करो किसी से झगड़ा ना कोई कुतर्क नहीं पड़ो किसी प्रपंच में यदि रहना है सुखी तो बढ़ाओ अपनी सहनशक्ति को और बटाओ हाँथ घर के काम […]

किसी का दम निकलता है घर में तो कोई सड़कों पर मारा-मारा फिरता है भूंख लगती है तो सिर्फ प्यास बुझा लेता है इतनी धूप में सब घर में बैठे हैं तो कोई सड़कों पर […]