हिन्दी कविता – दिये जलाए | आज भारत ने खूब दिये जलाए | अपनी एकता का परिचय दिखाये| जल कोरोना भस्म हुआ या नही| है संकट मे फिर भी जस्न मनाए | घरो बंद जिंदगी […]

धर्म-जाति से परे हिंदी कविता एक भयावह महामारी पर  लिखना नहीं चाहती थी  पर लिखना पड़ा  कहना नहीं चाहती थी  पर कहना पढ़ा  आज कल जो माहौल है  उसे देख ये ख़ामोशी तोडना पड़ा  जब हम […]

करुँ कितना भी श्रिंगार पर जानती हूँ तेरे आगे कुछ भी नहीं हूँ मैं दीद जिस दिन नहीं होती तेरी चांद छत पर नहीं आता आईना जितनी दफ़ा देखूँ तेरा ही चेहरा नज़र आता

गुलशन फिज़ाओ में यूं ही नहीं महकते हैं इश्क की बूंदाबांदी से खिल उठते हैं एहसास की रोशनी से महक उठते हैं गीत यूंही नहीं बना करते दिल के जख्मों को हरा करते हैं

आसमान धुंधला नज़र आता है आईना तो वही है लेकिन चेहरा गमगीन नज़र आता है आसमान मिटती बनती रहती हैं रेखायें फिर भी नसीब बदलता ना नज़र आता है

हमारा आशियाना एक वादी बन गया है फिलहाल अब घर के सामान हमारे मित्र हो गए एक सुंदर वादियों सी गूंज रही आवाज थी पुन्ह हमसे जो टकराई तो हम चित हो गए हमसे किसी […]

हिन्दी कविता- जीवन ज्योत जलेगी | आज जीवन ज्योत जलेगी मानव प्राण भरेगी | छाई दुविधा कोरोना भारत तिल तिल मरेगी | वतन की एकता आज दुनिया सारी देखेगी | आई जो विपदा वायरस जगत […]

गजल- बचाने चले है | जान उनकी बचे जो सबको बचाने चले है | डाल जोखिम मे दरिया प्यार बहाने चले है | जानते है अंजाम अच्छा नहीं मर भी सकते | फिक्र लोगो की […]

हे कान्हा ! मैं तेरी जोगन जोग ना छूटत मेरो ……………….. रोम-रोम में बसत है तेरो प्रेम अनमोल रतन …………………. हे कान्हा ! मैं तेरी जोगन जोग ना छूटत मेरो …………………. माखनचोर चोर तू है […]

मुझमें अभी तक तू ज़िंदा है मेरी तन्हाई में,मेरे एहसास में मेरी हर सांस में अभी तक ज़िंदा है तू ——————-‐— दिल की ज़मी में आज भी उगते हैं तेरी तमन्ना के दरख्ते ———————– रोशन […]

मेरी तब भी नहीं चली थी मेरी अब भी नहीं चली है चारो तरफ बेबसी और लाचारी है ए खुदा तूने भी क्या बाकियों की तरह मुझसे वफाई निभाई है

सुनो! तुम सागर की तरह क्यों लगते हो? शब्दों में गहराई बहुत है मानसिक द्वंद छिपाने में चतुराई बहुत है। बाहर से एक शांत सतह भीतर गहरे तूफ़ान से लगते हो। प्रेम में हारे हुए […]

एक एक चीज का गिन गिन कर हिसाब लेने वाली वो लड़ाकी बन जाती है ढाल अपने भाई की। मां और पापा ने भाई को किस बात पर बिना वजह डांटा यह बताने वाली भी […]

पेश है आपकी खिदमत में:- गज़ल आज कल सोंचता बहुत है दिल ये मेरा तुझे भूलूँ या कैद दिल में करूँ ———————— दिल लगा लूँ या जान छुड़ा लूँ तुमसे आज कल सोंचता बहुत है […]

चलो सब मिलकर जीत दिलाएं कोरोना को हरायें पाँच अप्रैल को सब देशवासी घर में दीप जलाएं दीप की ज्योति से अपना घर सँसार सजाएं चलो सब मिलकर जीत दिलाएँ थू है उनपर जो जमाती […]

वाह भाई मजहब के ठेकेदारों क्या खूबी फर्ज निभाया है दुश्मन लगी है मानव जाति और काल को मित्र बनाया है कभी उनकी फिक्र भी कर लेता जिसे तेरी फिक्र सताती है कहीं कोई खड़ा […]

कर ले अखंड प्रतिज्ञा तू कर खंड खंड उस दहशत को जिससे यह विश्व है कांप रहा हौसलो से कर तू परस्त उसको तू दूर भ्रम का भूत भगा दहशत की नहीं जरूरत है असंयम […]

एक फूल खिला है प्यार का देखो आज काँटों के बीच। मुश्किल लगता है पाना देख रहा हूँ अँखियाँ मीच।। घूर घूर के देख रही है आखिर क्यों दुनिया सारी। ‘विनयचंद ‘परवाह करे क्यों जो […]

आस्था के कमल ——————– प्रेम और विश्वास के दरिया में ही खिलते हैं आस्था के कमल। तुम खरे उतरना इस विश्वास पर ना मुरझा पाए यह कमल स्मरण रहे। जीवन, यौवन सौंप दिया है तुम्हे […]

चैत्र नव रात्र के अवसर पर रामनवमी मे श्रीराम भजन हिन्दी राम भजन 9 – श्रीराम कहाते है | श्रीराम तुम्हारे चरणों मे हम भाव चढ़ाते है | प्रभु आप मर्यादा पुर्षोतम श्रीराम कहाते है […]

चैत्र नव रात्र के अवसर पर देवी भजन हिन्दी देबी गीत 8 – शरण तुम्हारे | लाया हूँ माता धार आँसुओ शरण तुम्हारे | भक्त पड़ा है आज माता चरन तुम्हारे | निर्मल भाव माता […]

यह प्रकृति तू रोष दिखाती है पर क्या करेगी उस ममता का जो तुझसे खुद लड़ जाती है तूने सोचा दुख दूं उन सबको जो दिन-प्रतिदिन तेरा नाश करें पर हे ममता की मूरत तू […]

पुत्र मोह में लिपटे प्राण-पखेरू भी उड़ चले आज बलि वेदी पर राजा दशरथ भी चढ़ गए आज कैसी विपदा आन पड़ी अवध नगरी पर जो फली- फूली थी उपवन सी अकस्मात ही उजड़ गई […]

कुछ तो खेल है हाथ की लकीरों का हाथ ना आया लगाया हाथ जिसमें न पाने की तमन्ना थी मिला हरदम वही मुझको जुस्तजू जिसकी थी हमने उसी से हाथ धो बैठे जिंदगी बन गई […]

बेबस होकर वो लौटे हैं श्रमवीर कहलाने वाले हैं जिस घर में आराम से लेटे हो उसकी नींव बनाने वाले हैं😢 घर मंदिर और कुआं पोखर निज श्रम से उसने सींचे हैं उसकी मेहनत का […]

ख्वाहिशें सुख गई हैं ऐसे मौसम के बदलते मिजाज़ से फसलें जैसे क्या बोया और क्या पाया सपनों और हक़ीकत में कोई वास्ता न हो जैसे ख्वाहिशें सुख गई हैं ऐसे कल तक जो हरी […]