अंबेडकर जयंती कि हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाये कविता – भीम हमारा अभिमान | किया निर्माण जो भारत का सविंधान | सत सत नमन भीम हमारा अभिमान | दिलाया अधिकार सबको जिसने समान| बाबा भीम को […]

कविता – तो बच जाने दो | बढ़ गया लोक डाउन तो बढ जाने दो | जान है जरूरी माल से तो बच जाने दो | इतने दिन बीते कुछ दिन और गुजारेंगे | घर […]

यह समय फिर ना मिले —————————- “दौड़ भाग की जिंदगी सुकून छीन ले गई, हम दौड़ते ही रह गए जिंदगी पीछे रह गई।” वक्त फिर भी ना रुका, सबको ठहरा सा दिया। भागी दौड़ी सी […]

आज कुछ बदला- बदला मिज़ाज है दिल भी बेताब है ——————– सिसकियाँ भी खामोश हैं लफ्जों में मिठास है ———————- गूंजती जा रही है गलियों में शहनाई ——‐‐‐————– बींद के इन्तज़ार में बीती जा रही […]

हिंदी कविता व्यंग्य शीर्षक-: हाय रे चीन (कोरोना और चाइना ) हाय रे चीन चैन लिया तूने सबका छीन कुछ भी न बचा तुझसे ऐसा जो न खाया तूने बीन बीन हाय तू कैसा शौक़ीन […]

फिर बैसाखी आई है देखो आज पंजाब में। दर्द पुराना जाग गया है उन सूखे हुए घाव में।। क्रूर फिरंगी ने हम पर कितना जुल्म किया था। जालियावाला बाग में वीरों जन समूह भून दिया […]

जब शोर मचा होता है दिल में खामोशी अच्छी लगती है ————— रात होती है ख्वाबों में तो मायूसी अच्छी लगती है ————— गूंजती है जब बेचैनी तो खामोशी अच्छी लगती है —————-

दो मित्रों का जोड़ा भैया अमर इतिहास बनाया था। एक थे ब्राह्मण एक मुस्लिम थे रिश्ता खास बनाया था।। जंग- ए-आजादी में कूद गए थे राम -लखन की जोड़ी बनकर। “सरफरोशी की तमन्ना “गाए फिरते […]

घर से तू बाहर न निकलो जनाब हर गली में कोरोना का पहरा है। हाथ धोओ रे साबुन से बारम्बार हर गली में कोरोना का पहरा है।। नाक मूँह पर लगाओ हमेशा नकाब हर गली […]

नेता से अभिनेता अच्छा ये मेरा मन भी कहता है। कभी हँसाए कभी रुलाए कभी उपदेशक बन कहता है। नेता से अभिनेता अच्छा है ये मेरा मन भी कहता है।। कभी दिलाए गुस्सा और कभी […]

आओ साथी करे हम कोरोना पे कड़ाई। यही से होगी हमारी भारत की लड़ाई ।। वार पे वार हम सहते गए,अब न सहेंगे । चलो चलें हम करे पीड़ितों की भलाई।। यही बनता है हमारा […]

दुनिया रुपी रंगमंच पे नाटक निश-दिन होता है। कभी प्यार है, कभी पछाड़ है। नाचे गाए कोई कोई हँसता रोता है।। नाटक के इस पृष्टभूमि पर सकल जीव अभिनेता है। कोई बना किसान यहाँ पर […]

दर्द के रिश्ते यूँ ही नहीं निभाये जाते मुस्कुराना पड़ता है ——— गहरे जख्म खाने के बाद दिल में लिपटे रहते हैं गम झूँठी हँसी दिखानी पड़ती है —————— चलना पड़ता है राह पर ठोकर […]

घर के भीतर बैठे हैं हम डरकर नहीं कोरोना से। रहे स्वस्थ समाज हमारा बचकर आज कोरोना से।। पीठ नहीं हम दिखा रहे हैं लड़कर जीतेंगे कोरोना से। ‘विनयचंद ‘रहे देश हमारा सुखी सुरक्षित नित […]

धवल चन्द्र सम उसका चेहरा । कनक कपोल पे एक तील का पहरा। अरुण अधर अनार कली सम।। भृकुटी कमान नजर शर शोभित । कुहू कुम्भ लट घुर्मित केशपाश से शोभित। भधुर बोल बड़ मधुर […]

एहसास की पावन चौकी पर भाव की मूरत बैठी है ———————- शब्द अलंकार से सुसज्जित हैं और कल्पना की आराधना होती है ———————— इसी को कहते हैं काव्य सौन्दर्य जो हर कवि की आत्मा कहलाती […]

आँचल में अपने छुपाकर वो, दुनियाँ की बुराइयों से बचाती है सारे जहान की खुशियाँ अपने दामन में लिपटाकर हमपर लुटाती है वही आँचल लाज़ बचाता है, और उसी से पसीना सुखाती है स्त्री की […]

दशरथ के घर जन्मे राम पर आनन्द अवध में छाया है। केवल कौशल्या कैकेयी नाहीं हर घर हर नर मंगल गाया है ।। हुआ विवाह राम का जब से घर-घर मधुर सुमंगल छाया है। वनवासी […]

प्रभु का नाम जप ले प्राणी। तेरी दो दिन की जिन्दगानी।। एक दिन बीता खाते-पीते। रात भी बीती सोते-सोते।। नया सबेरा पाकर भैया क्यों करता रे आनाकानी।। तेरी़़़़ दिन दुपहरिया साँझ बीतते ना देर लगेगी […]

महामारी से मुक्ति प्रार्थना —————————— हे दुख भंजन दयानिधे कृपासिंधु . .. भव पार करें। करो कृपा हम दीनजनों पर, दूर करो सब कष्ट धरा पर। करे तपस्या सब जन घर पर, बंद पड़े प्रभु […]

मापदंड ———- कुंठित हृदय से उपजती विषाक्त बेल, लील जाती है कितनी ही हरी कोपले। उनको कुचलती कोपलों से निकली, दर्दनाक चीखों का शोर दब जाता है फाइलों तले। उस हत्या के साथ पूरे परिवार […]

ग़ज़ल ——- दूरियां ,नज़दीकियां, खुशफहमियां तेरे साथ में, हम मिले ना थे कभी पर बह गए जज्बात में। 1. मौसमै अंदाज था कुछ खास था उस रात में, थे गिरफ्त में इश्क के उस बेवजह […]

गजल- कोरोना शैतान क्यो है | काफिया – आन ,रदीफ़ – क्यो है खौफ मे कोरोना से इंसान क्यो है | घर अपने आदमी परेशान क्यो है | हुआ लॉक डाउन लॉक घर मे रहो […]

शिखर धरा, गगन, मृदुल पवन हिले तेरी एक हूंक से, जो तू चले बिना रुके मंजिलें दिखे तुझे। समुंद्र भी दे रास्ता जो तू कहे जब गूंज से, चमकीला हो ये आसमान पसीने की तेरी […]

युवा पीढ़ी रचो इतिहास लिखो शौर्य की अद्भुत कहानी देश को भय मुक्त करो। भ्रष्टाचार, दुर्दभ्य दानवता के खिलाफ नए युग का सृजन करो। आओ युवा पीढ़ी! नारियों को अत्याचारों से मुक्त करो। हे राष्ट्र […]

उम्मीद की किरण जगमग आई है, आज फिर याद मुझे तेरी ओर लाई है। जमाने की तपिश, जिम्मेदारियों का बोझ.. सहते -सहते दबी राख सुगबुगाई है। तपती मनस्थली पर स्नेह की बूंदे छलकी, सूखी धरती […]

एक कांच का टुकड़ा दर्पण बनकर सबका रूप दिखता है। बना कांच एक चूड़ियाँ जग में बनिताओं का दिल हर्षाता है।। ये कांच कांच है ‘विनयचंद ‘सुन कांच पे आंच न आवे । साहित्य जगत […]

आँखों में अश्क लिए शायद,मेरे कब्र पे आ गया है कोई। मैं नहीं था बे-वफा शायद, यही गीत गुनगुना रहा है कोई।।

स्त्री ऐसी वाणी है हर भाग में पायी जाती है ये तो ऐसा गीत है जो हर राग में गाई जाती है पिता और भाई के संरक्षण में रहती है संरक्षण में वह रहती है,शासन […]

जो इंसानियत की दुश्मन बन जाये, वो जमाअत कैसी। खुदा ने भी लानत भेजी होगी, इबादत की ये बात कैसी। खुद की नहीं ना सही, अपनों की तो परवाह कर लेते, जिन्हें अपनों की परवाह […]

हिन्दी कविता- समय गिन रहा | लोक डाउन हुआ है हर कोई समय गिन रहा है | खत्म कब होगा बाहर का बनवास | हर कोई समय गिन रहा है | खाये जा रहा डर […]