My introduction :- “अभिनव कुमार एक साधारण छवि वाले व्यक्ति हैं । वे इकतालीस वर्षीय हैं व दिल्ली में रहते हैं । वे विधायी कानून में स्नातक हैं और कंपनी सचिव हैं । वे इसी […]

पंछी हूँ उड़ना चाहता हूँ पिंजरे में कैद हूँ इक आज़ाद आसमां चाहता हूँ माना घर में सुरक्षित हूँ पर खुद का बनाया घरौंदा चाहता हूँ जो तुम चाहो वही बोलता हूँ खुद की भी […]

वो भी दिन थे _________ क्या पल छिन थे जब तुम मेरे हुआ _____________करते थे गीत गुनगुनाते थे प्रेम के लफ्ज़ हुआ करते थे ——‐————- रिमझिम बारिश की फुहार में भीगते थे बदन ——————— होंठो […]

कभी मायूस होती हूँ कभी बेचैन होती हूँ मगर तेरी मोहब्बत में डूबी दिन-रैन होती हूँ, कभी बातें कभी यादें कभी तन्हाई में तुझको भुलाकर सब ओ मेरी जान सिर्फ तुझमें ही खोती हूँ । […]

रह जाती हैं स्कूल की सहेलियाँ स्कूल तक, कॉलेज की सहेलियाँ कॉलेज तक और पड़ोस की सहेलियाँ मायके तक बहुत ही मुश्किल है सहेलियों का साथ रहना दादी नानी बनने तक

कुछ अल्फाज बचा रखे थे उनके लिए वह आए और बिना बोले चले गए। कुछ नजरें बचा रखी थी उनके लिए वह आए और बिना देखे चले गए। कुछ गीत सजा रखे थे उनके लिए […]

अपनी इस लड़ाई से चाहे खुद लड़ना पड़ जाए अपनी ही परछाई से जब बात प्रतिष्ठा की हो तो हर व्यक्ति का अपना ओहदा है यह बात है आत्म सम्मान की ना हार जीत का […]

मेरे बच्चे साथ निभाओगे गर गुस्सा हो जाऊं किसी बात पर आकर मुझे मनाओगे ? इन सिकुड़न वाले हाथों को क्या प्यार से तुम सहलाओगे? बूढ़ा हूं कुछ , सुनने की शक्ति भी क्षीण हुई […]

ओ मेरे शिव, मैं सच में तुमसे प्यार कर बैठी सबने कहा , क्या मिलेगा मुझे उस योगी के संग जिसका कोई आवास नहीं वो फिरता रहता है बंजारों सा जिसका कोई एक स्थान नहीं […]

कभी कभी सोचती हूँ अगर इस पल मेरी साँसें थम जाये और इश्वर मुझसे ये कहने आये मांगो जो माँगना हो कोई एक अधूरी इच्छा जो अभी इस पल पूरी हो जाये मैं सोच में […]

आज पिघली-पिघली है देखो पथ्थर की दीवार बन्धु,सखा,माँ-बाप सभी छूट रहे हैं विडम्बना देखो समय की कुछ बिछड़ रहे तो कुछ रिश्ते जुड़ रहे हैं जिस आँगन में खेली- कूदी वही छोड़ कर जाती है […]

गजल -जीत लेंगे कोरोना | जीत लेंगे कोरोना तेरा नाम मिटा देंगे | मुरझाए चेहरों पर मुस्कान खिला देंगे | पहले न जान पाये अब जान चुके तुझे | तू पहचान हमे तुझको पानी पीला […]

कविता -सुरक्षित वही है होता | कोरोना देखे ना जात जान सभी लेता | रहता ज़ो घर मे सुरक्षित वही है होता | पहने न मुख बाहर मास्क खतरा बहुत | बचके रहना सभी आदमी […]

अंबेडकर जयंती कि हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाये कविता – भीम हमारा अभिमान | किया निर्माण जो भारत का सविंधान | सत सत नमन भीम हमारा अभिमान | दिलाया अधिकार सबको जिसने समान| बाबा भीम को […]

कविता – तो बच जाने दो | बढ़ गया लोक डाउन तो बढ जाने दो | जान है जरूरी माल से तो बच जाने दो | इतने दिन बीते कुछ दिन और गुजारेंगे | घर […]

यह समय फिर ना मिले —————————- “दौड़ भाग की जिंदगी सुकून छीन ले गई, हम दौड़ते ही रह गए जिंदगी पीछे रह गई।” वक्त फिर भी ना रुका, सबको ठहरा सा दिया। भागी दौड़ी सी […]

आज कुछ बदला- बदला मिज़ाज है दिल भी बेताब है ——————– सिसकियाँ भी खामोश हैं लफ्जों में मिठास है ———————- गूंजती जा रही है गलियों में शहनाई ——‐‐‐————– बींद के इन्तज़ार में बीती जा रही […]

हिंदी कविता व्यंग्य शीर्षक-: हाय रे चीन (कोरोना और चाइना ) हाय रे चीन चैन लिया तूने सबका छीन कुछ भी न बचा तुझसे ऐसा जो न खाया तूने बीन बीन हाय तू कैसा शौक़ीन […]

फिर बैसाखी आई है देखो आज पंजाब में। दर्द पुराना जाग गया है उन सूखे हुए घाव में।। क्रूर फिरंगी ने हम पर कितना जुल्म किया था। जालियावाला बाग में वीरों जन समूह भून दिया […]

जब शोर मचा होता है दिल में खामोशी अच्छी लगती है ————— रात होती है ख्वाबों में तो मायूसी अच्छी लगती है ————— गूंजती है जब बेचैनी तो खामोशी अच्छी लगती है —————-

दो मित्रों का जोड़ा भैया अमर इतिहास बनाया था। एक थे ब्राह्मण एक मुस्लिम थे रिश्ता खास बनाया था।। जंग- ए-आजादी में कूद गए थे राम -लखन की जोड़ी बनकर। “सरफरोशी की तमन्ना “गाए फिरते […]

घर से तू बाहर न निकलो जनाब हर गली में कोरोना का पहरा है। हाथ धोओ रे साबुन से बारम्बार हर गली में कोरोना का पहरा है।। नाक मूँह पर लगाओ हमेशा नकाब हर गली […]

नेता से अभिनेता अच्छा ये मेरा मन भी कहता है। कभी हँसाए कभी रुलाए कभी उपदेशक बन कहता है। नेता से अभिनेता अच्छा है ये मेरा मन भी कहता है।। कभी दिलाए गुस्सा और कभी […]

आओ साथी करे हम कोरोना पे कड़ाई। यही से होगी हमारी भारत की लड़ाई ।। वार पे वार हम सहते गए,अब न सहेंगे । चलो चलें हम करे पीड़ितों की भलाई।। यही बनता है हमारा […]

दुनिया रुपी रंगमंच पे नाटक निश-दिन होता है। कभी प्यार है, कभी पछाड़ है। नाचे गाए कोई कोई हँसता रोता है।। नाटक के इस पृष्टभूमि पर सकल जीव अभिनेता है। कोई बना किसान यहाँ पर […]

दर्द के रिश्ते यूँ ही नहीं निभाये जाते मुस्कुराना पड़ता है ——— गहरे जख्म खाने के बाद दिल में लिपटे रहते हैं गम झूँठी हँसी दिखानी पड़ती है —————— चलना पड़ता है राह पर ठोकर […]

घर के भीतर बैठे हैं हम डरकर नहीं कोरोना से। रहे स्वस्थ समाज हमारा बचकर आज कोरोना से।। पीठ नहीं हम दिखा रहे हैं लड़कर जीतेंगे कोरोना से। ‘विनयचंद ‘रहे देश हमारा सुखी सुरक्षित नित […]

धवल चन्द्र सम उसका चेहरा । कनक कपोल पे एक तील का पहरा। अरुण अधर अनार कली सम।। भृकुटी कमान नजर शर शोभित । कुहू कुम्भ लट घुर्मित केशपाश से शोभित। भधुर बोल बड़ मधुर […]

एहसास की पावन चौकी पर भाव की मूरत बैठी है ———————- शब्द अलंकार से सुसज्जित हैं और कल्पना की आराधना होती है ———————— इसी को कहते हैं काव्य सौन्दर्य जो हर कवि की आत्मा कहलाती […]

आँचल में अपने छुपाकर वो, दुनियाँ की बुराइयों से बचाती है सारे जहान की खुशियाँ अपने दामन में लिपटाकर हमपर लुटाती है वही आँचल लाज़ बचाता है, और उसी से पसीना सुखाती है स्त्री की […]

दशरथ के घर जन्मे राम पर आनन्द अवध में छाया है। केवल कौशल्या कैकेयी नाहीं हर घर हर नर मंगल गाया है ।। हुआ विवाह राम का जब से घर-घर मधुर सुमंगल छाया है। वनवासी […]

प्रभु का नाम जप ले प्राणी। तेरी दो दिन की जिन्दगानी।। एक दिन बीता खाते-पीते। रात भी बीती सोते-सोते।। नया सबेरा पाकर भैया क्यों करता रे आनाकानी।। तेरी़़़़ दिन दुपहरिया साँझ बीतते ना देर लगेगी […]

महामारी से मुक्ति प्रार्थना —————————— हे दुख भंजन दयानिधे कृपासिंधु . .. भव पार करें। करो कृपा हम दीनजनों पर, दूर करो सब कष्ट धरा पर। करे तपस्या सब जन घर पर, बंद पड़े प्रभु […]

मापदंड ———- कुंठित हृदय से उपजती विषाक्त बेल, लील जाती है कितनी ही हरी कोपले। उनको कुचलती कोपलों से निकली, दर्दनाक चीखों का शोर दब जाता है फाइलों तले। उस हत्या के साथ पूरे परिवार […]